Japan 高校(専門学科)1〜3年 Industry / Engineering
अध्याय: 59
1. Basic Industrial Technology
People, technology and environment · Processing technology · How production works
- मनुष्य, तकनीक और पर्यावरण – लोग बेहतर जीने के लिए औज़ार और मशीनें बनाते हैं। तकनीक से उत्पादन बढ़ता है, पर धुआँ, कचरा और जोखिम भी बढ़ सकते हैं। इंजीनियर का कर्तव्य है सुरक्षित, ईमानदार और प्रकृति के प्रति दयालु होना। साफ़ तकनीक मदद करती है।
- विनिर्माण प्रौद्योगिकी: कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक – विनिर्माण कच्चे माल को काम की चीज़ों में बदलता है। प्राथमिक उद्योग मानक सामग्री बनाता है; द्वितीयक उद्योग तैयार माल। सामग्री को आकार देकर, काटकर, जोड़कर और गुण बदलकर रूपांतरित करते हैं। अच्छे भाग के लिए सही सामग्री, साफ़ तकनीकी ड्रॉइंग और प्रक्रिया योजना, टॉलरेंस के साथ सावधान माप, और नियंत्रण प्रणाली से चलने वाली मशीनें चाहिए, सब कुछ सुरक्षित ढंग से।
2. Research Project
Making works, product development · Investigation, research and experiments · Practice at industrial sites · Obtaining vocational qualifications
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
3. Practice
Element practice · Comprehensive practice · Practice with advanced technology
- औद्योगिक उत्पादन: कच्चे माल से तैयार पुर्ज़ा – उद्योग कच्चे माल को चरणों में उपयोगी सामान बनाता है। सरल धातु-कार्य में नापो, निशान लगाओ, काटो, छेद करो और जाँचो। सरल इलेक्ट्रॉनिक्स में बैटरी, स्विच और LED जैसे पुर्ज़े सुरक्षित जोड़ते हैं। कारख़ाना भ्रमण में चरण, सुरक्षा के नियम और हर पुर्ज़े की जाँच देखो।
- उन्नत प्रौद्योगिकी के अंदर का विज्ञान – उन्नत प्रौद्योगिकी असल में साधारण विज्ञान का होशियारी से इस्तेमाल है। सेंसर स्पर्श, प्रकाश और गति को बिजली के संकेत में बदलते हैं। चिप सिलिकॉन की बनती है। ग्राफ़ीन जैसे नए पदार्थ अपनी ताकत परमाणुओं के जमने के ढंग से पाते हैं। नई दवा को लक्ष्य के आकार में फिट होने के लिए बनाया जाता है, जैसे चाबी ताले में। जीव-विज्ञान, सूचना और नैनो-विज्ञान मिलते हैं तो नए क्षेत्र बनते हैं।
4. Drafting
Role of drafting · Drafting and design drafting in industrial fields · Drafting with information devices
- मशीन ड्राइंग: डिटेल ड्राइंग बनाना और पढ़ना – मशीन ड्राइंग किसी एक पुर्ज़े की ऐसी सटीक तस्वीर है कि कारखाना बिना कुछ पूछे उसे बना सके। डिटेल (वर्किंग) ड्राइंग में पुर्ज़े के दृश्य (views), अंदर का हिस्सा दिखाने के लिए सेक्शन, हर माप (dimension), माप कितना ऊपर-नीचे हो सकता है (tolerance), सतह की चिकनाई, पदार्थ और टाइटल ब्लॉक होते हैं।
- तकनीकी ड्राइंग: डिज़ाइन के विचार बताना – तकनीकी ड्राइंग एक साझा चित्र-भाषा है जो किसी वस्तु का सही आकार और माप दिखाती है। डिज़ाइनर हाथ से स्केच से शुरू करते हैं, फिर आइसोमेट्रिक या तिर्यक (ऑब्लीक) दृश्य से वस्तु को 3D में दिखाते हैं, और ऑर्थोग्राफ़िक प्रक्षेप (सामने, ऊपर, बगल के दृश्य) में मानक रेखाएँ, मिलीमीटर में माप और स्केल लगाते हैं ताकि कोई भी उसे बना सके। आज ज़्यादातर ड्राइंग CAD सॉफ़्टवेयर से बनती हैं।
- CAD मॉडलिंग: स्केच से 3D पुर्ज़े तक – CAD (कंप्यूटर एडेड डिज़ाइन) यानी किसी चीज़ को बनाने से पहले कंप्यूटर पर उसका सटीक मॉडल बनाना। डिज़ाइन हाथ के स्केच से शुरू होता है। CAD में वह कंस्ट्रेंट और डाइमेंशन वाला 2D स्केच बनता है। एक्सट्रूड, रिवॉल्व और कट जैसे 3D टूल स्केच को ठोस बनाते हैं। हर कदम फ़ीचर ट्री में सहेजा जाता है, इसलिए एक माप बदलने पर पूरा मॉडल दोबारा बन जाता है। पुर्ज़े असेंबली में जोड़े जाते हैं, सिमुलेशन से जाँचे जाते हैं, ड्रॉइंग के रूप में बाँटे जाते हैं और 3D प्रिंटर, लेज़र कटर या CNC मशीन को भेजे जाते हैं।
5. Industrial Information and Mathematics
Industrial society and information technology · Computer systems · Programming and mathematical processing of industrial phenomena
- कृषि में जानकारी: भूमिका, नैतिकता और सुरक्षा – जानकारी (सूचना) वह डेटा है जिसका मतलब हो और जो फ़ैसले में मदद करे। औद्योगिक समाज में खेत, कारखाने और दुकानें सब जानकारी पर चलते हैं। किसान मौसम, भाव और मिट्टी की जानकारी से काम तय करता है। पर जानकारी गलत, देर से या चोरी हुई हो सकती है, इसलिए नैतिकता (सही व्यवहार) और सुरक्षा (बचाव) ज़रूरी हैं।
- कंप्यूटर का मूल संगठन – कंप्यूटर प्रणाली में हार्डवेयर (जिसे छू सकें) और सॉफ़्टवेयर (निर्देश) दोनों होते हैं। इनपुट उपकरण डेटा अंदर लाते हैं, CPU (ALU + कंट्रोल यूनिट + रजिस्टर) उस पर काम करता है, और आउटपुट उपकरण परिणाम देते हैं। मेमोरी एक सीढ़ी जैसी है: रजिस्टर और कैश छोटे पर सबसे तेज़, प्राथमिक मेमोरी (RAM, ROM) चलते प्रोग्राम रखती है, और द्वितीयक भंडारण (HDD, SSD, पेन ड्राइव) डेटा हमेशा के लिए रखता है। 8 बिट = 1 बाइट, और KB से आगे हर इकाई पिछली की 1024 गुना है।
- औद्योगिक डेटा की प्रोग्रामिंग और गणितीय प्रक्रिया – प्रोग्राम डेटा लेता है (इनपुट), उस पर गणित करता है (प्रोसेस) और नतीजा दिखाता है (आउटपुट)। एल्गोरिदम चरणों की सूची है। उद्योग में प्रोग्राम मशीन भी चलाते हैं: सेंसर पढ़ो, सेट मान से तुलना करो, उपकरण चालू या बंद करो, और यह बार-बार दोहराओ।
6. Industrial Materials Technology
Social life and industrial materials · Properties and structure of industrial materials · Inspecting industrial materials · Manufacturing industrial materials · Processing industrial materials · Industrial materials and environment
- पदार्थ विज्ञान: पदार्थ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं – पदार्थ विज्ञान बताता है कि अंदर की बनावट (परमाणु, बंध, क्रिस्टल, ग्रेन) बाहर के गुण (मज़बूत, लचीला, भंगुर, हल्का) कैसे तय करती है। चार परिवार: धातु, पॉलिमर, सिरेमिक, कंपोज़िट। गुण परीक्षणों से नापे जाते हैं: तनन परीक्षण (प्रतिबल = बल ÷ क्षेत्रफल, विकृति = लंबाई में बदलाव ÷ मूल लंबाई, यंग गुणांक = प्रतिबल ÷ विकृति), कठोरता और आघात परीक्षण। ऊष्मा उपचार और मिश्रधातु बनाना अंदर की बनावट और इसलिए गुण बदलते हैं। नए पदार्थ: कंपोज़िट, नैनो, स्मार्ट और जैव पदार्थ। रसायन कला-सामग्री भी समझाता है: रंजक, बाइंडर, सिरेमिक, काँच, धातु।
- औद्योगिक पदार्थों की संरचना और गुण – परमाणु कैसे सजे हैं (ठोस, द्रव, गैस; क्रिस्टल या काँच जैसे; शृंखलाएँ) यही तय करता है कि पदार्थ कैसा व्यवहार करेगा। भार पड़ने पर पदार्थ पहले प्रत्यास्थ रूप से खिंचता है (वापस आता है), फिर सुघट्य रूप से (बदला रहता है); भंगुर हो तो टूट जाता है। द्रव बहते हैं और उनके गाढ़ेपन को श्यानता कहते हैं।
- औद्योगिक पदार्थों की जाँच – जाँच यह देखती है कि कोई पदार्थ इस्तेमाल से पहले काफ़ी अच्छा है या नहीं। यांत्रिक परीक्षण (तनन, कठोरता, आघात) मज़बूती और कठोरता नापते हैं। सूक्ष्मदर्शी पॉलिश की धातु के अंदर के कण दिखाता है। वर्नियर, पराश्रव्य, एक्स-रे और रंग जैसे उपकरण नाप और छिपी दरारें बताते हैं, अक्सर पुर्ज़े को बिगाड़े बिना।
- औद्योगिक पदार्थों का निर्माण – हर पदार्थ अलग तरीके से बनता है। धातु अयस्क से निकाली, पिघलाई और ढाली या बेली जाती है। सिरेमिक चूर्ण से आकार देकर पकाया जाता है। बहुलक छोटे अणुओं को जोड़कर लंबी शृंखला बनाने से बनते हैं। संमिश्र में मज़बूत रेशे राल या धातु के आधार में मिलते हैं। पदार्थ बनाने का तरीका ही उसकी संरचना और गुण तय करता है।
- औद्योगिक पदार्थों का प्रसंस्करण – प्रसंस्करण पदार्थ को उसका अंतिम आकार देता है। मशीनन-क्षमता बताती है कि पदार्थ कितनी आसानी से कटता है: नरम, तन्य धातुएँ आसानी से कटती हैं; कठोर या दृढ़ धातुएँ औज़ार घिसती हैं। मुख्य विधियाँ हैं ढलाई, रूपण (पीटना, बेलना, खींचना), कटाई (टर्निंग, मिलिंग, ड्रिलिंग, ग्राइंडिंग) और जोड़ना (वेल्डिंग, ब्रेज़िंग, सोल्डरिंग)। विधि पदार्थ, आकार, खर्च और पुर्ज़ों की संख्या देखकर चुनी जाती है।
- औद्योगिक पदार्थ और पर्यावरण – पदार्थ खोदे जाते हैं, बनाए जाते हैं, इस्तेमाल होते हैं और फेंके जाते हैं, और हर चरण ज़मीन की क्षति, ऊर्जा की खपत, धुएँ और कचरे से प्रकृति पर असर डालता है। हम कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल, पुनर्चक्रण, साफ़ फ़ैक्टरियों और इको-डिज़ाइन से पर्यावरण बचाते हैं। पुनर्चक्रण इस्तेमाल हुए पदार्थ को छाँटकर, साफ़ करके, पिघलाकर या फिर से ढालकर नए उत्पाद बनाता है, और आम तौर पर बहुत ऊर्जा बचाता है।
7. English for Industrial Technology
Industry-related conversation · Reading and writing on industrial technology · Presentation · Communication via networks
- प्रेज़ेंटेशन स्किल्स: श्रोताओं के सामने बोलना – अच्छा प्रेज़ेंटेशन श्रोता और उद्देश्य को सोचकर बनता है। उसमें साफ़ शुरुआत, मुख्य भाग और अंत होता है। स्लाइड सरल होती हैं और बोलने वाले की मदद करती हैं। साफ़ आवाज़, आँखों से संपर्क और सही समय ज़रूरी हैं। अभ्यास से घबराहट आत्मविश्वास बन जाती है।
- नेटवर्क पर संवाद – नेटवर्क से लोग एक-दूसरे को संदेश भेजते हैं। लंबे और औपचारिक संदेश के लिए ईमेल, छोटी बात के लिए चैट और लाइव मीटिंग के लिए वीडियो कॉल। संदेश छोटे पैकेट में बँटकर राउटरों से होता हुआ सामने वाले तक पहुँचता है। अच्छा संवाद साफ़, विनम्र और सुरक्षित होता है।
8. Industrial Management Technology
Overview of industrial management technology · Production planning and management · Process and quality control · Safety and environmental management · Factory management
- प्रबंधन और उत्पादन नियंत्रण – प्रबंधन का मतलब है लोगों, सामान, पैसे और जानकारी से व्यवसाय को इस तरह चलाना कि वह अपने लक्ष्य तक पहुँचे। एक सरल औज़ार है योजना-करो-जाँचो-सुधारो का चक्र। उत्पादन प्रबंधन उत्पाद बनाने की योजना और नियंत्रण करता है। इसके तीन लक्ष्य हैं: गुणवत्ता (अच्छा और सुरक्षित), लागत (कम बर्बादी, उचित दाम) और समय पर सही मात्रा। तेज़ चलाने से गुणवत्ता घट सकती है; ज़्यादा जाँच में समय और पैसा लगता है, इसलिए प्रबंधक तीनों में संतुलन रखते हैं।
- उत्पादन की योजना और प्रबंधन – उत्पादन योजना तय करती है कि क्या, कितना, कब और किन मशीनों व सामान से बनाना है। उत्पादन प्रबंधन रोज़ योजना को चलाता है, प्रगति देखता है और देरी ठीक करता है। उत्पादन और वितरण का मतलब है माल को भंडार से समय पर ग्राहक तक पहुँचाना।
- प्रक्रिया नियंत्रण और गुणवत्ता नियंत्रण – प्रक्रिया नियंत्रण यह देखता है कि हर काम सही क्रम में और समय पर चरणों से गुज़रे। गुणवत्ता नियंत्रण नमूनों को सीमा से मिलाकर जाँचता है कि उत्पाद अच्छा है या नहीं। कंट्रोल चार्ट बताता है कि प्रक्रिया भटक रही है, ताकि बहुत सारे पुर्ज़े ख़राब होने से पहले मशीन ठीक हो जाए।
- कारख़ाने की सुरक्षा, रखरखाव और पर्यावरण – रखरखाव मशीनों को चालू और सुरक्षित रखता है: नियमित छोटी देखभाल बड़ी ख़राबी से सस्ती पड़ती है। दुर्घटनाएँ असुरक्षित मशीन, असुरक्षित काम और ख़राब हालात से होती हैं; जाली, प्रशिक्षण, सुरक्षा-सामान और नियम इन्हें रोकते हैं। कारख़ाने धुआँ छानकर, बिजली बचाकर और कचरा ठीक से सँभालकर पर्यावरण भी बचाते हैं।
- फ़ैक्टरी प्रबंधन – फ़ैक्टरी तब अच्छी चलती है जब चार चीज़ें साथ चलें: लोग (कार्मिक प्रबंधन), पैसे का हिसाब (औद्योगिक लेखा), नियम (फ़ैक्टरी के क़ानून) और विचार (उद्यमिता)। मुनाफ़ा = बिक्री से आय − कुल ख़र्च।
9. Industrial Environmental Technology
Environment and humans · Environment and industry · Conserving the living environment · Environmental laws · Environmental countermeasure technology
- पर्यावरण और उद्योग – उद्योग हमें सामान और रोज़गार देता है, पर हवा, पानी और ज़मीन को गंदा भी कर सकता है। कारख़ाने बढ़े तो प्रदूषण बढ़ा। जोखिम = ख़तरा × सामना। उद्योग फ़िल्टर, पानी के शोधन, पुनर्चक्रण और सुरक्षा की परतों से जवाब देता है।
- रहने के पर्यावरण की रक्षा – हमारा रहने का पर्यावरण शहर, घर और आसपास की ज़मीन है। हरियाली शहर को ठंडा रखती है, स्वस्थ घर को ताज़ी हवा, रोशनी और साफ़ पानी चाहिए, और ख़तरा तब आपदा बनता है जब तैयारी कमज़ोर हो। रोकथाम और कमी (शमन) नुक़सान घटाती हैं।
- पर्यावरण विधि और सतत विकास – सतत विकास का मतलब है: आज की ज़रूरतें ऐसे पूरी करो कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। क़ानून अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण को संतुलन में रखने में मदद करता है। दुनिया के देशों ने स्टॉकहोम (1972), रियो (1992), क्योटो (1997) और पेरिस (2015) में मिलकर लक्ष्य तय किए, और 2015 में 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) अपनाए। संविधान स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार और उसकी रक्षा का कर्तव्य देते हैं; भारत में अनुच्छेद 21, 48A और 51A(g)। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 एक छतरी क़ानून है, जिससे सरकार मानक तय करती है और प्रदूषकों पर कार्रवाई करती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उद्योगों की जाँच करते हैं, अनुमति देते हैं और बंदी का आदेश दे सकते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण तकनीक: प्रदूषण पर नियंत्रण – उद्योग प्रदूषण को तीन जगह रोकता है: कम बनाओ, बाहर जाने से पहले पकड़ो, और जो बचे उसे साफ़ करो। फ़िल्टर और स्क्रबर हवा साफ़ करते हैं। बैठाना, सूक्ष्मजीव और रसायन पानी साफ़ करते हैं। पौधे, सूक्ष्मजीव और खुदाई मिट्टी साफ़ करते हैं। दीवार, माउंट और घेरा शोर और कंपन घटाते हैं। कार्बन फ़िल्टर गंध हटाता है। कचरा रिड्यूस, रीयूज़, रीसाइकल और फिर सुरक्षित निपटान से संभाला जाता है।
10. Machine Shop Technology
Development of machining methods · Machine materials · Various machining methods · Industrial measurement and instruments · Production management
- मशीनिंग विधियों का विकास: हाथ के औज़ार से CNC तक – पहले लोग धातु को हाथ से गढ़ते थे। पानी और भाप की शक्ति, फिर मशीन टूल ने काम तेज़ और सटीक बनाया। अदल-बदल योग्य पुर्ज़ों से बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ, और न्यूमेरिकल कंट्रोल (NC/CNC) में कंप्यूटर औज़ार को चलाता है। हर कदम पर घंटे में ज़्यादा पुर्ज़े और कम गलती मिली।
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
- मशीन शॉप प्रैक्टिस: धातु से पुर्ज़ा कैसे बनता है – मशीन शॉप कच्ची धातु को पाँच तरह के कामों से पुर्ज़े में बदलती है: ढलाई और फोर्जिंग (आकार देना), शीट-मेटल का काम (चादर मोड़ना), वेल्डिंग और कटाई (जोड़ना और काटना), मशीनिंग (औज़ार से धातु छीलकर सही माप लाना), और हाथ की फ़िनिशिंग व असेंबली (रेती, फिटिंग, बोल्ट कसना)। हर काम के अपने सुरक्षा नियम हैं।
- औद्योगिक मापन और मापक यंत्र – कारखाने लंबाई, कोण, द्रव्यमान, तापमान, दाब, प्रवाह और गति नापते हैं। स्टील रूल लगभग 1 मिमी, वर्नियर कैलिपर 0.02 मिमी और माइक्रोमीटर 0.01 मिमी तक पढ़ता है। गो/नो-गो गेज टॉलरेंस जल्दी जाँचता है। सेंसर भौतिक मात्रा को बिजली के संकेत में बदलते हैं। अच्छे मापन के लिए सही औज़ार, शून्यांक की जाँच, सावधानी और बार-बार रीडिंग चाहिए।
- विनिर्माण इंजीनियरिंग तकनीक: चीज़ें कैसे बनती हैं – विनिर्माण इंजीनियरिंग तकनीक का अर्थ है कच्चे माल को सुरक्षित, सटीक और ठीक लागत में काम की चीज़ों में बदलना। कारख़ाना एक तंत्र है: इनपुट (सामग्री, ऊर्जा, लोग, जानकारी) प्रक्रियाओं (काटना, आकार देना, जोड़ना, फ़िनिश) से गुज़रकर आउटपुट बनते हैं, और फ़ीडबैक से सुधार होता है। इंजीनियर प्रक्रिया के क़दम और समय की योजना बनाते हैं, गुणों के आधार पर सामग्री चुनते हैं, मशीन टूल और CNC मशीनें चलाते हैं, नियंत्रण प्रणालियों (सेंसर, PLC, न्यूमैटिक, हाइड्रोलिक, रोबोट) से स्वचालन करते हैं, और मानकों से गुणवत्ता जाँचते हैं ताकि हर उत्पाद ग्राहक की माँग पर खरा उतरे। यह एक व्यवसाय भी है, जिसमें उत्पाद विकास, विपणन और लागत सँभालनी होती है।
- संचालन प्रबंधन: व्यवसाय वस्तुएँ और सेवाएँ कैसे बनाते हैं – संचालन प्रबंधन (operations management) यह है कि व्यवसाय इनपुट (कच्चा माल, मज़दूर, मशीनें, पैसा) को आउटपुट (वस्तुएँ और सेवाएँ) में सबसे अच्छे ढंग से कैसे बदलता है। उत्पादन जॉब (ऑर्डर पर एक चीज़), बैच (एक जैसी चीज़ों के समूह) या फ़्लो (लगातार बड़े पैमाने पर) हो सकता है। संचालन के उद्देश्य हैं: कम लागत, ऊँची गुणवत्ता, गति, लचीलापन और पर्यावरण की देखभाल। प्रदर्शन मापते हैं: क्षमता (अधिकतम उत्पादन), क्षमता उपयोग (उत्पादन ÷ क्षमता × 100), श्रम उत्पादकता (उत्पादन ÷ मज़दूर) और प्रति इकाई लागत (कुल लागत ÷ उत्पादन)। आपूर्ति शृंखला आपूर्तिकर्ता, कारख़ाना, दुकान और ग्राहक को जोड़ती है; पुश प्रवाह में पहले माल बनता है, पुल प्रवाह (just-in-time) में ऑर्डर आने पर। गुणवत्ता नियंत्रण तैयार माल जाँचता है; गुणवत्ता आश्वासन और निरंतर सुधार (kaizen) हर चरण पर ख़राबी रोकते हैं।
