मंगा और चित्रण क्या हैं?
मंगा जापानी शैली की कॉमिक्स है। इसमें कहानी पैनलों की कतार में चित्रों और थोड़े शब्दों से कही जाती है। चित्रण (इलस्ट्रेशन) वह बना हुआ चित्र है जो समझाने, सजाने या कहानी का हिस्सा कहने के लिए बनता है। विज्ञान की किताब का चित्र, किताब का आवरण, पोस्टर और मंगा का पन्ना, सब चित्रण के रूप हैं। भारत, कोरिया, चीन, अमेरिका और फ़्रांस की कई कॉमिक्स मिलते-जुलते तरीके से बनती हैं।
कहानी, नेम और पैनल का ख़ाका
पहले कलाकार योजना बनाता है। पूरे अध्याय का मोटा ख़ाका, जिसे जापानी में नेम (स्टोरीबोर्ड) कहते हैं, पन्ने और पैनल दिखाता है। पैनल (कोमा) एक चौखटा है। पैनलों के बीच की जगह गटर है। कलाकार ख़ाके से पाठक की गति तय करता है:
- बड़ा पैनल: धीमा, शांत या बहुत ज़रूरी पल।
- कतार में छोटे पैनल: तेज़ क्रिया, जल्दी की बात।
- तिरछा पैनल या टूटा चौखटा: जोश या चौंकाने वाला पल।
पढ़ने का क्रम: पारंपरिक मंगा दाएँ से बाएँ और ऊपर से नीचे पढ़ा जाता है। अंग्रेज़ी, हिंदी जैसी कई भाषाओं के संस्करणों में पन्ना पलटकर बाएँ से दाएँ पढ़ने लायक बना दिया जाता है। ख़ाका ऐसा हो कि अगला खाना साफ़ दिखे।
पेंसिल, स्याही और रेखा की मोटाई
पेंसिल परत में मुद्रा, चेहरा, पृष्ठभूमि और परिप्रेक्ष्य तय होता है। यह ढीली होती है और बदली जा सकती है। फिर कलाकार डिप पेन (जी-पेन, राउंड पेन), ब्रश या मार्कर से स्याही चलाता है। रेखा की मोटाई मायने रखती है: बाहरी रेखा और छाया के लिए मोटी, बारीकियों और दूर की चीज़ों के लिए पतली। स्याही सूखने पर पेंसिल मिटा देते हैं। डिजिटल कलाकार टैबलेट पर परतों में यही करते हैं।
पात्र पहले सरल आकारों (सिर के लिए गोला, शरीर के लिए डिब्बे) और कुछ साफ़ विशेषताओं से बनाए जाते हैं। भाव आँखों, भौंहों और मुँह से दिखते हैं। अपने मौलिक पात्र बनाओ, दूसरों की नकल मत करो।
स्क्रीनटोन, गति-रेखाएँ और ध्वनि-शब्द
- स्क्रीनटोन: बिंदुओं या रेखाओं की शीट जो श्वेत-श्याम छपाई में धूसर छाया देती है। बड़े, पास-पास बिंदु गहरे दिखते हैं। अब यह कंप्यूटर पर भी होता है।
- गति-रेखाएँ: ऐसी रेखाएँ जो गति की दिशा में चलती हैं या केंद्र से बाहर फैलकर उस पर ध्यान खींचती हैं।
- संवाद गुब्बारे: अंडाकार में बोली गई बात; नुकीला आकार चिल्लाने के लिए; छोटे बुलबुलों वाला बादल सोच के लिए। पूँछ बोलने वाले की ओर होती है।
- ध्वनि-शब्द (ओनोमैटोपिया): "सनन" या "धड़ाम" जैसे शब्द, चित्र का हिस्सा बनाकर बड़े अक्षरों में।
किताबों, विज्ञापनों और विज्ञान के लिए चित्रण
चित्रकार पाठक के बारे में सोचता है। बच्चों की किताब में चित्र दोस्ताना और सरल होते हैं। विज्ञान की किताब में सटीक और नामांकित। पोस्टर में चटक और दूर से साफ़। अच्छे चित्रण में साफ़ केंद्र होता है, रंग नज़र को राह दिखाते हैं और वह पास के शब्दों से मेल खाता है। औज़ार पेंसिल और जलरंग से लेकर टैबलेट और सॉफ़्टवेयर तक हैं। कॉपीराइट का सम्मान करो: अपने बनाए चित्र या अनुमति वाली छवियाँ इस्तेमाल करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पैनल = एक चौखटा, एक पल; गटर = पैनलों के बीच की जगह
- बड़ा पैनल = धीमा; छोटे पैनल = तेज़
- परतें: योजना → पेंसिल → स्याही → टोन → लिखावट
- मोटी रेखा = बाहरी रेखा/छाया; पतली रेखा = बारीकी
- स्क्रीनटोन = धूसर छाया के बिंदु
- चित्रण = शब्दों का सहारा बनने वाला बना हुआ चित्र
हल किए गए उदाहरण
1. लड़ाई का दृश्य तेज़ महसूस होना चाहिए। पन्ना यह कैसे दिखाए?
कतार में छोटे तिरछे पैनल, गति-रेखाएँ, गति पर धुँधलापन और एक बड़ा ध्वनि-शब्द।
2. एक उदास शांत पल धीमा और असरदार लगना चाहिए। कौन-सा ख़ाका मदद करेगा?
ढेर सारी ख़ाली जगह वाला एक बड़ा पैनल, पतली नरम रेखाएँ और कोई ध्वनि-शब्द नहीं।
3. कक्षा 6 की किताब के लिए जल-चक्र का चित्रण चाहिए। उसमें क्या होना चाहिए?
सरल साफ़ आकार, दिशा दिखाते तीर, आसान शब्दों में नाम, और चटक रंग जो सूरज, बादल, बारिश और नदी को अलग दिखाएँ।
आम गलतियाँ
- पहले शब्द लिखकर बाद में चित्र बनाना। पहले चित्र बनाओ ताकि गुब्बारे सही बैठें।
- हर जगह सिर्फ़ मोटी रेखाएँ इस्तेमाल करना। चित्र सपाट लगता है।
- पैनलों का उलझा क्रम बनाना जिससे पाठक को अगला खाना न मिले।
- अपना पात्र बनाने के बजाय किसी और कलाकार के पात्र की हूबहू नकल करना।