स्थितिज ऊर्जा
स्थितिज ऊर्जा (U) वस्तु की स्थिति या आकार के कारण जमा ऊर्जा है।
पृथ्वी के पास गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा: m द्रव्यमान को h ऊपर उठाने में mgh कार्य लगता है, तो U = mgh (ज़मीन पर U = 0 मानकर)। सिर्फ़ U में बदलाव मायने रखता है, इसलिए शून्य कहीं भी मान सकते हो।
किसी भी संरक्षी बल के लिए: F = −dU/dx। बल उधर लगता है जिधर U घटे (गेंद ढलान से नीचे लुढ़कती है)।
स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा
स्प्रिंग वापस खींचती है: F = −kx (हुक का नियम), x = खिंचाव या दबाव, k = स्प्रिंग नियतांक (N/m)।
0 से x तक खींचने में हमारा कार्य F–x ग्राफ़ के नीचे त्रिभुज का क्षेत्रफल है: ½ × x × kx। तो U = ½kx²।
- उतना ही खींचो या दबाओ → U बराबर (x² दोनों तरफ़ धनात्मक)।
- x₁ से x₂ तक स्प्रिंग बल का कार्य: W = −(½kx₂² − ½kx₁²)।
- चिकने फ़र्श पर स्प्रिंग-गुटका: ½kx² + ½mv² = नियत, तो सामान्य लंबाई पर अधिकतम चाल v = x√(k/m)।
संरक्षी और असंरक्षी बल
बल संरक्षी है अगर:
- दो बिंदुओं के बीच उसका कार्य सिर्फ़ उन बिंदुओं पर निर्भर करे, रास्ते पर नहीं,
- किसी भी बंद रास्ते पर उसका कार्य शून्य हो,
- उसे F = −dU/dx लिख सकें।
उदाहरण: गुरुत्व, स्प्रिंग बल, स्थिर-विद्युत बल।
जिस बल का कार्य रास्ते पर निर्भर करे वह असंरक्षी है। उदाहरण: घर्षण, वायु प्रतिरोध, श्यान बल। ये यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मा या ध्वनि में बदलते हैं, तो K + U घटता है।
यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण
अगर सिर्फ़ संरक्षी बल कार्य करें: W = −ΔU। कार्य-ऊर्जा प्रमेय: W = ΔK। तो ΔK + ΔU = 0, यानी K + U = नियत।
घर्षण हो तो: K_i + U_i = K_f + U_f + ऊष्मा। कुल ऊर्जा (ऊष्मा सहित) हमेशा संरक्षित रहती है।
उदाहरण: H ऊँचाई से गिरी गेंद h गिरने के बाद v = √(2gh) चाल पाती है, क्योंकि mgh = ½mv²।
घर पर करके देखो
क्लिक वाले पेन की स्प्रिंग दबाकर मेज़ पर छोड़ो: जमा ½kx² पेन को उछालती है। ज़्यादा दबाओ (x ज़्यादा) तो ज़्यादा उछाल। फिर किताब को एक बार चिकनी मेज़ पर, एक बार कपड़े पर सरकाओ। कपड़े पर जल्दी रुकती है: घर्षण ने ऊर्जा ऊष्मा बना दी।
परीक्षा कोना
CBSE में अक्सर: F–x ग्राफ़ से U = ½kx² निकालो (2–3 अंक), संरक्षी बल के दो गुण लिखो, मुक्त रूप से गिरती वस्तु के लिए K + U नियत दिखाओ (3 अंक), और स्प्रिंग-गुटके के आंकिक प्रश्न।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- U = mgh (पृथ्वी के पास)
- F = −dU/dx
- स्प्रिंग: F = −kx, U = ½kx²
- सिर्फ़ संरक्षी बल: K + U = नियत
- घर्षण के साथ: K_i + U_i = K_f + U_f + ऊष्मा
- मुक्त पतन: v = √(2gh)
हल किए गए उदाहरण
1. 1.5 m ऊँची शेल्फ़ पर रखे 2 kg के बर्तन की स्थितिज ऊर्जा? (g = 10 m/s²)
चरण 1: U = mgh। चरण 2: U = 2 × 10 × 1.5 = 30 J।
2. k = 400 N/m की स्प्रिंग 5 cm दबाई गई। जमा ऊर्जा?
चरण 1: x = 0.05 m। चरण 2: U = ½ × 400 × 0.0025 = 0.5 J।
3. 0.2 kg का पत्थर 20 m से गिरता है। ज़मीन छूने से ठीक पहले चाल? (वायु प्रतिरोध नहीं)
चरण 1: mgh = ½mv²। चरण 2: v = √(2 × 10 × 20) = √400। उत्तर: 20 m/s। (द्रव्यमान कट गया।)
4. 2 m/s से चलता 1 kg का गुटका स्प्रिंग (k = 100 N/m) से टकराता है। अधिकतम दबाव?
चरण 1: ½mv² = ½kx²। चरण 2: 1 × 4 = 100 x²। चरण 3: x = 0.2 m।
5. 2 kg का डिब्बा 5 m ऊँची खुरदरी ढलान से फिसलकर नीचे 8 m/s से पहुँचता है। कितनी ऊर्जा ऊष्मा बनी?
चरण 1: ऊपर U = 2 × 10 × 5 = 100 J। चरण 2: नीचे K = ½ × 2 × 64 = 64 J। चरण 3: ऊष्मा = 36 J।
6. U(x) = 3x² − 12x J। x = 1 m पर बल और वह बिंदु जहाँ बल शून्य हो?
चरण 1: F = −dU/dx = 12 − 6x। चरण 2: x = 1 पर F = 6 N (+x की ओर)। चरण 3: F = 0 जब x = 2 m (U वक्र का सबसे निचला बिंदु, स्थायी संतुलन)।
7. स्प्रिंग (k = 500 N/m) को 2 cm से 6 cm तक खींचा। अतिरिक्त कार्य?
चरण 1: W = ½k(x₂² − x₁²)। चरण 2: = 250 × (0.0036 − 0.0004)। उत्तर: 0.8 J।
आम गलतियाँ
- U = mgh को पक्का मान समझना। सिर्फ़ अंतर मायने रखता है; शून्य स्तर आप चुनते हो।
- स्प्रिंग ऊर्जा को kx या ½kx लिखना। सही है ½kx² (त्रिभुज का क्षेत्रफल)।
- घर्षण होने पर भी K + U = नियत लगाना। तब अंत वाली तरफ़ ऊष्मा जोड़नी होगी।
- घर्षण को संरक्षी कहना क्योंकि वह "हमेशा रहता है"। वह असंरक्षी है क्योंकि उसका कार्य रास्ते की लंबाई पर निर्भर है।