यांत्रिकी क्या है?
यांत्रिकी (mechanism) पुर्ज़ों का ऐसा समूह है जो आपके दिए इनपुट (गति और बल) को मनचाहे आउटपुट (दूसरी गति या बल) में बदलता है। इसे तंत्र की तरह लिखते हैं: इनपुट → प्रक्रिया → आउटपुट।
यांत्रिकी तीन काम कर सकती है:
- गति का प्रकार बदलना (जैसे घूमने को सरकने में);
- बल या चाल का आकार बदलना;
- गति की दिशा बदलना।
गति के चार प्रकार
- घूर्णी (rotary): गोल घेरे में घूमना (पहिया, पंखा)।
- रेखीय (linear): एक दिशा में सीधी रेखा में चलना (सीधी पटरी पर रेल, दराज़)।
- प्रत्यागामी (reciprocating): सीधी रेखा में आगे-पीछे (आरी, सिलाई मशीन की सुई, इंजन का पिस्टन)।
- दोलनी (oscillating): चाप पर इधर-उधर झूलना (लोलक, झूला)।
उत्तोलक और यांत्रिक लाभ
उत्तोलक (lever) एक मज़बूत छड़ है जो आलंब (fulcrum) पर घूमती है। आप प्रयास (effort) लगाते हैं; उत्तोलक भार (load) हिलाता है।
- प्रथम श्रेणी: आलंब बीच में (सी-सॉ, कैंची, सब्बल)।
- द्वितीय श्रेणी: भार बीच में (हथठेला, सरौता, बोतल खोलने वाला)।
- तृतीय श्रेणी: प्रयास बीच में (चिमटी, मछली की बंसी, हमारी बाँह)।
आघूर्ण संतुलित होते हैं: प्रयास × प्रयास भुजा = भार × भार भुजा। यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास। यह 1 से ज़्यादा हो तो बल बढ़ता है, पर हाथ को भार से ज़्यादा दूरी चलनी पड़ती है। वेग अनुपात = प्रयास की दूरी ÷ भार की दूरी।
गियर, गियर-श्रृंखला और घिरनी
गियर दाँतों वाले पहिए हैं। जिसे आप घुमाते हैं वह चालक (driver), और जो घूमता है वह चालित (driven)। फँसे हुए दो गियर उल्टी दिशा में घूमते हैं। बीच में छोटा आइडलर गियर लगाने से चालित गियर चालक की ही दिशा में घूमता है, अनुपात नहीं बदलता।
गियर अनुपात = चालित के दाँते ÷ चालक के दाँते। आउटपुट चाल = इनपुट चाल ÷ गियर अनुपात। अनुपात 1 से ज़्यादा हो तो चाल घटती है और घूमने वाला बल (बल-आघूर्ण, torque) बढ़ता है।
संयुक्त गियर-श्रृंखला में एक धुरी पर दो गियर लगे होते हैं; हर जोड़ी का अनुपात गुणा करके कुल अनुपात मिलता है।
बेल्ट-घिरनी और चेन-स्प्रॉकेट घूमने को दूर तक पहुँचाते हैं। दोनों घिरनियाँ एक ही दिशा में घूमती हैं (क्रॉस बेल्ट दिशा उलट देती है)। वेग अनुपात = चालित का व्यास ÷ चालक का व्यास। बेल्ट फिसल सकती है (अटकने पर सुरक्षित); चेन नहीं फिसलती।
दूसरे गियर: बेवल गियर गति को 90° मोड़ते हैं, वर्म और व्हील बहुत ज़्यादा चाल घटाते हैं, और रैक-पिनियन घूमने को सीधी गति में बदलता है (कार का स्टीयरिंग)।
कैम, क्रैंक और लिंकेज
