Japan 高校(専門学科)1〜3年 Fine Arts (specialist)
अध्याय: 13
1. Introduction to Fine Arts
Basic theory of art · Nature and art; art in life and society · Intellectual property and portrait rights
- कला का मूल सिद्धांत – हर चित्र, पोस्टर या मूर्ति कुछ सरल हिस्सों से बनी होती है। कला के तत्व हैं बिंदु, रेखा, आकृति, रूप, रंग और बनावट। उन्हें सजाने के नियम हैं संतुलन, विरोधाभास, लय और एकता। इन्हें जानकर आप किसी भी कलाकृति को देखकर बता सकते हैं कि वह क्यों अच्छी लगती है और अपनी कृति भी ज़्यादा आत्मविश्वास से बना सकते हैं।
- प्रकृति और कला; जीवन और समाज में कला – प्रकृति कलाकारों की सबसे पुरानी शिक्षिका है। सीप सर्पिल में बढ़ती है, मधुमक्खियाँ छह भुजा वाले कमरे बनाती हैं, पेड़ शाखाओं में बँटते हैं और पानी लहरें बनाता है। कलाकार इन पैटर्न को पहचानकर चित्र, टाइल, कपड़े और इमारतों में गाढ़ा और साफ़ बना देते हैं। कला रोज़ के जीवन और समाज का हिस्सा भी है: वह इस्तेमाल की चीज़ें सजाती है, कहानियाँ कहती है, हमारी पहचान बताती है और उत्सवों में लोगों को जोड़ती है।
- बौद्धिक संपदा और चित्र-अधिकार – जब आप कुछ नया बनाते हैं, जैसे चित्र, फ़ोटो, गाना या डिज़ाइन, तो कानून उसे आपकी बौद्धिक संपदा मानता है। बनाने वाले के उस पर अधिकार हैं। दूसरों को उसकी नक़ल या बिक्री से पहले पूछना पड़ता है। चित्र-अधिकार (पोर्ट्रेट राइट) किसी इंसान के अपने चेहरे और छवि की रक्षा करता है, इसलिए किसी की फ़ोटो साझा करने या बेचने से पहले पूछिए। नियम देशों में अलग हैं, पर सम्मान, अनुमति और श्रेय का विचार हर जगह वही है। यह पन्ना सीखने के लिए है, कानूनी सलाह नहीं।
2. Art History
Japanese art and culture · Eastern art and culture · Western art and culture · Contemporary art and culture
- पूर्वी कला और संस्कृति – पूर्वी कला भारत, चीन, जापान, कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में पनपी। व्यापार के रास्तों और बौद्ध धर्म ने इन्हें जोड़ा, पर हर जगह की अपनी पहचान रही: भारत में नक्काशीदार मंदिर, चीन में स्याही और सुलेख, जापान में छपाई, बाग़ और चाय, दक्षिण-पूर्व एशिया में विशाल पत्थर के मंदिर।
- पश्चिमी कला और संस्कृति – पश्चिमी कला यूरोप और उससे प्रभावित जगहों की कला है। इसे समय-रेखा पर समझें: यूनान और रोम में संतुलन और सही माप पर ज़ोर, मध्ययुग में मीनारों और रंगीन काँच से आसमान की ओर उठता भाव, पुनर्जागरण में गहराई और इंसान पर ध्यान, और आधुनिक काल में नए आकार और रंगों से नियम तोड़ना।
3. Appreciation Studies
Research on works and artists · Research on conservation and restoration of cultural properties · Research on exhibition planning and layout · Art criticism
- कलाकृतियों और कलाकारों पर शोध – किसी कलाकृति पर शोध के लिए पाँच तरह के सुराग़ इकट्ठे करो: जो दिखता है, किसने बनाई, कब और कहाँ बनी, दूसरे कामों से कैसे मिलती है और कौन-से स्रोत इसे पक्का करते हैं। फिर जो मिला उसे प्रमाण के साथ अपने शब्दों में लिखो।
- कला संरक्षण: कलाकृतियों की देखभाल – कला संरक्षण का अर्थ है कलाकृतियों को इस तरह बचाना कि वे लंबे समय तक रहें। ज़्यादातर नुकसान प्रकाश, ग़लत नमी और तापमान, धूल और प्रदूषण, कीड़ों और लापरवाही से छूने से होता है। निवारक संरक्षण इन ख़तरों को नुकसान से पहले रोकता है। अगर कृति पहले से ख़राब है, तो संरक्षक सब दर्ज करता है, फिर साफ़ करता है, मज़बूत करता है और ऐसी सामग्री से सुधारता है जो बाद में हटाई जा सके, कम से कम बदलाव के साथ।
