South 중학교 2학년 Technology and Home Economics
अध्याय: 4
1. Human development and self-directed life
Self-esteem and identity · Food and clothing for growing teens · Nutrition in adolescence · Clothing design and self-image · Handling stress, anger, low mood · Teen addictions · Lifelong career design · Sexual self-determination · Healthy peer relationships · Diverse modern families · Resolving relationship conflicts · Preventing sexual and domestic violence
- आत्म-पहचान: मैं कौन हूँ और उसे कैसे जिऊँ? – पहचान ख़ुद के बारे में तुम्हारा बोध है: तुम्हारी भूमिकाएँ, मूल्य, ताक़तें और सपने। हम आत्म-चिंतन से ख़ुद को जानते हैं। आत्म-सम्मान यह है कि हम ख़ुद को कितना मूल्यवान मानते हैं। मज़बूत नैतिक पहचान का मतलब है कि हमारे काम हमारे मूल्यों से मेल खाते हैं।
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
- वस्त्र: हम कपड़े क्यों पहनते हैं, वे किससे बनते हैं और कैसे चुनें – कपड़े हमें धूप, बारिश और ठंड से बचाते हैं, शालीनता देते हैं, पहचान दिखाते हैं (वर्दी, साड़ी या कोरिया का हानबोक जैसी पारंपरिक पोशाक) और हमें अपनी पसंद दिखाने देते हैं। ये रेशों से बनते हैं: पौधों से (सूती, लिनन) और जानवरों से (ऊन, रेशम) मिलने वाले प्राकृतिक रेशे, और पेट्रोलियम से बने कृत्रिम रेशे (पॉलिएस्टर, नायलॉन)। रेशों को कातकर धागा बनता है, और धागे से बुनाई (ऊपर-नीचे) या निटिंग (फंदे) से कपड़ा। डिज़ाइन में रेखा, रंग, आकार और बनावट होती है। समझदार ख़रीदार वॉर्डरोब की योजना बनाता है, फ़िटिंग, क्वालिटी और केयर लेबल देखता है, दुकानों की तुलना करता है, प्रति पहनावा लागत निकालता है, और टिकाऊ विकल्प चुनता है: कम ख़रीदो, मरम्मत करो, अदला-बदली करो, रीसायकल करो।
- मानसिक स्वास्थ्य: भावनाएँ, तनाव और सहारा – मानसिक स्वास्थ्य यानी हम कैसे सोचते, महसूस करते, मुश्किलें सँभालते और दूसरों से जुड़ते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य की तरह यह सबके पास है और ऊपर-नीचे होता है। भावनाएँ काम के संकेत हैं। तनाव बाल्टी में पानी की तरह जमा होता है; अच्छे तरीके (नींद, व्यायाम, बात करना, धीमी साँस, योजना) उसे बाहर निकालते हैं। आत्म-सम्मान और अच्छे रिश्ते हमें बचाते हैं। अगर भारी भावनाएँ दो हफ़्ते या ज़्यादा रहें, या रोज़ का जीवन रुकने लगे, तो भरोसेमंद बड़े या विशेषज्ञ से बात करें — मदद माँगना हिम्मत है।
- लत: कैसे शुरू होती है और कैसे बचें – लत (addiction) यानी किसी पदार्थ या आदत पर नियंत्रण खो देना, नुकसान होने पर भी। यह पदार्थों (तंबाकू, शराब, ड्रग्स, ग़लत दवाएँ) की हो सकती है या व्यवहार (गेमिंग, जुआ, सोशल मीडिया) की। हर बार दिमाग़ में डोपामिन की उछाल उसे काम दोहराना सिखाती है; समय के साथ सहनशीलता बढ़ती है और ज़्यादा चाहिए होता है। चेतावनी संकेत: तलब, नियंत्रण खोना, मजबूरी और नुकसान के बाद भी जारी रखना। बचाव: 'ना' कहने का हुनर, अच्छे इनाम, नींद-दिनचर्या और जल्दी मदद माँगना। लत का इलाज संभव है।
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
