मशीन डिज़ाइन क्या है?
मशीन कई पुर्ज़ों का समूह है जो मिलकर काम करते हैं। मशीन डिज़ाइन का मतलब है सही पुर्ज़े, उनका आकार और पदार्थ चुनना, ताकि मशीन सुरक्षित, काफ़ी मज़बूत और सस्ती हो। डिज़ाइनर मशीन एलिमेंट कहे जाने वाले मानक पुर्ज़े बार-बार इस्तेमाल करते हैं, इसलिए पुर्ज़ा कहीं भी मिल जाता है।
जोड़ने वाले मशीन एलिमेंट (फ़ास्टनर)
फ़ास्टनर पुर्ज़ों को जोड़ते हैं।
- बोल्ट और नट: बोल्ट छेदों से गुज़रता है, नट चूड़ी पर कसकर पुर्ज़ों को दबाता है। फिर से खोला जा सकता है।
- पेंच और स्टड: पेंच चूड़ीदार छेद में घुसता है। स्टड के दोनों सिरों पर चूड़ी होती है।
- वॉशर: नट के नीचे चपटा छल्ला, जो दबाव फैलाता है।
- पिन और कॉटर: पिन पुर्ज़ों को खिसकने से रोकती है। स्प्लिट पिन नट को ढीला होने से रोकती है।
- रिवेट: धातु की कील, जिसका सिरा ठोककर चपटा किया जाता है। तोड़े बिना खुलती नहीं (स्थायी जोड़)।
चूड़ी (थ्रेड) एक सर्पिल खाँचा है। नट का एक चक्कर उसे पिच जितना आगे ले जाता है।
शाफ़्ट से जुड़े मशीन एलिमेंट
शाफ़्ट घूमने वाली छड़ है जो शक्ति पहुँचाती है। इस पर लगते हैं:
- की (key): खाँचे में बैठा छोटा टुकड़ा, जो पुली या गियर को शाफ़्ट से कसकर बाँधता है ताकि वह फिसले नहीं।
- कपलिंग: दो शाफ़्टों के सिरे जोड़ती है ताकि वे साथ घूमें।
- बेयरिंग: शाफ़्ट को थामता है और कम घर्षण से घूमने देता है (बॉल बेयरिंग में दो छल्लों के बीच छोटी इस्पात की गेंदें लुढ़कती हैं)।
- क्लच और ब्रेक: क्लच दो शाफ़्ट जोड़ता या अलग करता है। ब्रेक शाफ़्ट को धीमा या बंद करता है।
गियर ड्राइव, बेल्ट और चेन
गियर दाँतों वाला पहिया है। दो गियर के दाँत फँसकर गति बिना फिसले आगे बढ़ाते हैं। मोटर जिसे घुमाए वह चलाने वाला (ड्राइवर) गियर है, दूसरा चलने वाला (ड्रिवन) गियर। वे उलटी दिशा में घूमते हैं।
गियर अनुपात = ड्रिवन के दाँत ÷ ड्राइवर के दाँत। ड्रिवन की चाल = ड्राइवर की चाल ÷ अनुपात। अनुपात बड़ा तो चाल कम और बल-आघूर्ण (टॉर्क) ज़्यादा।
प्रकार: स्पर (सीधे दाँत), हेलिकल (तिरछे दाँत, शांत), बेवल (दिशा 90° बदलता है), वर्म (चाल बहुत घटाता है)। बेल्ट (चपटी या V) बेल्ट और पुली के घर्षण से चलती है। चेन कड़ियों और दाँतेदार चक्कों से चलती है, इसलिए फिसलती नहीं। स्प्रिंग ऊर्जा जमा करती है, कैम पुर्ज़े को ऊपर-नीचे चलाता है, फ़्लाईव्हील चाल को एक-सी रखता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- गियर अनुपात = N (ड्रिवन) / N (ड्राइवर)
- ड्रिवन की चाल = ड्राइवर की चाल × N ड्राइवर / N ड्रिवन
- चाल घटे तो टॉर्क उतना ही बढ़ता है (हानि छोड़कर)
- बेल्ट ड्राइव: N1 × D1 = N2 × D2 (N = rpm, D = पुली का व्यास)
- थ्रेड: नट का एक चक्कर = एक पिच आगे
हल किए गए उदाहरण
1. ड्राइवर गियर में 20 दाँत और ड्रिवन गियर में 60 दाँत हैं। गियर अनुपात बताओ।
अनुपात = 60 / 20 = 3। ड्रिवन गियर 3 गुना धीमा घूमता है।
2. ड्राइवर गियर 900 rpm पर घूमता है, उसमें 15 दाँत हैं। ड्रिवन गियर में 45 दाँत हैं। ड्रिवन की चाल निकालो।
ड्रिवन की चाल = 900 × 15 / 45 = 300 rpm।
3. मोटर की 10 cm व्यास की पुली 1200 rpm पर घूमती है और बेल्ट से 30 cm व्यास की पुली चलाती है। बड़ी पुली की चाल निकालो।
N1 D1 = N2 D2, इसलिए N2 = 1200 × 10 / 30 = 400 rpm।
4. एक बोल्ट की पिच 1.5 mm है। 8 पूरे चक्करों में नट कितना आगे जाएगा?
दूरी = 8 × 1.5 = 12 mm।
आम गलतियाँ
- ड्राइवर और ड्रिवन उलट देना: अनुपात ड्रिवन के दाँत ÷ ड्राइवर के दाँत होता है, उलटा नहीं।
- सोचना कि बड़ा गियर हमेशा ज़्यादा चाल देता है। बड़ा ड्रिवन गियर चाल घटाता है।
- रिवेट को खोलकर दोबारा इस्तेमाल करने लायक मान लेना। वह स्थायी जोड़ है।
- भूल जाना कि फँसे हुए गियर उलटी दिशा में घूमते हैं।