बल क्या है?
बल एक धक्का या खिंचाव है। बल दिखता नहीं, पर उसका असर दिखता है। बल:
- रुकी चीज़ को चला सकता है,
- उसे तेज़ या धीमा कर सकता है,
- उसकी दिशा बदल सकता है,
- उसका आकार बदल सकता है (आटे की लोई दबाओ)।
बल का SI मात्रक: न्यूटन (N)। बल में परिमाण और दिशा दोनों हैं, इसलिए यह सदिश है। इसे तीर से दिखाते हैं।
संतुलित और असंतुलित बल
जब किसी चीज़ पर कई बल लगें, तो उन्हें दिशा के साथ जोड़कर नेट (परिणामी) बल निकालते हैं।
- संतुलित बल: नेट बल शून्य। गति नहीं बदलती। रुका डिब्बा रुका रहता है; चलता डिब्बा उसी चाल और दिशा में चलता रहता है। जैसे रस्साकशी जिसमें दोनों टीमें बराबर खींचें।
- असंतुलित बल: नेट बल शून्य नहीं। चीज़ नेट बल की दिशा में तेज़ होती है, धीमी होती है या मुड़ती है।
3D में: 5 N − 5 N = 0 N (संतुलित), फिर 10 N − 4 N = 6 N (असंतुलित)।
घर्षण
घर्षण वह बल है जो छूती हुई दो सतहों के बीच फिसलने का विरोध करता है। यह हमेशा गति (या गति की कोशिश) के उलटी दिशा में लगता है।
- खुरदरी सतह पर घर्षण ज़्यादा; चिकनी सतह (बर्फ़, तेल लगा फ़र्श) पर कम।
- भारी अलमारी को हल्का धकेलो और वह न हिले, तो घर्षण तुम्हारे धक्के को ठीक बराबर कर रहा है।
- ज़मीन पर लुढ़कती गेंद घर्षण के कारण रुकती है, इसलिए नहीं कि "गति ख़त्म हो गई"।
घर्षण काम का भी है (चलना, ब्रेक, लिखना) और नुकसान का भी (पुर्ज़े घिसते हैं, मशीन गर्म होती है)। तेल, ग्रीस, बॉल बेयरिंग और चिकने आकार से इसे घटाते हैं।
न्यूटन का पहला नियम और जड़त्व
पहला नियम: कोई चीज़ विराम में रहती है, या सीधी रेखा में एक-सी चाल से चलती रहती है, जब तक उस पर असंतुलित बल न लगे।
गैलीलियो ने ढलानों पर कंचे लुढ़काकर यह देखा: सतह जितनी चिकनी, कंचा उतना दूर गया। बिल्कुल घर्षण न हो तो कंचा कभी न रुके।
जड़त्व किसी चीज़ की वह आदत है जिससे वह अपनी विराम या गति की अवस्था बदलने का विरोध करती है। इसलिए पहले नियम को जड़त्व का नियम भी कहते हैं।
- द्रव्यमान जड़त्व की माप है। भरे ट्रक को चलाना या रोकना साइकिल से कहीं मुश्किल है।
- बस अचानक रुके तो तुम आगे झुकते हो; अचानक चले तो पीछे।
- गिलास पर कार्ड और उस पर सिक्का रखो, कार्ड को झटके से उछालो: कार्ड उड़ जाता है, सिक्का गिलास में गिरता है।
- दरी को डंडे से पीटने पर धूल झड़ती है, क्योंकि दरी हिलती है पर धूल वहीं रह जाती है।
संवेग
संवेग (p) किसी चीज़ में "गति की मात्रा" है।
p = m × v
यह सदिश है, वेग की दिशा में। SI मात्रक: kg m/s।
धीमा ट्रक और तेज़ क्रिकेट गेंद दोनों चोट पहुँचा सकते हैं, क्योंकि संवेग द्रव्यमान और वेग दोनों पर निर्भर है। किसी चीज़ को रोकने के लिए उसका संवेग ख़त्म करना पड़ता है, और इसके लिए कुछ समय तक बल लगाना पड़ता है।
न्यूटन का दूसरा नियम: F = ma
दूसरा नियम: किसी चीज़ के संवेग बदलने की दर उस पर लगे असंतुलित बल के समानुपाती होती है, और बल की दिशा में होती है।
F ∝ (mv − mu) ÷ t = m(v − u) ÷ t = ma। मात्रक ऐसे चुनें कि स्थिरांक 1 हो:
F = m × a
1 न्यूटन वह बल है जो 1 kg द्रव्यमान को 1 m/s² का त्वरण दे। यानी 1 N = 1 kg m/s²।
