संघट्ट क्या है? संवेग हमेशा संरक्षित
संघट्ट यानी वस्तुओं के बीच छोटी, तेज़ अन्योन्य क्रिया (कभी छूना ज़रूरी नहीं, जैसे आवेशित कण)। उस छोटे पल में आंतरिक बल बहुत बड़े होते हैं और बाहरी बल नगण्य। न्यूटन के तीसरे नियम से दोनों पर बल बराबर और उलटे, इसलिए कुल संवेग संरक्षित: m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂।
कुल ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, पर गतिज ऊर्जा ज़रूरी नहीं।
प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ संघट्ट
- प्रत्यास्थ: संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित। उदाहरण: कठोर स्टील की गेंदें, गैस के अणु (लगभग)।
- अप्रत्यास्थ: संवेग संरक्षित, कुछ K खो जाती है (ऊष्मा, ध्वनि, विकृति)। ज़्यादातर असली टक्करें।
- पूर्णतः अप्रत्यास्थ: वस्तुएँ चिपककर एक ही वेग से चलती हैं; K का सबसे ज़्यादा ह्रास।
प्रत्यवस्थान गुणांक e = (अलग होने की चाल)/(पास आने की चाल) = (v₂ − v₁)/(u₁ − u₂)। e = 1 प्रत्यास्थ, 0 < e < 1 अप्रत्यास्थ, e = 0 पूर्णतः अप्रत्यास्थ।
1D में प्रत्यास्थ संघट्ट: व्युत्पत्ति
वस्तु 2 विराम में (u₂ = 0)।
- संवेग: m₁u₁ = m₁v₁ + m₂v₂ → m₁(u₁ − v₁) = m₂v₂ … (1)
- गतिज ऊर्जा: ½m₁u₁² = ½m₁v₁² + ½m₂v₂² → m₁(u₁ − v₁)(u₁ + v₁) = m₂v₂² … (2)
- (2) को (1) से भाग दो: u₁ + v₁ = v₂। (अलग होने की चाल = पास आने की चाल, e = 1।)
- v₂ को (1) में रखो: v₁ = (m₁ − m₂)u₁/(m₁ + m₂), v₂ = 2m₁u₁/(m₁ + m₂)।
विशेष स्थितियाँ: m₁ = m₂ → v₁ = 0, v₂ = u₁ (अदला-बदली)। m₁ ≪ m₂ (गेंद दीवार से) → v₁ ≈ −u₁ (वापस उछलती)। m₁ ≫ m₂ → v₂ ≈ 2u₁।
1D में पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट
साथ चलती हैं: m₁u₁ + m₂u₂ = (m₁ + m₂)v, तो v = (m₁u₁ + m₂u₂)/(m₁ + m₂)।
गतिज ऊर्जा ह्रास (u₂ = 0): ΔK = ½ · m₁m₂/(m₁ + m₂) · u₁²। उदाहरण: 3 m/s से 2 kg, रुकी 1 kg से: v = 2 m/s, ΔK = ½ × (2/3) × 9 = 3 J।
किसी भी e के लिए: v₁ = (m₁ − e m₂)u₁/(m₁ + m₂), v₂ = (1 + e)m₁u₁/(m₁ + m₂) (u₂ = 0)।
दो विमाओं में संघट्ट
वस्तु 1, x-अक्ष पर u₁ से चलकर रुकी वस्तु 2 से टकराती है। बाद में वे x-अक्ष के दोनों ओर θ₁ और θ₂ कोण पर जाती हैं।
- x: m₁u₁ = m₁v₁ cos θ₁ + m₂v₂ cos θ₂
- y: 0 = m₁v₁ sin θ₁ − m₂v₂ sin θ₂
- प्रत्यास्थ हो तो: ½m₁u₁² = ½m₁v₁² + ½m₂v₂²।
4 अज्ञात (v₁, v₂, θ₁, θ₂) पर सिर्फ़ 3 समीकरण, इसलिए एक (जैसे एक कोण) नापना पड़ता है।
बराबर द्रव्यमान, प्रत्यास्थ, एक रुका: θ₁ + θ₂ = 90°। उपपत्ति: संवेग से u⃗ = v⃗₁ + v⃗₂; ऊर्जा से u² = v₁² + v₂²। पहले का वर्ग: u² = v₁² + v₂² + 2v⃗₁·v⃗₂, तो v⃗₁·v⃗₂ = 0: वेग लंबवत।
घर पर करके देखो
चिकनी मेज़ पर एक जैसे दो सिक्के रखो। एक को सीधा दूसरे पर मारो: पहला लगभग रुकता है, दूसरा आगे बढ़ता है। अब थोड़ा तिरछा मारो और दोनों के रास्ते पर निशान लगाओ: लगभग समकोण बनता है। फिर रबर की गेंद और मिट्टी का लोंदा एक ही ऊँचाई से गिराओ: गेंद उछलती है (e लगभग 1), मिट्टी चिपक जाती है (e ≈ 0)।
परीक्षा कोना
CBSE में अक्सर: 1D प्रत्यास्थ संघट्ट में v₁ और v₂ की व्युत्पत्ति (5 अंक), बराबर द्रव्यमान में वेगों की अदला-बदली दिखाओ, पूर्णतः अप्रत्यास्थ में ऊर्जा ह्रास, और 2D में 90° वाला परिणाम। हमेशा पहले संवेग, फिर ऊर्जा लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂ (हमेशा)
- e = (v₂ − v₁)/(u₁ − u₂)
- प्रत्यास्थ 1D (u₂ = 0): v₁ = (m₁ − m₂)u₁/(m₁ + m₂), v₂ = 2m₁u₁/(m₁ + m₂)
- पूर्णतः अप्रत्यास्थ: v = (m₁u₁ + m₂u₂)/(m₁ + m₂)
- ऊर्जा ह्रास (u₂ = 0): ΔK = ½ · m₁m₂/(m₁ + m₂) · u₁²
- 2D: x और y में अलग-अलग संवेग संरक्षण; बराबर द्रव्यमान प्रत्यास्थ → θ₁ + θ₂ = 90°
हल किए गए उदाहरण
1. 4 m/s से 3 kg की गेंद, रुकी 1 kg गेंद से प्रत्यास्थ टकराती है। दोनों के अंतिम वेग?
