इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण: स्विच से चिप तक
विद्युत परिपथ धारा पहुँचाकर चीज़ें चलाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक परिपथ इससे आगे जाकर अर्धचालक पुर्ज़ों से धारा को नियंत्रित करते हैं। नियंत्रण हाथ के स्विच और रिले (स्विच हिलाने वाला विद्युत चुंबक) से शुरू हुआ, फिर निर्वात नलिकाएँ (1900 के दशक), ट्रांज़िस्टर (1947) और अंत में एकीकृत परिपथ (चिप) आए जिनमें अरबों ट्रांज़िस्टर होते हैं।
नियंत्रण तंत्र में इनपुट (स्विच, सेंसर), प्रक्रिया (ट्रांज़िस्टर, चिप) और आउटपुट (बत्ती, LED, मोटर, बज़र) होते हैं।
मुख्य पुर्ज़े और उनके प्रतीक
| पुर्ज़ा | काम | प्रतीक (वर्णन) |
|---|---|---|
| सेल / बैटरी | ऊर्जा (वोल्टेज) देती है | लंबी पतली रेखा (+) और छोटी मोटी रेखा (−); बैटरी में यह जोड़ा दोहराया जाता है |
| स्विच | रास्ता खोलता/बंद करता है | खाली जगह से ऊपर उठी रेखा |
| प्रतिरोधक | धारा सीमित करता है | छोटा आयत (कुछ किताबों में टेढ़ी-मेढ़ी रेखा) |
| परिवर्ती प्रतिरोधक / पोटेंशियोमीटर | बदलने योग्य प्रतिरोध, जैसे वॉल्यूम नॉब | आयत पर तीर |
| संधारित्र | आवेश जमा करता है | दो छोटी समांतर प्लेटें |
| डायोड | एक-तरफ़ा धारा | त्रिभुज जो एक पट्टी की ओर इशारा करता है |
| LED | रोशनी देने वाला डायोड | डायोड प्रतीक और बाहर जाते दो तीर |
| LDR / थर्मिस्टर | रोशनी / तापमान से प्रतिरोध बदलता है | प्रतिरोधक पर अंदर आते तीर / तिरछी रेखा |
| ट्रांज़िस्टर (NPN) | स्विच या प्रवर्धक | वृत्त में बेस रेखा; उत्सर्जक पर बाहर जाता तीर |
निष्क्रिय (passive) पुर्ज़े (प्रतिरोधक, संधारित्र, प्रेरक) ऊर्जा नहीं जोड़ते, प्रवर्धन नहीं करते। सक्रिय (active) पुर्ज़े (ट्रांज़िस्टर, चिप) पावर सप्लाई की मदद से नियंत्रण या प्रवर्धन करते हैं।
प्रतिरोधक और रंग कोड
प्रतिरोधक ओम के नियम से धारा तय करता है: I = V ÷ R। उसका मान रंगीन पट्टियों से लिखा होता है:
काला 0, भूरा 1, लाल 2, नारंगी 3, पीला 4, हरा 5, नीला 6, बैंगनी 7, धूसर 8, सफ़ेद 9। पहली और दूसरी पट्टी अंक, तीसरी पट्टी शून्यों की संख्या (गुणक), चौथी सहनशीलता (सुनहरी ±5%, चाँदी ±10%)।
उदाहरण: नारंगी–हरा–भूरा–सुनहरी = 3, 5, ×10 = 350 Ω ± 5%।
प्रतिरोधक की शक्ति रेटिंग भी होती है (अक्सर ¼ W)। शक्ति P = I²R इससे कम रहनी चाहिए, वरना वह गर्म हो जाएगा।
संधारित्र, डायोड, LED और ट्रांज़िस्टर
- संधारित्र: कुचालक से अलग की गई दो धातु प्लेटें। सप्लाई से जोड़ने पर आवेशित होता है और बाद में आवेश लौटाता है। उपयोग: चार्जर का आउटपुट समतल करना, समय-देरी (प्रतिरोधक के साथ, समय ≈ R × C), कैमरा फ़्लैश। मात्रक: फ़ैरड (F); सामान्य मान µF में। इलेक्ट्रोलिटिक संधारित्र की + और − टाँगें होती हैं।
- डायोड: धारा केवल एनोड से कैथोड (पट्टी वाला सिरा) की ओर जाने देता है। AC को DC में बदलने (दिष्टकरण) और उलटी लगी बैटरी से बचाने में काम आता है। चालू सिलिकॉन डायोड पर लगभग 0.7 V गिरता है।
- LED: चमकने वाला डायोड। इसे लगभग 2 V (लाल) से 3 V (नीली/सफ़ेद) और लगभग 10–20 mA चाहिए, और श्रेणी में प्रतिरोधक ज़रूर लगाना है। लंबी टाँग एनोड (+) है।
- ट्रांज़िस्टर: तीन टाँगें – बेस, संग्राहक (कलेक्टर), उत्सर्जक (एमिटर)। छोटी बेस धारा (सिलिकॉन NPN के बेस पर लगभग 0.7 V) से बहुत बड़ी कलेक्टर धारा बहने लगती है। स्विच (चालू/बंद) या प्रवर्धक (छोटे सिग्नल की बड़ी नकल) के रूप में।
एनालॉग और डिजिटल सिग्नल