11. Machine Design
Role of design in production · Forces acting on machines · Strength of materials · Machine elements and devices · Design of tools and machines
- उत्पादन में डिज़ाइन की भूमिका – डिज़ाइन ज़रूरत को ऐसी ड्रॉइंग में बदलता है जिसे कारखाना बना सके। डिज़ाइन के समय आकार, नाप, सामग्री, टॉलरेंस और पुर्ज़ों की संख्या चुनी जाती है। ये चुनाव ज़्यादातर लागत, गुणवत्ता और सुरक्षा तय करते हैं। जाँच और ग्राहक का उपयोग फ़ीडबैक बनकर वापस डिज़ाइन तक जाता है। अच्छा डिज़ाइन कम, सरल और मानक पुर्ज़े इस्तेमाल करता है।
- मशीनों पर लगने वाले बल – मशीन तभी चलती है जब उस पर बल लगता है। नेट बल = धक्का − घर्षण, और त्वरण a = नेट बल ÷ द्रव्यमान। कार्य = बल × दूरी (जूल)। शक्ति = कार्य ÷ समय (वॉट)। दक्षता = उपयोगी निर्गत ÷ निवेश × 100%। घर्षण से कुछ ऊर्जा गर्मी बनकर बेकार जाती है, इसलिए तेल और बेयरिंग लगाते हैं।
- पदार्थ की मज़बूती: प्रतिबल, विकृति और आकार – प्रतिबल = बल ÷ क्षेत्रफल (MPa)। विकृति = बढ़ी हुई लंबाई ÷ मूल लंबाई (कोई इकाई नहीं)। प्रत्यास्थ सीमा तक पुर्ज़ा वापस लौट आता है; यील्ड बिंदु के बाद वह हमेशा के लिए खिंचा रह जाता है (प्लास्टिक); चरम प्रतिबल पर टूट जाता है। E = प्रतिबल ÷ विकृति। सुरक्षा गुणांक = चरम प्रतिबल ÷ कार्यकारी प्रतिबल। तीखे कोने प्रतिबल बढ़ाते हैं, इसलिए डिज़ाइनर उन्हें गोल करते हैं।
- मशीन डिज़ाइन: जोड़ने वाले पुर्ज़े, शाफ़्ट और गियर – मशीन छोटे-छोटे मानक पुर्ज़ों से बनती है, जिन्हें मशीन एलिमेंट कहते हैं। बोल्ट, नट, पेंच और रिवेट पुर्ज़े जोड़ते हैं। शाफ़्ट, की, कपलिंग और बेयरिंग घुमाव को सँभालते हैं। गियर, बेल्ट और चेन गति आगे पहुँचाते हैं। गियर अनुपात = चलने वाले गियर के दाँत ÷ चलाने वाले गियर के दाँत।
12. Prime Movers
Energy conversion and the environment · Fluid machinery · Internal combustion engines · Turbine engines · Refrigeration equipment
- ऊर्जा रूपांतरण: उपकरणों और बिजलीघरों में ऊर्जा कैसे रूप बदलती है – ऊर्जा के कई रूप हैं: रासायनिक, गतिज, गुरुत्वीय स्थितिज, प्रत्यास्थ, विद्युत, ऊष्मीय, प्रकाश, ध्वनि, नाभिकीय। उपकरण एक रूप को दूसरे में बदलते हैं। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, इसलिए इनपुट = उपयोगी + बेकार। दक्षता = उपयोगी ÷ इनपुट × 100 %। शक्ति = ऊर्जा ÷ समय। बिजलीघरों की दक्षता, लागत और प्रदूषण अलग-अलग हैं, और हम नवीकरणीय व अनवीकरणीय स्रोतों में से चुनते हैं।
- द्रव मशीनें: पंप, टरबाइन, पंखा और हाइड्रोलिक मशीनें – द्रव मशीन किसी द्रव (तरल या गैस) की मदद से ऊर्जा को आगे बढ़ाती है। पंप और कंप्रेसर द्रव को ऊर्जा देते हैं। टरबाइन द्रव से ऊर्जा लेता है। पंखा हवा को चलाता है। हाइड्रोलिक (तेल) और वायवीय (हवा) मशीनें छोटे धक्के को बड़ा धक्का बना देती हैं, क्योंकि बंद द्रव में दाब p = F/A हर जगह बराबर रहता है।
- ऊष्मा इंजन – ऊष्मा इंजन वह मशीन है जो ऊष्मा को यांत्रिक कार्य में बदलती है। ईंधन जलकर ऊष्मा Q = q × m देता है, जहाँ q ईंधन का ऊष्मीय मान (दहन की ऊष्मा) और m उसका द्रव्यमान है। गर्म गैस फैलकर पिस्टन को धकेलती है या टरबाइन घुमाती है। चार स्ट्रोक इंजन चूषण, संपीडन, शक्ति और निष्कासन दोहराता है। ऊष्मा का केवल कुछ भाग उपयोगी कार्य बनता है, बाक़ी बेकार ऊष्मा बनकर निकल जाता है। दक्षता η = W ÷ Q × 100%। इंजन CO₂ और दूसरी गैसें भी छोड़ते हैं जो हवा को गंदा और धरती को गर्म करती हैं।
- टरबाइन इंजन: भाप टरबाइन और गैस टरबाइन – टरबाइन इंजन तेज़ चलती गैस को घूमती गति में बदलता है। भाप टरबाइन को बॉयलर से गर्म भाप मिलती है। गैस टरबाइन हवा दबाता है, उसमें ईंधन जलाता है और गर्म गैस को टरबाइन से निकालता है। घूमती धुरी जनित्र, जहाज़ के प्रोपेलर या जेट को चलाती है। दक्षता = उपयोगी कार्य ÷ दी गई ऊष्मा।
- बॉयलर, प्रशीतन (रेफ्रिजरेशन) और एयर कंडीशनिंग उपकरण – बॉयलर ईंधन जलाकर पानी को ऊँचे दाब की भाप बनाता है। दाब मापी और सेफ़्टी वाल्व उसे सुरक्षित रखते हैं। फ्रिज या एसी ठंडक नहीं बनाते, गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। प्रशीतक (रेफ्रिजरेंट) कंप्रेसर, कंडेंसर, विस्तार वाल्व और वाष्पक में घूमता है, ठंडी तरफ़ गर्मी सोखता है और गर्म तरफ़ छोड़ता है।
13. Electromechanics (Mechatronics)
Industrial society and electromechanics · Mechanisms and transmission of motion · Input and output elements of electromechanical systems · Control methods for electromechanical systems · Computer control of electromechanical systems · Society and robot technology
- इलेक्ट्रोमैकेनिकल उपकरण और उत्पादन लाइन – इलेक्ट्रोमैकेनिकल उपकरण में चलते पुर्ज़े (यांत्रिकी) बिजली और इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ मिले होते हैं। इसमें एक सेंसर (आँख), एक नियंत्रक (दिमाग़) और मोटर जैसा एक्चुएटर (मांसपेशी) होता है। फ़ैक्टरियाँ ऐसे उपकरणों को उत्पादन लाइन में जोड़ती हैं, जहाँ डिब्बे एक स्टेशन से दूसरे तक जाते हैं और मशीनें काम तेज़, सुरक्षित और हर बार एक जैसा करती हैं।
- यांत्रिकी: मशीनें गति और बल को कैसे बदलती हैं – यांत्रिकी (mechanism) एक इनपुट गति और बल लेकर अलग आउटपुट गति और बल देती है। गति चार तरह की होती है: घूर्णी, रेखीय, प्रत्यागामी और दोलनी। उत्तोलक आलंब पर घूमता है; यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास। गियर और घिरनी घूमने की गति आगे पहुँचाते हैं; गियर अनुपात = चालित दाँते ÷ चालक दाँते, और आउटपुट चाल = इनपुट चाल ÷ गियर अनुपात। आपस में फँसे गियर उल्टी दिशा में घूमते हैं; बेल्ट से दिशा वही रहती है। कैम, क्रैंक-स्लाइडर और रैक-पिनियन घूर्णी गति को सीधी या आगे-पीछे की गति में बदलते हैं। यांत्रिकी चाल के बदले बल देती है: जितना काम डालोगे, उससे ज़्यादा कभी नहीं मिलेगा।
- सेंसर: मशीनें दुनिया को कैसे महसूस करती हैं – सेंसर किसी भौतिक राशि (प्रकाश, तापमान, दूरी, नमी, ध्वनि, दाब) को विद्युत संकेत में बदलता है। एनालॉग सेंसर लगातार बदलता वोल्टेज देता है; ADC उसे संख्या में बदलता है जिसे कंप्यूटर समझता है। नियंत्रक संख्या को थ्रेशोल्ड (सीमा) से मिलाकर एक्चुएटर को, अक्सर रिले के ज़रिए, चालू-बंद करता है। तय समय पर बार-बार पढ़ना डेटा लॉगिंग है। अच्छे सेंसर की सही रेंज, संवेदनशीलता, शुद्धता और प्रतिक्रिया-समय होता है।
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
- रोबोट नियंत्रक और प्रोग्रामिंग – नियंत्रक (कंट्रोलर) एक छोटा कंप्यूटर है जो रोबोट का दिमाग़ होता है। यह सेंसर से इनपुट पढ़ता है, बार-बार प्रोग्राम चलाता है (पढ़ो, फ़ैसला करो, काम करो) और मोटर या बत्ती जैसे आउटपुट चालू-बंद करता है। पिन कमज़ोर होते हैं, इसलिए मोटर के लिए ड्राइवर लगाते हैं।
- रोबोटिक्स: रोबोट कैसे महसूस करता, सोचता और काम करता है – रोबोट एक मशीन है जो आसपास को महसूस करती है, प्रोग्राम से फ़ैसला लेती है और मोटरों से काम करती है। इसमें ढाँचा, सेंसर, कंट्रोलर, एक्चुएटर, गियर जैसा संचरण और बिजली का स्रोत होता है। रोबोट कारख़ानों, अस्पतालों, खेतों, घरों और अंतरिक्ष में मदद करते हैं।
14. Production Technology
Social change and production technology · Electrical technology in production · Electronic technology in production · Control technology in production · Robot technology in production · Production automation technology
- औद्योगिक क्रांति: कारण, प्रभाव और सुधार (1760–1914) – लगभग 1760 से 1914 के बीच काम घर के हाथ-औज़ारों से हटकर कारख़ानों की मशीनों पर आ गया। पहली लहर (लगभग 1760–1840) ब्रिटेन में कोयला, लोहा, भाप शक्ति और सूती मिलों से शुरू हुई। दूसरी लहर (लगभग 1870–1914) में इस्पात, बिजली, रसायन और तेल आए, और उद्योग पश्चिमी यूरोप, अमेरिका, जापान और रूस तक फैला। शहर तेज़ी से बढ़े; मज़दूरों को लंबे घंटे, बाल श्रम और गंदे घर मिले। मज़दूरों ने संघ बनाए, नए विचारों (उदारवाद, समाजवाद, रूढ़िवाद) में बहस हुई, और सरकारों ने धीरे-धीरे कारख़ाना, स्वास्थ्य और मताधिकार के सुधार किए।
- उत्पादन में विद्युत तकनीक – कारखाने बिजली से चलते हैं। DC एक ही दिशा में बहती है (बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स)। AC की दिशा सेकंड में कई बार बदलती है (भारत में 50 Hz) और घर-कारखाने की सप्लाई AC है। शक्ति P = V x I और ऊर्जा = शक्ति x समय। सुरक्षित इंस्टॉलेशन में सही मोटाई के तार, ओवरलोड पर बिजली काटने वाला ब्रेकर और लोगों को बचाने वाला अर्थ तार होता है।
- बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स: पुर्ज़े और परिपथ – इलेक्ट्रॉनिक्स में छोटे पुर्ज़े विद्युत धारा को नियंत्रित करते हैं। बैटरी या पावर सप्लाई ऊर्जा देती है; स्विच रास्ता खोलता या बंद करता है। प्रतिरोधक धारा सीमित करता है (V = IR), संधारित्र आवेश जमा करता है और सिग्नल को समतल या धीमा कर सकता है, डायोड धारा को एक ही दिशा में जाने देता है, LED रोशनी देने वाला डायोड है, और ट्रांज़िस्टर छोटी बेस धारा से बहुत बड़ी धारा को चालू करता या बढ़ाता है। हर पुर्ज़े का मानक प्रतीक है। परिपथ पहले काग़ज़ या सिम्युलेटर में बनाते हैं, ब्रेडबोर्ड पर आज़माते हैं, और बोर्ड पर सोल्डर करके पक्का करते हैं। एनालॉग परिपथ लगातार बदलते सिग्नल, डिजिटल परिपथ केवल चालू/बंद सिग्नल सँभालते हैं।
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
- रोबोटिक्स: रोबोट कैसे महसूस करता, सोचता और काम करता है – रोबोट एक मशीन है जो आसपास को महसूस करती है, प्रोग्राम से फ़ैसला लेती है और मोटरों से काम करती है। इसमें ढाँचा, सेंसर, कंट्रोलर, एक्चुएटर, गियर जैसा संचरण और बिजली का स्रोत होता है। रोबोट कारख़ानों, अस्पतालों, खेतों, घरों और अंतरिक्ष में मदद करते हैं।
- उत्पादन ऑटोमेशन तकनीक – ऑटोमेशन में मशीनें कम मानव मेहनत से उत्पादन का काम करती हैं। CAD पुर्ज़ा बनाता है, CAM चित्र को औज़ार के रास्ते (G-code) में बदलता है, और CNC मशीन उन्हीं संख्याओं पर सटीक चलती है। सेंसर और कन्वेयर मशीनों को स्वचालित लाइन में जोड़ते हैं और नेटवर्क सबको मुख्य कंप्यूटर से जोड़ता है, जो आदेश भेजता है और रिपोर्ट लेता है।
15. Automotive Engineering
People and motor vehicles · Principles of the car · Car structure · Cars and electrical/electronic technology · Cars and safety · Cars and the environment
- लोग और मोटर वाहन – मोटर वाहन लोगों और सामान को तेज़ी से घर-घर पहुँचाते हैं। पर बहुत ज़्यादा होने पर जाम, धुआँ, शोर और दुर्घटनाएँ भी लाते हैं। इंजीनियर सुरक्षित और साफ़ कारें बनाते हैं, और शहर बस, ट्रेन, साझा सफ़र और बेहतर सड़कें लाते हैं।
- कार के सिद्धांत – पेट्रोल इंजन चार स्ट्रोक (भरना, दबाना, पावर, निकास) में ईंधन जलाता है। ताक़त क्लच, गियरबॉक्स, ड्राइव शाफ़्ट और डिफ़रेंशियल से होकर पहियों तक जाती है। गियर गति और धक्के की अदला-बदली करते हैं। कार तब तक तेज़ होती है जब तक चालक बल रुकावट के बराबर न हो जाए। ब्रेक घर्षण से गति को गर्मी में बदलते हैं।
- कार की बनावट – इंजन को टॉर्क और पावर से बताया जाता है। उसे सहायक प्रणालियाँ चाहिए: ईंधन, हवा और निकास, शीतलन और तेल। बॉडी में क्रंपल ज़ोन और मज़बूत यात्री केबिन होता है। स्प्रिंग और डैम्पर (सस्पेंशन) सफ़र को नरम बनाते हैं, स्टीयरिंग आगे के पहिये मोड़ती है, और टायर व ईंधन-क्षमता सड़क पर प्रदर्शन तय करते हैं।
- ऑटोमोटिव इलेक्ट्रिकल सिस्टम – गाड़ी 12 V सिस्टम पर चलती है (कई ट्रकों में 24 V, हाइब्रिड और EV में 48 V या हाई-वोल्टेज बैटरी)। धारा बैटरी + से सुरक्षा उपकरण, स्विच और लोड से होकर धातु की बॉडी (चेसिस ग्राउंड) से लौटती है। ओम का नियम V = I × R और शक्ति P = V × I से तार और फ़्यूज़ चुनते हैं। तीन मुख्य खराबियाँ: ओपन सर्किट (धारा नहीं), ग्राउंड से शॉर्ट (बहुत ज़्यादा धारा, फ़्यूज़ उड़ता है) और ज़्यादा प्रतिरोध (मद्धम या धीमा)। फ़्यूज़, सर्किट ब्रेकर और फ़्यूज़िबल लिंक तारों की रक्षा करते हैं। लेड-एसिड बैटरी में 2.1 V के छह सेल होते हैं; अल्टरनेटर लगभग 14 V पर चार्ज करता है। मल्टीमीटर वोल्टेज, कंटिन्युटी, प्रतिरोध और वोल्टेज ड्रॉप नापता है।
- कार और सुरक्षा – कार की सुरक्षा के दो काम हैं। बचाव (सक्रिय) उपकरण जैसे ABS, स्टेबिलिटी कंट्रोल, रडार ब्रेक और लेन सहायता टक्कर होने से रोकने की कोशिश करते हैं। टक्कर (निष्क्रिय) उपकरण जैसे क्रंपल ज़ोन, सीट बेल्ट और एयरबैग तब लोगों को बचाते हैं जब टक्कर टल नहीं सकती।
- कार और पर्यावरण – पेट्रोल या डीज़ल की कार ईंधन जलाती है और पाइप से गैसें निकलती हैं। कुछ गैसें हानिकारक हैं: कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, बिना जला ईंधन और कालिख। कार्बन डाइऑक्साइड गर्मी रोकती है। कैटेलिटिक कन्वर्टर बुरी गैसों को कम हानिकारक बना देता है। हल्की कार, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार कम या बिल्कुल ईंधन नहीं जलातीं, इसलिए हवा साफ़ रहती है। समय पर सर्विस और आराम से चलाना भी प्रदूषण घटाता है।
16. Automotive Maintenance
Car maintenance and related laws · Automotive materials · Car maintenance and testing
- कार की देखभाल और उससे जुड़े क़ानून – कार की देखभाल उसे सुरक्षित, भरोसेमंद, साफ़ और सस्ता चलने वाला रखती है। इसके तीन रूप हैं: चालक की रोज़ की जाँच, तय दूरी पर नियमित सर्विस और ख़राबी आने पर मरम्मत। ज़्यादातर देशों में क़ानून कहता है कि कार सड़क-योग्य रहे, समय-समय पर निरीक्षण पास करे और ज़रूरी काम मान्यता-प्राप्त गैराज में हों। गैराज को मंज़ूरी, औज़ार और प्रशिक्षित स्टाफ़ चाहिए, और मैकेनिक प्रशिक्षण व परीक्षा से लाइसेंस या ग्रेड पाते हैं।
- ऑटोमोटिव सामग्री – कार स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक, रबर और काँच से बनती है। हर सामग्री मज़बूती, वज़न, लागत या सुरक्षा के लिए चुनी जाती है। इन्हें काटकर, मोड़कर, ढालकर, वेल्ड करके और बोल्ट से जोड़कर पुर्ज़े बनते हैं। मैकेनिक हाथ के औज़ार, बिजली के औज़ार और नापने के औज़ार इस्तेमाल करते हैं और बोल्ट को सही टॉर्क पर कसते हैं। उम्र पूरी होने पर कार से तरल निकाले जाते हैं, काम के पुर्ज़े दोबारा लगते हैं और धातु, काँच, रबर व प्लास्टिक अलग करके रीसायकल होते हैं।
- कार की सर्विस और जाँच – मैकेनिक कार को तीन जगह जाँचता है। इंजन और उससे जुड़े सिस्टम: कंप्रेशन, तेल, कूलेंट, इग्निशन, ईंधन व हवा के फ़िल्टर। चेसिस: ब्रेक, टायर, सस्पेंशन, स्टीयरिंग और व्हील अलाइनमेंट। संरक्षण और सुरक्षा उपकरण: धुआँ साफ़ करने वाले उपकरण और उत्सर्जन जाँच, बत्तियाँ, सीट बेल्ट, एयरबैग और चेतावनी बत्तियाँ। हर जाँच में नापा हुआ मान सीमा से मिलाया जाता है, और सीमा के ग़लत तरफ़ होने का मतलब मरम्मत है।
17. Naval Architecture
Overview of ships · Ship structure and equipment · Ship design · Shipbuilding · Ship management
- जहाज़ का परिचय – जहाज़ पानी पर तैरती एक बड़ी लोहे की इमारत है। वह इसलिए तैरता है कि उसके हटाए हुए पानी का भार जहाज़ के भार के बराबर होता है (आर्कीमिडीज़ का सिद्धांत)। जहाज़ के भाग हैं पतवार (अग्र, पश्च, कील, डेक); उसके प्रकार हैं मालवाहक, टैंकर, मछली जहाज़, यात्री जहाज़; और सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय नियम हैं जैसे लोड लाइन।
- जहाज़ का डिज़ाइन – जहाज़ ऐसा बनाया जाता है कि उसका वज़न उसके हटाए पानी (विस्थापन) के वज़न के बराबर हो, पानी उसे कम से कम रोके, प्रोपेलर उसे धकेल सके और पतवार लहरों में मज़बूत रहे।
- जहाज़ निर्माण – जहाज़ ऐसे बनता है: पूरे आकार का नक्शा बनाना, स्टील की प्लेटें काटना, प्लेटों को वेल्ड करके ब्लॉक बनाना, ब्लॉकों को जोड़कर पतवार बनाना, पतवार को पानी में उतारना, फिर इंजन व सामान लगाना और रंगना।
- जहाज़ प्रबंधन: निरीक्षण और मरम्मत – जहाज़ की तय समय पर निरीक्षकों द्वारा जाँच होती है और चलने के लिए उसके पास वैध प्रमाणपत्र होने चाहिए। जाँच में खराबी मिले तो मरम्मत होती है, अक्सर ड्राई डॉक में, जहाँ पानी निकालकर पतवार पर काम किया जाता है।
18. Electric Circuits
Elements of electric circuits · DC circuits · AC circuits · Electrical measurement · Various waveforms
- विद्युत परिपथ के अवयव – हर परिपथ एक स्रोत (बैटरी) और तीन मूल भागों से बनता है: प्रतिरोधक जो धारा सीमित करता है (R = V/I); संधारित्र जो आवेश जमा करता है (C = Q/V); और प्रेरक, एक कुंडली जो धारा के बदलाव का विरोध करती है और चुंबकीय क्षेत्र में ऊर्जा जमा करती है।
- किरचॉफ के नियम और व्हीटस्टोन सेतु – संधि नियम: किसी भी संधि पर आने वाली धाराओं का योग = जाने वाली धाराओं का योग (ΣI = 0), क्योंकि आवेश संरक्षित है। लूप नियम: किसी भी बंद लूप में विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य (ΣΔV = 0), क्योंकि ऊर्जा संरक्षित है। चिह्न: धारा की दिशा में प्रतिरोधक पार करने पर −IR; सेल को − से + पार करने पर +ε. चार प्रतिरोधकों P, Q, R, S वाला व्हीटस्टोन सेतु तब संतुलित होता है (गैल्वेनोमीटर में धारा नहीं) जब P/Q = R/S; इससे अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात होता है, जैसे मीटर सेतु में।
