निर्माण मशीनें (Construction machinery)
हर मशीन का एक मुख्य काम है।
- एक्सकेवेटर: खोदता और लादता है। उसकी भुजा में बूम, स्टिक और बकेट होते हैं, जो हाइड्रोलिक सिलेंडर (तेल से पिस्टन धकेलना) से चलते हैं।
- बुलडोज़र: चौड़े ब्लेड से मिट्टी धकेलता और समतल करता है।
- डंपर ट्रक: मिट्टी और पत्थर ढोता है।
- रोलर: भारी ड्रम से मिट्टी और डामर दबाता है।
- क्रेन: भारी चीज़ें ऊपर और आगे उठाती है।
- कंक्रीट मिक्सर और पंप: कंक्रीट बनाते और पहुँचाते हैं।
मशीन का चुनाव काम के आकार, मिट्टी के प्रकार, जगह और प्रति घंटा लागत पर निर्भर करता है।
क्रेन संतुलन कैसे रखती है
क्रेन एक उत्तोलक (लीवर) है। बल का घुमाने वाला असर उसका आघूर्ण = भार × टावर से दूरी होता है। भार का आघूर्ण काउंटरवेट के आघूर्ण से कम होना चाहिए, सुरक्षा-अंतर के साथ। अगर भार × दूरी बड़ी हुई तो क्रेन आगे की ओर पलट जाती है। इसीलिए भार दूर हो तो क्रेन कम उठा पाती है। चालक उठाने से पहले हमेशा लोड चार्ट देखता है।
हाइड्रोलिक कई मशीनों में एक जैसा काम करता है: तेल पर छोटा धक्का बड़े सिलेंडर में बड़ा बल बना देता है।
निर्माण की बिजली सुविधाएँ (Construction electrical facilities)
साइट को औज़ारों, रोशनी और पंपों के लिए अस्थायी बिजली चाहिए। यह मीटर के ज़रिए ग्रिड से या जनरेटर से आती है। बिजली वितरण बोर्ड पर जाती है, जो अलग-अलग सर्किट देता है। हर सर्किट में एक सर्किट ब्रेकर होता है जो धारा ज़्यादा होने पर बंद हो जाता है।
एम्पियर में धारा = शक्ति ÷ वोल्टेज (I = P ÷ V)। एक सर्किट के सारे औज़ारों की धारा जोड़िए। कुल धारा ब्रेकर की रेटिंग से ऊपर गई तो वह ट्रिप हो जाएगा।
साइट पर बिजली की सुरक्षा
साइटें गीली और धूल भरी होती हैं, इसलिए बिजली का झटका असली खतरा है। नियम: अर्थ तार लगाइए (खराबी हो तो ज़मीन तक सुरक्षित रास्ता), RCD (रेज़िडुअल करंट डिवाइस) लगाइए जो धारा लीक होते ही पल भर में बिजली काट दे, केबल को गीली ज़मीन से ऊपर रखिए, बाहर के लिए बने प्लग-सॉकेट इस्तेमाल कीजिए और प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन से जाँच करवाइए। चालू तार कभी ठीक न करें। क्रेन और लंबे डंडे बिजली की ऊपरी लाइनों से दूर रखें।
करके देखें: एम्पियर जोड़िए
घर के तीन उपकरणों के लेबल देखिए (उन पर वाट लिखा होता है)। वाट को 230 V से भाग देकर एम्पियर निकालिए। सब जोड़िए। क्या वे 16 A की लाइन पर साथ सुरक्षित चलेंगे? 3D में ब्रेकर से अपना उत्तर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आघूर्ण = भार × दूरी
- क्रेन सुरक्षित तभी जब भार का आघूर्ण < काउंटरवेट का आघूर्ण
- I = P ÷ V (एम्पियर = वाट ÷ वोल्ट)
- कुल धारा = सभी औज़ारों की धारा का योग
- कुल धारा > ब्रेकर रेटिंग तो ब्रेकर ट्रिप
हल किए गए उदाहरण
1. एक क्रेन का काउंटरवेट 4 t है और 3 m दूरी पर है। 3 m पर वह अधिकतम कितना भार उठा सकती है?
काउंटर आघूर्ण = 4 × 3 = 12 t·m। 3 m पर भार × 3 < 12, इसलिए भार 4 t से कम होना चाहिए।
2. वही क्रेन 6 m दूरी पर भार उठाती है। अब अधिकतम भार कितना है?
भार × 6 < 12, इसलिए भार < 2 t। दूर होने पर वह आधा ही उठा पाती है।
3. एक ड्रिल 230 V पर 1150 W लेती है। वह कितनी धारा खींचती है?
I = P ÷ V = 1150 ÷ 230 = 5 A।
4. एक सर्किट में 16 A का ब्रेकर है। 5 A की ड्रिल और 8 A का मिक्सर चल रहे हैं। क्या 6 A का ग्राइंडर भी चालू कर सकते हैं?
5 + 8 = 13 A। 6 जोड़ने पर 19 A, जो 16 A से ज़्यादा है, इसलिए ब्रेकर ट्रिप होगा। नहीं।
5. रोलर 20 cm की परत को 14 cm कर देता है। मोटाई कितने प्रतिशत घटी?
कमी = 6 cm। 6 ÷ 20 × 100 = 30 %।
6. साइट पर 230 V पर 100 W के 3 बल्ब लगे हैं। कुल धारा निकालिए।
कुल शक्ति = 300 W। I = 300 ÷ 230 ≈ 1.3 A।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ भार का वज़न देखना और दूरी भूल जाना। आघूर्ण = भार × दूरी।
- एक सर्किट पर बहुत सारे औज़ार लगा देना। पहले एम्पियर जोड़िए।
- बारिश में बाहर घर के सॉकेट या कटे केबल इस्तेमाल करना।
- "बार-बार ट्रिप हो रहा है" कहकर अर्थ तार हटा देना या ब्रेकर बायपास करना। ट्रिप होना चेतावनी है।