एनालॉग सिग्नल एक सीमा में कोई भी मान ले सकता है, जैसे माइक्रोफ़ोन या तापमान सेंसर का बदलता वोल्टेज। डिजिटल सिग्नल के केवल दो स्तर हैं: 0 (निम्न) और 1 (उच्च)। प्रवर्धक एनालॉग परिपथ हैं; लॉजिक गेट और माइक्रोकंट्रोलर डिजिटल। एनालॉग-से-डिजिटल कनवर्टर एक को दूसरे में बदलता है।
परिपथ बनाना: ड्रॉइंग, सामग्री, सिम्युलेशन और सोल्डरिंग
- योजना: मानक प्रतीकों से परिपथ आरेख और पुर्ज़ों की सूची (मान, रेटिंग) बनाओ। तकनीकी दस्तावेज़ में बोर्ड लेआउट और वायरिंग ड्रॉइंग भी होती है।
- सिम्युलेट करो: मुफ़्त सर्किट-सिम्युलेशन सॉफ़्टवेयर में जाँचो, पुर्ज़े ख़रीदने से पहले धारा देखो।
- प्रोटोटाइप: पुर्ज़े ब्रेडबोर्ड में लगाओ; सोल्डर नहीं चाहिए, बदलना आसान।
- पक्का करो: पुर्ज़े स्ट्रिपबोर्ड या प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) पर लगाकर सोल्डर करो।
सामग्री: चालक (ताँबे के तार और ट्रैक, टिन चढ़ी टाँगें), कुचालक (PVC आवरण, फ़ाइबरग्लास बोर्ड, हीट-श्रिंक ट्यूब), सोल्डर (टिन आधारित मिश्रधातु, आजकल सीसा-रहित) जिसके अंदर फ़्लक्स होता है। बोर्ड में छेद और कटाई की जाती है; तार छीले, काटे और क्रिम्प किए जाते हैं।
सोल्डरिंग के चरण: गर्म टिप (लगभग 330 °C) को साफ़ करके टिन करो → टिप को पैड और टाँग पर साथ में 1–2 s रखो → सोल्डर जोड़ पर लगाओ, आयरन पर नहीं → पहले सोल्डर हटाओ, फिर आयरन → अच्छा जोड़ चमकीला और छोटे शंकु जैसा होता है → बची टाँग काटो।
सुरक्षा: आयरन को स्टैंड पर रखो, हवादार जगह में काम करो (फ़्लक्स का धुआँ), टाँग काटते समय आँखों की सुरक्षा पहनो, टिप को कभी मत छुओ, काम के बाद प्लग निकालो, और घर की मेन बिजली पर कभी काम मत करो।
करके देखो: एक LED परिपथ
9 V बैटरी, एक लाल LED और कुछ प्रतिरोधकों (या 3D फ़्री-प्ले) से: I = (9 − 2) ÷ R से 330 Ω, 470 Ω और 1 kΩ के लिए धारा का अनुमान लगाओ। कौन सबसे चमकीली? कौन सबसे सुरक्षित? अब LED उलटी लगाओ: क्या होता है और क्यों?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ओम का नियम: V = I × R
- LED का श्रेणी प्रतिरोध: R = (V_सप्लाई − V_LED) ÷ I_LED
- शक्ति: P = V × I = I² × R
- रंग कोड: अंक, अंक, × 10^(तीसरी पट्टी), सहनशीलता
- RC समय: समय ≈ R × C (सेकंड, R ओम में, C फ़ैरड में)
हल किए गए उदाहरण
1. प्रतिरोधक पढ़ो: पीला–बैंगनी–लाल–सुनहरी।
4, 7, ×10² → 4700 Ω = 4.7 kΩ, ±5%।
2. लाल LED (2 V, 20 mA) को 9 V बैटरी से चलाना है। कितना प्रतिरोध चाहिए?
R = (9 − 2) ÷ 0.02 = 7 ÷ 0.02 = 350 Ω। अगला मानक मान 390 Ω लगाओ।
3. 5 V सप्लाई और 150 Ω प्रतिरोधक से 2 V LED में कितनी धारा बहेगी?
I = (5 − 2) ÷ 150 = 3 ÷ 150 = 0.02 A = 20 mA।
4. उदाहरण 2 का 350 Ω प्रतिरोधक कितनी शक्ति लेता है? क्या ¼ W का प्रतिरोधक ठीक है?
P = I²R = 0.02² × 350 = 0.0004 × 350 = 0.14 W। हाँ, 0.14 W < 0.25 W।
5. 100 µF संधारित्र 10 kΩ प्रतिरोधक से आवेशित होता है। देरी लगभग कितनी?
t ≈ R × C = 10 000 × 0.0001 = 1 s।
6. शाम को अपने-आप जलने वाली स्ट्रीट लाइट में इनपुट, प्रक्रिया और आउटपुट पुर्ज़े बताओ।
इनपुट: LDR (अँधेरे में प्रतिरोध बढ़ता है)। प्रक्रिया: ट्रांज़िस्टर जो बेस वोल्टेज बढ़ने पर चालू होता है। आउटपुट: रिले और बत्ती (या LED)।
आम गलतियाँ
- LED को बिना प्रतिरोधक सीधे बैटरी से जोड़ना; बहुत ज़्यादा धारा से वह जल जाती है।
- डायोड, LED या इलेक्ट्रोलिटिक संधारित्र उलटा लगाना; इनका + और − सिरा होता है।
- रंग कोड ग़लत सिरे से पढ़ना; सहनशीलता पट्टी (सुनहरी/चाँदी) दाईं ओर रखो।
- सोल्डर को आयरन की टिप पर पिघलाकर जोड़ पर टपकाना; इससे फीका 'ड्राई जॉइंट' बनता है जो ठीक से नहीं जोड़ता।