National Year 9 Science
अध्याय: 12
1. Working scientifically
Scientific attitudes · Experimental skills and investigations · Analysis and evaluation · Measurement
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- डेटा विश्लेषण – डेटा विश्लेषण यानी कच्चे आँकड़ों को जवाब में बदलना। इसका एक चक्र है: सवाल पूछो, डेटा इकट्ठा करो, साफ़ करो (ग़लती, दोहराव और खाली जवाब हटाओ), व्यवस्थित करो, माध्य, माध्यिका, परास और पैटर्न से विश्लेषण करो, सही चार्ट बनाओ और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। बाहरी मान, छोटे नमूने और पक्षपात पर नज़र रखो, और याद रखो कि दो चीज़ों का साथ बढ़ना (सहसंबंध) यह साबित नहीं करता कि एक दूसरे का कारण है। डेटा को सुरक्षित रखना और अनुमति से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है।
- मापन और मात्रक: हम कुछ भी कैसे मापते हैं – किसी चीज़ को मापना यानी उसकी तुलना एक तय मात्रा से करना, जिसे मात्रक (इकाई) कहते हैं. हर माप में एक संख्या और एक मात्रक होता है. दुनिया भर के वैज्ञानिक SI पद्धति इस्तेमाल करते हैं, जिसमें मीटर, किलोग्राम और सेकंड जैसे सात मूल मात्रक हैं. किलो (×1000), सेंटी (÷100) और मिली (÷1000) जैसे उपसर्ग मात्रक को बड़ा या छोटा करते हैं. अच्छा माप शून्य से शुरू होता है, आँख निशान के ठीक ऊपर रखकर पढ़ा जाता है, और सबसे छोटे खाने (अल्पतमांक) जितना ही सटीक होता है. पूर्णांकित मान एक छोटी सीमा छिपाता है, जिसे ऊपरी और निचली सीमा बताती हैं.
2. Biology: Structure and function of living organisms
Cells and organisation · The skeletal and muscular systems · Nutrition and digestion · Gas exchange systems · Reproduction · Health
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
- कंकाल तंत्र – कंकाल शरीर का ढाँचा है; बड़े व्यक्ति में 206 हड्डियाँ होती हैं। इसके पाँच मुख्य कार्य हैं: सहारा और आकार, सुरक्षा, गति (मांसपेशियों के साथ), लाल अस्थि-मज्जा में रक्त कोशिकाएँ बनाना और कैल्शियम जैसे खनिज जमा करना। हड्डियाँ जोड़ों (संधि) पर मिलती हैं: कब्ज़ा जोड़ (कोहनी, घुटना) एक दिशा में मुड़ता है, कंदुक-खल्लिका जोड़ (कंधा, कूल्हा) हर दिशा में घूमता है। स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से, कंडरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, उपास्थि सिरों पर गद्दी है। मांसपेशियाँ सिर्फ़ खींचती हैं, इसलिए जोड़ी में काम करती हैं, जैसे बाइसेप्स और ट्राइसेप्स।
- मानव पाचन तंत्र और विषमपोषी पोषण – विषमपोषी जीव दूसरे जीवों से बना-बनाया भोजन लेते हैं। मनुष्य प्राणिसम (holozoic) पोषण करता है: पूरा भोजन खाकर एक लंबी नली, आहार नाल, में उसे तोड़ता है। दाँत, लार, आमाशय का अम्ल, एंज़ाइम, पित्त और अग्न्याशयी रस बड़े अणुओं को छोटा करते हैं, जिन्हें क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम रक्त में सोख लेते हैं।
- श्वसन: वायवीय, अवायवीय और मानव फेफड़े – श्वसन वह प्रक्रम है जिसमें कोशिका के अंदर भोजन (ज़्यादातर ग्लूकोज) टूटकर ऊर्जा देता है, जो ATP में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) ग्लूकोज पूरा टूटकर CO₂ और जल बनता है और बहुत ऊर्जा मिलती है; ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय) थोड़ी ऊर्जा मिलती है और एथेनॉल (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशी) बनता है। फेफड़ों की लाखों कूपिकाएँ रक्त तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