चरण 1: v₁ = (3 − 1) × 4 / 4 = 2 m/s। चरण 2: v₂ = 2 × 3 × 4 / 4 = 6 m/s। जाँच p: 12 = 6 + 6 ✔। K: 24 = 6 + 18 ✔।
2. 6 m/s से 1 kg गेंद, रुकी 2 kg गेंद से प्रत्यास्थ टकराती है। अंतिम वेग?
चरण 1: v₁ = (1 − 2) × 6 / 3 = −2 m/s (वापस लौटती)। चरण 2: v₂ = 2 × 6 / 3 = 4 m/s।
3. 4 m/s से 5 kg ट्रॉली रुकी 3 kg ट्रॉली से टकराकर चिपक जाती है। साझा चाल और ऊर्जा ह्रास?
चरण 1: v = 20 / 8 = 2.5 m/s। चरण 2: पहले K = 40 J। चरण 3: बाद में K = ½ × 8 × 6.25 = 25 J। उत्तर: 15 J ह्रास।
4. 400 m/s से 10 g की गोली लटके हुए 2 kg लकड़ी के गुटके में धँस जाती है। ठीक बाद गुटके की चाल?
चरण 1: पूर्णतः अप्रत्यास्थ। चरण 2: v = 0.01 × 400 / 2.01 ≈ 1.99 m/s।
5. ऊपर वाला गुटका कितना ऊपर झूलेगा?
चरण 1: टक्कर के बाद ऊर्जा संरक्षित: ½v² = gh। चरण 2: h = (1.99)² / 20 ≈ 0.198 m ≈ 20 cm। (यह प्राक्षेपिक लोलक है।)
6. गेंद 1.6 m से e = 0.5 वाले फ़र्श पर गिराई गई। कितना ऊपर उछलेगी?
चरण 1: फ़र्श पर चाल = √32। चरण 2: उछाल के बाद v = 0.5 × √32। चरण 3: h = 0.25 × 32 / 20 = 0.4 m (h′ = e²h)।
7. बराबर गोटियाँ: 4 m/s से A, रुकी B से प्रत्यास्थ टकराती है; A अपनी पुरानी रेखा से 30° पर जाती है। θ₂, v₁, v₂?
चरण 1: बराबर द्रव्यमान, प्रत्यास्थ → θ₁ + θ₂ = 90°, θ₂ = 60°। चरण 2: v₁ = 4 cos30° ≈ 3.46 m/s, v₂ = 4 cos60° = 2 m/s। जाँच K: 16 = 12 + 4 ✔।
8. पूर्व की ओर 3 m/s से 2 kg गेंद, उत्तर की ओर 6 m/s से 1 kg गेंद से टकराकर चिपकती है। साझा वेग?
चरण 1: pₓ = 6, p_y = 6 (kg m/s)। चरण 2: p = 6√2। चरण 3: v = 6√2 / 3 ≈ 2.83 m/s, पूर्व से 45° उत्तर की ओर।
आम गलतियाँ
- हर संघट्ट में गतिज ऊर्जा संरक्षण लगाना। सिर्फ़ प्रत्यास्थ में K बचती है; संवेग हमेशा।
- चिह्न भूलना। बाईं ओर वेग ऋणात्मक; v₁ ऋणात्मक मतलब गेंद वापस लौटी।
- 2D में संवेग सीधे जोड़ देना। x और y भाग अलग करके हर एक का संरक्षण लगाओ।
- अप्रत्यास्थ में ऊर्जा "नष्ट" मानना। वह ऊष्मा, ध्वनि और विकृति बनती है; कुल ऊर्जा संरक्षित।