विद्युत आवेश और विद्युत धारा क्या है?
हर पदार्थ में छोटे-छोटे आवेशित कण होते हैं। धातु के तार में कुछ इलेक्ट्रॉन आज़ाद घूमते हैं। जब ये एक दिशा में खिसकते हैं, तो आवेश बहता है। किसी बिंदु से हर सेकंड जितना आवेश गुज़रता है, उसे विद्युत धारा कहते हैं:
I = Q / t
आवेश Q का मात्रक कूलॉम (C), समय t सेकंड में और धारा I एम्पियर (A) में। यानी 1 एम्पियर = हर सेकंड 1 कूलॉम आवेश। 1 कूलॉम में लगभग 6.25 × 1018 इलेक्ट्रॉन होते हैं; एक इलेक्ट्रॉन का आवेश 1.6 × 10−19 C है। छोटी धारा मिलीएम्पियर (1 mA = 10−3 A) या माइक्रोएम्पियर (1 µA = 10−6 A) में लिखते हैं।
विद्युत धारा की दिशा
इलेक्ट्रॉन की खोज से पहले ही वैज्ञानिकों ने धारा की दिशा तय कर दी थी: वह दिशा जिसमें धन आवेश चलता, यानी सेल के बाहर + से − की ओर। इसे परिपाटी धारा कहते हैं। इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक हैं, इसलिए वे उल्टी दिशा में, − से + की ओर चलते हैं। परिपथ आरेखों में हमेशा परिपाटी धारा ही दिखाते हैं।
विद्युत परिपथ और ऐमीटर
विद्युत परिपथ आवेश के बहने का एक बंद, बिना टूटा रास्ता है। अगर स्विच (प्लग कुंजी) खुला है या तार टूटा है, तो परिपथ खुला है और कहीं भी धारा नहीं बहती।
धारा ऐमीटर से मापते हैं। इसे हमेशा श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं ताकि पूरी धारा इसमें से गुज़रे। ऐमीटर का प्रतिरोध बहुत कम होता है, इसलिए यह धारा को लगभग नहीं बदलता। इसका + सिरा सेल के + की तरफ़ रहता है।
विभवांतर किसे कहते हैं?
आवेश अपने आप नहीं बहता, उसे धक्का चाहिए, जैसे पानी को नीचे बहने के लिए ऊँचाई का अंतर। सेल रासायनिक क्रिया से एक सिरे को दूसरे से ऊँचे विद्युत विभव पर रखता है। दो बिंदुओं के बीच विभवांतर वह कार्य है जो एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में होता है:
V = W / Q
SI मात्रक वोल्ट (V): 1 वोल्ट = 1 जूल प्रति कूलॉम। विभवांतर वोल्टमीटर से मापते हैं, जिसे पुर्ज़े के पार्श्व (आर-पार) में जोड़ते हैं। वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, इसलिए यह लगभग कोई धारा नहीं लेता।
परिपथ आरेख के प्रतीक
असली बैटरी और बल्ब बनाना मुश्किल है, इसलिए मानक प्रतीक इस्तेमाल करते हैं:
- सेल: एक लंबी पतली रेखा (+) और एक छोटी मोटी रेखा (−)।
- बैटरी: दो या अधिक सेल एक साथ।
- प्लग कुंजी या स्विच: खुली (बंद परिपथ नहीं) या बंद।
- तारों का जोड़: बिंदु (डॉट); बिना जुड़े एक-दूसरे को पार करते तारों पर डॉट नहीं।
- बल्ब: गोले में क्रॉस या लूप।
- प्रतिरोधक: छोटा आयत या टेढ़ी-मेढ़ी रेखा।
- परिवर्ती प्रतिरोध (धारा नियंत्रक / रिओस्टेट): प्रतिरोधक पर तीर।
- ऐमीटर: गोले में A, वोल्टमीटर: गोले में V।
परीक्षा में अक्सर सेल, कुंजी, प्रतिरोधक, श्रेणी में ऐमीटर और प्रतिरोधक के आर-पार वोल्टमीटर वाला परिपथ बनाने को कहा जाता है। सीधी रेखाओं से साफ़ चित्र बनाने का अभ्यास करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- I = Q / t (धारा = आवेश ÷ समय)
- Q = n × e, जहाँ e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C
- V = W / Q (विभवांतर = कार्य ÷ आवेश)
- 1 A = 1 C/s; 1 V = 1 J/C; 1 mA = 10⁻³ A; 1 µA = 10⁻⁶ A
हल किए गए उदाहरण
1. एक बल्ब से 1 मिनट में 30 C आवेश गुज़रता है। धारा ज्ञात करो।
t = 60 s. I = Q / t = 30 / 60 = 0.5 A.
2. 2 A की धारा 5 मिनट तक बहती है। कितना आवेश बहा?
t = 300 s. Q = I × t = 2 × 300 = 600 C.
3. 12 V विभवांतर पर 4 C आवेश ले जाने में कितना कार्य होगा?
W = V × Q = 12 × 4 = 48 J.
4. 1 C आवेश में कितने इलेक्ट्रॉन होते हैं?
n = Q / e = 1 / (1.6 × 10⁻¹⁹) = 6.25 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन।
5. किसी तार में 0.4 A धारा है। 2 सेकंड में कितने इलेक्ट्रॉन गुज़रेंगे?
Q = 0.4 × 2 = 0.8 C. n = 0.8 / (1.6 × 10⁻¹⁹) = 5 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन।
6. एक बैटरी 3 V विभवांतर पर 2 मिनट में 360 J कार्य करती है। आवेश और धारा ज्ञात करो।
Q = W / V = 360 / 3 = 120 C. t = 120 s, इसलिए I = 120 / 120 = 1 A.
आम गलतियाँ
- I = Q / t लगाने से पहले मिनट को सेकंड में न बदलना।
- वोल्टमीटर को श्रेणी में या ऐमीटर को पार्श्व में जोड़ देना। ऐमीटर: श्रेणी, वोल्टमीटर: पार्श्व।
- परिपथ आरेख में धारा − से + दिखाना। परिपाटी धारा + से − होती है; केवल इलेक्ट्रॉन − से + चलते हैं।
- यह सोचना कि बल्ब धारा को "खा" जाता है। बल्ब में जितनी धारा जाती है उतनी ही निकलती है; बल्ब ऊर्जा लेता है।