- स्वास्थ्य और रोग – स्वास्थ्य का मतलब है शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों में पूरी तरह ठीक होना, केवल बीमार न होना नहीं। संक्रामक रोग रोगाणुओं (जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटिस्ट) से होते हैं और हवा, पानी, भोजन, छूने या जानवरों से एक से दूसरे में फैलते हैं। हृदय रोग, मधुमेह, कई कैंसर और उच्च रक्तचाप जैसे असंक्रामक रोग नहीं फैलते; ये जीन, उम्र और जीवनशैली से जुड़े हैं। बचाव: स्वच्छता, साफ़ पानी, टीके, संतुलित आहार, व्यायाम, नींद, धूम्रपान से दूरी, नियमित जाँच और स्व-जाँच। एंटीबायोटिक जीवाणु मारते हैं, विषाणु नहीं; इनके ग़लत उपयोग से प्रतिरोधी जीवाणु पनपते हैं। दवा पर्चे या डॉक्टर के कहे अनुसार ही लें।
3. Biology: Material cycles and energy
Photosynthesis · Cellular respiration
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- श्वसन: वायवीय, अवायवीय और मानव फेफड़े – श्वसन वह प्रक्रम है जिसमें कोशिका के अंदर भोजन (ज़्यादातर ग्लूकोज) टूटकर ऊर्जा देता है, जो ATP में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) ग्लूकोज पूरा टूटकर CO₂ और जल बनता है और बहुत ऊर्जा मिलती है; ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय) थोड़ी ऊर्जा मिलती है और एथेनॉल (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशी) बनता है। फेफड़ों की लाखों कूपिकाएँ रक्त तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।
4. Biology: Interactions and interdependencies
Relationships in an ecosystem
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
5. Biology: Genetics and evolution
Inheritance, chromosomes, DNA and genes
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
6. Chemistry
The particulate nature of matter · Atoms, elements and compounds · Pure and impure substances · Chemical reactions · Energetics · The Periodic Table · Materials · Earth and atmosphere
- द्रव्य का कण मॉडल – हर द्रव्य बहुत छोटे कणों से बना है जो हमेशा गति करते रहते हैं। ठोस में कण पास-पास होते हैं और बस काँपते हैं; द्रव में पास होते हुए भी फिसलते हैं; गैस में दूर-दूर होकर हर दिशा में तेज़ भागते हैं। गरम करने पर कणों को ऊर्जा मिलती है: या तो वे तेज़ चलते हैं (तापमान बढ़ता है) या उनके बीच का खिंचाव टूटता है (अवस्था बदलती है, तापमान स्थिर रहता है)। गैस दाब कणों की दीवार से टक्कर से बनता है।
- परमाणु और अणु – रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न बनता है, न नष्ट होता है (द्रव्यमान संरक्षण), और यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक ही अनुपात में होते हैं (स्थिर अनुपात)। डाल्टन ने दोनों को समझाया: पदार्थ छोटे-छोटे परमाणुओं से बना है जो पूरी संख्याओं में जुड़ते हैं। परमाणु जुड़कर अणु बनाते हैं; आवेश वाले परमाणु या समूह आयन हैं। सूत्र संयोजकता को क्रॉस करके लिखते हैं। आण्विक द्रव्यमान (आयनिक यौगिक के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान) सूत्र के सभी परमाणु द्रव्यमानों का योग है, u में।
- मिश्रण और उनका पृथक्करण – मिश्रण में दो या ज़्यादा पदार्थ किसी भी अनुपात में मिले होते हैं और हर पदार्थ अपने गुण बनाए रखता है। समांगी मिश्रण (विलयन) हर जगह एक जैसा दिखता है, विषमांगी नहीं। कण के आकार से: विलयन (< 1 nm), कोलॉइड (1–1000 nm), निलंबन (> 1000 nm)। कोलॉइड प्रकाश फैलाता है (टिंडल प्रभाव)। सांद्रता बताती है कि विलयन में कितना विलेय है। मिश्रण को उसके हिस्सों के अंतर से अलग करते हैं: वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, ऊर्ध्वपातन, अपकेंद्रण और स्कंदन।
- रासायनिक अभिक्रियाएँ और समीकरण संतुलन – रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न बनते हैं, न नष्ट होते हैं; वे सिर्फ़ अपने साथी बदलते हैं। इसलिए समीकरण के दोनों ओर हर तत्व के परमाणु बराबर होने चाहिए। हम सूत्र के आगे की संख्या बदलकर संतुलन करते हैं, सूत्र को कभी नहीं बदलते।
- ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ – हर अभिक्रिया में ऊर्जा संरक्षित रहती है; वह सिर्फ़ रसायनों और परिवेश के बीच आती-जाती है। ऊष्माक्षेपी (exothermic) अभिक्रिया परिवेश को ऊर्जा देती है, तापमान बढ़ता है (जलना, उदासीनीकरण, श्वसन, हैंड वॉर्मर)। ऊष्माशोषी (endothermic) अभिक्रिया ऊर्जा लेती है, तापमान गिरता है (ऊष्मीय वियोजन, सिट्रिक अम्ल + सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट, प्रकाश-संश्लेषण, कोल्ड पैक)। अभिक्रिया प्रोफ़ाइल अभिकारक, उत्पाद और सक्रियण ऊर्जा दिखाती है। बंध तोड़ने में ऊर्जा लगती है, बनाने में निकलती है। ΔH = तोड़ने की ऊर्जा − बनाने में निकली ऊर्जा; ऋणात्मक हो तो ऊष्माक्षेपी।
- आवर्त सारणी: वर्ग, आवर्त और प्रवृत्तियाँ – आवर्त सारणी में तत्व परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन की संख्या) के क्रम में रखे जाते हैं। पंक्तियाँ आवर्त हैं; स्तंभ वर्ग (समूह) हैं। एक वर्ग के तत्वों में बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन बराबर होते हैं, इसलिए वे मिलती-जुलती अभिक्रिया करते हैं। मेंडलीफ़ ने शुरुआती सारणी बनाई, अज्ञात तत्वों के लिए खाली जगह छोड़ी और उनके गुण बताए। धातुएँ बाईं ओर और नीचे, अधातुएँ दाईं ओर और ऊपर। वर्ग 0 की उत्कृष्ट गैसों का बाहरी कोश भरा होता है, इसलिए वे अक्रियाशील हैं। वर्ग 1 की क्षार धातुएँ नीचे जाने पर ज़्यादा क्रियाशील होती हैं। वर्ग 7 (कई देशों में वर्ग 17) के हैलोजन नीचे जाने पर कम क्रियाशील होते हैं।
- धातु और अधातु: गुण और सक्रियता श्रेणी – धातुएँ आम तौर पर चमकदार, कठोर, आघातवर्ध्य, तन्य और ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुएँ मंद, भंगुर और कुचालक। धातुएँ क्षारकीय ऑक्साइड बनाती हैं, जल और तनु अम्ल से हाइड्रोजन देती हैं, और अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण के विलयन से बाहर निकाल देती है। सक्रियता के क्रम में लिखी सूची सक्रियता श्रेणी कहलाती है।
- पृथ्वी एक तंत्र: मंडल और ऊर्जा – पृथ्वी एक बड़ी मशीन जैसी है, जिसके पाँच हिस्से हैं: चट्टान (भूमंडल), पानी (जलमंडल), बर्फ (हिममंडल), हवा (वायुमंडल) और जीवन (जीवमंडल)। इस मशीन को सूर्य चलाता है। सूर्य की ऊर्जा कई तरह की किरणों में आती है, जिसे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। सूर्य पृथ्वी को बराबर गर्म नहीं करता, इसी से पवनें, समीर और महासागरीय धाराएँ बनती हैं। पानी, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मंडलों के बीच गोल-गोल घूमते हैं। इंसान अब इन चक्रों को बदल रहा है, इसलिए हमें पृथ्वी का ध्यान रखना है।
7. Physics: Energy
Calculation of fuel uses and costs · Energy changes and transfers · Changes in systems
- विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा – विद्युत शक्ति विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर है: P = VI = I²R = V²/R, मात्रक वाट। ऊर्जा = शक्ति × समय। घर में ऊर्जा किलोवाट-घंटा में मापते हैं: 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 10⁶ J। बिल = यूनिट × दर।
- ऊर्जा के भंडार और स्थानांतरण – ऊर्जा वह है जिससे कोई बदलाव होता है। ऊर्जा भंडारों में रहती है (रासायनिक, गतिज, गुरुत्वीय, प्रत्यास्थ, ऊष्मीय, चुंबकीय, स्थिरवैद्युत, नाभिकीय) और चार रास्तों से एक भंडार से दूसरे में जाती है: बल द्वारा कार्य, विद्युत धारा, ऊष्मा (तापन) और विकिरण (प्रकाश, ध्वनि)। ऊर्जा का मात्रक जूल (J) है। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है। कुछ ऊर्जा हमेशा ऊष्मा बनकर फैल जाती है, इसलिए कोई मशीन 100% दक्ष नहीं होती।