- सम्मान, सहमति और लैंगिक समानता: किशोरों के लिए यौन-नैतिकता – यौन-नैतिकता का मतलब है अपने शरीर और दूसरे लोगों के साथ सम्मान से पेश आना। सहमति साफ़, अपनी मर्ज़ी की और जानकारी वाली होनी चाहिए, और कभी भी बदली जा सकती है। दबाव, डर या ताक़त के कारण कही "हाँ" मान्य नहीं है। हर लिंग के व्यक्ति के अधिकार बराबर हैं और कोई भी भरोसेमंद बड़े से मदद माँग सकता है।
- पारिवारिक नैतिकता: परिवार के साथ अच्छे से जीना – परिवार ऐसे लोगों का समूह है जो साथ रहते हैं, एक-दूसरे की देखभाल करते हैं और एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। परिवार कई तरह के होते हैं: एकल, संयुक्त, एकल-अभिभावक, मिश्रित, दंपति, दादा-दादी वाले। पारिवारिक नैतिकता का मतलब है सदस्यों का एक-दूसरे से निष्पक्ष और प्यार भरा व्यवहार: बराबर सम्मान, काम का बँटवारा, ईमानदार बातचीत, बच्चों और बुज़ुर्गों की देखभाल। अच्छा दांपत्य संबंध स्वतंत्र चुनाव, भरोसे और बराबरी पर टिका है। हर परिवार में समस्याएँ आती हैं; अच्छी बातचीत, बँटवारा और बाहर की मदद से परिवार उबरता है।
- सुरक्षा शिक्षा: घर, सड़क और लोगों के बीच सुरक्षित रहना – सुरक्षा का मतलब है खतरे को जल्दी पहचानना और नुकसान से पहले कदम उठाना। जोखिम = संभावना × नुकसान। आग में निकास साफ़ रखो और सीढ़ी लो, सड़क पर नियम मानो और हेलमेट या सीट बेल्ट पहनो, हाथ धोओ और दवा सही लो, और किसी असुरक्षित हालत में: ना कहो, दूर जाओ, भरोसेमंद बड़े को बताओ।
2. Living environment and sustainable choices
Life resources and their cycle · Balanced meals using Korean dietary guides · Choosing and storing food safely · Planning and cooking sustainable meals · Clothing materials and care · Sustainable clothing plans · Changing meaning of housing · Healthy living environments · Organising living space · Production and disposal of goods · Changing consumer environment · Teen consumer decisions · Consumer rights and responsibilities · Digital living and its changes
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
- खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता – खाने में बहुत छोटे जीव (जीवाणु, विषाणु, फफूँद) हो सकते हैं जो हमें बीमार करते हैं। चार आदतें खाना सुरक्षित रखती हैं: साफ़ रखो (हाथ, बर्तन, जगह), अलग रखो (कच्चा और खाने को तैयार), अच्छी तरह पकाओ (बीच में कम से कम 75 °C) और ठंडा रखो (5 °C या कम)। 5–60 °C के ख़तरे के क्षेत्र में जीवाणु सबसे तेज़ बढ़ते हैं, हर 20 मिनट में दोगुने तक। खाद्य उद्योग HACCP योजना और सफ़ाई के नियम अपनाते हैं।
- वस्त्र: हम कपड़े क्यों पहनते हैं, वे किससे बनते हैं और कैसे चुनें – कपड़े हमें धूप, बारिश और ठंड से बचाते हैं, शालीनता देते हैं, पहचान दिखाते हैं (वर्दी, साड़ी या कोरिया का हानबोक जैसी पारंपरिक पोशाक) और हमें अपनी पसंद दिखाने देते हैं। ये रेशों से बनते हैं: पौधों से (सूती, लिनन) और जानवरों से (ऊन, रेशम) मिलने वाले प्राकृतिक रेशे, और पेट्रोलियम से बने कृत्रिम रेशे (पॉलिएस्टर, नायलॉन)। रेशों को कातकर धागा बनता है, और धागे से बुनाई (ऊपर-नीचे) या निटिंग (फंदे) से कपड़ा। डिज़ाइन में रेखा, रंग, आकार और बनावट होती है। समझदार ख़रीदार वॉर्डरोब की योजना बनाता है, फ़िटिंग, क्वालिटी और केयर लेबल देखता है, दुकानों की तुलना करता है, प्रति पहनावा लागत निकालता है, और टिकाऊ विकल्प चुनता है: कम ख़रीदो, मरम्मत करो, अदला-बदली करो, रीसायकल करो।
