कारखाने को बिजली क्यों चाहिए
कारखाने की मोटर, बल्ब, हीटर और कंप्यूटर सब विद्युत ऊर्जा से चलते हैं। परिपथ (circuit) एक बंद रास्ता है: स्रोत आवेश को तारों से मशीन तक और वापस भेजता है। रास्ता टूटा तो कुछ नहीं बहता। स्रोत का धक्का वोल्टता (V) है। आवेश का बहाव धारा (I) है, जिसे ऐम्पियर (A) में मापते हैं।
DC परिपथ
दिष्ट धारा (DC) हमेशा एक ही दिशा में बहती है। बैटरी और सोलर पैनल से DC मिलती है। इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़ों, सेंसरों और छोटे कंट्रोलरों को DC चाहिए।
ओम का नियम: V = I x R। R प्रतिरोध है (ओम में)। एक के बाद एक जुड़े पुर्ज़ों (श्रेणी क्रम) में सबमें वही धारा बहती है और प्रतिरोध जुड़ते हैं। साथ-साथ जुड़े पुर्ज़ों (समांतर क्रम) में हर एक पर वोल्टता समान रहती है और धारा बँट जाती है।
AC परिपथ
प्रत्यावर्ती धारा (AC) की दिशा बदलती रहती है। एक पूरा आगे-पीछे एक चक्र है। एक सेकंड में चक्रों की संख्या आवृत्ति है (हर्ट्ज़, Hz)। भारत में 50 Hz है, यानी एक चक्र में 1/50 = 0.02 s लगता है। घरेलू वोल्टता लगभग 230 V होती है।
AC क्यों? ट्रांसफ़ॉर्मर से AC की वोल्टता आसानी से बढ़ाई-घटाई जा सकती है। बिजलीघर बहुत ऊँची वोल्टता पर बिजली भेजते हैं ताकि लंबे तारों में कम ऊर्जा बेकार हो, फिर ट्रांसफ़ॉर्मर उसे कारखाने और घर के लिए घटा देते हैं। कारखानों में तीन-फ़ेज़ AC भी चलती है: तीन तार, हर एक दूसरे से थोड़ा देर से झूलता है। इससे बड़ी मोटरों को सुचारु शक्ति मिलती है।
शक्ति: P = V x I (वाट)। ऊर्जा: E = P x समय। एक किलोवाट-घंटा (kWh) यानी 1000 W का 1 घंटा चलना, यही बिल की एक "यूनिट" है।
विद्युत इंस्टॉलेशन और सुरक्षा
विद्युत इंस्टॉलेशन यानी मशीनों तक बिजली लाने वाली सारी वायरिंग और सुरक्षा के पुर्ज़े।
- तार: ज़्यादा धारा के लिए मोटा तार, वरना गरम हो जाएगा।
- फ़्यूज़ या ब्रेकर: धारा बहुत ज़्यादा होने (ओवरलोड) या तार छू जाने (शॉर्ट सर्किट) पर सर्किट काट देता है। ब्रेकर फिर से ऑन हो सकता है; फ़्यूज़ तार पिघल जाता है और बदलना पड़ता है।
- अर्थ तार: मशीन के धातु के ढाँचे को ज़मीन से जोड़ता है। लाइव तार ढाँचे को छू जाए तो धारा ज़मीन में चली जाती है और ब्रेकर ट्रिप होता है, इसलिए करंट नहीं लगता।
- स्विचबोर्ड: एक डिब्बा जिसमें मुख्य स्विच और हर लाइन का ब्रेकर होता है।
सुरक्षित काम: मशीन छूने से पहले सप्लाई बंद करके ताला लगाइए, गीले हाथ कभी नहीं, और ऊँची वोल्टता पर सिर्फ प्रशिक्षित लोग काम करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- V = I x R
- P = V x I
- ऊर्जा (kWh) = शक्ति (kW) x समय (घंटा)
- आवृत्ति f = 1 / T (T = एक चक्र का समय, सेकंड में)
- श्रेणी क्रम: R कुल = R1 + R2 + ...
हल किए गए उदाहरण
1. 12 V की बैटरी 4 ओम की DC मोटर चलाती है। धारा निकालिए।
I = V / R = 12 / 4 = 3 A।
2. AC का एक चक्र 0.02 s लेता है। आवृत्ति कितनी है?
f = 1 / T = 1 / 0.02 = 50 Hz।
3. कारखाने का हीटर 230 V से 10 A लेता है। उसकी शक्ति कितनी है?
P = V x I = 230 x 10 = 2300 W = 2.3 kW।
4. हीटर 5 घंटे चलता है। कितनी ऊर्जा लगी?
E = 2.3 kW x 5 h = 11.5 kWh = 11.5 यूनिट।
5. 230 V की लाइन पर 16 A का ब्रेकर है। सुरक्षित रूप से अधिकतम कितनी शक्ति ले सकते हैं?
P = 230 x 16 = 3680 W, लगभग 3.7 kW। इससे ज़्यादा पर ब्रेकर ट्रिप होगा।
6. एक ही 230 V लाइन से तीन मशीनें 3 A, 4 A, 5 A लेती हैं। ब्रेकर 10 A का है। क्या होगा?
कुल धारा = 3 + 4 + 5 = 12 A, जो 10 A से ज़्यादा है, इसलिए ब्रेकर ट्रिप होगा। हल: एक मशीन दूसरी लाइन पर लगाइए।
आम गलतियाँ
- AC और DC को एक जैसा समझना। DC एक दिशा में रहती है; AC की दिशा बार-बार बदलती है।
- शक्ति और ऊर्जा को मिलाना। वाट शक्ति (दर) है; kWh ऊर्जा (शक्ति x समय) है।
- ब्रेकर को सिर्फ इंसानों के लिए मानना। ब्रेकर तारों को गरमी से बचाता है; अर्थ तार इंसान को बचाता है।
- एक लाइन पर बहुत मशीनें लगाना क्योंकि "प्लग लग जाता है"।