प्रकाश कैसे चलता है
प्रकाश किसी स्रोत से आता है, जैसे सूरज, बल्ब या आग। ज़्यादातर चीज़ें स्रोत नहीं हैं। हम उन्हें इसलिए देखते हैं क्योंकि उन पर पड़कर प्रकाश हमारी आँख में आता है।
प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। इसे तीर वाली रेखा से दिखाते हैं, जिसे किरण कहते हैं।
प्रकाश एक तरंग है, पर ध्वनि और पानी की तरंगों से अलग:
- ध्वनि को चलने के लिए माध्यम (हवा, पानी, धातु) चाहिए। प्रकाश को नहीं; वह सूरज से धरती तक ख़ाली जगह पार करता है।
- प्रकाश बहुत तेज़ है: निर्वात में लगभग 3 × 10⁸ m/s। हवा में ध्वनि सिर्फ़ लगभग 340 m/s चलती है।
इसीलिए बिजली की चमक पहले दिखती है, गड़गड़ाहट बाद में सुनाई देती है।
परावर्तन, अवशोषण या संचरण
प्रकाश किसी वस्तु पर पड़े तो तीन बातें हो सकती हैं:
- परावर्तन (reflection): प्रकाश वापस लौट आता है। दर्पण और सफ़ेद काग़ज़ बहुत लौटाते हैं।
- अवशोषण (absorption): पदार्थ प्रकाश को सोख लेता है और गर्म हो जाता है। काली चीज़ें बहुत सोखती हैं।
- संचरण (transmission): प्रकाश आर-पार निकल जाता है। साफ़ काँच और पानी बहुत प्रकाश जाने देते हैं।
ज़्यादातर पदार्थ तीनों थोड़ा-थोड़ा करते हैं। साफ़ काँच लगभग 90% प्रकाश जाने देता है, फिर भी खिड़की में हल्का प्रतिबिंब दिखता है।
पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी
- पारदर्शी: प्रकाश सीधा आर-पार; साफ़ दिखता है (साफ़ काँच)।
- पारभासी: प्रकाश जाता है पर बिखर जाता है; धुँधला दिखता है (घिसा काँच, बटर पेपर)।
- अपारदर्शी: प्रकाश बिल्कुल नहीं जाता; छाया बनती है (लकड़ी, धातु)।
परावर्तन और दर्पण
जहाँ किरण सतह से टकराती है, वहाँ सतह पर 90° की एक रेखा खींचो। इसे अभिलंब (normal) कहते हैं।
- आपतन कोण (i): आती किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
- परावर्तन कोण (r): लौटती किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
परावर्तन का नियम: i = r।
चिकनी सतह (दर्पण, शांत पानी) पर नियमित परावर्तन होता है: सब किरणें एक ही दिशा में लौटती हैं, इसलिए प्रतिबिंब दिखता है। खुरदरी सतह (काग़ज़, दीवार) पर विसरित परावर्तन होता है: किरणें हर दिशा में बिखरती हैं, सतह दिखती है पर प्रतिबिंब नहीं।
समतल दर्पण का प्रतिबिंब बराबर आकार का, सीधा, दर्पण के उतना ही पीछे जितनी वस्तु आगे है, और दाएँ-बाएँ उल्टा होता है।
अपवर्तन, लेंस, आँख और पिनहोल कैमरा
काँच और पानी में प्रकाश हवा से धीमा चलता है। तिरछा घुसने पर वह मुड़ जाता है। इसे अपवर्तन कहते हैं।
- धीमे माध्यम में (हवा → काँच): अभिलंब की ओर मुड़ता है।
- तेज़ माध्यम में (काँच → हवा): अभिलंब से दूर मुड़ता है।
- अभिलंब के साथ-साथ (0°) आए तो धीमा होता है पर मुड़ता नहीं।
उत्तल लेंस (बीच में मोटा) किरणों को एक बिंदु, फ़ोकस, पर मिलाता है। अवतल लेंस (बीच में पतला) उन्हें फैलाता है।