- आवास: घर हमारी ज़रूरतें कैसे पूरी करते हैं और कैसे बदलते हैं – आवास यानी वह जगह जहाँ लोग रहते हैं। अच्छा घर आश्रय, सुरक्षा, निजता, सेहत और अपनेपन का एहसास देता है। घर का रूप जलवायु, स्थानीय सामग्री, संस्कृति, पैसे और परिवार के रहन-सहन से तय होता है। अंदर की जगह निजी, साझा और सेवा हिस्सों में बँटी होती है। स्वस्थ घर में ताज़ी हवा, धूप और कम सीलन होती है, और वह साफ़-सुथरा व व्यवस्थित रहता है। समाज बदलने के साथ आवास भी बदलता है: आँगन वाले पारंपरिक घरों से शहर के अपार्टमेंट और भविष्य के हरित, स्मार्ट और साझा घरों तक। सबको अच्छा और सस्ता घर मिलना एक ज़रूरी सामाजिक मुद्दा है।
- उपभोक्ता शिक्षा: समझदार ख़रीदार कैसे बनें – जो भी सामान या सेवा ख़रीदता या इस्तेमाल करता है, वह उपभोक्ता है। समझदार ख़रीदारी ज़रूरत (जो चाहिए ही) और इच्छा (जो अच्छा लगे) को अलग करने से शुरू होती है। विवेकपूर्ण उपभोग लाभ और क़ीमत की तुलना करता है, अवसर लागत (वही पैसा और किस काम आता) गिनता है और बजट में रहता है। विक्रेता मनोविज्ञान का इस्तेमाल करते हैं: एंकर क़ीमत (बड़ी कटी क़ीमत), भेड़चाल ('सबके पास है'), जल्दबाज़ी (उलटी गिनती), 99 वाली क़ीमतें और सेलिब्रिटी विज्ञापन; किशोर ऑनलाइन बड़े निशाने पर हैं। 'मैं सहमत हूँ' दबाना अनुबंध है, इसलिए शर्तें, ऑटो-रिन्यूअल, रद्द और रिफ़ंड नियम पढ़ें। लेबल पढ़ें: प्रति इकाई क़ीमत, एक्सपायरी, सामग्री, एलर्जन, पोषण और सुरक्षा निशान। उपभोक्ता के अधिकार हैं (सुरक्षा, सूचना, चुनाव, सुनवाई, निवारण, शिक्षा, बुनियादी ज़रूरतें, स्वच्छ पर्यावरण) और कर्तव्य भी (बिल रखना, निशान जाँचना, सही शिकायत, टिकाऊ ख़रीदारी)। मिलकर उपभोक्ता संस्कृति तय करते हैं: हम जो ख़रीदते हैं, वही बनता है।
- डिजिटल पदचिह्न और नेट शिष्टाचार – डिजिटल पदचिह्न वह डेटा का निशान है जो हम ऑनलाइन छोड़ते हैं। सक्रिय पदचिह्न जान-बूझकर साझा होते हैं (पोस्ट, कमेंट, फ़ॉर्म); निष्क्रिय पदचिह्न हमारी जानकारी के बिना इकट्ठे होते हैं (कुकीज़, ब्राउज़िंग हिस्ट्री, लोकेशन, IP पता)। ये मिटाना कठिन है और बाद में दूसरे देख सकते हैं। हम डिजिटल समाज में रहते हैं जहाँ पढ़ाई, बैंकिंग, ख़रीदारी और सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हैं; इसका ज़िम्मेदार उपयोगकर्ता डिजिटल नागरिक (नेटिज़न) है। नेट शिष्टाचार: नैतिक (कॉपीराइट मानें, भरोसेमंद जानकारी), सम्मानजनक (निजता, विविधता, बुलिंग नहीं) और ज़िम्मेदार (ज़्यादा निजी बातें नहीं, ट्रोल को जवाब नहीं)। संचार शिष्टाचार: सटीक, विनम्र, विश्वसनीय; सोशल मीडिया शिष्टाचार: सोच-समझकर पासवर्ड और प्राइवेसी, अपलोड से पहले सोचें, साझा करने से पहले जाँचें।
3. Technological problem-solving and innovation
What technology is and its social effects · Standards and appropriate technology · Technological problem-solving process · Visualising solutions and drawings · Invention process · Intellectual property · Materials and their properties · Technical drawing conventions · Making products with tools · Eco-friendly energy resources · Solving energy problems · Transport and logistics systems · Solving transport problems
