मशीन ड्राइंग क्या है?
मशीन ड्राइंग मशीन के पुर्ज़े की तकनीकी ड्राइंग है। यह चित्रों में लिखे निर्देश हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
- डिटेल (वर्किंग) ड्राइंग: सिर्फ़ एक पुर्ज़ा, उसे बनाने की हर जानकारी के साथ।
- असेंबली ड्राइंग: कई पुर्ज़े जुड़े हुए, वे कैसे फ़िट होते हैं (अगला पाठ)।
ड्राइंग मानकों (standards) पर बनती है, ज़्यादातर ISO पर। इसलिए भारत में बनी ड्राइंग जापान या ब्राज़ील में भी पढ़ी जा सकती है। माप मिलीमीटर में होते हैं और इकाई अक्सर लिखी नहीं जाती।
दृश्य (views) और सेक्शन व्यू
हम ऑर्थोग्राफ़िक दृश्य बनाते हैं: सामने का, ऊपर का और बगल का दृश्य। हर दृश्य एक सतह को सीधे देखता है। जो दृश्य आकार सबसे अच्छा दिखाए, उसे सामने का दृश्य चुनो। जितने ज़रूरी हों, उतने ही दृश्य बनाओ।
रेखाओं के प्रकार
- मोटी लगातार रेखा: दिखने वाले किनारे।
- पतली डैश रेखा: छिपे किनारे।
- पतली चेन रेखा (लंबा डैश, बिंदु): केंद्र रेखा।
- पतली लगातार रेखा: माप रेखा और हैचिंग।
सेक्शन व्यू
अंदर का आकार उलझा हो तो सोचो कि पुर्ज़े को कटिंग प्लेन से काट दिया। आगे का आधा हटाओ और बचा हिस्सा बनाओ। कटे ठोस में हैचिंग (45° की पतली लाइनें) भरो। प्रकार: पूरा सेक्शन, आधा सेक्शन और लोकल सेक्शन। ठोस शाफ्ट, बोल्ट, की (key) और रिब लंबाई में कटें तो हैच नहीं करते।
माप, टॉलरेंस और सतह फ़िनिश
हर माप एक ही बार लिखो, उस दृश्य में जहाँ वह सबसे साफ़ दिखे। चिह्न: Ø = व्यास, R = त्रिज्या, M10 = 10 mm की मीट्रिक चूड़ी, 1 × 45° = चैम्फ़र।
कोई मशीन बिल्कुल सही माप नहीं बना सकती। इसलिए टॉलरेंस देते हैं, यानी छूट की सीमा। Ø40 ±0.05 = 39.95 से 40.05 mm। टॉलरेंस = ऊपरी सीमा − निचली सीमा = 0.10 mm। H7/h6 जैसे ISO फ़िट बताते हैं कि छेद और शाफ्ट कैसे जुड़ेंगे: क्लीयरेंस (ढीला), ट्रांज़िशन, या इंटरफ़ेरेंस (कसा, दबाकर)।
सतह फ़िनिश (जैसे Ra 1.6 µm) बताती है कि सतह कितनी चिकनी हो। छोटी संख्या = ज़्यादा चिकनी = ज़्यादा महँगी।
टाइटल ब्लॉक, स्केल और प्रोजेक्ट के दस्तावेज़
टाइटल ब्लॉक शीट के नीचे दाएँ कोने में होता है। इसमें पुर्ज़े का नाम, ड्राइंग नंबर, पदार्थ, स्केल, प्रोजेक्शन चिह्न (फ़र्स्ट या थर्ड एंगल), किसने बनाई और जाँची, तारीख और बदलाव लिखे होते हैं।
स्केल: 1:1 = असली आकार, 1:2 = आधा, 2:1 = दोगुना। कागज़ के मानक आकार A4 से A0 तक। पूरे प्रोजेक्ट की सारी ड्राइंग, उनके नंबर और बदलाव एक व्यवस्थित सेट में रखे जाते हैं, अक्सर CAD में।
डिटेल ड्राइंग कैसे पढ़ें: 1) टाइटल ब्लॉक, 2) सामने का दृश्य, 3) मन में 3D आकार, 4) सेक्शन, 5) माप और टॉलरेंस, 6) नोट्स।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- टॉलरेंस = ऊपरी सीमा − निचली सीमा
- ऊपरी सीमा = मूल माप + ऊपरी विचलन; निचली सीमा = मूल माप + निचला विचलन
- ड्राइंग पर माप = असली माप × स्केल (1:2 पर आधा)
- Ø = व्यास, R = त्रिज्या, M = मीट्रिक चूड़ी, □ = वर्ग
- हैचिंग: 45° की पतली रेखाएँ, एक पुर्ज़े में एक ही दिशा
हल किए गए उदाहरण
1. शाफ्ट पर Ø25 ±0.02 लिखा है। सीमाएँ और टॉलरेंस बताओ।
ऊपरी सीमा = 25.02 mm, निचली = 24.98 mm। टॉलरेंस = 25.02 − 24.98 = 0.04 mm।
2. 180 mm लंबा पुर्ज़ा 1:2 स्केल पर बना है। कागज़ पर कितना लंबा होगा?
180 × 1/2 = 90 mm। पर माप में 180 ही लिखेंगे।
3. छेद Ø20 +0.021/0 और शाफ्ट Ø20 −0.007/−0.020 है। कौन-सा फ़िट है?
सबसे छोटा छेद 20.000, सबसे बड़ा शाफ्ट 19.993। शाफ्ट हमेशा छोटा है, तो हमेशा खाली जगह रहेगी: क्लीयरेंस फ़िट। सबसे कम खाली जगह = 0.007 mm।
आम गलतियाँ
- एक ही माप दो दृश्यों में लिखना। हर माप एक ही बार।
- लंबाई में कटे ठोस शाफ्ट या बोल्ट पर हैचिंग करना। इन्हें हैच नहीं करते।
- स्केल 1:1 न हो तो कागज़ वाली लंबाई लिख देना। हमेशा असली माप लिखो।
- टॉलरेंस भूल जाना। बिना टॉलरेंस वाले माप पर टाइटल ब्लॉक की सामान्य टॉलरेंस लगती है, 'बिल्कुल सटीक' नहीं।