- बल वही, द्रव्यमान दुगुना → त्वरण आधा (3D का चरण 4)।
- F × t = संवेग में बदलाव। इसीलिए फ़ील्डर हाथ पीछे खींचता है: ज़्यादा समय = हाथ पर कम बल। ऊँची कूद वाले गद्दों पर इसी कारण गिरते हैं।
पहला नियम दूसरे में छिपा है: F = 0 तो a = 0, यानी वेग नहीं बदलता।
न्यूटन का तीसरा नियम: क्रिया और प्रतिक्रिया
तीसरा नियम: जब एक चीज़ दूसरी को धकेलती है, तो दूसरी भी पहली को बराबर परिमाण और उलटी दिशा का बल लगाती है।
- ये दोनों बल दो अलग चीज़ों पर लगते हैं, इसलिए एक-दूसरे को कभी नहीं काटते।
- दोनों एक ही पल में लगते हैं।
- बराबर बल का मतलब बराबर त्वरण नहीं: हल्की चीज़ ज़्यादा त्वरित होती है (a = F/m)।
उदाहरण: आगे चलने के लिए तुम ज़मीन को पीछे धकेलते हो; तैराक पानी पीछे धकेलता है; नाव से किनारे पर कूदो तो नाव पीछे जाती है; बंदूक का प्रतिक्षेप; रॉकेट गैस नीचे धकेलता है और गैस रॉकेट को ऊपर।
वस्तुओं के तंत्र पर बल और संवेग संरक्षण
तंत्र (system) चीज़ों का ऐसा समूह है जिसे हम साथ में देखते हैं, जैसे दो ट्रॉली और उनके बीच की स्प्रिंग।
- आंतरिक बल तंत्र के अंदर की चीज़ों के बीच लगते हैं। तीसरे नियम से ये बराबर-उलटे जोड़ों में आते हैं, इसलिए पूरे तंत्र के लिए इनका जोड़ शून्य है।
- बाहरी बल बाहर से आते हैं (हाथ का धक्का, फ़र्श का घर्षण)।
इसलिए सिर्फ़ बाहरी बल ही तंत्र का कुल संवेग बदल सकते हैं। नेट बाहरी बल शून्य हो तो कुल संवेग वही रहता है। यह संवेग संरक्षण का नियम है:
m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂
3D में दोनों ट्रॉली विराम से शुरू होती हैं (कुल 0)। स्प्रिंग के धक्के के बाद: 1 kg × (−4 m/s) + 2 kg × (+2 m/s) = 0। बंदूक का प्रतिक्षेप और रॉकेट का उड़ना भी इसी से समझ आता है।
अगर दो चीज़ें जुड़ी हों या बाहरी बल उन्हें साथ धकेले, तो उन्हें एक चीज़ मान सकते हो: त्वरण = कुल बाहरी बल ÷ कुल द्रव्यमान।
करके देखो: घर पर जड़त्व और तीसरा नियम
- सिक्का और कार्ड: गिलास पर ताश का पत्ता, उस पर सिक्का रखो। पत्ते को तेज़ी से बगल में झटको। पहले अंदाज़ा लगाओ: सिक्का कहाँ जाएगा? (गिलास में गिरेगा: विराम का जड़त्व।)
- गुब्बारा रॉकेट: कमरे में एक धागा ताने, उसमें स्ट्रॉ डालो, फूला गुब्बारा स्ट्रॉ पर टेप करो और हवा छोड़ दो। हवा पीछे भागती है, गुब्बारा आगे (तीसरा नियम)।
- 3D में: खुले खेल में F = 10 N रखो। m को 1 kg से 5 kg करो। पहले सोचो a कैसे बदलेगा, फिर धक्का देकर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नेट बल = सभी बलों का जोड़ (दिशा के साथ)
- संवेग p = m × v (मात्रक kg m/s)
- दूसरा नियम: F = m × a = m(v − u) ÷ t
- 1 N = 1 kg × 1 m/s²
- आवेग: F × t = संवेग में बदलाव = mv − mu
- तीसरा नियम: F(A का B पर) = − F(B का A पर)
- संवेग संरक्षण: m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂
- प्रतिक्षेप: m_बंदूक × v_बंदूक = − m_गोली × v_गोली (विराम से शुरू)
हल किए गए उदाहरण
1. एक ट्रॉली पर दो बल हैं: 12 N दाईं ओर और 5 N बाईं ओर। नेट बल बताओ। क्या बल संतुलित हैं?