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज: खोजें हमारा जीवन कैसे बदलती हैं – विज्ञान पता लगाता है कि प्रकृति कैसे काम करती है; प्रौद्योगिकी (तकनीक) उस ज्ञान से औज़ार बनाती और समस्याएँ सुलझाती है। समाज भी विज्ञान को दिशा देता है: सवाल पूछकर, शोध के लिए पैसा देकर और नियम बनाकर। छापाख़ाना, भाप इंजन, बिजली, टीके और इंटरनेट ने काम करने, जीने और सोचने का तरीक़ा बदल दिया। हर तकनीक के लाभ और जोखिम दोनों होते हैं। सही फ़ैसले के लिए हम प्रमाण देखते हैं, लाभ और जोखिम तौलते हैं, पूछते हैं किसे फ़ायदा और किसे नुक़सान, नैतिकता और भविष्य सोचते हैं, और सुरक्षा नियम अपनाते हैं।
- उचित तकनीक (Appropriate Technology) – उचित तकनीक वह औज़ार या तरीक़ा है जो उसे इस्तेमाल करने वाले लोगों, जगह और पैसे के हिसाब से ठीक बैठे। यह अक्सर सरल, सस्ती, गाँव में ही ठीक हो सकने वाली और पर्यावरण के लिए अच्छी होती है। सबसे अच्छी तकनीक हमेशा सबसे नई या सबसे बड़ी नहीं होती। हम लागत, हुनर, मरम्मत, ऊर्जा, पर्यावरण और ज़रूरत देखकर चुनते हैं।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- तकनीकी ड्राइंग: डिज़ाइन के विचार बताना – तकनीकी ड्राइंग एक साझा चित्र-भाषा है जो किसी वस्तु का सही आकार और माप दिखाती है। डिज़ाइनर हाथ से स्केच से शुरू करते हैं, फिर आइसोमेट्रिक या तिर्यक (ऑब्लीक) दृश्य से वस्तु को 3D में दिखाते हैं, और ऑर्थोग्राफ़िक प्रक्षेप (सामने, ऊपर, बगल के दृश्य) में मानक रेखाएँ, मिलीमीटर में माप और स्केल लगाते हैं ताकि कोई भी उसे बना सके। आज ज़्यादातर ड्राइंग CAD सॉफ़्टवेयर से बनती हैं।
- डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार – बौद्धिक संपदा (IP) मन की रचना है, जैसे कहानी, गीत, प्रोग्राम, आविष्कार या लोगो। बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) निर्माता को उसके उपयोग पर नियंत्रण देते हैं। कॉपीराइट रचनात्मक कार्य (लेख, संगीत, कला, सॉफ़्टवेयर कोड) को बनते ही अपने-आप बचाता है; पेटेंट नए, उपयोगी आविष्कार को लगभग 20 साल बचाता है और इसके लिए आवेदन करना पड़ता है; ट्रेडमार्क ब्रांड नाम, लोगो और नारे बचाता है। साहित्यिक चोरी दूसरे का काम बिना श्रेय अपना बताना है। उल्लंघन सुरक्षित IP को बिना अनुमति इस्तेमाल करना है। सार्वजनिक लाइसेंस से निर्माता अपनी शर्तों पर साझा करते हैं: रचनात्मक कार्यों के लिए क्रिएटिव कॉमन्स (BY, SA, NC, ND), और सॉफ़्टवेयर के लिए GPL (कॉपीलेफ़्ट: बदला संस्करण खुला रहे) और Apache (उदार: नोटिस रखकर बंद उत्पाद में भी)।
- सामग्री और उनके गुण (Materials) – हम जो कुछ बनाते हैं वह सामग्री से बनता है: लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, काँच, सिरेमिक, कपड़ा और कंपोज़िट. हर सामग्री के गुण होते हैं: मज़बूती, कड़ापन, कठोरता, लचीलापन, घनत्व, ऊष्मा और विद्युत चालन, पारदर्शिता, जलरोधिता और लागत. डिज़ाइनर काम के हिसाब से सामग्री चुनते हैं, सोचते हैं कि उसे कैसे आकार दें और जोड़ें (पेंच, कील, गोंद, वेल्डिंग, सोल्डरिंग, सिलाई), और सुरक्षा, लागत व पर्यावरण का ध्यान रखते हैं. कपड़े प्राकृतिक रेशों (सूती, ऊन, रेशम) और कृत्रिम रेशों (पॉलिएस्टर, नायलॉन) से बनते हैं.