पिनहोल कैमरा एक डिब्बा है जिसमें छोटा छेद होता है। किरणें सीधी छेद से गुज़रती हैं और पीछे उल्टा प्रतिबिंब बनाती हैं। हमारी आँख भी ऐसे ही काम करती है, पर उसमें तेज़ प्रतिबिंब के लिए लेंस है। प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है और दिमाग़ उसे सीधा समझ लेता है।
रंग और प्रिज़्म
सफ़ेद प्रकाश कई रंगों का मेल है। काँच का प्रिज़्म हर रंग को अलग मात्रा में मोड़ता है, इसलिए रंग फैलकर स्पेक्ट्रम बनाते हैं: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल (बैजनीहपीनाला)। लाल सबसे कम, बैंगनी सबसे ज़्यादा मुड़ता है। इसे विक्षेपण (dispersion) कहते हैं। इंद्रधनुष भी बारिश की बूँदों से ऐसे ही बनता है।
- वस्तु का रंग वही है जो वह लौटाती है। हरी पत्ती हरा लौटाती है, बाकी रंग सोख लेती है।
- सफ़ेद वस्तु सब रंग लौटाती है; काली वस्तु सब रंग सोख लेती है।
- फ़िल्टर सिर्फ़ अपने रंग को जाने देता है। लाल फ़िल्टर लाल को जाने देता है, बाकी सोख लेता है।
नीली रोशनी में लाल कमीज़ काली दिखती है: लौटाने के लिए उसे लाल रंग मिलता ही नहीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परावर्तन का नियम: आपतन कोण = परावर्तन कोण (i = r)
- निर्वात में प्रकाश की चाल ≈ 3 × 10⁸ m/s
- दूरी = चाल × समय
- परावर्तित % + अवशोषित % + संचरित % = 100%
हल किए गए उदाहरण
1. किरण दर्पण पर अभिलंब से 35° पर पड़ती है। परावर्तन कोण क्या है? आती और लौटती किरण के बीच कितना कोण है?
चरण 1: नियम से r = i = 35°। चरण 2: दोनों किरणों के बीच कोण = i + r = 35° + 35° = 70°।
2. किरण दर्पण की सतह से 20° का कोण बनाती है (अभिलंब से नहीं)। परावर्तन कोण निकालो।
चरण 1: अभिलंब सतह से 90° पर है। चरण 2: अभिलंब से कोण i = 90° − 20° = 70°। चरण 3: r = i = 70°।
3. सूरज का प्रकाश धरती तक लगभग 500 s में पहुँचता है। प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है। सूरज कितनी दूर है?
चरण 1: दूरी = चाल × समय। चरण 2: = 3 × 10⁸ × 500 = 1.5 × 10¹¹ m। चरण 3: यानी लगभग 15 करोड़ km।
4. एक खिड़की 88% प्रकाश जाने देती है और 4% सोखती है। कितना प्रतिशत लौटाती है?
चरण 1: तीनों मिलकर 100% होते हैं। चरण 2: परावर्तित = 100 − 88 − 4 = 8%।
5. लाल रोशनी में हरी टी-शर्ट काली क्यों दिखती है?
चरण 1: शर्ट सिर्फ़ हरा प्रकाश लौटाती है। चरण 2: लाल रोशनी में हरा है ही नहीं। चरण 3: शर्ट लाल को सोख लेती है, कुछ नहीं लौटाती, इसलिए काली दिखती है।
आम गलतियाँ
- कोण को दर्पण की सतह से नापना। कोण हमेशा अभिलंब से नापो।
- यह सोचना कि हमारी आँख से प्रकाश निकलता है। असल में प्रकाश वस्तु से हमारी आँख में आता है।
- यह सोचना कि अपवर्तन में प्रकाश हमेशा अभिलंब की ओर मुड़ता है। तेज़ माध्यम में जाते समय (काँच → हवा) वह दूर मुड़ता है।
- यह सोचना कि प्रिज़्म रंग बनाता है। रंग पहले से सफ़ेद प्रकाश में थे; प्रिज़्म सिर्फ़ उन्हें अलग करता है।