United Grade 12 AP Physics C: Mechanics
अध्याय: 7
1. Kinematics
Scalars and vectors · Displacement, velocity and acceleration · Representing motion · Reference frames and relative motion · Motion in two or three dimensions
- सरल रेखा में गति (कक्षा 11) – गति बताने के लिए पहले संदर्भ तंत्र चुनते हैं: एक मूल बिंदु, एक दिशा और एक घड़ी। स्थिति x समय t के साथ बदलती है। वेग v = dx/dt, यानी x–t ग्राफ की ढाल; त्वरण a = dv/dt, यानी v–t ग्राफ की ढाल। v–t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन। a स्थिर हो तो: v = u + at, x = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति (कक्षा 11) – समतल में r = r₀ + v₀t + ½at² और v = v₀ + at, x और y पर अलग-अलग लगते हैं। प्रक्षेप्य का क्षैतिज वेग u cos θ स्थिर रहता है और ऊर्ध्वाधर वेग हर सेकंड g से बदलता है, इसलिए पथ परवलय है: y = x tan θ − gx²/(2u²cos²θ)। T = 2u sin θ/g, H = u² sin²θ/2g, R = u² sin 2θ/g (45° पर अधिकतम)। एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर पर वेग की दिशा घूमती है, इसलिए केंद्र की ओर अभिकेंद्र त्वरण a = v²/r = ω²r होता है।
2. Force and Translational Dynamics
Systems and center of mass · Forces and free-body diagrams · Newton's third law · Newton's first law · Newton's second law · Gravitational force · Kinetic and static friction · Spring forces · Resistive (drag) forces · Circular motion
- द्रव्यमान केंद्र: दो कण, दृढ़ पिंड और एकसमान छड़ – द्रव्यमान केंद्र वह एक बिंदु है जो ऐसे चलता है मानो पूरे निकाय का सारा द्रव्यमान वहीं इकट्ठा हो। एक रेखा पर दो कणों के लिए x_cm = (m₁x₁ + m₂x₂)/(m₁ + m₂)। यह दोनों को मिलाने वाली रेखा पर, भारी कण के पास होता है। कई कणों के लिए x_cm = Σmx/Σm (y और z के लिए भी ऐसे ही)। L लंबाई की एकसमान छड़ का द्रव्यमान केंद्र L/2 पर, यानी ठीक बीच में होता है। आंतरिक बल द्रव्यमान केंद्र को नहीं हिला सकते, सिर्फ़ बाहरी बल: M·a_cm = F_ext।
- जड़त्व, पहला नियम, संवेग, दूसरा नियम और आवेग – कोई वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई नेट बाहरी बल न लगे (पहला नियम)। बदलाव का यह विरोध जड़त्व है और द्रव्यमान इसका माप है। संवेग p = mv. संवेग बदलने की दर नेट बल के बराबर है: F = dp/dt, द्रव्यमान स्थिर हो तो F = ma (दूसरा नियम)। आवेग J = F × Δt = Δp; रुकने में ज़्यादा समय लगे तो बल कम लगता है।
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम – ब्रह्मांड की हर वस्तु हर दूसरी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। r दूरी पर रखे दो द्रव्यमानों m₁ और m₂ के बीच खिंचाव F = G m₁ m₂ / r² होता है। यह बल दोनों को मिलाने वाली रेखा पर लगता है। दोनों एक-दूसरे को बराबर और उलटी दिशा में खींचते हैं। G = 6.67 × 10⁻¹¹ N m² kg⁻² हर जगह एक जैसा है, इसलिए इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं। कई द्रव्यमान एक वस्तु को खींचें तो बल सदिश की तरह जुड़ते हैं (अध्यारोपण)।
- घर्षण: स्थैतिक, गतिज और लोटनिक घर्षण, नियम और स्नेहन – घर्षण वह बल है जो छूती सतहों के बीच आपेक्षिक गति (या उसकी शुरुआत) का विरोध करता है। स्थैतिक घर्षण ज़रूरत के हिसाब से ख़ुद बदलता है, पर एक अधिकतम तक: सीमांत घर्षण fs,max = μs N. फिसलना शुरू होते ही गतिज घर्षण fk = μk N लगता है, और μk < μs. घर्षण अभिलंब बल और सतहों की प्रकृति पर निर्भर है, संपर्क क्षेत्रफल पर नहीं। लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण से बहुत कम है; स्नेहक और बॉल बेयरिंग घर्षण घटाते हैं।
- स्प्रिंग के दोलन और सरल लोलक – स्प्रिंग से बँधा गुटका F = −kx का खिंचाव महसूस करता है, जहाँ k बल नियतांक (कठोरता) है। यह SHM करता है, T = 2π√(m/k)। सरल लोलक छोटे झूलों में mg sinθ ≈ mgθ का खिंचाव महसूस करता है और SHM करता है, T = 2π√(L/g)। लोलक का आवर्तकाल गोलक के द्रव्यमान पर और (छोटे झूलों में) आयाम पर निर्भर नहीं करता।