- चीज़ें बनाना: विचार से प्रोटोटाइप तक – कोई चीज़ बनाने के लिए हम योजना बनाते हैं, सामान चुनते हैं, नापकर निशान लगाते हैं, काटते हैं, जोड़ते हैं, सजाते-चमकाते हैं, जाँचते हैं और फिर सुधारते हैं। पहला चलने वाला नमूना प्रोटोटाइप कहलाता है। हर क़दम में सही औज़ार सुरक्षित तरीक़े से चलता है। जाँच बताती है क्या बदलना है, और अच्छा बनाने वाला यह चक्र तब तक दोहराता है जब तक चीज़ बढ़िया न चले।
- ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत – अनवीकरणीय स्रोत (कोयला, तेल, गैस, यूरेनियम) प्रकृति के बनाने से तेज़ खर्च होते हैं, और जीवाश्म ईंधन CO₂ छोड़ते हैं। नवीकरणीय स्रोत प्रकृति फिर से भरती है: सौर (फ़ोटोवोल्टिक सेल और सौर तापन), पवन (P ∝ v³), जलविद्युत (P = η ρ g h Q), ज्वारीय, भूतापीय और जैव भार। हाइड्रोजन ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली और पानी बनाता है। धूप और हवा बदलती रहती हैं, इसलिए भंडारण (बैटरी, पंप किया पानी) और कई स्रोतों का मिश्रण चाहिए। हर स्रोत की कुछ क़ीमत है: ज़मीन, सामग्री, लागत और प्रकृति पर असर।
- परिवहन प्रौद्योगिकी: लोगों और सामान को ले जाना – परिवहन प्रौद्योगिकी लोगों और सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है। हर परिवहन तंत्र के पाँच हिस्से होते हैं: वाहन, रास्ता (सड़क, रेल, समुद्री मार्ग, हवाई मार्ग), टर्मिनल (स्टेशन, बंदरगाह, हवाई अड्डा), शक्ति का स्रोत और नियंत्रण। ज़मीन पर वाहन घर्षण (friction) से आगे बढ़ते हैं। जहाज़ उत्प्लावन बल (buoyancy) से तैरता है। विमान तब उड़ता है जब उत्थापक बल (lift) भार से और प्रणोद (thrust) कर्षण (drag) से ज़्यादा हो। रॉकेट गैस को पीछे फेंकता है और ख़ुद आगे जाता है। रुकने की दूरी = सोचने की दूरी + ब्रेक लगने की दूरी। भविष्य का परिवहन साफ़, सुरक्षित और स्मार्ट होगा: इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहन, मैग्लेव ट्रेन, ड्रोन और बिना ड्राइवर की कारें।
4. Sustainable technology and convergence
Construction technology and structures · Planning to maintaining structures · Sustainable building design · Electrical and electronic parts · ICT and AI applications · Solving ICT and AI problems · Machine elements and power transmission · Building a mechanism · Robots, control and automation · Medical technology · Biotechnology problems · Challenging attitude to technology · Empathetic problem solving
- निर्माण तकनीक: इमारतें कैसे योजना बनाकर बनती हैं – निर्माण तकनीक यह ज्ञान है कि ढाँचों की योजना कैसे बनाएँ, उन्हें कैसे बनाएँ, फ़िनिश करें और सँभालें। इमारत में नींव, ढाँचा (स्तंभ और बीम), दीवारें और छत होती हैं। हर भार (इमारत का अपना स्थिर भार, लोगों-फ़र्नीचर का सजीव भार, हवा और बर्फ़) एक साफ़ रास्ते से मिट्टी तक जाना चाहिए। कंक्रीट दबाव में मज़बूत है, स्टील खिंचाव में, इसलिए आरसीसी दोनों को जोड़ता है। कारीगर पैमाने वाले नक्शे (प्लान, एलिवेशन, सेक्शन) पढ़ते हैं, गणित से क्षेत्रफल-आयतन निकालते हैं, भवन कोड मानते हैं और पानी, बिजली, हवा के तंत्र लगाते हैं।