- कार्य, ऊर्जा और शक्ति – जब बल किसी वस्तु को खिसकाता है, तब कार्य होता है: W = F × s, मात्रक जूल (J)। ऊर्जा यानी कार्य करने की क्षमता। चलती वस्तु में गतिज ऊर्जा ½mv² होती है, ऊँचाई पर रखी वस्तु में स्थितिज ऊर्जा mgh। ऊर्जा न बनती है न नष्ट होती है, बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। शक्ति यानी कार्य कितनी जल्दी हुआ: P = W ÷ t, मात्रक वाट। उत्तोलक और घिरनी जैसी सरल मशीनें कम बल से भारी वस्तु उठाने में मदद करती हैं।
8. Physics: Motion and forces
Describing motion · Forces · Pressure in fluids · Balanced forces · Forces and motion
- गति: दूरी, चाल, वेग, त्वरण और ग्राफ़ – जब किसी चीज़ की जगह समय के साथ बदलती है, तो वह गति में है। दूरी पूरे रास्ते की लंबाई है (अदिश); विस्थापन शुरू से आख़िर तक की सीधी दूरी है, दिशा के साथ (सदिश)। चाल = दूरी ÷ समय; वेग = विस्थापन ÷ समय। त्वरण = वेग में बदलाव ÷ समय। s–t ग्राफ़ का ढाल वेग देता है, v–t ग्राफ़ का ढाल त्वरण, और v–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल दूरी। एकसमान त्वरण के लिए: v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as।
- बल: धक्का और खिंचाव – बल दो वस्तुओं के बीच का धक्का या खिंचाव है। इसका मात्रक न्यूटन (N) है। संपर्क बल में छूना ज़रूरी है (धक्का, घर्षण, अभिलंब बल, तनाव, उत्प्लावन); असंपर्क बल दूर से काम करते हैं (गुरुत्व, चुंबकीय, विद्युत)। बल को तीर से दिखाते हैं: शुरुआत = बल लगने का बिंदु, दिशा, लंबाई = परिमाण। बल चाल, दिशा या आकार बदल सकता है। बल संतुलित हों तो रुकी वस्तु रुकी रहती है (साम्यावस्था)। बल हमेशा जोड़े में होते हैं: A, B को धकेले तो B भी A को उतना ही उल्टा धकेलता है (न्यूटन का तीसरा नियम)।
- तरलों में दाब और पास्कल का नियम – तरल (द्रव या गैस) जिस सतह को छूता है, उस पर धक्का देता है। यह लंबवत बल ÷ क्षेत्रफल = दाब, P = F/A। गुरुत्व के कारण ऊपर के तरल का भार होता है, इसलिए गहराई के साथ दाब बढ़ता है: P = P₀ + ρgh। स्थिर द्रव में एक ही गहराई पर दाब बराबर होता है, बर्तन का आकार कुछ भी हो। पास्कल का नियम: बंद तरल पर लगाया गया अतिरिक्त दाब हर जगह बराबर पहुँचता है। हाइड्रॉलिक लिफ़्ट और ब्रेक इसी पर चलते हैं: छोटे पिस्टन पर छोटा बल, बड़े पिस्टन पर बड़ा बल, F = f × A/a।
- बल तथा गति के नियम – बल एक धक्का या खिंचाव है। संतुलित बल (नेट बल शून्य) गति नहीं बदलते; असंतुलित बल चाल या दिशा बदलता है। घर्षण फिसलने का विरोध करता है। पहला नियम: कोई चीज़ अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था में रहती है जब तक असंतुलित बल न लगे (जड़त्व; भारी चीज़ का जड़त्व ज़्यादा)। संवेग p = mv। दूसरा नियम: F = ma (संवेग बदलने की दर), 1 N = 1 kg m/s²। तीसरा नियम: बल जोड़ों में आते हैं, बराबर और उलटे, दो अलग चीज़ों पर। बाहरी बल न हो तो तंत्र के आंतरिक बल कट जाते हैं और कुल संवेग संरक्षित रहता है।
9. Physics: Waves
Observed waves · Sound waves · Energy and waves · Light waves
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
- प्रकाश: परावर्तन, अवशोषण और संचरण – प्रकाश सीधी रेखा में लगभग 3 × 10⁸ m/s की चाल से चलता है और उसे चलने के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं। किसी वस्तु पर पड़ने पर प्रकाश लौट सकता है (परावर्तन), सोखा जा सकता है (अवशोषण, वस्तु गर्म होती है) या आर-पार जा सकता है (संचरण)। चिकनी सतह पर आपतन कोण = परावर्तन कोण। काँच या पानी में जाते समय प्रकाश धीमा होकर मुड़ता है (अपवर्तन)। प्रिज़्म सफ़ेद प्रकाश को रंगों में बाँट देता है, और वस्तु का रंग वही है जो वह लौटाती है।
10. Physics: Electricity and electromagnetism