- ढाल क्षेत्र, ऑयलर विधि और लॉजिस्टिक मॉडल – अवकल समीकरण dy/dx = f(x, y) हर बिंदु पर ढाल बताता है। उन ढालों की छोटी रेखाएँ बनाने से ढाल क्षेत्र बनता है, और हल-वक्र उन रेखाओं के साथ चलते हैं। ऑयलर विधि सीधे कदमों में चलती है: yₙ₊₁ = yₙ + h·f(xₙ, yₙ)। लॉजिस्टिक मॉडल dP/dt = kP(1 − P/K) में वृद्धि P = K/2 पर सबसे तेज़ है और P अंत में K पर रुकता है। वायु प्रतिरोध के साथ गिरती वस्तु, m dv/dt = mg − bv, सीमांत वेग v_t = mg/b की ओर जाती है।
- अभिकेंद्र बल, समतल सड़क और ढालू सड़क पर कार – वृत्त में चलती वस्तु की दिशा लगातार बदलती है, इसलिए उसे केंद्र की ओर नेट बल चाहिए: अभिकेंद्र बल F = mv²/r. यह कोई नया बल नहीं; तनाव, गुरुत्व, घर्षण या अभिलंब बल का हिस्सा इसे देता है। समतल सड़क पर सिर्फ़ घर्षण देता है, इसलिए vmax = √(μs r g). θ कोण पर ढालू सड़क पर अभिलंब बल का हिस्सा भी मदद करता है: घर्षण के बिना आदर्श चाल v₀ = √(r g tanθ), और घर्षण के साथ vmax = √[r g (μs + tanθ)/(1 − μs tanθ)].
3. Work, Energy, and Power
Translational kinetic energy · Work · Potential energy · Conservation of energy · Power
- कार्य, गतिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और शक्ति – जब बल किसी चीज़ को अपनी दिशा में खिसकाता है तो कार्य होता है: W = F·s = F s cos θ। बदलते बल का कार्य F–x ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल है। चलती वस्तु की गतिज ऊर्जा K = ½mv² है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय: कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में बदलाव। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W/t = F·v।
- स्थितिज ऊर्जा, स्प्रिंग ऊर्जा और संरक्षी बल – स्थितिज ऊर्जा U स्थिति या आकार के कारण जमा ऊर्जा है। पृथ्वी के पास U = mgh; खिंची या दबी स्प्रिंग में U = ½kx²। जिस बल का कार्य सिर्फ़ शुरू और अंत के बिंदु पर निर्भर करे, रास्ते पर नहीं, वह संरक्षी बल है (गुरुत्व, स्प्रिंग बल)। तब F = −dU/dx और K + U नियत रहता है। घर्षण, वायु प्रतिरोध असंरक्षी हैं: ये यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मा बना देते हैं।
4. Linear Momentum
Linear momentum · Change in momentum and impulse · Conservation of linear momentum · Elastic and inelastic collisions
- जड़त्व, पहला नियम, संवेग, दूसरा नियम और आवेग – कोई वस्तु अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई नेट बाहरी बल न लगे (पहला नियम)। बदलाव का यह विरोध जड़त्व है और द्रव्यमान इसका माप है। संवेग p = mv. संवेग बदलने की दर नेट बल के बराबर है: F = dp/dt, द्रव्यमान स्थिर हो तो F = ma (दूसरा नियम)। आवेग J = F × Δt = Δp; रुकने में ज़्यादा समय लगे तो बल कम लगता है।
- तीसरा नियम, संवेग संरक्षण और बलों का संतुलन – बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A ने B पर बल लगाया तो उसी पल B भी A पर बराबर और उलटा बल लगाता है (तीसरा नियम)। यह जोड़ा अलग-अलग वस्तुओं पर लगता है। जिस निकाय पर कोई नेट बाहरी बल न हो, उसका कुल रैखिक संवेग स्थिर रहता है; इससे प्रतिक्षेप, रॉकेट और टक्करें समझ आती हैं। कोई कण संतुलन में है जब उस पर सारे बलों का योग शून्य हो; संतुलन वाले तीन संगामी बल एक बंद त्रिभुज बनाते हैं।
- एक और दो विमाओं में प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ संघट्ट – हर संघट्ट (टक्कर) में कुल संवेग संरक्षित रहता है (छोटी सी टक्कर में बाहरी बल नहीं)। प्रत्यास्थ संघट्ट में गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है। अप्रत्यास्थ में कुछ गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि या पिचकने में जाती है; वस्तुएँ चिपक जाएँ तो पूर्णतः अप्रत्यास्थ। 1D प्रत्यास्थ में (वस्तु 2 रुकी हो): v₁ = (m₁ − m₂)u₁/(m₁ + m₂), v₂ = 2m₁u₁/(m₁ + m₂)। 2D में x और y दोनों दिशाओं में अलग-अलग संवेग संरक्षित।