- प्रत्यावर्ती धारा – प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार अपना मान और दिशा बदलती है: I = I₀ sin ωt। इसका rms मान I₀/√2 है, यानी वह स्थिर DC जो उतनी ही गर्मी दे। प्रतिरोध में V और I साथ चलते हैं; प्रेरक में I 90° पीछे (Xʟ = ωL); संधारित्र में I 90° आगे (Xᴄ = 1/ωC)। श्रेणी LCR में Z = √(R² + (Xʟ − Xᴄ)²), Xʟ = Xᴄ पर अनुनाद होता है, और औसत शक्ति P = Vrms Irms cos φ।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- विद्युत मीटर, मापन और स्वचालित नियंत्रण – विद्युत मीटर किसी राशि को स्केल पर दिखाते हैं। अमीटर श्रेणी में जुड़ता है और उसका प्रतिरोध बहुत कम होता है; वोल्टमीटर समांतर में जुड़ता है और उसका प्रतिरोध बहुत ज़्यादा होता है। मापन का अर्थ मानक से तुलना करना और त्रुटि जानना है। स्वचालित नियंत्रण में मशीन खुद मान टिकाए रखती है: खुले लूप में परिणाम नहीं देखा जाता, बंद लूप में सेंसर और फ़ीडबैक से त्रुटि सुधारी जाती है। उदाहरण: थर्मोस्टैट, मोटर की चाल का नियंत्रण, पानी के स्तर का नियंत्रण।
- विभिन्न तरंगरूप: साइन, वर्ग, त्रिकोण और क्षणिक अवस्था – तरंगरूप (waveform) समय के साथ वोल्टेज या धारा का ग्राफ़ है। घर की AC साइन तरंग है, पर परिपथों में वर्ग, त्रिकोण और आरी तरंगें भी चलती हैं। हर ऐसी तरंग साइन तरंगों का योग होती है। स्विच बंद करने के बाद RC परिपथ का वोल्टेज समय नियतांक τ = RC के हिसाब से धीरे-धीरे चढ़ता है; इस छोटे समय को क्षणिक अवस्था (transient) कहते हैं।
19. Electrical Machines
DC equipment · AC machines · Electrical materials · Power electronics
- विद्युत मशीनें: जनित्र, मोटर और ट्रांसफ़ॉर्मर – विद्युत मशीनें ऊर्जा का रूप बदलती हैं। जनित्र गति को बिजली में और मोटर बिजली को गति में बदलता है; दोनों में चुंबक और कुंडली होती है। सिंक्रोनस मशीन चुंबकीय क्षेत्र के ठीक बराबर चाल से घूमती है (Ns = 120f/P)। इंडक्शन मोटर थोड़ी धीमी चलती है (स्लिप)। DC मशीन में कम्यूटेटर होता है। ट्रांसफ़ॉर्मर Vs/Vp = Ns/Np से वोल्टता बदलता है। आपातकालीन सप्लाई (बैटरी और इंजन-जनित्र) मेन्स जाने पर बिजली बनाए रखती है।
- AC जनित्र और ट्रांसफ़ॉर्मर – AC जनित्र चुंबकीय क्षेत्र में एक कुंडली घुमाता है। उससे गुजरता फ्लक्स लगातार बदलता है, इसलिए emf e = NBAω sin ωt बनता है, शिखर NBAω। ट्रांसफ़ॉर्मर एक लोहे के क्रोड पर लिपटी दो कुंडलियों के अन्योन्य प्रेरण से चलता है: Vs/Vp = Ns/Np। उच्चायी (स्टेप-अप) वोल्टता बढ़ाता, धारा घटाता है; अपचायी (स्टेप-डाउन) उल्टा। शक्ति लगभग वही रहती है (Vp Ip ≈ Vs Is)।
- विद्युत पदार्थ: चालक, चुंबकीय और विद्युतरोधी – विद्युत मशीनों में तीन तरह के पदार्थ लगते हैं। चालक (तांबा, एल्युमिनियम, नाइक्रोम) में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं और प्रतिरोधकता कम होती है। विद्युतरोधी (चीनी मिट्टी, रबर, अभ्रक, तेल) अपने इलेक्ट्रॉन पकड़े रखते हैं और भंजन वोल्टेज पर ही फेल होते हैं। चुंबकीय पदार्थ नरम (आसानी से चुंबकित-अचुंबकित, कोर के लिए) या कड़े (चुंबकत्व रखते हैं, स्थायी चुंबक के लिए) होते हैं।
- पावर इलेक्ट्रॉनिक्स: यंत्र, शक्ति रूपांतरण और कन्वर्टर परिपथ – पावर इलेक्ट्रॉनिक्स ऐसे स्विचों से विद्युत शक्ति का रूप बदलता है जो पूरे ON या पूरे OFF रहते हैं, इसलिए ऊर्जा कम बर्बाद होती है। रेक्टिफ़ायर AC को DC में बदलता है, चॉपर DC को दूसरे स्तर के DC में (आउटपुट = ड्यूटी चक्र × इनपुट), इन्वर्टर DC को AC में। आम यंत्र: डायोड, थाइरिस्टर (SCR), पावर MOSFET और IGBT।
20. Electric Power Technology
Power generation · Transmission and distribution · Controlling electric power · Using electric power · Energy-saving technology · Electrical laws
- बिजली कैसे बनती है – ज़्यादातर बिजली तार की कुंडलियों के अंदर चुंबक घुमाकर बनती है। यह विद्युत-चुंबकीय प्रेरण है और मशीन है प्रत्यावर्तित्र (alternator)। घुमाने का काम टरबाइन करता है; टरबाइन को भाप, पानी या हवा घुमाती है। सौर सेल अलग हैं: प्रकाश सीधे धारा बनाता है। ट्रांसफ़ॉर्मर वोल्टेज बढ़ाता है ताकि ग्रिड कम नुक़सान से दूर तक बिजली ले जाए।
- पावर ग्रिड और हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन – तार में बिजली गर्मी बनकर बर्बाद होती है: हानि = I²R। भेजी गई शक्ति P = V × I तय हो तो वोल्टेज बढ़ाने पर धारा घटती है और हानि वोल्टेज के वर्ग के हिसाब से घटती है। बिजलीघर पर ट्रांसफ़ॉर्मर वोल्टेज बढ़ाता है, घरों के पास घटाता है। ग्रिड कई लाइनों का जाल (ग्राफ़) है, इसलिए एक लाइन टूटे तो बिजली दूसरे रास्ते से आ जाती है।
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
- विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा – विद्युत शक्ति विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर है: P = VI = I²R = V²/R, मात्रक वाट। ऊर्जा = शक्ति × समय। घर में ऊर्जा किलोवाट-घंटा में मापते हैं: 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J। बिल = यूनिट × दर।
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) – हर मशीन ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। इसका कुछ हिस्सा वह बनता है जो हमें चाहिए (उपयोगी ऊर्जा)। बाकी ज़्यादातर ऊष्मा बनकर बिखर जाता है (व्यर्थ ऊर्जा)। दक्षता = उपयोगी ऊर्जा ÷ कुल दी गई ऊर्जा × 100 %। कोई असली मशीन 100 % तक नहीं पहुँचती। दक्ष यंत्र और कम बर्बादी से पैसा और प्रदूषण दोनों बचते हैं।
- बिजली के कानून: बिजली को सुरक्षित रखना – बिजली से झटका और आग का खतरा होता है, इसलिए कानून बनाए जाते हैं। तीन तरह के नियम हैं: बिजली देने वाली कंपनी के लिए, वायरिंग करने वाले के लिए और बिकने वाले उपकरणों के लिए। तीनों मिलकर वोल्टेज स्थिर, वायरिंग सुरक्षित और उपकरण जाँचे हुए रखते हैं।
21. Electronic Technology
Overview of electronic technology · Semiconductors and electronic circuits · Communication systems · Audio-visual equipment · Electronic measurement
- बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स: पुर्ज़े और परिपथ – इलेक्ट्रॉनिक्स में छोटे पुर्ज़े विद्युत धारा को नियंत्रित करते हैं। बैटरी या पावर सप्लाई ऊर्जा देती है; स्विच रास्ता खोलता या बंद करता है। प्रतिरोधक धारा सीमित करता है (V = IR), संधारित्र आवेश जमा करता है और सिग्नल को समतल या धीमा कर सकता है, डायोड धारा को एक ही दिशा में जाने देता है, LED रोशनी देने वाला डायोड है, और ट्रांज़िस्टर छोटी बेस धारा से बहुत बड़ी धारा को चालू करता या बढ़ाता है। हर पुर्ज़े का मानक प्रतीक है। परिपथ पहले काग़ज़ या सिम्युलेटर में बनाते हैं, ब्रेडबोर्ड पर आज़माते हैं, और बोर्ड पर सोल्डर करके पक्का करते हैं। एनालॉग परिपथ लगातार बदलते सिग्नल, डिजिटल परिपथ केवल चालू/बंद सिग्नल सँभालते हैं।
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
- डेटा संचार तंत्र (Data Communication Systems) – संचार तंत्र सूचना को ट्रांसमीटर से चैनल के रास्ते रिसीवर तक भेजता है। चैनल ताँबे का तार, ऑप्टिकल फ़ाइबर या रेडियो तरंगें हो सकता है। रेडियो से संदेश भेजने के लिए उसे तेज़ वाहक तरंग पर चढ़ाते हैं: AM में वाहक का आयाम और FM में आवृत्ति संदेश के साथ बदलती है। समय-विभाजन मल्टीप्लेक्सिंग (TDM) में कई संकेत बारी-बारी छोटे समय-खानों में एक ही चैनल बाँटते हैं।
- श्रव्य-दृश्य उपकरण (Audio-Visual Equipment) – श्रव्य उपकरण ध्वनि को विद्युत संकेत में बदलते हैं (माइक्रोफ़ोन), उसे बड़ा करते हैं (प्रवर्धक) और फिर ध्वनि में लौटाते हैं (लाउडस्पीकर)। दृश्य उपकरण प्रकाश को विद्युत संकेत में बदलते हैं (पिक्सेलों वाला कैमरा सेंसर) और फिर प्रकाश में लौटाते हैं (स्क्रीन)। डिजिटल उपकरण संकेत को संख्याओं में रखते हैं: ध्वनि के लिए प्रति सेकंड सैंपल, चित्र के लिए पिक्सेल और प्रति सेकंड फ़्रेम।
- अनुप्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक मापन – रेडियो और केबल ठीक चलें, इसलिए हम उन्हें मापते हैं। ऑसिलोस्कोप संकेत को समय के साथ दिखाता है (f = 1/T)। ट्रांसमीटर की आवृत्ति, शक्ति और मॉड्यूलेशन गहराई जाँचते हैं। रिसीवर की संवेदनशीलता जाँचते हैं। माइक्रोवेव और प्रकाश की हानि डेसिबल (dB) में गिनते हैं। एंटीना की क्षेत्र-प्रबलता दूरी के साथ घटती है।
22. Electronic Circuits
Electronic circuit devices · Amplifier circuits · Various electronic circuits
- अर्धचालक और p-n संधि डायोड – अर्धचालक में ऊर्जा अंतराल छोटा (लगभग 1 eV) होता है, इसलिए थोड़ी गर्मी से कुछ इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाते हैं। शुद्ध सिलिकॉन नैज है (इलेक्ट्रॉन = होल)। 5 संयोजकता वाला परमाणु मिलाने से n-प्रकार, 3 वाला मिलाने से p-प्रकार बनता है। p और n जोड़ने पर ह्रास परत और लगभग 0.7 V का विभव प्राचीर बनता है। डायोड अग्र बायस में धारा चलाता है, पश्च में लगभग नहीं, इसलिए यह AC को DC में बदल सकता है।
- प्रवर्धक परिपथ (Amplifier Circuits) – प्रवर्धक (amplifier) छोटे संकेत को बड़ा करता है, और इसके लिए बिजली की आपूर्ति से ऊर्जा लेता है। वोल्टता लब्धि = Vout / Vin; डेसिबल में लब्धि = 20 log10(Vout / Vin)। निम्न आवृत्ति (ऑडियो) प्रवर्धक ध्वनि के संकेत बढ़ाते हैं। उच्च आवृत्ति (रेडियो) प्रवर्धक हज़ारों से लाखों हर्ट्ज़ के संकेत बढ़ाते हैं, अक्सर एक स्टेशन पर ट्यून किए हुए। हर प्रवर्धक की एक बैंडविड्थ और आपूर्ति से तय सीमा होती है।
- पावर सप्लाई, दोलित्र, पल्स और मॉडुलन परिपथ – पावर सप्लाई AC को स्थिर DC बनाती है: दिष्टकारी नकारात्मक आधा उलटता है, संधारित्र फ़िल्टर उभार चिकने करता है और रेगुलेटर उसे सपाट कर देता है। दोलित्र फ़ीडबैक से अपने आप तरंग बनाता है। पल्स परिपथ तय ड्यूटी के साथ ON-OFF होता है। मॉडुलन संदेश को ऊँची आवृत्ति की वाहक तरंग पर चढ़ाता है और डिमॉडुलन उसे वापस निकालता है।
23. Electronic Measurement and Control
Overview of electronic measurement and control · Sequence control · Feedback control · Networked measurement and control
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
- सीक्वेंस कंट्रोल (क्रम नियंत्रण) – सीक्वेंस कंट्रोल में मशीन अपने काम एक तय क्रम में, एक के बाद एक करती है, स्विच, रिले, टाइमर या PLC की मदद से। START बटन रिले की कुंडली को करंट देता है, सेल्फ-होल्डिंग संपर्क उसे चालू रखता है और STOP रास्ता तोड़ देता है। PLC यही काम लैडर प्रोग्राम बार-बार चलाकर करता है।
- फ़ीडबैक नियंत्रण – फ़ीडबैक नियंत्रण आउटपुट को मापता है, उसे सेट पॉइंट से मिलाता है और त्रुटि से मशीन को सुधारता है। ON-OFF नियंत्रण लक्ष्य के आसपास झूलता है, P नियंत्रण में त्रुटि घटती है पर ऑफ़सेट बचता है, और I जोड़ने से ऑफ़सेट खत्म हो जाता है। अच्छा नियंत्रण तेज़, स्थिर और कम ओवरशूट वाला होता है।
- नेटवर्क आधारित मापन और नियंत्रण – नेटवर्क वाले तंत्र में कई सेंसर और एक्चुएटर एक ही केबल या वायरलेस लिंक से कंट्रोलर से जुड़ते हैं। हर उपकरण का एक पता होता है और डेटा पैकेट बनकर चलता है। कंट्रोलर प्रोग्राम (पढ़ो, तय करो, लिखो) चलाता है और ऑपरेटर दूर बैठकर सब देख व चला सकता है, जैसे SCADA और IoT में।
24. Telecommunication Technology
Wired communication · Radio communication · Image communication · I/O devices of communication equipment · Communication laws
- तार वाले संचार उपकरण – तार वाले डेटा संचार में बिट (1 और 0) बिजली या प्रकाश के स्पंदों के रूप में केबल पर चलते हैं। डेटा पैकेट में कटता है और हर पैकेट पर पता होता है। सिरों पर टर्मिनल उपकरण (फ़ोन, कंप्यूटर, मोडेम) होते हैं; नेटवर्क उपकरण (स्विच, राउटर) पैकेट को सही जगह पहुँचाते हैं। फ़ायरवॉल और पासवर्ड डेटा की रक्षा करते हैं। अच्छे जोड़ के लिए सही केबल, सही तार-क्रम और जाँच ज़रूरी है।
- रेडियो संचार उपकरण – रेडियो ट्रांसमीटर में दोलित्र (वाहक बनाता है), मॉडुलक (संदेश चढ़ाता है), पावर प्रवर्धक और एंटीना होते हैं। रिसीवर में एंटीना, ट्यूनर, डिटेक्टर और स्पीकर होते हैं; सुपरहेटेरोडाइन रिसीवर पहले संकेत को एक तय मध्यवर्ती आवृत्ति (IF) पर लाता है। माइक्रोवेव लिंक में डिश सीधी रेखा में होती हैं। जहाज़ों पर संकट के लिए VHF, DSC, EPIRB और SART होते हैं।
- इमेज कम्युनिकेशन (चित्र संचार) – तस्वीर पिक्सेल का जाल है और हर पिक्सेल एक अंक है। तस्वीर भेजने का मतलब अंक भेजना है। कम्प्रेशन सूची छोटी करता है, एन्क्रिप्शन चाबी से छिपाता है, और टीवी तस्वीर को पंक्ति दर पंक्ति फिर बनाता है।
- कंप्यूटर और संगणन: विकास, भाग और इनपुट-आउटपुट उपकरण – कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो इनपुट लेती है, प्रोग्राम के अनुसार उस पर काम करती है, डेटा सहेजती है और आउटपुट देती है। अबेकस से स्मार्टफ़ोन तक उपकरण बदलते गए। हर कंप्यूटर में इनपुट इकाई, CPU, मेमोरी और आउटपुट इकाई होती है, जो बस और पोर्ट से जुड़ी रहती हैं।
- संचार कानून – रेडियो तरंगें साझा संसाधन हैं, इसलिए कानून तय करते हैं कि कौन-सी आवृत्ति कौन इस्तेमाल करे। राष्ट्रीय रेडियो कानून लाइसेंस देते हैं, ITU के रेडियो नियम देशों के बीच बैंड बाँटते हैं, तार वाले संचार के कानून केबल और नेटवर्क देखते हैं, और समुद्री कानून यह पक्का करते हैं कि हर जहाज़ मदद बुला सके।
25. Programming Technology
Algorithms · Programming techniques
- समस्या समाधान का परिचय – कंप्यूटर से समस्या हल करने के चरण: समस्या का विश्लेषण (इनपुट, आउटपुट, नियम), एल्गोरिद्म बनाना (सीमित, स्पष्ट, क्रमबद्ध चरण), प्रोग्रामिंग भाषा में कोड करना, अलग-अलग इनपुट से जाँचना (टेस्ट), और डीबग (गलतियाँ ढूँढकर हटाना)। एल्गोरिद्म को फ़्लोचार्ट (अंडाकार = शुरू/रुको, समांतर चतुर्भुज = इनपुट/आउटपुट, आयत = प्रक्रिया, हीरा = निर्णय, तीर = दिशा) या स्यूडोकोड (सरल संरचित भाषा) में दिखाते हैं। विघटन बड़ी समस्या को छोटी उप-समस्याओं में तोड़ता है।
- प्रोग्रामिंग तकनीक – अच्छा प्रोग्राम डेटा को सही ढाँचे (ऐरे, स्टैक, क्यू) में रखता है, साझा कोडिंग नियम मानता है, फ़ाइल को रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड पढ़ता-लिखता है, साफ़ इनपुट-आउटपुट बनाता है और छोटे मॉड्यूल में बँटा होता है जो एक-एक काम करते हैं।
26. Hardware Technology
Computer electronic circuits · Computer organisation · Computer control · Embedded microcomputer technology
- डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स: संयोजी और अनुक्रमिक परिपथ – डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स में वोल्टता के केवल दो स्तर होते हैं: 0 और 1। संयोजी परिपथ (combinational circuit) का आउटपुट केवल उसी समय के इनपुट पर निर्भर करता है। इसे चार चरणों में बनाते हैं: सत्य सारणी लिखिए, व्यंजक लिखिए, उसे सरल कीजिए (कार्नो मानचित्र मदद करता है) और गेट बनाइए। अनुक्रमिक परिपथ (sequential circuit) में स्मृति भी होती है, इसलिए उसका आउटपुट इनपुट और पिछली स्थिति दोनों पर निर्भर करता है। फ्लिप-फ्लॉप सबसे छोटी स्मृति-इकाई है: वह क्लॉक पल्स आने पर ही इनपुट D की नकल करता है। कई फ्लिप-फ्लॉप मिलकर काउंटर और रजिस्टर बनाते हैं। सिमुलेटर में असली सर्किट बनाने से पहले हर इनपुट जाँचा जा सकता है।
- कंप्यूटर का मूल संगठन – कंप्यूटर प्रणाली में हार्डवेयर (जिसे छू सकें) और सॉफ़्टवेयर (निर्देश) दोनों होते हैं। इनपुट उपकरण डेटा अंदर लाते हैं, CPU (ALU + कंट्रोल यूनिट + रजिस्टर) उस पर काम करता है, और आउटपुट उपकरण परिणाम देते हैं। मेमोरी एक सीढ़ी जैसी है: रजिस्टर और कैश छोटे पर सबसे तेज़, प्राथमिक मेमोरी (RAM, ROM) चलते प्रोग्राम रखती है, और द्वितीयक भंडारण (HDD, SSD, पेन ड्राइव) डेटा हमेशा के लिए रखता है। 8 बिट = 1 बाइट, और KB से आगे हर इकाई पिछली की 1024 गुना है।
- कंप्यूटर और संगणन: विकास, भाग और इनपुट-आउटपुट उपकरण – कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो इनपुट लेती है, प्रोग्राम के अनुसार उस पर काम करती है, डेटा सहेजती है और आउटपुट देती है। अबेकस से स्मार्टफ़ोन तक उपकरण बदलते गए। हर कंप्यूटर में इनपुट इकाई, CPU, मेमोरी और आउटपुट इकाई होती है, जो बस और पोर्ट से जुड़ी रहती हैं।
- रोबोट नियंत्रक और प्रोग्रामिंग – नियंत्रक (कंट्रोलर) एक छोटा कंप्यूटर है जो रोबोट का दिमाग़ होता है। यह सेंसर से इनपुट पढ़ता है, बार-बार प्रोग्राम चलाता है (पढ़ो, फ़ैसला करो, काम करो) और मोटर या बत्ती जैसे आउटपुट चालू-बंद करता है। पिन कमज़ोर होते हैं, इसलिए मोटर के लिए ड्राइवर लगाते हैं।