कैम घूमती धुरी पर लगा एक ख़ास आकार का पहिया है। उस पर टिका फ़ॉलोअर ऊपर-नीचे धकेला जाता है: घूर्णी इनपुट, प्रत्यागामी आउटपुट। आकार: गोल-उत्केंद्री (धीरे चढ़ना-उतरना), नाशपाती (रुकना, फिर तेज़ चढ़ना), घोंघा (धीरे चढ़ना, अचानक गिरना)।
क्रैंक और स्लाइडर घूमते पहिए को छड़ और सरकने वाले गुटके से जोड़ते हैं। यह दोनों ओर काम करता है: कार इंजन में पिस्टन क्रैंक घुमाता है; पंप में क्रैंक पिस्टन चलाता है।
लिंकेज धुरियों से जुड़ी छड़ें हैं। ये दिशा उलटती हैं, गति को समांतर रखती हैं (टूलबॉक्स की ट्रे) या 90° मोड़ती हैं (बेल-क्रैंक)।
यांत्रिकी बनाते समय: इनपुट और आउटपुट गति तय करें, यांत्रिकी चुनें, अनुपात निकालें, मॉडल बनाएँ (गत्ता, लकड़ी, किट या कंप्यूटर सिमुलेशन), जाँचें और सुधारें। घर्षण घटाने को तेल और बेयरिंग लगाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास
- वेग अनुपात = प्रयास की दूरी ÷ भार की दूरी
- दक्षता = यांत्रिक लाभ ÷ वेग अनुपात × 100%
- उत्तोलक संतुलन: प्रयास × प्रयास भुजा = भार × भार भुजा
- गियर अनुपात = चालित दाँते ÷ चालक दाँते
- आउटपुट चाल = इनपुट चाल ÷ गियर अनुपात
- घिरनी वेग अनुपात = चालित व्यास ÷ चालक व्यास
- संयुक्त श्रृंखला अनुपात = अनुपात₁ × अनुपात₂
हल किए गए उदाहरण
1. गति पहचानिए: (क) छत के पंखे की पंखुड़ी, (ख) झूला, (ग) सिलाई मशीन की सुई, (घ) ऊपर जाती लिफ़्ट।
(क) घूर्णी, (ख) दोलनी, (ग) प्रत्यागामी, (घ) रेखीय।
2. एक उत्तोलक 150 N प्रयास से 600 N भार उठाता है। यांत्रिक लाभ निकालिए।
यांत्रिक लाभ = 600 ÷ 150 = 4।
3. 300 N का भार आलंब से 0.4 m पर है। 1.2 m पर कितना प्रयास इसे संतुलित करेगा?
प्रयास × 1.2 = 300 × 0.4 = 120। प्रयास = 120 ÷ 1.2 = 100 N।
4. 15 दाँतों वाला चालक, 45 दाँतों वाले चालित गियर को घुमाता है; इनपुट 300 rpm। अनुपात और आउटपुट चाल निकालिए।
अनुपात = 45 ÷ 15 = 3। आउटपुट = 300 ÷ 3 = 100 rpm, उल्टी दिशा में।
5. मोटर की 50 mm घिरनी 200 mm की घिरनी चलाती है। मोटर 1200 rpm पर है। आउटपुट चाल?
वेग अनुपात = 200 ÷ 50 = 4। आउटपुट = 1200 ÷ 4 = 300 rpm, उसी दिशा में।
6. संयुक्त श्रृंखला: A (10 दाँते) B (40) को चलाता है। B की धुरी पर लगा C (12) D (36) को चलाता है। इनपुट 800 rpm। आउटपुट चाल?
AB अनुपात = 4, CD अनुपात = 3, कुल = 12। आउटपुट = 800 ÷ 12 ≈ 66.7 rpm।
आम गलतियाँ
- गियर अनुपात को चालक ÷ चालित लिखना। सही है चालित ÷ चालक।
- यह मानना कि बेल्ट दिशा उलट देती है। सीधी बेल्ट से दिशा वही रहती है; फँसे गियर दिशा उलटते हैं।
- यह सोचना कि उत्तोलक मुफ़्त ऊर्जा देता है। बल ज़्यादा मिलता है तो प्रयास को ज़्यादा दूरी चलनी पड़ती है।
- प्रत्यागामी और दोलनी में गड़बड़। प्रत्यागामी सीधी रेखा में आगे-पीछे है; दोलनी चाप पर झूलना।