5. Torque and Rotational Dynamics
Rotational kinematics · Connecting linear and rotational motion · Torque · Rotational inertia · Rotational equilibrium · Newton's second law in rotational form
- जड़त्व आघूर्ण, घूर्णन त्रिज्या और घूर्णी गति – सीधी रेखा की गति की हर राशि का एक घूमने वाला जुड़वाँ है: x का θ, v का ω, a का α, m का I, F का τ, p का L = Iω। जड़त्व आघूर्ण I = Σmr² बताता है कि पिंड का घूमना बदलना कितना कठिन है; अक्ष से दूर का द्रव्यमान इसे बहुत बढ़ाता है। घूर्णन त्रिज्या k वह दूरी है जहाँ सारा द्रव्यमान रख दें तो I वही रहे: I = Mk²। मानक मान: वलय MR², चकती ½MR², ठोस गोला ⅖MR², छड़ (बीच से) ML²/12। स्थिर α पर: ω = ω₀ + αt, θ = ω₀t + ½αt², ω² = ω₀² + 2αθ, और τ = Iα।
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।
6. Energy and Momentum of Rotating Systems
Rotational kinetic energy · Torque and work · Angular momentum and angular impulse · Conservation of angular momentum · Rolling · Motion of orbiting satellites
- जड़त्व आघूर्ण, घूर्णन त्रिज्या और घूर्णी गति – सीधी रेखा की गति की हर राशि का एक घूमने वाला जुड़वाँ है: x का θ, v का ω, a का α, m का I, F का τ, p का L = Iω। जड़त्व आघूर्ण I = Σmr² बताता है कि पिंड का घूमना बदलना कितना कठिन है; अक्ष से दूर का द्रव्यमान इसे बहुत बढ़ाता है। घूर्णन त्रिज्या k वह दूरी है जहाँ सारा द्रव्यमान रख दें तो I वही रहे: I = Mk²। मानक मान: वलय MR², चकती ½MR², ठोस गोला ⅖MR², छड़ (बीच से) ML²/12। स्थिर α पर: ω = ω₀ + αt, θ = ω₀t + ½αt², ω² = ω₀² + 2αθ, और τ = Iα।
- बल-आघूर्ण, कोणीय संवेग और दृढ़ पिंडों का संतुलन – बल-आघूर्ण (torque) बल का घुमाने वाला असर है: τ = r × F, परिमाण rF sinθ, मात्रक N m। कोणीय संवेग संवेग का घूमने वाला रूप है: L = r × p; स्थिर अक्ष पर घूमते पिंड के लिए L = Iω। बल-आघूर्ण कोणीय संवेग बदलता है: τ = dL/dt। बाहरी बल-आघूर्ण शून्य हो तो L नहीं बदलता, इसलिए द्रव्यमान अंदर खींचने पर पिंड तेज़ घूमता है। दृढ़ पिंड संतुलन में तब है जब कुल बल शून्य (खिसकना नहीं) और किसी भी बिंदु के परितः कुल बल-आघूर्ण शून्य (घूमना नहीं) हो।
- पलायन वेग, कक्षीय वेग और परिक्रमा करते उपग्रह की ऊर्जा – किसी चीज़ को बगल की ओर काफ़ी तेज़ फेंको तो वह पृथ्वी की ओर गिरते हुए भी ज़मीन पर नहीं पहुँचती, चक्कर लगाती रहती है: यह कक्षीय वेग है, v₀ = √(GM/r), सतह के ठीक ऊपर लगभग 7.9 km/s। और तेज़, पलायन वेग vₑ = √(2GM/R) = √(2gR) ≈ 11.2 km/s से फेंको, तो वह हमेशा के लिए पृथ्वी छोड़ देती है। vₑ = √2 × v₀। वृत्तीय कक्षा में उपग्रह की KE = GMm/2r, स्थितिज ऊर्जा = −GMm/r और कुल ऊर्जा E = −GMm/2r। कुल ऊर्जा ऋणात्मक है, यानी उपग्रह बँधा है। ऊँची कक्षा में चाल कम और समय ज़्यादा: T = 2π√(r³/GM)।
7. Oscillations
Defining simple harmonic motion · Frequency and period of SHM · Representing and analyzing SHM · Energy of simple harmonic oscillators · Simple and physical pendulums
- सरल आवर्त गति (SHM) – जो गति तय समय के बाद बार-बार दोहराती है, वह आवर्ती गति है। अगर वस्तु बीच की जगह के इधर-उधर आती-जाती है और वापस खींचने वाला बल दूरी के अनुपात में है (F = −kx), तो वह सरल आवर्त गति है। इसकी स्थिति x = A sin(ωt + φ) है, जहाँ ω = 2π/T = 2πf। बीच में चाल सबसे ज़्यादा, सिरों पर त्वरण सबसे ज़्यादा, और कुल ऊर्जा ½kA² हमेशा वही रहती है।
- स्प्रिंग के दोलन और सरल लोलक – स्प्रिंग से बँधा गुटका F = −kx का खिंचाव महसूस करता है, जहाँ k बल नियतांक (कठोरता) है। यह SHM करता है, T = 2π√(m/k)। सरल लोलक छोटे झूलों में mg sinθ ≈ mgθ का खिंचाव महसूस करता है और SHM करता है, T = 2π√(L/g)। लोलक का आवर्तकाल गोलक के द्रव्यमान पर और (छोटे झूलों में) आयाम पर निर्भर नहीं करता।