- एम्बेडेड सिस्टम (Embedded Systems) – एम्बेडेड सिस्टम एक छोटा कंप्यूटर है जो किसी बड़ी चीज़ के अंदर एक ही काम के लिए लगा होता है, जैसे वॉशिंग मशीन या ट्रैफ़िक लाइट। यह सेंसर से पढ़ता है (इनपुट), माइक्रोकंट्रोलर पर प्रोग्राम चलाता है (प्रोसेस) और LED, मोटर जैसे एक्चुएटर चलाता है (आउटपुट)। प्रोग्राम लूप में दोहराता है और वेरिएबल, शर्तें व इवेंट इस्तेमाल करता है। स्मार्ट चीज़ें ब्लूटूथ या वाई-फ़ाई जैसे प्रोटोकॉल से डेटा भेजती हैं।
27. Software Technology
Operating systems · Security technology · Software creation
- ऑपरेटिंग सिस्टम – ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) मुख्य सिस्टम सॉफ़्टवेयर है जो उपयोगकर्ता और हार्डवेयर के बीच रहकर सारे संसाधन संभालता है। इसके कार्य: प्रोसेस प्रबंधन (प्रोग्रामों में CPU बाँटना), मेमोरी प्रबंधन (RAM देना और वापस लेना), फ़ाइल प्रबंधन, उपकरण प्रबंधन (ड्राइवरों से) और सुरक्षा (पासवर्ड, अनुमति)। उपयोगकर्ता OS से यूज़र इंटरफ़ेस से बात करता है: कमांड लाइन (CLI), ग्राफ़िकल (GUI), टच, आवाज़ या हावभाव। उदाहरण: Windows, Linux, macOS, Android, iOS।
- साइबर सुरक्षा: ख़तरे और उनसे बचाव – साइबर सुरक्षा कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की रक्षा करती है। इसके लक्ष्य हैं गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता (CIA त्रिक)। आम ख़तरे: मालवेयर, फ़िशिंग व सोशल इंजीनियरिंग, ब्रूट फ़ोर्स और डिनायल ऑफ़ सर्विस। बचाव: मज़बूत प्रमाणीकरण, कूटलेखन, फ़ायरवॉल, एंटी-मालवेयर, अपडेट, पहुँच नियंत्रण और बैकअप।
- सॉफ़्टवेयर विकास: विचार से चलते ऐप तक – अच्छा सॉफ़्टवेयर चरणों में बनता है: समस्या का विश्लेषण करके आवश्यकताएँ लिखो, हल डिज़ाइन करो, छोटे हिस्सों में कोड करो, सामान्य, सीमा और गलत डेटा से परीक्षण करो, उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाओ और रखरखाव करो। वॉटरफ़ॉल हर चरण एक बार क्रम से करता है; एजाइल छोटे चक्र दोहराता है। मज़बूत प्रोग्राम इनपुट जाँचते हैं, और टीमें वर्ज़न कंट्रोल, साफ़ भूमिकाएँ और उपयोगकर्ता की राय इस्तेमाल करती हैं।
28. Computer Systems Technology
Building computer systems · Network technology · Database technology · Techniques for using information media
- कंप्यूटर सिस्टम बनाना – कंप्यूटर सिस्टम हार्डवेयर (इनपुट, प्रोसेसर, मेमोरी, स्टोरेज, आउटपुट) और सॉफ़्टवेयर की टीम है। इसे बनाने के लिए पहले ज़रूरत का विश्लेषण, फिर बजट में डिज़ाइन, फिर जाँच करके मूल्यांकन करते हैं। सबसे कमज़ोर हिस्सा (बॉटलनेक) पूरे सिस्टम की गति रोकता है, इसलिए उसे पहले सुधारते हैं।
- नेटवर्क के प्रकार, टोपोलॉजी और प्रोटोकॉल: आकार, ढाँचा और नियम – नेटवर्क आकार से बँटते हैं: PAN (एक व्यक्ति के आस-पास कुछ मीटर), LAN (कमरा, इमारत या परिसर), MAN (शहर) और WAN (देश या दुनिया)। टोपोलॉजी नोड्स के जुड़ने का ढाँचा है: बस (सब एक बैकबोन केबल पर), स्टार (सब एक केंद्रीय हब या स्विच से) और ट्री (स्तरों में जुड़े स्टार)। प्रोटोकॉल नियमों का समूह है: TCP/IP इंटरनेट पर डेटा तोड़ता और रास्ता देता है, HTTP और HTTPS वेब पेज लाते हैं, FTP फ़ाइलें भेजता है, SMTP ईमेल भेजता है, POP3 ईमेल डाउनलोड करता है, PPP दो उपकरण सीधे जोड़ता है, TELNET दूर के कंप्यूटर में लॉग-इन कराता है, और VoIP इंटरनेट पर आवाज़ ले जाता है।
- डेटाबेस संकल्पनाएँ: DBMS, रिलेशन और की – अलग-अलग फ़ाइलों में डेटा रखने से दोहराव, असंगति और कमज़ोर सुरक्षा होती है। डेटाबेस संबंधित डेटा को एक व्यवस्थित जगह रखता है, और DBMS (जैसे MySQL) उसे सँभालने वाला सॉफ़्टवेयर है। रिलेशनल मॉडल में डेटा तालिकाओं (रिलेशन) में रहता है, जिनमें स्तंभ (एट्रिब्यूट) और पंक्तियाँ (टपल) होती हैं; डोमेन किसी स्तंभ के अनुमत मानों का समूह है। कैंडिडेट की हर पंक्ति को अलग पहचानती है; उनमें से एक प्राइमरी की चुनी जाती है और बाकी ऑल्टरनेट की होती हैं।
- सूचना माध्यम के उपयोग की तकनीक – सूचना माध्यम संदेश को लिखावट, चित्र, आवाज़ या वीडियो के रूप में ले जाते हैं। डिजिटाइज़ेशन इन्हें संख्याओं में बदलता है: चिकनी लहर को कई जगह नापते हैं (नमूने) और हर नमूना एक संख्या बनता है। नमूने ज़्यादा तो गुणवत्ता अच्छी पर फ़ाइल बड़ी। आकार, रंग का अंतर, चिह्न और हलचल जैसी प्रस्तुति की तकनीकें संदेश को साफ़ बनाती हैं।
29. Building Structures
Overview of building structures · Building materials · Timber structures · Reinforced concrete structures · Steel structures · Composite structures · Seismic technology for buildings
- इमारत की संरचना का परिचय – इमारत की संरचना भार (अपना वज़न, लोग, हवा, भूकंप) को सुरक्षित ज़मीन तक पहुँचाती है। भार छत, बीम, खंभा, नींव, ज़मीन के रास्ते जाता है। दो आम प्रणालियाँ हैं: दीवार संरचना और ढाँचा संरचना। तिरछी पट्टी हवा के बग़ल के धक्के से बचाती है और चौड़ी नींव भार फैलाकर ज़मीन को धँसने से रोकती है।
- निर्माण सामग्री – मुख्य निर्माण सामग्री हैं लकड़ी, इस्पात, कंक्रीट, प्रबलित कंक्रीट (RCC) और ईंट। इन्हें दबाव-ताक़त, खिंचाव-ताक़त, वज़न, आग से सुरक्षा और दाम से तौलते हैं। कंक्रीट और ईंट दबाव में मज़बूत पर खिंचाव में कमज़ोर हैं, इस्पात दोनों में मज़बूत पर आग में नरम पड़ता है, लकड़ी हल्की पर जलती है। काम के हिसाब से चुनो।
- लकड़ी की संरचनाएँ – लकड़ी की संरचना में लकड़ी के खंभे और बीम जोड़कर ढाँचा बनता है। मोर्टिस-टेनन जैसे जोड़ टुकड़ों को जोड़ते हैं। तिरछी पट्टी हवा से ढाँचे को तिरछा होने से रोकती है। लकड़ी को सूखा और ज़मीन से ऊपर रखना होता है ताकि सड़े नहीं, और गहरा बीम कम झुकता है क्योंकि अकड़ गहराई के घन से बढ़ती है।
- प्रबलित कंक्रीट (RC) संरचना – कंक्रीट दबाने (संपीड़न) में बहुत मज़बूत है पर खिंचने (तनाव) में कमज़ोर। जहाँ खिंचाव होता है वहाँ सरिया (स्टील की छड़ें) डालने से यह कमी दूर हो जाती है। इसी से बीम, कॉलम, स्लैब और नींव बनती हैं। कंक्रीट सरिया को जंग और आग से भी बचाता है।
- स्टील संरचना – स्टील खींचने और दबाने दोनों में मज़बूत है, इसलिए पतले और हल्के हिस्से भी बड़ा भार उठा लेते हैं। बीम H आकार की होती है ताकि स्टील वहाँ रहे जहाँ झुकाव सबसे ज़्यादा है। हिस्से कारखाने में बनते हैं और बोल्ट या वेल्डिंग से जुड़ते हैं। कमियाँ: पतले खंभे मुड़ते हैं, आग में स्टील नरम होता है और जंग लगती है, इसलिए आग-रोधी और रंग की परत चाहिए।
- मिश्रित (कम्पोजिट) संरचना – मिश्रित संरचना में स्टील और कंक्रीट एक ही हिस्से में साथ काम करते हैं ताकि दोनों एक-दूसरे की कमज़ोरी ढक दें। SRC में स्टील का H-ढाँचा प्रबलित कंक्रीट के अंदर होता है। CFT में कंक्रीट स्टील के पाइप में भरा होता है। ये ज़्यादा भार उठाते हैं, आग और भूकंप में बेहतर हैं और ऊँची इमारतों के लिए अच्छे हैं।
- इमारतों के लिए सिस्मिक (भूकंप) तकनीक – भूकंप में ज़मीन हिलती है और इमारत पीछे रहना चाहती है, इसलिए झूलती है। बचाव के तीन तरीक़े हैं: दीवारों और ब्रेस से इमारत को मज़बूत और कड़ा बनाओ, नीचे रबर बेयरिंग लगाओ ताकि झटका ऊपर न पहुँचे (बेस आइसोलेशन), या डैम्पर लगाओ जो झूलने की ऊर्जा सोख लें। पुराने घरों को मरम्मत (रेट्रोफ़िट) से सुरक्षित बनाया जा सकता है।
30. Architectural Planning
Overview of architectural planning · History of architecture · Architecture and living environment · Building services · Planning and programming buildings · Urban planning
- वास्तुशिल्प डिज़ाइन (Architectural Design) – वास्तुशिल्प डिज़ाइन किसी ज़रूरत को भवन में बदलता है। यह ब्रीफ़ (लोगों की ज़रूरत, जगह, बजट) से शुरू होता है, फिर रेखाचित्र, प्लान, एलिवेशन और सेक्शन, फिर 3D मॉडल और CAD। डिज़ाइनर मॉड्यूल, सममिति और अनुपात का उपयोग करता है, जाँचता है कि संरचना भार सह सकती है, धूप-छाया का ध्यान रखता है और पर्यावरण तथा लोगों के बारे में सोचता है।
- वास्तुकला: इमारतें कैसे खड़ी रहती हैं, दिखती और महसूस होती हैं – वास्तुकला लोगों के लिए इमारतें और जगहें डिज़ाइन करने की कला और विज्ञान है। हर इमारत को अपना भार ज़मीन तक पहुँचाना होता है: स्तंभ-धरन से, मेहराब, वॉल्ट और गुंबद से, या स्टील-कंक्रीट के ढाँचे से। हर युग की अपनी शैली रही: मिस्री, यूनानी-रोमन, बाइज़ेंटाइन, रोमनस्क, गॉथिक, पुनर्जागरण और आधुनिक। वास्तुकार नक़्शों (प्लान, उन्नयन, सेक्शन), मॉडल और CAD से योजना बनाते हैं, और जगह, रोशनी व पहुँच ऐसे सोचते हैं कि जगह सबके काम आए और अच्छी लगे।
- वास्तुकला और रहने का वातावरण – आरामदायक घर जलवायु के साथ चलता है। गहरा छज्जा गर्मी की ऊँची धूप रोकता है पर सर्दी की नीची धूप अंदर आने देता है। आमने-सामने की खिड़कियाँ क्रॉस वेंटिलेशन देती हैं; ऊँचा रोशनदान गर्म हवा को स्टैक प्रभाव से बाहर निकालता है। ड्राफ़्ट बिना चाहे आने वाली हवा है, वेंटिलेशन योजनाबद्ध ताज़ी हवा है: Q = n × V ÷ 3600। हल्के रंग धूप लौटाते हैं और छत ठंडी रखते हैं; रंग मन-मिज़ाज बदलते हैं और रास्ता खोजने में भी मदद करते हैं।
- भवन सेवाएँ – भवन सेवाएँ वे प्रणालियाँ हैं जो इमारत को सुरक्षित और आरामदायक बनाती हैं: जल आपूर्ति, जल निकासी और स्वच्छता, ताप-वेंटिलेशन-वातानुकूलन (HVAC), बिजली और संचार वायरिंग, अग्नि सुरक्षा और लिफ़्ट। हर एक में सरल भौतिकी है: पानी का दाब p = ρgh, निकासी के लिए ढलान, AC में गर्मी को पंप करना, और बिजली बचाने के लिए ऊर्जा = शक्ति × समय। सही सामग्री भी ज़रूरी है, जैसे PVC, ताँबा और PPR पाइप और इंसुलेटेड ताँबे के तार।
- इमारतों की योजना और प्रोग्रामिंग – इमारत की योजना प्रोग्राम से शुरू होती है: कौन उपयोग करेगा, वह क्या करेगा, कितनी जगह और पैसा है और कौन-से नियम लागू हैं। स्वतंत्र घर अपने प्लॉट पर अकेला खड़ा होता है; अपार्टमेंट में कई घर ऊपर-ऊपर बनते हैं और दीवारें, सीढ़ियाँ व लिफ़्ट साझा होती हैं। स्कूल, अस्पताल और दुकान को अलग-अलग नक़्शा चाहिए। बाधा-मुक्त और यूनिवर्सल डिज़ाइन इमारत को सबके उपयोग लायक बनाते हैं: लगभग 1:12 की रैंप, चौड़े दरवाज़े, लिफ़्ट और साफ़ संकेत। काम के अनुपात: निर्मित क्षेत्र अनुपात = आधार ÷ प्लॉट, FAR = कुल फ़र्श क्षेत्र ÷ प्लॉट।
- नगर नियोजन और नगरीय जीवन की गुणवत्ता – नगर नियोजन का अर्थ है पहले से तय करना कि शहर की ज़मीन कैसे इस्तेमाल होगी: सड़कें, घर, काम, पार्क और सेवाएँ कहाँ होंगी और शहर कैसे बढ़ेगा। योजना के बिना शहर खेतों पर फैलता है, जाम बढ़ता है और झुग्गियों में पानी व नाली नहीं होती। नियोजक भूमि-उपयोग क्षेत्रीकरण, सार्वजनिक परिवहन, सही घनत्व और हरियाली से जीवन की गुणवत्ता बढ़ाते हैं, जिसे आवास, रोज़गार, साफ़ हवा, सेवाएँ, परिवहन और सुरक्षा से मापा जाता है। नए विचार हैं: रहने योग्य शहर, 15-मिनट पड़ोस, स्मार्ट शहर और शहर की ब्रांडिंग। गाँव और छोटे नगर भी मिलकर नियोजित किए जाते हैं।
31. Structural Design of Buildings
Overview of structural design · Forces acting on structures · Forces in statically determinate structures · Mechanics of members · Forces in statically indeterminate structures · Design of various structures · Seismic design of buildings
- संरचना डिज़ाइन: बीम, ट्रस और दृढ़ फ़्रेम – संरचना डिज़ाइन का मतलब है हिस्सों का आकार और माप ऐसे चुनना कि वे भार सुरक्षित रूप से सह सकें। इंजीनियर भार की तुलना क्षमता से करते हैं और सुरक्षा गुणांक 1 से ऊपर रखते हैं। बीम झुकने का सामना करती है (गहराई सबसे ज़रूरी), ट्रस त्रिभुज इस्तेमाल करता है इसलिए हर छड़ सिर्फ़ दबती या खिंचती है, और दृढ़ फ़्रेम के कड़े कोने बगल के धक्के में उसका आकार बनाए रखते हैं।
- संरचनाओं पर कार्य करने वाले बल – संरचना भार (स्थायी, चल, पवन, भूकंप) को ज़मीन तक पहुँचाती है। खड़े रहने के लिए उसे संतुलन में होना चाहिए: ऊपर के बल = नीचे के बल और घुमाव का असर बराबर (ΣFx = 0, ΣFy = 0, ΣM = 0)। सहारे प्रतिक्रिया देते हैं: रोलर 1, पिन 2, स्थिर (fixed) 3। समतल में अज्ञात प्रतिक्रियाएँ 3 हों तो बीम स्थिति-निर्धारण योग्य (determinate) है; कम हों तो अस्थिर, ज़्यादा हों तो अनिर्धारित (indeterminate)।
- स्थैतिक निर्धार्य संरचनाओं में बल – जब तीन संतुलन समीकरण (क्षैतिज बल का योग = 0, ऊर्ध्वाधर बल का योग = 0, आघूर्ण का योग = 0) सभी सहारों की प्रतिक्रियाएँ और भीतरी बल निकालने के लिए काफ़ी हों, तो संरचना स्थैतिक निर्धार्य कहलाती है। सरल रूप से टिके बीम में, भार P अगर पूरी लंबाई के हिस्से a पर हो, तो R_A = P(1 − a) और R_B = P·a होता है। झुकाव आघूर्ण भार के ठीक नीचे सबसे ज़्यादा होता है। त्रिकोण ट्रस की हर छड़ बस खिंचती या दबती है। प्रतिबल = बल ÷ क्षेत्रफल।
- सदस्यों की यांत्रिकी: पदार्थ, काट और विरूपण – संरचना के किसी सदस्य (छड़, बीम, खंभा) को तीन बातों से परखते हैं। पदार्थ: प्रतिबल σ = F/A, विकृति ε = ΔL/L और कठोरता E = σ/ε। काट: क्षेत्रफल A, द्वितीय आघूर्ण I = bh³/12 और काट मापांक Z = I/y। विरूपण: छड़ बढ़ती है ΔL = FL/(AE); सरल टिका बीम बीच के भार से झुकता है δ = PL³/(48EI)। गहराई h सबसे ज़्यादा मायने रखती है: उसे दुगुना करने पर I आठ गुना और झुकाव आठवाँ हिस्सा हो जाता है।
- स्थैतिक अनिर्धार्य संरचनाओं में बल – जब अज्ञात प्रतिक्रियाएँ या सदस्य तीन संतुलन समीकरणों से हल होने वालों से ज़्यादा हों, तो संरचना अनिर्धार्य कहलाती है। फ़ालतू अज्ञातों को रिडंडेंट कहते हैं; अनिर्धार्यता की कोटि = अज्ञात − समीकरण। इसे हल करने के लिए संगतता (हिस्से साथ-साथ कैसे मुड़ेंगे) और पदार्थ की कठोरता EI का उपयोग करते हैं। लाभ: अतिरिक्त सहारे या जड़े सिरों वाले बीम में आघूर्ण और झुकाव बहुत कम होते हैं (उतने ही कुल पाट वाले साधारण बीम से दो-पाट बीम लगभग 38 गुना कम झुकता है)। कीमत: सहारा धँसे तो प्रतिबल पैदा होता है।
- विभिन्न संरचनाओं का डिज़ाइन: लकड़ी, प्रबलित कंक्रीट और इस्पात – लकड़ी हल्की, नवीकरणीय और रेशे की दिशा में मज़बूत है, पर रेशे के आर-पार कमज़ोर और नमी व सड़न से नाज़ुक। कंक्रीट दबाव में मज़बूत और खिंचाव में कमज़ोर है, इसलिए खिंचाव वाली जगह पर इस्पात की छड़ें (सरिया) डालते हैं: प्रबलित कंक्रीट (RC)। इस्पात दबाव और खिंचाव दोनों में मज़बूत, तन्य और वज़न के हिसाब से हल्का है; पतले इस्पात सदस्य बकल हो सकते हैं और आग में इस्पात की मज़बूती घटती है। तीनों में भार एक ही रास्ते से जाता है: स्लैब, बीम, खंभा, नींव, ज़मीन।
- इमारतों का भूकंप-रोधी डिज़ाइन – भूकंप में ज़मीन हिलती है और इमारत का द्रव्यमान उसका विरोध करता है, इसलिए उस पर बग़ल से जड़त्व बल F = m × a लगता है: भारी और ऊँची मंज़िलों पर ज़्यादा। नुकसान कमज़ोर मंज़िल (सॉफ़्ट स्टोरी), छोटे खंभे, टक्कर, मरोड़, कमज़ोर जोड़ और भंगुर पदार्थों से होता है। भूकंप-रोधी डिज़ाइन इमारत को मज़बूती, कठोरता, तन्यता और नियमित आकार देता है, शियर वॉल, ब्रेसिंग या बेस आइसोलेशन के साथ। पुरानी इमारतों को रेट्रोफ़िट से मज़बूत करते हैं: दीवार या ब्रेस जोड़ना, खंभे लपेटना और जोड़ ठीक करना।
32. Building Construction
Overview of building construction · Building construction work · Various construction works · Construction machinery and related tools · Building cost estimation
- भवन निर्माण का परिचय – निर्माण का मतलब है नक्शे को तय क्रम में असली इमारत बनाना: योजना, साइट की तैयारी, नींव, ढाँचा, फ़िनिशिंग। सुरक्षा प्रबंधन काम से पहले ख़तरे पहचानकर उन्हें रोकता है। सौंपने के बाद रखरखाव इमारत को दशकों तक सुरक्षित रखता है।
- भवन निर्माण कार्य: विधियाँ, अनुबंध, योजना और पर्यवेक्षण – निर्माण कार्य एक निर्माण विधि (अलग कारीगर, मुख्य ठेकेदार या डिज़ाइन-बिल्ड) से संगठित होता है, अनुबंध (तय दाम या लागत-प्लस) से बँधता है, काम, हफ़्तों और क्रम की योजना से चलता है और पर्यवेक्षक असली प्रगति को योजना से मिलाकर जाँचता है।
- विभिन्न निर्माण कार्य – इमारत को कई तरह के काम चाहिए: अस्थायी कार्य, नींव और ज़मीन का काम, ढाँचा, फ़िनिशिंग, भवन सेवाएँ, पुरानी इमारतों की भूकंपरोधी मज़बूती, प्रीफ़ैब और मशीन जैसी श्रम-बचत विधियाँ, और पर्यावरण बचाने के लिए पुनर्चक्रण के साथ सावधान तोड़फोड़।
- निर्माण मशीनें और संबंधित औज़ार – निर्माण मशीनें समय और भारी मेहनत बचाती हैं: एक्सकेवेटर खोदता है, बुलडोज़र धकेलता है, डंप ट्रक ढोता है, रोलर दबाता है, क्रेन उठाती है, और मिक्सर, पंप, वाइब्रेटर कंक्रीट सँभालते हैं। स्पिरिट लेवल और साहुल जैसे औज़ार काम सीधा रखते हैं। हर मशीन को प्रशिक्षित चालक और शुरू करने से पहले सुरक्षा जाँच चाहिए।
- भवन लागत अनुमान – अनुमान निर्माण से पहले लागत का पूर्वानुमान है। मूल नियम: लागत = मात्रा × दर। मोटा अनुमान (क्षेत्रफल × प्रति m² दर) जल्दी बनता है और लगभग 20% सटीक होता है। ब्योरेवार अनुमान हर चीज़ की नापी मात्रा से बनता है और लगभग 5% सटीक होता है। निविदा में ठेकेदार बोली लगाते हैं और मालिक सबसे कम स्वीकार्य बोली चुनता है।
33. Building Laws
Overview of laws on building work · Building Standards Act · Laws on building work etc.