नेट बल = 12 − 5 = 7 N दाईं ओर। नेट बल शून्य नहीं, इसलिए बल असंतुलित हैं और ट्रॉली दाईं ओर त्वरित होगी।
2. 30 m/s से चलती 0.15 kg की क्रिकेट गेंद का संवेग बताओ।
p = m × v = 0.15 × 30 = 4.5 kg m/s, गेंद की गति की दिशा में।
3. 1200 kg की कार को 2 m/s² का त्वरण देने के लिए कितना बल चाहिए?
F = m × a = 1200 × 2 = 2400 N।
4. 5 kg के ब्लॉक पर 20 N बल लगता है। घर्षण 5 N है। त्वरण बताओ।
नेट बल = 20 − 5 = 15 N। a = 15 ÷ 5 = 3 m/s²।
5. 20 m/s से चलती 1000 kg की कार ब्रेक से 4 s में रुकती है। ब्रेक का बल बताओ।
a = (0 − 20) ÷ 4 = −5 m/s²। F = 1000 × (−5) = −5000 N। ब्रेक बल 5000 N है, गति के उलटी दिशा में। (या: संवेग में बदलाव = 0 − 20000 = −20000 kg m/s; F = −20000 ÷ 4 = −5000 N।)
6. 4 kg की बंदूक से 20 g की गोली 400 m/s से चलती है। बंदूक का प्रतिक्षेप वेग बताओ।
पहले कुल संवेग = 0। बाद में: 0.02 × 400 + 4 × v = 0 → 8 + 4v = 0 → v = −2 m/s। बंदूक 2 m/s से पीछे जाती है।
7. 3 m/s से चलती 2 kg की ट्रॉली रुकी हुई 1 kg की ट्रॉली से टकराकर चिपक जाती है। साझा वेग बताओ।
पहले संवेग = 2 × 3 + 1 × 0 = 6 kg m/s। बाद में: (2 + 1) × v = 6 → v = 2 m/s, उसी दिशा में।
8. चिकने फ़र्श पर 3 kg और 2 kg के ब्लॉक सटे हैं। 3 kg वाले पर 10 N का धक्का लगता है। त्वरण और 3 kg ब्लॉक द्वारा 2 kg ब्लॉक पर लगा बल बताओ।
दोनों को एक तंत्र मानो: a = 10 ÷ (3 + 2) = 2 m/s²। 2 kg ब्लॉक को F = 2 × 2 = 4 N चाहिए, तो 3 kg ब्लॉक उसे 4 N से धकेलता है। तीसरे नियम से 2 kg ब्लॉक भी 3 kg ब्लॉक को 4 N पीछे धकेलता है (यह आंतरिक जोड़ा तंत्र के लिए कट जाता है)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि चलती चीज़ को चलते रहने के लिए बल चाहिए। बल सिर्फ़ गति बदलने के लिए चाहिए; चीज़ें घर्षण से रुकती हैं।
- कहना कि क्रिया और प्रतिक्रिया कट जाती हैं। वे दो अलग चीज़ों पर लगती हैं, इसलिए नहीं कटतीं।
- F = ma लगाने से पहले घर्षण न घटाना। नेट बल लो।
- संवेग के सवाल में ग्राम को किलोग्राम में न बदलना (20 g = 0.02 kg)।