Current electricity · Static electricity · Magnetism
- विद्युत धारा, विभवांतर और विद्युत परिपथ – विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है: I = Q/t, मात्रक एम्पियर, इसे श्रेणी में लगे ऐमीटर से मापते हैं। विभवांतर एकांक आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में किया गया कार्य है: V = W/Q, मात्रक वोल्ट, इसे पार्श्व में लगे वोल्टमीटर से मापते हैं। धारा केवल बंद परिपथ में बहती है।
- स्थिर विद्युत (Static Electricity) – दो अलग चीज़ों को रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी पर चले जाते हैं। जो इलेक्ट्रॉन पाता है वह ऋण आवेशित होता है, जो खोता है वह धन आवेशित। आवेश बनता या मिटता नहीं, सिर्फ़ जगह बदलता है। समान आवेश एक-दूसरे को धकेलते हैं, असमान आवेश खींचते हैं। आवेशित वस्तु प्रेरण से उदासीन वस्तु को भी खींचती है। भूसंपर्कण से अतिरिक्त आवेश सुरक्षित ज़मीन में चला जाता है।
- विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव – जिस तार में विद्युत धारा बहती है, उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बन जाता है। सीधे तार के चारों ओर यह वृत्तों में होता है, वृत्ताकार लूप के केंद्र पर लगभग सीधा होता है, और परिनालिका के अंदर एकसमान होता है, जिससे परिनालिका छड़ चुंबक जैसी बन जाती है।
11. Physics: Matter
Physical changes · Particle model · Energy in matter
- द्रव्य के गुण – द्रव्य (matter) वह सब है जिसमें द्रव्यमान हो और जो जगह घेरे। कुछ गुण, जैसे द्रव्यमान और आयतन, मात्रा पर निर्भर करते हैं। कुछ गुण, जिन्हें विशिष्ट गुण कहते हैं, शुद्ध पदार्थ की हर मात्रा में एक जैसे रहते हैं और पदार्थ की पहचान कराते हैं: घनत्व (द्रव्यमान ÷ आयतन), गलनांक, क्वथनांक और विलेयता। भौतिक परिवर्तन (पिघलना, उबलना, घुलना) में नया पदार्थ नहीं बनता और कुल द्रव्यमान वही रहता है। रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है। ठोस और द्रव में कण पास-पास, गैस में दूर-दूर होते हैं, इसलिए गैस का घनत्व बहुत कम है; कणों की गति से विसरण और ब्राउनी गति समझ आती है।
- द्रव्य का कण मॉडल – हर द्रव्य बहुत छोटे कणों से बना है जो हमेशा गति करते रहते हैं। ठोस में कण पास-पास होते हैं और बस काँपते हैं; द्रव में पास होते हुए भी फिसलते हैं; गैस में दूर-दूर होकर हर दिशा में तेज़ भागते हैं। गरम करने पर कणों को ऊर्जा मिलती है: या तो वे तेज़ चलते हैं (तापमान बढ़ता है) या उनके बीच का खिंचाव टूटता है (अवस्था बदलती है, तापमान स्थिर रहता है)। गैस दाब कणों की दीवार से टक्कर से बनता है।
- आंतरिक ऊर्जा (Internal Energy) – हर चीज़ बहुत छोटे कणों से बनी है। कण हिलते-डुलते हैं (गतिज ऊर्जा) और आपस में बलों से बँधे रहते हैं (स्थितिज ऊर्जा)। सब कणों की इन ऊर्जाओं का कुल जोड़ आंतरिक ऊर्जा U है। गर्म करने पर U बढ़ती है: या तो कण तेज़ चलते हैं और तापमान बढ़ता है (Q = mcΔT), या बंधन टूटते हैं और अवस्था बदलती है, तापमान वही रहता है (Q = mL)। रगड़ना या दबाना (कार्य) भी U बढ़ाता है।
12. Physics: Space physics
Space physics
- सौरमंडल – सौरमंडल = सूर्य और वह सब कुछ जिसे उसका गुरुत्व थामे रखता है: 8 ग्रह, उनके चंद्रमा, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और धूल। भीतरी चार ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल) छोटे और चट्टानी हैं। क्षुद्रग्रह पट्टी के बाद विशाल ग्रह: गैस दानव बृहस्पति और शनि, हिम दानव यूरेनस और नेपच्यून। गुरुत्व ग्रहों को सूर्य की ओर खींचता है जबकि वे बगल में चलते हैं, इसलिए वे कक्षा में घूमते हैं; पास वाले तेज़ चलते हैं और उनका वर्ष छोटा होता है। यह सब लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल के घूमते बादल से बना।