- भवन निर्माण कानूनों का परिचय – भवन कानून सरकार के बनाए नियम हैं जो इमारत को सुरक्षित, स्वस्थ और पड़ोसियों के लिए ठीक रखते हैं। ये सीढ़ी की तरह हैं: ऊपर कानून (Act) बड़ा लक्ष्य बताता है, फिर सरकारी आदेश, फिर मंत्रालय के नियम जो संख्याएँ तय करते हैं, और सबसे नीचे तकनीकी मानक। हर नक्शे को चारों स्तर पार करने होते हैं।
- भवन मानक कानून: इमारत के स्तर और शहर के स्तर के नियम – भवन मानक कानून (बिल्डिंग कोड) में नियमों के दो समूह होते हैं। इमारत-स्तर के नियम एक इमारत के बारे में हैं: मज़बूत ढाँचा, आग से निकास, रोशनी, हवा और स्वच्छता। शहर-स्तर के नियम बताते हैं कि इमारतें साथ कैसे बनें: कवरेज अनुपात (नींव का क्षेत्र ÷ प्लॉट), फ़र्श क्षेत्र अनुपात FAR (कुल फ़र्श ÷ प्लॉट), सड़क की चौड़ाई और सड़क से दूरी।
- निर्माण कार्य, नगर योजना, अच्छी इमारतों और मज़दूर सुरक्षा के कानून – बिल्डिंग कोड के अलावा इमारत के आसपास चार और कानून होते हैं। निर्माण-कार्य कानून बताते हैं कि कौन डिज़ाइन और निगरानी कर सकता है। नगर योजना कानून शहर को ज़ोन में बाँटते हैं और सड़क व खुली जगह की योजना बनाते हैं। अच्छी इमारतों को बढ़ावा देने वाले कानून लंबी उम्र, ऊर्जा-बचत और सबके लिए सुलभ इमारत को सहारा देते हैं। व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कानून निर्माण करने वालों की रक्षा करते हैं।
34. Building Services Planning
Living environment and facilities · Building structure related to services · Planning building services · Installing building services · Laws on building services
- रहने का वातावरण और सुविधाएँ: इमारत में गर्मी, हवा और रोशनी – कमरे का आराम तीन चीज़ों से बनता है। प्राकृतिक वातावरण (सूरज, हवा, बाहर का तापमान) स्रोत है। भीतरी वातावरण (तापमान, रोशनी, ताज़ी हवा, आवाज़) वह है जो हम महसूस करते हैं। तरल और ऊष्मीय यांत्रिकी बताती है कि हवा और गर्मी कैसे चलती हैं: गर्म हवा ऊपर उठती है, हवा खुले रास्तों से गुज़रती है और गर्मी दीवार से Q = U × A × ΔT की दर से बहती है।
- सेवाओं से जुड़ा इमारत का ढाँचा: योजना, संरचना और संरचनात्मक यांत्रिकी – इमारत को अपना भार ज़मीन तक पहुँचाना होता है और पाइप, डक्ट व केबल जैसी सेवाओं के लिए जगह भी छोड़नी होती है। योजना में शाफ़्ट और मशीन-कक्ष सही जगह रखे जाते हैं। संरचना (खंभे, बीम, स्लैब) भार उठाती है। संरचनात्मक यांत्रिकी बताती है कि बीम कितनी झुकेगी: झुकाव भार के साथ बढ़ता है और बीम गहरी होने पर तेज़ी से घटता है (लगभग 1 ÷ गहराई³)।
- इमारत की सेवाओं की योजना – इमारत की सेवाएँ (पानी, निकासी, एयर कंडीशनिंग, बिजली, आग-सुरक्षा, लिफ़्ट) इमारत के साथ ही प्लान की जाती हैं। योजनाकार हर सेवा चुनता है, उसका रास्ता बनाता है और शाफ़्ट, सीलिंग के ऊपर और मशीन-कक्ष में जगह रखता है। ऊँचाई = मंज़िल की ऊँचाई - बीम - नली - गैप जैसी जाँच से पता चलता है कि सब फिट होगा या नहीं।
- इमारत की सेवाएँ लगाना – सेवाएँ लगाने के काम में चार लक्ष्य साथ चलते हैं: समय, ख़र्च, गुणवत्ता और सुरक्षा। गैंट चार्ट कार्यों को पट्टियों में दिखाता है और क्रांतिक पथ वह सबसे लंबी कड़ी है जो पूरा होने की तारीख़ तय करती है। लागत अनुमान = (मात्रा x इकाई दर) का योग + ऊपरी खर्च + लाभ + थोड़ी आकस्मिक राशि।
- इमारत की सेवाओं के कानून – इमारत की सेवाओं का काम चार नियम-समूहों से बँधा है: सुरक्षा और स्वास्थ्य कानून (मज़दूरों की रक्षा), भवन कानून (मज़बूती और आग-सुरक्षा), सेवा कानून (बिजली, गैस, पानी पर लाइसेंस वाला काम) और पर्यावरण कानून (प्रदूषण और हानिकारक गैसों की सीमा)। एक काम अक्सर कई कानूनों में आता है। हर देश में नाम अलग हैं, पर विचार वही हैं।
35. Air-Conditioning Systems
Overview of air conditioning · Air-conditioning equipment · Ventilation and smoke-exhaust installations · Direct heating equipment · Installing air-conditioning
- एयर कंडीशनिंग का परिचय – एयर कंडीशनिंग तापमान, नमी, सफ़ाई और हवा की गति को नियंत्रित करती है। प्रणाली सर्व-वायु, वायु-जल या शीतलक आधारित हो सकती है। शीतलन भार वह गर्मी है जिसे निकालना है (धूप, लोग, बत्ती, गरम दीवारें और ताज़ी हवा); तापन भार वह गर्मी है जो ठंड में जोड़नी है। नम हवा को शुष्क-बल्ब तापमान, सापेक्ष आर्द्रता और ओस बिंदु से बताते हैं।
- एयर कंडीशनिंग उपकरण – केंद्रीय एयर कंडीशनिंग संयंत्र में चिलर ठंडा पानी बनाता है; वायु इकाई (AHU) हवा को छानती, ठंडा करती और नलियों से कमरों तक भेजती है। स्प्लिट AC जैसी अलग इकाइयाँ एक कमरे को ठंडा करती हैं। थर्मोस्टैट और वाल्व ठंडक नियंत्रित करते हैं, और समझदार सेट तापमान, इन्सुलेशन, इन्वर्टर और चर वायु-प्रवाह से ऊर्जा बचती है। सरल डिज़ाइन: प्रवाह V = Q / (rho cp deltaT), नली का क्षेत्रफल A = V / v, COP = शीतलन / बिजली।
- संवातन और धुआँ-निकास प्रणाली – संवातन कमरे की बासी हवा को ताज़ी हवा से बदलता है, खिड़की जैसे प्राकृतिक रास्तों से या पंखों से। प्रवाह प्रति घंटे हवा बदलाव (ACH = प्रवाह ÷ कमरे का आयतन) से तय होता है। ऊष्मा पुनर्प्राप्ति इकाई बाहर जाती हवा की गर्मी अंदर आती हवा को देकर ऊर्जा बचाती है। आग में धुआँ-निकास प्रणाली छत से गर्म धुआँ निकालती है ताकि फ़र्श के पास साफ़ परत बनी रहे।
- प्रत्यक्ष तापन उपकरण: बॉयलर, पाइप और रेडिएटर – प्रत्यक्ष (गर्म पानी) तापन में बॉयलर पानी गर्म करता है, पंप उसे आपूर्ति पाइप से रेडिएटरों तक भेजता है और ठंडा हुआ पानी बंद लूप में बॉयलर तक लौटता है। पहुँचाई गई गर्मी Q = प्रवाह × 4.186 × ΔT है। विस्तार टंकी बढ़ा हुआ पानी सोखती है, वाल्व हर कमरे को नियंत्रित करते हैं और पाइप का आकार ऐसा रखते हैं कि पानी की गति कम और शांत रहे।
- एयर-कंडीशनिंग की स्थापना: पाइपिंग, जाँच और रखरखाव – स्प्लिट एसी लगाने के लिए अंदर की इकाई दीवार पर ऊँचाई पर और बाहर की इकाई मज़बूत स्टैंड पर, खुली हवा के साथ लगाइए। दोनों को इन्सुलेटेड तांबे की रेफ्रिजरेंट नलियों और नीचे ढलान वाले ड्रेन पाइप से जोड़िए। फिर सूखी नाइट्रोजन से रिसाव जाँचिए, वैक्यूम पंप से हवा और नमी निकालिए, वाल्व खोलिए और हवा के तापमान-अंतर से कमीशनिंग कीजिए। नियमित सफ़ाई से एसी कुशल रहता है।
36. Sanitary and Fire-Protection Systems
Water and hot-water supply installations · Drainage and ventilation installations · Wastewater treatment facilities · Fire-protection installations · Gas and communication installations · Installing sanitary and fire-protection equipment
- जल और गर्म जल आपूर्ति प्रतिष्ठान – पानी स्रोत (नदी, झील, जलाशय या कुआँ) से आता है, शोधन संयंत्र में साफ़ होता है और मुख्य पाइपों से इमारतों तक पहुँचता है। ऊँची टंकी या पंप दाब देता है: p = ρgh, यानी हर मीटर ऊँचाई पर लगभग 9.81 kPa। पाइप का आकार ऐसा रखते हैं कि पानी की गति लगभग 2 m/s से कम रहे। वॉटर हीटर E = m × c × ΔT से नल के लिए पानी गर्म करता है।
- जल-निकास और वेंट प्रतिष्ठान – इस्तेमाल हुआ पानी इमारत से गुरुत्व के सहारे ढलान वाले नाली-पाइपों, खड़े स्टैक और सीवर से होकर निकलता है। हर फ़िक्स्चर में ट्रैप होता है, यानी U-मोड़ जो जल-सील रोककर सीवर गैस को रोकता है। वेंट पाइप सिस्टम में हवा आने देता है ताकि फ़्लश से सील सूख न जाए। घर में दाब वाले आपूर्ति पाइप साफ़ पानी लाते हैं और बिना दाब वाले निकास पाइप इस्तेमाल हुआ पानी ले जाते हैं।
- अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र – शौचालय, रसोई और स्नानघर का इस्तेमाल किया पानी कई चरणों में साफ होता है। जाली कचरा रोकती है, बैठने की टंकी भारी ठोस नीचे बैठाती है, हवा की टंकी में सूक्ष्म जीव घुली गंदगी खाते हैं और कीटाणु-नाशन से रोगाणु मरते हैं। जहाँ सीवर नहीं है वहाँ सेप्टिक टैंक होता है। साफ किया पानी बगीचे, फ्लश और सफाई में दोबारा काम आता है।
- अग्नि सुरक्षा प्रतिष्ठापन – इमारत आग से डिटेक्टर और अलार्म (चेतावनी), अग्निशामक, हाइड्रेंट और स्प्रिंकलर (आग बुझाना) और निकास मार्ग (बाहर निकलना) से बचती है। आग को गर्मी, ईंधन और ऑक्सीजन चाहिए; हर व्यवस्था इनमें से एक हटाती है। डिज़ाइनर इमारत के उपयोग और आकार से प्रणाली चुनते हैं और पानी का बहाव, दाब और टंकी का आकार निकालते हैं।
- गैस और संचार प्रतिष्ठापन – इमारत में गैस मुख्य पाइप, दाब घटाने वाले रेगुलेटर, मीटर और सुरक्षित पाइपिंग से उपकरणों तक पहुँचती है, सुरक्षा के लिए वाल्व और लीक अलार्म होते हैं। संचार केबल (अक्सर ऑप्टिकल फाइबर) से एंट्री बॉक्स, राउटर और फिर तार या वाई-फाई से कमरों तक आता है। दोनों में सुरक्षा, क्षमता और मरम्मत की आसानी देखी जाती है।
- सेनेटरी और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की स्थापना – अच्छी स्थापना के चार विचार हैं: भारी उपकरण आधार पर मज़बूती से कसो; पाइप को तय दूरी पर सहारा दो; नाली के पाइप को ढलान दो ताकि पानी बहे; और जोड़ कसकर लगाओ। फिर प्रणाली की जाँच (आम तौर पर काम के दाब का 1.5 गुना), निरीक्षण और समय पर रखरखाव होता है ताकि ज़रूरत पर काम करे।
37. Surveying
Surveying in civil engineering · Plane surveying · Height surveying · Topographic maps · Photogrammetry · Using surveying technology
- सिविल इंजीनियरिंग में सर्वेक्षण – सर्वेक्षण ज़मीन की नाप है ताकि सड़क, पुल और इमारत की योजना बने और निशान लगें। दूरी टेप, रेंजिंग पोल और इलेक्ट्रॉनिक यंत्र से नापते हैं और क्षैतिज में बदलते हैं (H = L cos θ)। कोण थियोडोलाइट या कंपास से नापते हैं। दूरी और कोण मिलकर नक्शे पर कोई भी बिंदु तय करते हैं।
- स्थिति और ऊँचाई का सर्वेक्षण – किसी बिंदु को रखने के लिए उसकी स्थिति (पूर्व, उत्तर) और ऊँचाई चाहिए। प्लेन टेबल खेत में ही नक्शा बनाती है। कोण थियोडोलाइट से नापे जाते हैं। ट्रैवर्स जुड़ी रेखाओं की श्रृंखला है, जिसे बंद होना चाहिए। लेवलिंग से ऊँचाई का अंतर = पश्च दृष्टि - अग्र दृष्टि। नियंत्रण बिंदु पक्का ढाँचा देते हैं और उपग्रह (GNSS) स्थिति और ऊँचाई बताते हैं।
- ऊँचाई का सर्वेक्षण – ऊँचाई के सर्वेक्षण से पता चलता है कि कोई बिंदु कितना ऊँचा या नीचा है। लेवल एक सीधी नज़र की रेखा देता है और स्टाफ़ की रीडिंग से ऊँचाई का अंतर मिलता है। रास्ते के साथ की ऊँचाइयों से लंबाई-काट बनती है, आड़ी ऊँचाइयों से आड़ी काट बनती है, और इन्हीं से काटने-भरने की मिट्टी का आयतन निकलता है।
- स्थलाकृतिक मानचित्र – स्थलाकृतिक मानचित्र बृहत् मापनी के मानचित्र हैं जो छोटे क्षेत्र की प्राकृतिक और मानवीय चीज़ें तय चिह्नों और रंगों से विस्तार में दिखाते हैं। भारत में इन्हें भारतीय सर्वेक्षण विभाग शीटों की एक श्रृंखला में बनाता है (1:10,00,000 → 1:2,50,000 → 1:50,000 → 1:25,000)। उच्चावच समोच्च रेखाओं से दिखता है; उनकी दूरी और आकार ढाल और भू-आकृति बताते हैं, और परिच्छेदिका उन्हें पार्श्व दृश्य में बदलती है।
- भू-स्थानिक सूचना – भू-स्थानिक सूचना यानी धरती पर जगहों के बारे में आँकड़े। फोटोग्रामेट्री फोटो से नापती है: दो अतिव्यापी फोटो में खिसकाव (पैरालैक्स) से ऊँचाई मिलती है। रिमोट सेंसिंग हवाई जहाज़ और उपग्रह से चीज़ों की लौटाई या भेजी ऊर्जा पढ़ती है। GIS आँकड़ों को परतों में रखता है और उन्हें जोड़कर जाँचने देता है।
38. Civil Engineering Mechanics
Soil mechanics · Hydraulics
- मृदा यांत्रिकी – मृदा यांत्रिकी बताती है कि भार और पानी में मिट्टी कैसा व्यवहार करती है। मिट्टी में ठोस कण, पानी और हवा होते हैं। पानी उसमें रिसता है (डार्सी का नियम), भार से वह धीरे-धीरे दबती है (संघनन), घर्षण और संसंजन से फिसलने का विरोध करती है (τ = c + σ tan φ) और दीवारों पर बगल से दबाव डालती है।
- हाइड्रोलिक्स: ठहरा पानी, बहता पानी और लहरें – हाइड्रोलिक्स में हम पानी का अध्ययन करते हैं ताकि बांध, नहर और पाइप बना सकें। ठहरा पानी दीवार पर दाब p = ρgh लगाता है, जो गहराई के साथ बढ़ता है। बहते पानी की बहाव दर Q = A × v होती है। खुली नहर में मैनिंग समीकरण आकार, ढलान और खुरदरेपन से चाल बताता है। लहरें और धाराएँ खंभों व समुद्री दीवार पर अतिरिक्त बल लगाती हैं।
39. Civil Structural Design
Structural mechanics for civil engineering · Design of steel structures · Design of reinforced concrete structures · Design of foundations and retaining structures
- सिविल इंजीनियरिंग के लिए संरचना यांत्रिकी – किसी संरचना पर भार लगे तो भी उसे स्थिर रहना चाहिए। इसलिए बल संतुलित होने चाहिए: ऊर्ध्वाधर बलों का योग = 0 और आघूर्णों का योग = 0। सरल टिका बीम में ये दो नियम आधार प्रतिक्रियाएँ देते हैं। फिर हम बंकन आघूर्ण निकालते हैं और अंत में प्रतिबल σ = बल ÷ क्षेत्रफल से जाँचते हैं कि अंग काफ़ी मज़बूत है या नहीं।
- इस्पात संरचनाओं का डिज़ाइन: H-बीम और प्लेट गर्डर – इस्पात बीम का डिज़ाइन यानी ऐसा आकार चुनना कि प्रतिबल अनुमेय सीमा से नीचे रहे। हम बंकन आघूर्ण M और अपरूपण बल V निकालते हैं, फिर पर्याप्त परिच्छेद गुणांक Z (σ = M / Z) और अपरूपण के लिए पर्याप्त वेब क्षेत्रफल वाला परिच्छेद चुनते हैं। H-बीम में ज़्यादातर इस्पात फ्लैंज में, बीच से दूर, होता है इसलिए वह कम झुकती है। प्लेट गर्डर ऊँची वेल्डेड बीम है जिसका पतला वेब स्टिफ़नर से सीधा रखा जाता है।
- प्रबलित कंक्रीट संरचनाओं का डिज़ाइन – कंक्रीट दबाने पर मज़बूत और खींचने पर कमज़ोर होता है। बीम में ऊपर का भाग दबता और नीचे का खिंचता है, इसलिए सरिए नीचे की ओर रखते हैं। कंक्रीट में दबाने वाला बल C और इस्पात में खींचने वाला बल T बराबर होते हैं, और मिलकर आघूर्ण क्षमता M = T × भुजा देते हैं। स्तंभ मुख्यतः दबते हैं। पूर्व-प्रतिबलित कंक्रीट बीम को पहले से दबा देता है ताकि दरारें न खुलें।
- नींव और रिटेनिंग संरचनाओं का डिज़ाइन – नींव इमारत का भार ज़मीन तक पहुँचाती है, बिना मिट्टी के फेल हुए या ज़्यादा धँसे। फैली फूटिंग क्षेत्रफल बड़ा करती है ताकि वहन दाब q = Q ÷ A छोटा रहे। पाइल गहरी मज़बूत मिट्टी तक पहुँचता है और सतह घर्षण व सिरे के वहन से भार उठाता है। रिटेनिंग दीवार मिट्टी को मिट्टी के दाब P = ½ Ka γ H² के विरुद्ध रोकती है, और उसे खिसकना, पलटना या मिट्टी पर ज़्यादा भार डालना नहीं चाहिए।
40. Civil Engineering Construction
Civil engineering materials · Construction techniques · Civil works management · Construction machinery and electrical facilities · Laws on civil construction
- सिविल इंजीनियरिंग सामग्री – सड़कें, पुल और इमारतें कंक्रीट, इस्पात (स्टील), मिट्टी और पॉलिमर से बनती हैं। हर सामग्री के अपने गुण होते हैं: दबाव (संपीडन) कितना सहती है, खिंचाव (तनाव) कितना सहती है, पानी और समय का असर कितना होता है। इंजीनियर काम के हिसाब से सामग्री चुनता है और अक्सर दो को मिलाता है, जैसे कंक्रीट में इस्पात।