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स: पुर्ज़े और परिपथ – इलेक्ट्रॉनिक्स में छोटे पुर्ज़े विद्युत धारा को नियंत्रित करते हैं। बैटरी या पावर सप्लाई ऊर्जा देती है; स्विच रास्ता खोलता या बंद करता है। प्रतिरोधक धारा सीमित करता है (V = IR), संधारित्र आवेश जमा करता है और सिग्नल को समतल या धीमा कर सकता है, डायोड धारा को एक ही दिशा में जाने देता है, LED रोशनी देने वाला डायोड है, और ट्रांज़िस्टर छोटी बेस धारा से बहुत बड़ी धारा को चालू करता या बढ़ाता है। हर पुर्ज़े का मानक प्रतीक है। परिपथ पहले काग़ज़ या सिम्युलेटर में बनाते हैं, ब्रेडबोर्ड पर आज़माते हैं, और बोर्ड पर सोल्डर करके पक्का करते हैं। एनालॉग परिपथ लगातार बदलते सिग्नल, डिजिटल परिपथ केवल चालू/बंद सिग्नल सँभालते हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): मशीनें सोचना कैसे सीखती हैं – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) कंप्यूटर प्रणाली की वह क्षमता है जिससे वह ऐसे काम करती है जिनमें आम तौर पर इंसानी दिमाग़ लगता है: देखना, बोली समझना, फ़ैसला करना और सीखना। AI प्रणाली एक एजेंट है जो महसूस करती है, सोचती है और काम करती है। पुरानी AI इंसानों के लिखे नियमों पर चलती थी। आज की AI ज़्यादातर मशीन लर्निंग से चलती है: वह ढेर सारे लेबल वाले उदाहरणों (डेटा) से ख़ुद नियम ढूँढती है। न्यूरल नेटवर्क सरल इकाइयों की परतें हैं जिनकी कड़ियों की ताकत (भार) प्रशिक्षण में बदलती है। AI नक्शों, अनुवाद, स्वास्थ्य, खेती और खेलों में काम आती है। एकतरफ़ा डेटा से यह ग़लत या पक्षपाती हो सकती है, इसलिए इंसान को इसे जाँचना, निजता बचाना और ज़िम्मेदार रहना चाहिए।
- यांत्रिकी: मशीनें गति और बल को कैसे बदलती हैं – यांत्रिकी (mechanism) एक इनपुट गति और बल लेकर अलग आउटपुट गति और बल देती है। गति चार तरह की होती है: घूर्णी, रेखीय, प्रत्यागामी और दोलनी। उत्तोलक आलंब पर घूमता है; यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास। गियर और घिरनी घूमने की गति आगे पहुँचाते हैं; गियर अनुपात = चालित दाँते ÷ चालक दाँते, और आउटपुट चाल = इनपुट चाल ÷ गियर अनुपात। आपस में फँसे गियर उल्टी दिशा में घूमते हैं; बेल्ट से दिशा वही रहती है। कैम, क्रैंक-स्लाइडर और रैक-पिनियन घूर्णी गति को सीधी या आगे-पीछे की गति में बदलते हैं। यांत्रिकी चाल के बदले बल देती है: जितना काम डालोगे, उससे ज़्यादा कभी नहीं मिलेगा।
- रोबोटिक्स: रोबोट कैसे महसूस करता, सोचता और काम करता है – रोबोट एक मशीन है जो आसपास को महसूस करती है, प्रोग्राम से फ़ैसला लेती है और मोटरों से काम करती है। इसमें ढाँचा, सेंसर, कंट्रोलर, एक्चुएटर, गियर जैसा संचरण और बिजली का स्रोत होता है। रोबोट कारख़ानों, अस्पतालों, खेतों, घरों और अंतरिक्ष में मदद करते हैं।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।