- निर्माण तकनीकें – सिविल निर्माण कुछ मुख्य तकनीकों से होता है: मिट्टी का काम (कटाई और भराई), नींव का काम (फूटिंग और पाइल), कंक्रीट का काम (साँचा, सरिया, ढलाई, तराई), सड़क बिछाना (परतें), सुरंग का काम (खुदाई, सहारा, अस्तर) और ICT आधारित निर्माण, जिसमें डिजिटल गाइड से सही गहराई तक खुदाई होती है।
- निर्माण प्रबंधन: संगठन, समय, गुणवत्ता और सुरक्षा – निर्माण का प्रबंधन यानी लोगों को चलाना (संगठन), योजना पर टिके रहना (प्रक्रिया नियंत्रण), काम को पर्याप्त अच्छा रखना (गुणवत्ता नियंत्रण) और सबको सुरक्षित रखना (सुरक्षा प्रबंधन)। प्रबंधक तीनों को लक्ष्य से मिलाकर देखता है और समस्याएँ जल्दी सुधारता है।
- निर्माण मशीनें और बिजली की सुविधाएँ – हर निर्माण मशीन का एक मुख्य काम होता है: एक्सकेवेटर खोदता है, क्रेन उठाती है, रोलर दबाता है, डंपर ढोता है। क्रेन तभी सीधी रहती है जब भार का आघूर्ण काउंटरवेट के आघूर्ण से कम हो। साइट की बिजली जनरेटर या सप्लाई से वितरण बोर्ड और औज़ारों तक जाती है, जिसकी सुरक्षा अर्थिंग और ओवरलोड पर ट्रिप होने वाले ब्रेकर करते हैं।
- सिविल निर्माण के कानून – हर देश में ऐसे कानून होते हैं जो तय करते हैं कि निर्माण कैसे होगा। पाँच समूह सबसे ज़रूरी हैं: अनुमति और भवन संहिता, मज़दूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य, पर्यावरण (शोर, धूल, कचरा), अनुबंध और लाइसेंस, तथा निरीक्षण और पूर्णता प्रमाणपत्र। ये कानून लोगों, पड़ोसियों और प्रकृति की रक्षा करते हैं और बताते हैं कि गड़बड़ी होने पर ज़िम्मेदार कौन है।
41. Infrastructure Engineering
Infrastructure development · Transport and logistics · Water resources · Infrastructure systems
- बुनियादी ढाँचा विकास (इंफ्रास्ट्रक्चर) – बुनियादी ढाँचा वे साझा चीज़ें हैं जो किसी जगह को चलाने के लिए ज़रूरी हैं: सड़कें, पुल, पानी की पाइपें, बिजली के तार, स्कूल, अस्पताल और बाढ़ से बचाने वाली दीवारें। सिविल इंजीनियर इन्हें बहुत पुराने समय से बनाते आए हैं। अच्छा बुनियादी ढाँचा सबके काम आता है (सामाजिक पूँजी), आपदा से बचाता है, ऊर्जा देता है और प्रकृति का ध्यान रखकर बनता है।
- परिवहन और लॉजिस्टिक्स – परिवहन लोगों और सामान को सड़क, रेल, जल, हवाई और पाइपलाइन से ले जाता है। हर साधन को ढाँचा चाहिए: सड़क, रेल पटरी, बंदरगाह और हवाई अड्डे, जो मिलकर एक जाल बनाते हैं। लॉजिस्टिक्स सामान की पूरी यात्रा की योजना है, फ़ैक्टरी से गोदाम, दुकान और घर तक, कम लागत में और समय पर। साधन चुनना गति, लागत, भार और दूरी के बीच का सौदा है।
- जल संसाधन – धरती का लगभग सारा पानी खारा समुद्री पानी है; उपयोग लायक मीठा पानी बहुत थोड़ा है। बढ़ती आबादी, खेती, उद्योग और प्रदूषण से जल दुर्लभता होती है। बहुउद्देशीय बाँध कई कामों के लिए पानी रोकते हैं पर समस्याएँ भी लाते हैं। वर्षा जल संग्रहण पानी बचाने का पुराना और आसान तरीका है।
42. Industrial Chemistry
Substances and chemistry · Chemistry of gases and water · Properties of elements and chemical bonding · Chemical change and energy · Petroleum and chemistry · Materials and chemistry · Daily life and chemical products
- परमाणु और अणु – रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न नष्ट होता है (द्रव्यमान संरक्षण), और यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक ही अनुपात में होते हैं (स्थिर अनुपात)। डाल्टन ने दोनों को समझाया: पदार्थ छोटे-छोटे परमाणुओं से बना है जो पूरी संख्याओं में जुड़ते हैं। परमाणु जुड़कर अणु बनाते हैं; आवेश वाले परमाणु या समूह आयन हैं। सूत्र संयोजकता को क्रॉस करके लिखते हैं। आण्विक द्रव्यमान (आयनिक यौगिक के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान) सूत्र के सभी परमाणु द्रव्यमानों का योग है, u में।
- गैस के नियम: दाब, आयतन और ताप का आपसी रिश्ता – गैस का दाब कणों के दीवार से टकराने से बनता है। गैस की तय मात्रा के लिए: बॉयल का नियम P₁V₁ = P₂V₂ (ताप स्थिर); चार्ल्स का नियम V₁/T₁ = V₂/T₂ (दाब स्थिर); दाब (गे-लुसाक) नियम P₁/T₁ = P₂/T₂ (आयतन स्थिर)। ताप हमेशा केल्विन में। संयुक्त नियम: P₁V₁/T₁ = P₂V₂/T₂। डाल्टन: मिश्रण का कुल दाब = आंशिक दाबों का योग; आंशिक दाब = मोल अंश × कुल दाब।
- रासायनिक आबंधन: आयनिक, सहसंयोजक और धात्विक बंध – परमाणु आपस में जुड़कर (बंध बनाकर) ज़्यादा स्थिर होते हैं। इसमें सिर्फ़ बाहरी इलेक्ट्रॉन काम आते हैं। ज़्यादातर परमाणु बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होने पर सबसे स्थिर होते हैं: यही अष्टक नियम है। इसके तीन मुख्य रास्ते हैं। आयनिक बंध में धातु अधातु को इलेक्ट्रॉन दे देती है; विपरीत आवेश वाले आयन बनते हैं और एक-दूसरे को खींचते हैं। सहसंयोजक बंध में दो अधातुएँ इलेक्ट्रॉन जोड़े बाँटती हैं और अणु बनते हैं। धात्विक बंध में धातु परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन एक साझा 'सागर' में छोड़ देते हैं जो धनायनों को जोड़े रखता है। विद्युत-ऋणात्मकता का अंतर बताता है कि कौन-सा बंध बनेगा। बंध का प्रकार ही गलनांक, बिजली चलाने और पानी में घुलने जैसे गुण तय करता है।
- रासायनिक परिवर्तन और ऊर्जा – रासायनिक परिवर्तन में परमाणु साथी बदलते हैं और नए पदार्थ बनते हैं। पाँच विचार लगभग सब समझा देते हैं: अम्ल और क्षार (H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं), उपचयन और अपचयन (इलेक्ट्रॉन चलते हैं), ऊष्मा (ऊष्माक्षेपी में गर्मी बाहर, ऊष्माशोषी में अंदर), दर और साम्य (कितनी तेज़ी से, और कहाँ टिकती है), और नाभिकीय ऊर्जा (नाभिक बदलता है और बहुत ज़्यादा ऊर्जा निकलती है)।
- हाइड्रोकार्बन: कहाँ से आते हैं, क्या काम आते हैं और छल्ले – हाइड्रोकार्बन केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिक हैं। ये कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से मिलते हैं, जिन्हें गर्म करके अलग किया जाता है (प्रभाजी आसवन)। लंबी शृंखला को तोड़कर काम की छोटी शृंखला बनाना क्रैकिंग है। इनसे ईंधन और प्लास्टिक मिलते हैं, पर जलाने से CO2 बनती है। शृंखला का छल्ला बन जाए तो साइक्लोऐल्केन CnH2n मिलता है, जिसमें 2 H कम होते हैं।
- पदार्थ विज्ञान: पदार्थ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं – पदार्थ विज्ञान बताता है कि अंदर की बनावट (परमाणु, बंध, क्रिस्टल, ग्रेन) बाहर के गुण (मज़बूत, लचीला, भंगुर, हल्का) कैसे तय करती है। चार परिवार: धातु, पॉलिमर, सिरेमिक, कंपोज़िट। गुण परीक्षणों से नापे जाते हैं: तनन परीक्षण (प्रतिबल = बल ÷ क्षेत्रफल, विकृति = लंबाई में बदलाव ÷ मूल लंबाई, यंग गुणांक = प्रतिबल ÷ विकृति), कठोरता और आघात परीक्षण। ऊष्मा उपचार और मिश्रधातु बनाना अंदर की बनावट और इसलिए गुण बदलते हैं। नए पदार्थ: कंपोज़िट, नैनो, स्मार्ट और जैव पदार्थ। रसायन कला-सामग्री भी समझाता है: रंजक, बाइंडर, सिरेमिक, काँच, धातु।
- खाद्य विज्ञान: हमारे भोजन का रसायन – खाद्य विज्ञान पढ़ता है कि भोजन किससे बना है और खेत से थाली तक कैसे बदलता है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, पानी, विटामिन और खनिज होते हैं। पकाने से ये बदलते हैं: गर्मी प्रोटीन को खोलती है (विकृतीकरण), स्टार्च पानी में फूलता है (जिलेटिनीकरण), और सूखी गर्मी मेयार्ड अभिक्रिया व कैरामेलीकरण से भोजन भूरा करती है। सूक्ष्मजीव किण्वन से ब्रेड, दही और अचार बनाते हैं, पर भोजन ख़राब भी कर सकते हैं। प्रसंस्करण, परिरक्षण और सही तापमान भोजन को सुरक्षित और पौष्टिक रखते हैं।
43. Chemical Engineering
Chemical factories and plants · Material and energy balances · Unit operations · Measurement and control · Chemical plant management and safety
- औद्योगिक रसायन: रासायनिक संयंत्र कैसे काम करता है – रासायनिक संयंत्र सस्ते कच्चे माल को उपयोगी उत्पाद में बदलता है। पहले कच्चा माल तैयार होता है, फिर चुनी हुई परिस्थितियों में रिएक्टर में अभिक्रिया होती है, उत्पाद अलग किया जाता है और बचा पदार्थ वापस भेजा जाता है (पुनःचक्रण)। इंजीनियर गति, लब्धि, ख़र्च, सुरक्षा और पर्यावरण में संतुलन बनाते हैं।
- पदार्थ और ऊर्जा संतुलन – संतुलन यानी प्रक्रिया का हिसाब-किताब। द्रव्यमान अंदर = बाहर + जमा। ऊर्जा अंदर = बाहर + जमा। गिनती से पहले सभी संख्याएँ एक ही इकाई में (SI) लिखिए।
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
- औद्योगिक सुरक्षा: रासायनिक उत्पादन में जोखिम और सुरक्षा – ख़तरा (hazard) वह है जो नुकसान कर सकता है। जोखिम (risk) बताता है कि नुकसान कितना संभव है और कितना गंभीर होगा। रासायनिक कारख़ाने अपने जोखिम (आग, ज़हर, दाब, गर्मी) पहचानते हैं, चिह्न लगाते हैं और कई परतों में सुरक्षा रखते हैं: अच्छा डिज़ाइन, अलार्म, राहत वाल्व और प्रशिक्षण। जोखिम = संभावना × असर; परतें जोड़कर इसे कम रखा जाता है।
44. Global Environmental Chemistry
Global environment and humans · Resources and energy · Surveying the natural environment · Environmental conservation and chemical technology · Building a sustainable society
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
- पर्यावरण रसायन – पर्यावरण रसायन हवा, पानी और मिट्टी में मौजूद रसायनों का अध्ययन है: वे कहाँ से आते हैं और क्या असर करते हैं। सूखी हवा में लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन, 0.9% आर्गन और 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड है। ईंधन जलने से SO₂, NOₓ, CO और कण जैसे प्रदूषक बनते हैं। SO₂ और NO₂ बारिश में अम्ल बनाते हैं (pH 5.6 से कम)। हम अनुमापन जैसी मात्रात्मक जाँच से प्रदूषण नापते हैं, मानकों से तुलना करते हैं और क़ानून व साफ़ तकनीक से नुक़सान घटाते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण तकनीक: प्रदूषण पर नियंत्रण – उद्योग प्रदूषण को तीन जगह रोकता है: कम बनाओ, बाहर जाने से पहले पकड़ो, और जो बचे उसे साफ़ करो। फ़िल्टर और स्क्रबर हवा साफ़ करते हैं। बैठाना, सूक्ष्मजीव और रसायन पानी साफ़ करते हैं। पौधे, सूक्ष्मजीव और खुदाई मिट्टी साफ़ करते हैं। दीवार, माउंट और घेरा शोर और कंपन घटाते हैं। कार्बन फ़िल्टर गंध हटाता है। कचरा रिड्यूस, रीयूज़, रीसाइकल और फिर सुरक्षित निपटान से संभाला जाता है।
- पर्यावरण विधि और सतत विकास – सतत विकास का मतलब है: आज की ज़रूरतें ऐसे पूरी करो कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। क़ानून अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण को संतुलन में रखने में मदद करता है। दुनिया के देशों ने स्टॉकहोम (1972), रियो (1992), क्योटो (1997) और पेरिस (2015) में मिलकर लक्ष्य तय किए, और 2015 में 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) अपनाए। संविधान स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार और उसकी रक्षा का कर्तव्य देते हैं; भारत में अनुच्छेद 21, 48A और 51A(g)। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 एक छतरी क़ानून है, जिससे सरकार मानक तय करती है और प्रदूषकों पर कार्रवाई करती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उद्योगों की जाँच करते हैं, अनुमति देते हैं और बंदी का आदेश दे सकते हैं।
45. Materials Production Technology
Material manufacturing methods · Ores and raw-material pre-treatment · Iron and steel smelting · Non-ferrous smelting · Manufacturing ceramic materials · Manufacturing polymer materials
- औद्योगिक पदार्थों का निर्माण – हर पदार्थ अलग तरीके से बनता है। धातु अयस्क से निकाली, पिघलाई और ढाली या बेली जाती है। सिरेमिक चूर्ण से आकार देकर पकाया जाता है। बहुलक छोटे अणुओं को जोड़कर लंबी शृंखला बनाने से बनते हैं। संमिश्र में मज़बूत रेशे राल या धातु के आधार में मिलते हैं। पदार्थ बनाने का तरीका ही उसकी संरचना और गुण तय करता है।
- धातुकर्म: धात्विक बंध से अयस्क से धातु निकालने तक – धातुएँ मुक्त इलेक्ट्रॉनों के समुद्र में बँधे धनायनों से बनी हैं। यही धात्विक बंध बताता है कि वे क्यों चमकती, चालन करती और मुड़ती हैं। ज़्यादातर धातुएँ चट्टानों में यौगिकों के रूप में मिलती हैं, जिन्हें अयस्क कहते हैं। धातुकर्म अयस्क से शुद्ध धातु निकालने का विज्ञान है: पहले अयस्क का सांद्रण, फिर यौगिक को गर्मी (उत्ताप धातुकर्म), विलयन (जल धातुकर्म) या बिजली (विद्युत धातुकर्म) से धातु में बदलना, फिर शोधन। धातु जितनी ज़्यादा सक्रिय, उसे निकालना उतना कठिन और उसका संक्षारण उतना तेज़।
- लोहा और इस्पात का निष्कर्षण (स्मेल्टिंग) – ब्लास्ट फर्नेस में कोक से बनी कार्बन मोनोक्साइड गैस लौह अयस्क का अपचयन करके पिघला पिग आयरन बनाती है। इसमें लगभग 4% कार्बन होता है, इसलिए यह भंगुर है। कन्वर्टर में ऑक्सीजन फूँकने से अधिकतर कार्बन जल जाता है और इस्पात (स्टील) बनता है। फिर इसे सतत ढलाई से पट्टियों में ढाला जाता है।
46. Materials Engineering
History of materials development · Properties of industrial materials · Material testing and inspection · Structural materials · Functional materials · Environment and materials
- औद्योगिक सामग्रियों के विकास का इतिहास – पूरे युगों के नाम उनकी मुख्य सामग्री पर रखे गए: पत्थर, काँसा, लोहा। हर कदम के लिए नया हुनर चाहिए था, ज़्यादातर गर्मी और रसायन पर बेहतर काबू। इस्पात 1800 के दशक में सस्ते बड़े उत्पादन से आया, प्लास्टिक और सिलिकॉन 1900 के दशक में, और अब कंपोजिट और नैनो-सामग्री परमाणु-स्तर पर डिज़ाइन होती हैं।
- औद्योगिक पदार्थों की संरचना और गुण – परमाणु कैसे सजे हैं (ठोस, द्रव, गैस; क्रिस्टल या काँच जैसे; शृंखलाएँ) यही तय करता है कि पदार्थ कैसा व्यवहार करेगा। भार पड़ने पर पदार्थ पहले प्रत्यास्थ रूप से खिंचता है (वापस आता है), फिर सुघट्य रूप से (बदला रहता है); भंगुर हो तो टूट जाता है। द्रव बहते हैं और उनके गाढ़ेपन को श्यानता कहते हैं।
- औद्योगिक पदार्थों की जाँच – जाँच यह देखती है कि कोई पदार्थ इस्तेमाल से पहले काफ़ी अच्छा है या नहीं। यांत्रिक परीक्षण (तनन, कठोरता, आघात) मज़बूती और कठोरता नापते हैं। सूक्ष्मदर्शी पॉलिश की धातु के अंदर के कण दिखाता है। वर्नियर, पराश्रव्य, एक्स-रे और रंग जैसे उपकरण नाप और छिपी दरारें बताते हैं, अक्सर पुर्ज़े को बिगाड़े बिना।
- संरचनात्मक पदार्थ – संरचनात्मक पदार्थ पुल, कार, हवाई जहाज़ और मशीनों का भार सँभालते हैं। इस्पात और ढलवाँ लोहा मज़बूत और सस्ते हैं, हल्की धातुएँ वज़न बचाती हैं, सेरामिक कठोर पर भंगुर होते हैं, इंजीनियरिंग प्लास्टिक हल्के और टिकाऊ हैं, और कंपोज़िट दो पदार्थ मिलाकर दोनों की अच्छाइयाँ देते हैं।
- क्रियात्मक पदार्थ (फंक्शनल मटेरियल) – क्रियात्मक पदार्थ इस काम के लिए चुने जाते हैं कि वे क्या करते हैं, कितने मज़बूत हैं इसके लिए नहीं। चुंबकीय पदार्थ चुंबक और ट्रांसफ़ॉर्मर बनाते हैं, पीज़ो पदार्थ बिजली को ध्वनि में बदलते हैं, काँच प्रकाश को राह देता है, सौर सेल धूप से बिजली बनाते हैं और सेंसर पदार्थ आसपास बदलने पर अपना कोई गुण बदल देते हैं।
- औद्योगिक पदार्थ और पर्यावरण – पदार्थ खोदे जाते हैं, बनाए जाते हैं, इस्तेमाल होते हैं और फेंके जाते हैं, और हर चरण ज़मीन की क्षति, ऊर्जा की खपत, धुएँ और कचरे से प्रकृति पर असर डालता है। हम कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल, पुनर्चक्रण, साफ़ फ़ैक्टरियों और इको-डिज़ाइन से पर्यावरण बचाते हैं। पुनर्चक्रण इस्तेमाल हुए पदार्थ को छाँटकर, साफ़ करके, पिघलाकर या फिर से ढालकर नए उत्पाद बनाता है, और आम तौर पर बहुत ऊर्जा बचाता है।
47. Materials Processing
Development of material processing technology · Material processing methods · Production automation and process control · Production control of materials · Quality control and inspection of materials
- मशीनिंग विधियों का विकास: हाथ के औज़ार से CNC तक – पहले लोग धातु को हाथ से गढ़ते थे। पानी और भाप की शक्ति, फिर मशीन टूल ने काम तेज़ और सटीक बनाया। अदल-बदल योग्य पुर्ज़ों से बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ, और न्यूमेरिकल कंट्रोल (NC/CNC) में कंप्यूटर औज़ार को चलाता है। हर कदम पर घंटे में ज़्यादा पुर्ज़े और कम गलती मिली।
- औद्योगिक पदार्थों का प्रसंस्करण – प्रसंस्करण पदार्थ को उसका अंतिम आकार देता है। मशीनन-क्षमता बताती है कि पदार्थ कितनी आसानी से कटता है: नरम, तन्य धातुएँ आसानी से कटती हैं; कठोर या दृढ़ धातुएँ औज़ार घिसती हैं। मुख्य विधियाँ हैं ढलाई, रूपण (पीटना, बेलना, खींचना), कटाई (टर्निंग, मिलिंग, ड्रिलिंग, ग्राइंडिंग) और जोड़ना (वेल्डिंग, ब्रेज़िंग, सोल्डरिंग)। विधि पदार्थ, आकार, खर्च और पुर्ज़ों की संख्या देखकर चुनी जाती है।
- उत्पादन ऑटोमेशन तकनीक – ऑटोमेशन में मशीनें कम मानव मेहनत से उत्पादन का काम करती हैं। CAD पुर्ज़ा बनाता है, CAM चित्र को औज़ार के रास्ते (G-code) में बदलता है, और CNC मशीन उन्हीं संख्याओं पर सटीक चलती है। सेंसर और कन्वेयर मशीनों को स्वचालित लाइन में जोड़ते हैं और नेटवर्क सबको मुख्य कंप्यूटर से जोड़ता है, जो आदेश भेजता है और रिपोर्ट लेता है।
- प्रबंधन और उत्पादन नियंत्रण – प्रबंधन का मतलब है लोगों, सामान, पैसे और जानकारी से व्यवसाय को इस तरह चलाना कि वह अपने लक्ष्य तक पहुँचे। एक सरल औज़ार है योजना-करो-जाँचो-सुधारो का चक्र। उत्पादन प्रबंधन उत्पाद बनाने की योजना और नियंत्रण करता है। इसके तीन लक्ष्य हैं: गुणवत्ता (अच्छा और सुरक्षित), लागत (कम बर्बादी, उचित दाम) और समय पर सही मात्रा। तेज़ चलाने से गुणवत्ता घट सकती है; ज़्यादा जाँच में समय और पैसा लगता है, इसलिए प्रबंधक तीनों में संतुलन रखते हैं।
- प्रक्रिया नियंत्रण और गुणवत्ता नियंत्रण – प्रक्रिया नियंत्रण यह देखता है कि हर काम सही क्रम में और समय पर चरणों से गुज़रे। गुणवत्ता नियंत्रण नमूनों को सीमा से मिलाकर जाँचता है कि उत्पाद अच्छा है या नहीं। कंट्रोल चार्ट बताता है कि प्रक्रिया भटक रही है, ताकि बहुत सारे पुर्ज़े ख़राब होने से पहले मशीन ठीक हो जाए।
48. Ceramic Chemistry
Composition of ceramics · Structure and properties of ceramics · Phase change and phase equilibrium · High-temperature reactions · Crystalline materials · Amorphous materials
- सिरेमिक की संरचना और गुण – सिरेमिक आयनों से बने होते हैं जो मज़बूत बंधों से जुड़े होते हैं। धनायन और ऋणायन के आकार का अनुपात तय करता है कि हर आयन के कितने पड़ोसी होंगे (समन्वय संख्या): 0.225 से 0.414 पर 4, 0.414 से 0.732 पर 6, और 0.732 से ऊपर 8। आयन दोहराते पैटर्न में हों तो क्रिस्टल, बेतरतीब हों तो काँच। मज़बूत बंध सिरेमिक को कठोर और ताप-सह बनाते हैं; टिके हुए आयन उसे भंगुर।
- अवस्था परिवर्तन: गुप्त ऊष्मा, वाष्प दाब और प्रावस्था आरेख – अवस्था परिवर्तन में पदार्थ ठोस, द्रव और गैस के बीच बदलता है। बदलते समय तापमान वही रहता है; लगी ऊष्मा गुप्त ऊष्मा है (Q = m × L)। द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब बाहर के दाब के बराबर हो जाए, इसलिए कम दाब पर क्वथनांक घटता है। प्रावस्था आरेख हर तापमान और दाब पर अवस्था दिखाता है; इसकी रेखाएँ त्रिक बिंदु पर मिलती हैं और द्रव-गैस रेखा क्रांतिक बिंदु पर ख़त्म होती है।
- उच्च-ताप अभिक्रियाएँ – गर्मी से परमाणु ज़्यादा काँपते हैं, इसलिए कुछ नई जगह कूद जाते हैं। यह चलना (विसरण) दो ठोसों को उनके संपर्क पर अभिक्रिया करने देता है, और उत्पाद की परत धीरे-धीरे मोटी होती है। गलनांक पर ठोस द्रव बनता है; ठंडा होने पर क्रिस्टल के केंद्रक बनते हैं और बढ़ते हैं। भट्ठी में ऑक्सीजन जुड़ सकती है (ऑक्सीकरण) या कार्बन या हाइड्रोजन से हट सकती है (अपचयन), और इससे उत्पाद बदलता है।
- क्रिस्टलीय सिरेमिक पदार्थ – क्रिस्टलीय सिरेमिक में आयन या परमाणु दोहराते पैटर्न में होते हैं। सिलिका (SiO₂) कोने साझा करते SiO₄ चतुष्फलकों का जाल है। ऐलुमिना (Al₂O₃) में ऑक्सीजन की परतों के बीच के खाली स्थानों में ऐलुमिनियम होता है और वह बहुत कठोर है। काओलिनाइट जैसे मिट्टी के खनिज सिलिका और ऐलुमिना की परतों के ढेर हैं, जिनके बीच पानी जाकर गीली मिट्टी को फिसलने और ढलने देता है। ऑक्साइड (MgO, ZrO₂) और अ-ऑक्साइड (SiC, Si₃N₄) सिरेमिक ऊँचे ताप और घिसाई के काम आते हैं।
- अक्रिस्टलीय पदार्थ: ऑक्साइड काँच और काँच-सिरेमिक – अक्रिस्टलीय ठोस में दोहराता पैटर्न नहीं होता। ऑक्साइड काँच कोने साझा करते SiO₄ खंडों का बेतरतीब जाल है (जाल-निर्माता)। सोडा (Na₂O) और चूना (CaO) संशोधक हैं: वे कड़ियाँ तोड़ते हैं और नरम होने का तापमान घटाते हैं। काँच का तीखा गलनांक नहीं होता; वह काँच संक्रमण में धीरे-धीरे नरम होता है। काँच-सिरेमिक वह काँच है जिसे नियंत्रित ढंग से गर्म करके उसके भीतर लाखों छोटे क्रिस्टल उगाए जाते हैं, जिससे मज़बूती और कम ऊष्मीय प्रसार मिलता है।
49. Ceramic Technology
Raw material processing · Forming and drying ceramics · Heat treatment and melting · Processing ceramics · Quality control and evaluation · Conservation and recycling technology
- सिरेमिक कच्चे माल का प्रसंस्करण – सिरेमिक की शुरुआत प्राकृतिक खनिजों से होती है: आकार के लिए मिट्टी, मज़बूती के लिए क्वार्ट्ज़ और जोड़ने के लिए फेल्डस्पार (फ्लक्स)। इन्हें तोड़ा, पीसा, छाना, लोहा हटाया और प्रतिशत के हिसाब से तौलकर बैच बनाया जाता है।
- सिरेमिक को आकार देना और सुखाना – मिट्टी या पाउडर को पहले आकार दिया जाता है: हाथ या चाक से (प्लास्टिक विधि), साँचे में पाउडर दबाकर, या प्लास्टर के साँचे में स्लिप डालकर। फिर गीले टुकड़े को धीरे सुखाते हैं। पानी निकलता है और टुकड़ा थोड़ा सिकुड़ता है। तेज़ सुखाने से दरार पड़ती है।
- ईंधन, भट्ठी, पकाना और पिघलाना – ईंधन ऑक्सीजन के साथ जलकर गर्मी देता है। भट्ठी (किल्न) उस गर्मी को रोकती है ताकि सामान 1000 से 1400 °C पर पक सके, जहाँ कण जुड़ते हैं (सिंटरिंग) और टुकड़ा कड़ा हो जाता है। काँच का मिश्रण पिघलने के लिए लगभग 1500 °C चाहिए। ईंधन तय करता है कि कितना तापमान मिल सकता है।
- घिसाई के पदार्थों और औज़ारों से सिरेमिक की मशीनिंग – पका सिरेमिक बहुत कठोर और भंगुर होता है। स्टील के औज़ार नरम पड़ते हैं, इसलिए उसे ज़्यादा कठोर घिसाई वाले पदार्थों से काटते हैं: एल्युमिना, सिलिकॉन कार्बाइड और हीरा। ग्राइंडिंग तेज़ी से पदार्थ हटाती है, बारीक ग्रिट से लैपिंग और पॉलिश सतह चिकनी करती है। बहुत दबाव से पुर्ज़ा टूट जाता है।
- सिरेमिक उद्योग में सुरक्षा, कचरा उपचार और रीसाइक्लिंग – सिरेमिक कारखाना धूल, धुआँ और गंदा पानी बनाता है, और बचा हुआ सामान भी। मास्क, हवा निकासी और फ़िल्टर मज़दूरों और हवा को बचाते हैं। बैठने वाले टैंक पानी साफ़ करते हैं ताकि उसे दोबारा काम में लें। टूटा सामान पीसकर ग्रोग बनता है और नई मिट्टी में मिल जाता है, जिससे कच्चा माल बचता है और कचरा घटता है।
50. Ceramic Industry
Overview of the ceramic industry · Functional ceramics · Ceramics (pottery) · Glass and enamel · Refractories · Cement
- सेरामिक उद्योग का परिचय – सेरामिक उद्योग धरती के पदार्थों से सख़्त, गर्मी सहने वाले, बिना धातु के उत्पाद बनाता है। चरण हैं: कच्चा माल तैयार करना, मिलाना, आकार देना, सुखाना और भट्ठी में पकाना। चार बड़े परिवार हैं: बर्तन, काँच, आग-रोधी ईंटें और सीमेंट।
- प्रकार्यात्मक (फंक्शनल) सेरामिक – प्रकार्यात्मक सेरामिक सावधानी से बने ऐसे सेरामिक हैं जो कोई खास काम करते हैं। यांत्रिक वाले बहुत सख़्त और घिसने से बचे रहते हैं (औज़ार, बेयरिंग)। विद्युत वाले रोधी होते हैं, आवेश जमा करते हैं या दबाने पर वोल्टेज बनाते हैं (पीज़ो)। प्रकाशीय वाले प्रकाश को आर-पार जाने देते हैं।
- सेरामिक (मिट्टी के बर्तन): अर्थनवेयर और पोर्सिलेन – बर्तन मिट्टी में सिलिका और फेल्सपार मिलाकर बनते हैं। मिट्टी को आकार देकर सुखाते, पकाते और अक्सर ग्लेज़ करते हैं। मिट्टी का बर्तन (अर्थनवेयर) लगभग 1000 °C पर पकता है: छिद्रदार, नारंगी या भूरा। चीनी मिट्टी (पोर्सिलेन) लगभग 1300 °C पर पकती है: सफ़ेद, घनी, खनकदार, पानी नहीं सोखती।
- काँच और इनैमल – साधारण काँच रेत (सिलिका), सोडा-ऐश और चूना पत्थर को लगभग 1500 °C पर पिघलाकर, नरम रहते आकार देकर और फिर धीरे ठंडा (एनीलिंग) करके बनता है। काँच बिना क्रिस्टल-क्रम वाला ठोस है। इनैमल धातु पर लगभग 800 °C पर जमाई गई काँच की पतली परत है जो जंग रोकती है और चमकदार, साफ़ करने में आसान सतह देती है।
- आग-रोधी पदार्थ (रिफ्रैक्टरी) – रिफ्रैक्टरी गर्मी-रोधी सेरामिक पदार्थ हैं जो बहुत ऊँचे तापमान पर भी अपना आकार और मज़बूती बनाए रखते हैं। ये इस्पात, सीमेंट, काँच और सेरामिक की भट्ठियों के अस्तर में लगते हैं। मुख्य प्रकार: आग-मिट्टी, उच्च-एल्युमिना, सिलिका और मैग्नीशिया ईंटें, और बिना आकार वाले कास्टेबल। ईंट गर्मी और धातुमल (स्लैग) देखकर चुनो।
- सीमेंट: कैसे बनता है और क्यों जमता है – सीमेंट एक स्लेटी पाउडर है। चूना-पत्थर और मिट्टी को लगभग 1450 °C पर पकाकर क्लिंकर बनता है, फिर उसे थोड़े जिप्सम के साथ पीसा जाता है। पानी मिलाने पर यह जमकर सख़्त हो जाता है। रेत और गिट्टी के साथ यह कंक्रीट बनाता है।
51. Textile Products
Fibres and textile products · Yarns and fabrics · Secondary textile products · Planning textile products
- वस्त्र रेशे: प्राकृतिक, संश्लेषित, गुण और धागे – वस्त्र रेशा (फ़ाइबर) एक बारीक, लचीला धागा है जो चौड़ाई से बहुत ज़्यादा लंबा होता है। रेशों को कातकर धागा (सूत) बनता है, और धागों को बुनकर या गूँथकर (knitting) कपड़ा। प्राकृतिक रेशे पौधों से (सूती, लिनन – सेल्युलोज़ के बने) या जंतुओं से (ऊन, रेशम – प्रोटीन के बने) आते हैं। मानव-निर्मित रेशे या तो पुनर्जनित हैं (विस्कोस रेयॉन, लायोसेल, लकड़ी के सेल्युलोज़ से) या संश्लेषित (नायलॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रिलिक, पेट्रो-रसायनों से)। हर रेशे का रूप और रसायन उसके गुण तय करते हैं: सूती पानी सोखता है और ठंडा रहता है; ऊन गर्म और लचीली है; रेशम चिकना और चमकीला; पॉलिएस्टर और नायलॉन मज़बूत, सिलवट-रोधी और जल्दी सूखने वाले पर कम सोखते हैं। कताई रेशों को बटकर धागा बनाती है; पॉलीकॉट जैसे मिश्रण दो रेशों के अच्छे गुण जोड़ते हैं। जलाने, सूक्ष्मदर्शी और पानी की बूँद जैसे आसान परीक्षण रेशा पहचानने में मदद करते हैं।
- कपड़ा निर्माण: रेशे से कपड़े तक – हर कपड़ा रेशों से शुरू होता है। रेशे का आकार और रसायन तय करते हैं कि वह कैसा लगेगा और कैसे काम करेगा: कपास पानी सोखता है, ऊन हवा फँसाकर गर्म रहता है, पॉलिएस्टर मज़बूत और जल्दी सूखने वाला है। रेशों को ऐंठकर धागा काता जाता है; ज़्यादा ऐंठन से धागा मज़बूत होता है। अलग रेशे एक धागे में मिलाए (मिश्रण) या अलग धागे एक कपड़े में लगाए (संमिश्रण) जा सकते हैं। धागों से कपड़ा बुनाई (दो सेट समकोण पर), फंदे बनाकर (knitting) या अबुना तरीके (रेशे सीधे जोड़कर) से बनता है। स्मार्ट वस्त्र आसपास के बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हैं, और तकनीकी वस्त्र खास काम के लिए बनते हैं।
- कपड़े से बने उत्पाद: कपड़े से तैयार माल तक – कपड़ा प्राथमिक वस्त्र उत्पाद है। उससे बनी चीज़ें द्वितीयक उत्पाद हैं: पहनने के कपड़े, घर के कपड़े और औद्योगिक कपड़े। कारख़ाने में लाइन चलती है (डिज़ाइन, पैटर्न, कटाई, सिलाई, फिनिश), गुणवत्ता जाँची जाती है, और कई जगह परंपरागत बुने-रंगे कपड़े आज भी बनते हैं।
- उत्पाद योजना: बाज़ार की ज़रूरत से उत्पाद प्रस्ताव तक – उत्पाद योजना (product planning) तय करती है कि कुछ बनाने से पहले क्या बनाना है। कंपनी देखती है कि बाज़ार कैसे बदल रहा है, बाहर और अंदर की हालत जाँचती है, नीति और विषय तय करती है, बाज़ार सर्वेक्षण से विचार परखती है और फिर प्रस्ताव लिखती है, जिससे प्रबंधक तय करते हैं कि आगे बढ़ना है या नहीं।
52. Textile and Dyeing Technology
Fibre manufacture and dyeing technology · Chemistry of fibres and dyeing · Materials · Processing textile products
- रेशे बनाना और रंगाई की तकनीक – लोग पहले प्राकृतिक रेशों को हाथ से कातते थे और पौधों से रंगते थे। फिर मशीनें आईं, 1856 में पहला कृत्रिम रंग बना और 1930 के दशक में कृत्रिम रेशे। कृत्रिम रेशा बनाने के लिए पिघला या घुला पॉलिमर स्पिनरेट के छोटे छेदों से दबाया जाता है। कपड़ा रंग के टब में रंगा जाता है, और तीन मूल रंग (सायन, मैजेंटा, पीला) मिलाकर लगभग हर रंग बनता है।
- रेशों और रंगाई का रसायन – रेशा लंबी पॉलिमर शृंखलाओं का गुच्छा है, जो बहुत से छोटे मोनोमरों के जुड़ने से बनती हैं। सूती सेल्युलोज़ है, ऊन और रेशम प्रोटीन हैं, पॉलिएस्टर और नायलॉन संश्लेषित पॉलिमर हैं। हर रेशे के बंधन-स्थल अलग हैं, इसलिए हर रेशे को मेल खाता रंजक चाहिए: सूती के लिए रिएक्टिव, ऊन-रेशम-नायलॉन के लिए अम्लीय, पॉलिएस्टर के लिए डिस्पर्स, ऐक्रिलिक के लिए क्षारीय (बेसिक)। गर्मी, pH, नमक और सहायक रसायन तय करते हैं कि कितना रंग अंदर जाए और कितना पक्का टिके।
- सामग्री और उनके गुण (Materials) – हम जो कुछ बनाते हैं वह सामग्री से बनता है: लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, काँच, सिरेमिक, कपड़ा और कंपोज़िट. हर सामग्री के गुण होते हैं: मज़बूती, कड़ापन, कठोरता, लचीलापन, घनत्व, ऊष्मा और विद्युत चालन, पारदर्शिता, जलरोधिता और लागत. डिज़ाइनर काम के हिसाब से सामग्री चुनते हैं, सोचते हैं कि उसे कैसे आकार दें और जोड़ें (पेंच, कील, गोंद, वेल्डिंग, सोल्डरिंग, सिलाई), और सुरक्षा, लागत व पर्यावरण का ध्यान रखते हैं. कपड़े प्राकृतिक रेशों (सूती, ऊन, रेशम) और कृत्रिम रेशों (पॉलिएस्टर, नायलॉन) से बनते हैं.
- वस्त्र उत्पादों की प्रोसेसिंग: रंगाई और फ़िनिशिंग – करघे से उतरा कपड़ा (ग्रे कपड़ा) कई चरणों में तैयार होता है: तैयारी (धुलाई, ब्लीच), रंगाई या छपाई, मशीनों से फ़िनिश (कैलेंडरिंग, रेज़िंग, शियरिंग, हीट सेटिंग, सैनफ़ोराइज़िंग) और सतह का उपचार (मर्सराइज़िंग, जल-रोधी, ज्वाला-रोधी, सिलवट-रोधी)। हर चरण कपड़े का रंग, स्पर्श, आकार या सुरक्षा बदलता है। रंग रेशे, धागे, कपड़े या तैयार वस्त्र पर चढ़ाया जा सकता है।
53. Dyeing and Weaving Design
Textiles and form · Textile design techniques · Realising a design · Decorative styles and interior decoration
- टेक्सटाइल डिज़ाइन: रेशे से डिज़ाइनदार कपड़े तक – टेक्सटाइल डिज़ाइन का मतलब है तय करना कि कपड़ा कैसे बनेगा, कैसा दिखेगा और कैसा लगेगा। रेशों को कातकर धागा बनता है; धागे से बुनकर, बुनाई (निटिंग) से या जोड़कर कपड़ा बनता है; फिर रंगाई, छपाई या कढ़ाई से रंग और डिज़ाइन आता है; और फ़िनिश कपड़े को खास गुण देती है, जैसे पानी-रोधी या सिलवट-रोधी।
- सजावट की शैलियाँ, पैटर्न और इंटीरियर डेकोरेशन – सजावट एक छोटी इकाई से बनती है जिसे रूपांकन (motif) कहते हैं: फूल, हीरा, तारा, गोला। रूपांकन को बराबर दूरी पर दोहराने से पैटर्न बनता है। दोहराव सीधा हो सकता है, आधा-नीचे (half-drop, हर दूसरा स्तंभ आधा क़दम नीचे खिसकता है) या शीशे जैसा (हर दूसरा स्तंभ उलटा होता है)। सजावट की शैली उन चुनावों का समूह है जो साथ अच्छे लगते हैं: रूपांकन का आकार, रंग और दोहराव का ढंग। उदाहरण: शास्त्रीय (सममिति, गहरे और सुनहरे रंग), ज्यामितीय (सीधी रेखाएँ और कोण), लोक-फूल (फूल और चटक रंग) और आधुनिक सादा (कम चीज़ें, शांत रंग)। शैलियाँ जगह, समय, मौसम और सुंदरता की सोच के साथ बदलती हैं। यही बातें वस्त्र शैली में भी चलती हैं: पैटर्न, कट और रंग से पता चलता है कि पहनने वाले कौन हैं और मौसम कौन-सा है। इंटीरियर डेकोरेशन में एक चुनी हुई शैली दीवार, पर्दे, गद्दी और दरी पर दोहराई जाती है ताकि कमरा एक परिवार जैसा लगे, और साफ़ रास्ते और काफ़ी रोशनी से कमरा काम का भी रहे।
54. Interior Planning
Overview of interior planning · Interior form and psychology · Interior environment · Interiors and ergonomics · Scale and dimension planning · Interior elements · Planning various spaces
- इंटीरियर डिज़ाइन: तत्व, प्रस्तुति और अभ्यास – इंटीरियर डिज़ाइन का मतलब है कमरे के भीतर की ऐसी योजना जो उपयोगी, आरामदायक और सुखद हो। मुख्य तत्व हैं जगह, रेखा, आकार, रंग, रोशनी, बनावट और फ़र्नीचर। अच्छा डिज़ाइनर पहले कमरा नापता है, चलने का रास्ता खाली रखता है, बड़ी और छोटी चीज़ों में संतुलन बनाता है, मनचाहे मूड का रंग चुनता है और दिन की रोशनी के साथ लैंप जोड़ता है। विचार दिखाने के लिए प्रस्तुति की तकनीकें हैं: नक्शा (ऊपर से, पैमाने पर), ऊँचाई-चित्र (सामने से दीवार), परिप्रेक्ष्य चित्र, रंग-सामग्री बोर्ड और 3D मॉडल। अभ्यास में क्रम होता है: ज़रूरत समझो, नापो, रेखाचित्र बनाओ, चुनो, दिखाओ, सुधारो।
- इंटीरियर में आकार और मनोविज्ञान: इंद्रियाँ, रंग और जगह का असर – कमरा सिर्फ़ देखा नहीं जाता, महसूस भी किया जाता है। हम आँख, कान, त्वचा और नाक से उसे जानते हैं और दिमाग़ इन संकेतों को एहसास (प्रत्यक्षण, perception) में बदल देता है। आकार का असर होता है: खड़ी रेखाएँ कमरे को ऊँचा और पड़ी रेखाएँ चौड़ा दिखाती हैं। रंग का असर होता है: गर्म रंग (लाल, नारंगी) पास और जोशीले लगते हैं, ठंडे रंग (नीला, हरा) दूर और शांत; हल्के रंग जगह खोलते हैं, गहरे रंग समेटते हैं। बनावट (texture) का भी असर है: चिकनी सतह ठंडी और साफ़, खुरदरी मज़बूत और प्राकृतिक, नरम गर्म और आरामदायक लगती है। जगह व्यवहार भी बदलती है। हर इंसान के चारों ओर निजी दूरी का अदृश्य घेरा होता है (करीबी लगभग 0.45 मी, निजी 1.2 मी तक, सामाजिक 3.6 मी तक, फिर सार्वजनिक) और लोग रास्ता पहचानने के लिए निशान, रास्ते और साफ़ किनारे इस्तेमाल करते हैं। अच्छा डिज़ाइनर यह सब जानकर ऐसा कमरा बनाता है जो काम के हिसाब से सही लगे।
- रहने का वातावरण और सुविधाएँ: इमारत में गर्मी, हवा और रोशनी – कमरे का आराम तीन चीज़ों से बनता है। प्राकृतिक वातावरण (सूरज, हवा, बाहर का तापमान) स्रोत है। भीतरी वातावरण (तापमान, रोशनी, ताज़ी हवा, आवाज़) वह है जो हम महसूस करते हैं। तरल और ऊष्मीय यांत्रिकी बताती है कि हवा और गर्मी कैसे चलती हैं: गर्म हवा ऊपर उठती है, हवा खुले रास्तों से गुज़रती है और गर्मी दीवार से Q = U × A × ΔT की दर से बहती है।
- इंटीरियर और एर्गोनॉमिक्स – एर्गोनॉमिक्स का मतलब है फर्नीचर और कमरे को इंसान के शरीर के हिसाब से बनाना। कद, कोहनी, घुटने और हाथ की पहुँच के नाप से कुर्सी, मेज़ और शेल्फ की ऊँचाई तय होती है, और चलने की जगह भी। मेज़ कोहनी की ऊँचाई पर, पैर ज़मीन पर और रोज़ की चीज़ें आसान पहुँच में हों तो शरीर आराम में रहता है।
- आकार और नाप की योजना – आकार की योजना तय करती है कि जगह कितनी बड़ी हो (लोग × हर एक की जगह)। नाप की योजना शरीर, फर्नीचर और खाली जगह जोड़कर सही नाप तय करती है। ग्रिड सब नाप को एक इकाई के गुणज में रखती है और आवाजाही की योजना रास्तों को छोटा और साफ़ बनाती है। नक्शे में 1:50 जैसा स्केल असली नाप को छोटा करता है।
- घर, दफ़्तर और सार्वजनिक भवन की योजना – हर तरह की जगह इस आधार पर बनती है कि उसे कौन इस्तेमाल करेगा और क्या करेगा। घर में निजी, साझा और सेवा के इलाके और अच्छी निजता चाहिए। दफ़्तर में कतार की मेज़ें, चौड़े रास्ते और अलग बैठक-कक्ष। सार्वजनिक भवन में चौड़ा प्रवेश, रैम्प, साफ़ रास्ते और कम से कम दो निकास, ताकि भीड़ आराम से चले और सुरक्षित निकले।
55. Interior Fittings
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- इमारत की संरचना का परिचय – इमारत की संरचना भार (अपना वज़न, लोग, हवा, भूकंप) को सुरक्षित ज़मीन तक पहुँचाती है। भार छत, बीम, खंभा, नींव, ज़मीन के रास्ते जाता है। दो आम प्रणालियाँ हैं: दीवार संरचना और ढाँचा संरचना। तिरछी पट्टी हवा के बग़ल के धक्के से बचाती है और चौड़ी नींव भार फैलाकर ज़मीन को धँसने से रोकती है।
- इंटीरियर निर्माण – कमरे के अंदर हर सतह परतों में बनती है: पहले आधार, फिर सतह (फ़िनिश)। फ़र्श, दीवार और छत यही नियम मानते हैं। दरवाज़े-खिड़की खुली जगह हैं जिन्हें लिंटल सँभालता है। सीढ़ी में सही ऊँचाई और पाँव की जगह चाहिए। जॉइनरी यानी लकड़ी या बोर्ड की बनी स्थायी फिटिंग, जैसे अलमारी। काम का सही क्रम निर्माण प्रबंधन तय करता है।
- इंटीरियर सामग्री: प्रकार और गुण – इंटीरियर सामग्री चार परिवारों में बँटती है। ढाँचे की सामग्री भार उठाती है (कंक्रीट, लकड़ी)। काम की सामग्री कोई ख़ास काम करती है, जैसे गर्मी, आवाज़ या आग रोकना (मिनरल वूल, जिप्सम बोर्ड)। सतह की सामग्री अंतिम रूप और घिसाई सहने की ताक़त देती है (पेंट, टाइल)। इकाई सामग्री तय नाप के टुकड़ों में आती है (टाइल, बोर्ड, ईंट) और गिनी जाती है। हम गुण देखकर चुनते हैं: मज़बूती, गर्मी, आग, पानी और घिसाई।
- इंटीरियर रखरखाव और नवीनीकरण – कमरे पुराने होते हैं: रंग फीका पड़ता है, दरार और सीलन आती है, फ़र्श घिसता है। रखरखाव यानी नियमित देखभाल और जल्दी मरम्मत, जो इंतज़ार करने से सस्ती पड़ती है। नवीनीकरण पुराने कमरे को सुधारना है और उसका तय क्रम है: सर्वे, योजना और बजट, तोड़-फोड़, पाइप-तार, सतह, सफ़ाई और सौंपना। मरम्मत, नवीनीकरण या नया निर्माण इस आधार पर चुनो कि कितना बदलना है और ख़र्च कितना है।
- इंटीरियर फिटिंग के कानून – इंटीरियर काम पर कानून इसलिए हैं कि लोग आग, गिरने और ख़राब हवा से सुरक्षित रहें। आम नियम: दीवार और छत की सतह की आग-ग्रेड, सुरक्षित निकास तक कम दूरी, सीढ़ी और रेलिंग की सुरक्षित नाप, और बोर्ड व गोंद से निकलने वाली हानिकारक गैस की सीमा के साथ पर्याप्त हवा। संख्याएँ देश के अनुसार बदलती हैं; असली सीमा स्थानीय बिल्डिंग कोड और अग्नि नियम तय करते हैं। उपयोग से पहले निरीक्षक काम जाँचता है।
56. Interior Element Production
Materials and processing · Various elements · Processing methods · Production management
- पदार्थ का चयन और इको-डिज़ाइन – पदार्थ चुनने का मतलब है उत्पाद की ज़रूरत और पदार्थ की क्षमता का मेल बिठाना। पहले ज़रूरतें लिखिए (मज़बूती, वज़न, दाम, रूप, सुरक्षा, पर्यावरण)। फिर हर पदार्थ को हर ज़रूरत पर अंक दीजिए, जो बात ज़्यादा ज़रूरी है उसे ज़्यादा महत्व (भार) दीजिए और कुल अंक की तुलना कीजिए। इको-डिज़ाइन उत्पाद के पूरे जीवन को देखता है: कच्चा माल, निर्माण, इस्तेमाल और अंत। प्राकृतिक पदार्थ पेड़-पौधों, जानवरों या ज़मीन से मिलते हैं; कृत्रिम पदार्थ इंसान कारख़ाने में बनाता है। यही तरीक़ा सॉफ़्टवेयर, प्रोसेसर और इंटरफ़ेस चुनने में भी काम आता है।
- इंटीरियर डिज़ाइन: तत्व, प्रस्तुति और अभ्यास – इंटीरियर डिज़ाइन का मतलब है कमरे के भीतर की ऐसी योजना जो उपयोगी, आरामदायक और सुखद हो। मुख्य तत्व हैं जगह, रेखा, आकार, रंग, रोशनी, बनावट और फ़र्नीचर। अच्छा डिज़ाइनर पहले कमरा नापता है, चलने का रास्ता खाली रखता है, बड़ी और छोटी चीज़ों में संतुलन बनाता है, मनचाहे मूड का रंग चुनता है और दिन की रोशनी के साथ लैंप जोड़ता है। विचार दिखाने के लिए प्रस्तुति की तकनीकें हैं: नक्शा (ऊपर से, पैमाने पर), ऊँचाई-चित्र (सामने से दीवार), परिप्रेक्ष्य चित्र, रंग-सामग्री बोर्ड और 3D मॉडल। अभ्यास में क्रम होता है: ज़रूरत समझो, नापो, रेखाचित्र बनाओ, चुनो, दिखाओ, सुधारो।
- औद्योगिक पदार्थों का प्रसंस्करण – प्रसंस्करण पदार्थ को उसका अंतिम आकार देता है। मशीनन-क्षमता बताती है कि पदार्थ कितनी आसानी से कटता है: नरम, तन्य धातुएँ आसानी से कटती हैं; कठोर या दृढ़ धातुएँ औज़ार घिसती हैं। मुख्य विधियाँ हैं ढलाई, रूपण (पीटना, बेलना, खींचना), कटाई (टर्निंग, मिलिंग, ड्रिलिंग, ग्राइंडिंग) और जोड़ना (वेल्डिंग, ब्रेज़िंग, सोल्डरिंग)। विधि पदार्थ, आकार, खर्च और पुर्ज़ों की संख्या देखकर चुनी जाती है।
- विनिर्माण इंजीनियरिंग तकनीक: चीज़ें कैसे बनती हैं – विनिर्माण इंजीनियरिंग तकनीक का अर्थ है कच्चे माल को सुरक्षित, सटीक और ठीक लागत में काम की चीज़ों में बदलना। कारख़ाना एक तंत्र है: इनपुट (सामग्री, ऊर्जा, लोग, जानकारी) प्रक्रियाओं (काटना, आकार देना, जोड़ना, फ़िनिश) से गुज़रकर आउटपुट बनते हैं, और फ़ीडबैक से सुधार होता है। इंजीनियर प्रक्रिया के क़दम और समय की योजना बनाते हैं, गुणों के आधार पर सामग्री चुनते हैं, मशीन टूल और CNC मशीनें चलाते हैं, नियंत्रण प्रणालियों (सेंसर, PLC, न्यूमैटिक, हाइड्रोलिक, रोबोट) से स्वचालन करते हैं, और मानकों से गुणवत्ता जाँचते हैं ताकि हर उत्पाद ग्राहक की माँग पर खरा उतरे। यह एक व्यवसाय भी है, जिसमें उत्पाद विकास, विपणन और लागत सँभालनी होती है।
- संचालन प्रबंधन: व्यवसाय वस्तुएँ और सेवाएँ कैसे बनाते हैं – संचालन प्रबंधन (operations management) यह है कि व्यवसाय इनपुट (कच्चा माल, मज़दूर, मशीनें, पैसा) को आउटपुट (वस्तुएँ और सेवाएँ) में सबसे अच्छे ढंग से कैसे बदलता है। उत्पादन जॉब (ऑर्डर पर एक चीज़), बैच (एक जैसी चीज़ों के समूह) या फ़्लो (लगातार बड़े पैमाने पर) हो सकता है। संचालन के उद्देश्य हैं: कम लागत, ऊँची गुणवत्ता, गति, लचीलापन और पर्यावरण की देखभाल। प्रदर्शन मापते हैं: क्षमता (अधिकतम उत्पादन), क्षमता उपयोग (उत्पादन ÷ क्षमता × 100), श्रम उत्पादकता (उत्पादन ÷ मज़दूर) और प्रति इकाई लागत (कुल लागत ÷ उत्पादन)। आपूर्ति शृंखला आपूर्तिकर्ता, कारख़ाना, दुकान और ग्राहक को जोड़ती है; पुश प्रवाह में पहले माल बनता है, पुल प्रवाह (just-in-time) में ऑर्डर आने पर। गुणवत्ता नियंत्रण तैयार माल जाँचता है; गुणवत्ता आश्वासन और निरंतर सुधार (kaizen) हर चरण पर ख़राबी रोकते हैं।
57. Design Practice
Design in industry · Design and creative activity · Visual design · Product design · Environmental design
- उत्पादन में डिज़ाइन की भूमिका – डिज़ाइन ज़रूरत को ऐसी ड्रॉइंग में बदलता है जिसे कारखाना बना सके। डिज़ाइन के समय आकार, नाप, सामग्री, टॉलरेंस और पुर्ज़ों की संख्या चुनी जाती है। ये चुनाव ज़्यादातर लागत, गुणवत्ता और सुरक्षा तय करते हैं। जाँच और ग्राहक का उपयोग फ़ीडबैक बनकर वापस डिज़ाइन तक जाता है। अच्छा डिज़ाइन कम, सरल और मानक पुर्ज़े इस्तेमाल करता है।
- डिज़ाइन (Design) क्या है? क्षेत्र, रूप-कार्य और सबके लिए डिज़ाइन – डिज़ाइन यानी किसी चीज़ की सोच-समझकर योजना बनाना ताकि वह लोगों का कोई काम करे। इसके कई क्षेत्र हैं: उत्पाद, ग्राफ़िक, फ़ैशन-वस्त्र, इंटीरियर, लैंडस्केप, वास्तुकला और डिजिटल (UX)। अच्छा डिज़ाइन रूप (आकार, रंग, सामग्री) और कार्य को जोड़ता है: "रूप कार्य के पीछे चलता है"। डिज़ाइनर तत्वों और सिद्धांतों का उपयोग करते हैं, वस्तु को शरीर के अनुसार बनाते हैं (एर्गोनॉमिक्स), सबके लिए (समावेशी) और धरती के लिए कम नुकसानदेह (टिकाऊ) चीज़ें बनाते हैं।
- ग्राफ़िक डिज़ाइन (Graphic Design) – ग्राफ़िक डिज़ाइन चित्र, शब्द और आकृतियों को इस तरह सजाना है कि संदेश साफ़, काम का और सुंदर लगे। डिज़ाइनर तत्वों (रेखा, आकृति, रंग, अक्षर, चित्र, खाली जगह) और सिद्धांतों (ग्रिड व संरेखण, पदानुक्रम, कंट्रास्ट, निकटता, दोहराव, संतुलन, खाली जगह) का उपयोग करते हैं। प्रक्रिया: ब्रीफ़, खोज, विचार, स्केच, डिजिटल ड्राफ़्ट, राय और अंतिम कलाकृति। पोस्टर, लोगो, किताब के कवर, पैकेट, साइन बोर्ड, वेबसाइट और ऐप सब इसी से बनते हैं।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- रहने का परिवेश और रूप: लोगों के लिए जगह गढ़ना – हम जहाँ रहते हैं, यानी घर, आँगन, गली और पार्क, उन्हें लोग ही आकार देते हैं। अच्छे आकार लोगों की ज़रूरत के हिसाब से होते हैं: सही नाप (मानव पैमाना), रोशनी और छाया, आसान आवाजाही और सुखद एहसास। पेड़, रास्ते, बैठने की जगहें और इमारतें मिलकर जगह को आरामदायक बनाते हैं।
58. Design Materials
Design and materials · Properties and processing of inorganic materials · Properties and processing of organic materials · Materials and processing that widen design possibilities
- सामग्री और उनके गुण (Materials) – हम जो कुछ बनाते हैं वह सामग्री से बनता है: लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, काँच, सिरेमिक, कपड़ा और कंपोज़िट. हर सामग्री के गुण होते हैं: मज़बूती, कड़ापन, कठोरता, लचीलापन, घनत्व, ऊष्मा और विद्युत चालन, पारदर्शिता, जलरोधिता और लागत. डिज़ाइनर काम के हिसाब से सामग्री चुनते हैं, सोचते हैं कि उसे कैसे आकार दें और जोड़ें (पेंच, कील, गोंद, वेल्डिंग, सोल्डरिंग, सिलाई), और सुरक्षा, लागत व पर्यावरण का ध्यान रखते हैं. कपड़े प्राकृतिक रेशों (सूती, ऊन, रेशम) और कृत्रिम रेशों (पॉलिएस्टर, नायलॉन) से बनते हैं.
- धातु, सिरेमिक और काँच: गुण और प्रक्रिया – धातु टूटने से पहले मुड़ती है और गर्म या ठंडी हालत में ढाली जा सकती है. सिरेमिक कठोर और ताप-रोधी है पर भंगुर. काँच ठंडा हो तो साफ़ और भंगुर, गर्म हो तो नरम और ढालने लायक.
- प्लास्टिक और लकड़ी: गुण और प्रक्रिया – प्लास्टिक हल्का, जलरोधी और गर्म करने पर ढलने वाला है. लकड़ी रेशे की दिशा में मज़बूत और आड़ी दिशा में कमज़ोर है. दोनों कार्बन से बने हैं, इसलिए जलते हैं.
- सामग्री और प्रसंस्करण जो डिज़ाइन की संभावनाएँ बढ़ाते हैं – डिज़ाइनर सामग्री को उसके गुणों से चुनता है: मज़बूती, वज़न, कीमत, रूप और उस पर काम करने की आसानी। लकड़ी, धातु, प्लास्टिक और सिरेमिक अलग-अलग व्यवहार करते हैं। प्रसंस्करण यानी सामग्री को आकार देना: काटना, मोड़ना, जोड़ना, साँचे में ढालना और आज 3D प्रिंट करना। नई सामग्री या नई प्रक्रिया से नए आकार बनते हैं, जैसे हल्की मुड़ी धातु की कुर्सी, साँचे में ढला प्लास्टिक का कप या जटिल अंदर वाला प्रिंट किया हुआ पुर्ज़ा। अच्छा डिज़ाइन सामग्री, प्रक्रिया और काम का सही मेल है।
59. History of Design
Japanese design · Western design · Contemporary design
- पश्चिमी डिज़ाइन: प्राचीन काल से आधुनिक डिज़ाइन तक जीवन और कला – डिज़ाइन यानी यह सोचना कि चीज़ कैसी दिखे और कैसे काम करे। प्राचीन समय में यूनान और रोम के लोग पत्थर और मिट्टी से बनाते थे और संतुलन व अनुपात पसंद करते थे। मध्य युग में नुकीले मेहराब, रंगीन काँच और हाथ की कारीगरी थी। आरंभिक आधुनिक काल में सजावट, गुंबद और नाम वाले कलाकार आए, और छपाई से विचार फैले। औद्योगिक क्रांति के बाद मशीनों से सस्ता सामान बना, और आधुनिक डिज़ाइन ने कहा कि आकार काम के हिसाब से हो। हर युग का डिज़ाइन उस समय के लोगों की सामग्री, औज़ार और सोच दिखाता है।
- डिज़ाइन इतिहास: आंदोलनों और डिज़ाइनरों ने रोज़ की चीज़ें कैसे बदलीं – डिज़ाइन समय के साथ बदलते हैं, क्योंकि नई सामग्री, नई तकनीक और समाज के बारे में नए विचार आते हैं। आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स ने सस्ते कारखाना सामान को नकारा और हाथ के काम को महत्त्व दिया। आर नूवो ने प्रकृति की बहती रेखाएँ अपनाईं। बाउहाउस और आधुनिकतावाद ने कहा, रूप कार्य के पीछे चलता है, और बड़े पैमाने के उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया। मध्य-शताब्दी डिज़ाइनरों ने ढली प्लाईवुड और प्लास्टिक से सस्ता फ़र्नीचर बनाया। उत्तर-आधुनिकता और मेम्फ़िस ने रंग और मज़े से नियम तोड़े। आज टिकाऊपन और डिजिटल निर्माण पर ध्यान है। दूसरों का काम पढ़ने से हम विश्लेषण करना, प्रेरणा लेना और बेहतर डिज़ाइन करना सीखते हैं।