- कला प्रदर्शनी: योजना, सजावट और कला को देखना – प्रदर्शनी कलाकृतियों का योजना से किया गया सार्वजनिक प्रदर्शन है, जहाँ कृतियाँ, दर्शक और स्थान मिलते हैं। स्थान हो सकते हैं: संग्रहालय, कला-दीर्घा, सार्वजनिक जगह, ऑनलाइन। योजना में विषय और दर्शक चुनना, कृतियाँ छाँटना, फिर उन्हें सजाना, रोशनी देना और परिचय-पर्ची लगाना शामिल है। दर्शक वर्णन, विश्लेषण, व्याख्या और मूल्यांकन करते हैं।
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
4. Drawing
Drawing (dessin) · Sketching · Expressive materials · Appreciation
- रेखांकन और चित्रकला (Drawing and Painting) – रेखांकन देखने और सोचने का तरीक़ा है: इससे हम जो देखते हैं उसे दर्ज करते हैं, याद रखते हैं, डिज़ाइन की योजना बनाते हैं और विचार व्यक्त करते हैं। अच्छा चित्र खाका (blocking in) से शुरू होता है: चीज़ों को सरल आकारों में देखना (गोला, घन, बेलन) और हल्की रेखाओं से अनुपात जाँचना। फिर रेखा किनारे तय करती है, और रेखा का वज़न (भारी या हल्का) पास-दूर दिखाता है। रोशनी रूप देती है: रोशन वस्तु पर चमक, मध्य-स्वर, मुख्य छाया, परावर्तित रोशनी और गिरती छाया दिखती है। स्वर (value) सफ़ेद से काले तक जाता है; रोशनी-अँधेरे का तेज़ अंतर छायांकन (chiaroscuro) कहलाता है, और चित्र ऊँची कुंजी (ज़्यादातर हल्का) या नीची कुंजी (ज़्यादातर गहरा) में हो सकता है। सूखे माध्यम (ग्रेफ़ाइट, चारकोल, पेस्टल, रंगीन पेंसिल) हैचिंग, क्रॉस-हैचिंग, बिंदु और मिलाने से स्वर बनाते हैं; गीले माध्यम (स्याही, जलरंग, गुआश, ऐक्रेलिक, तैलरंग) वॉश, परतों और रंग मिलाने से। रैखिक और वायुमंडलीय परिप्रेक्ष्य जगह दिखाते हैं, और आकृति चित्रण में अनुपात, मुद्रा और पूर्वसंक्षेपण (foreshortening) लगते हैं।
- स्केचिंग: सरल आकारों से झटपट आकृतियों तक – स्केच एक तेज़, खुला चित्र है जो देखी हुई चीज़ के मुख्य आकार, अनुपात और रोशनी पकड़ता है। अच्छी स्केचिंग का रास्ता: देखो और नापो, सरल आकार देखो, हल्की निर्माण रेखाओं से ढाँचा बनाओ, एक दिशा की रोशनी से छाया दो, फिर निखारो। झटपट आकृति स्केच गति रेखा से शुरू होता है और सिर को इकाई मानता है (वयस्क लगभग 7½ सिर ऊँचा)।
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
5. Composition (Design Basics)
Form and colour · Materials · Plane and 3D composition · Appreciation
- रंग सिद्धांत: रंग-चक्र, रंगों का मेल, मिश्रण और अर्थ – रंग सिद्धांत रंग मिलाने और साथ रखने के सरल नियम हैं। पेंट में लाल, पीला और नीला प्राथमिक रंग हैं; दो प्राथमिक से द्वितीयक (नारंगी, हरा, बैंगनी) बनता है; प्राथमिक + पास वाला द्वितीयक = तृतीयक, और इस तरह 12 रंगों का चक्र बनता है। हर रंग के तीन आयाम हैं: वर्ण/ह्यू (नाम), मान (हल्का-गहरा: टिंट, शेड, टोन) और संतृप्ति (चटक-फीका)। पूरक, सजातीय, त्रिक और एकवर्णी जैसे सामंजस्य रंगों को साथ अच्छा दिखाते हैं। गर्म रंग आगे आते लगते हैं, ठंडे पीछे जाते। प्रकाश जुड़कर सफ़ेद बनता है (RGB); पेंट और स्याही प्रकाश घटाते हैं (CMY से लगभग काला)। रंग भावना और संस्कृति के अर्थ भी रखते हैं।
- सामग्री और उनके गुण (Materials) – हम जो कुछ बनाते हैं वह सामग्री से बनता है: लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, काँच, सिरेमिक, कपड़ा और कंपोज़िट. हर सामग्री के गुण होते हैं: मज़बूती, कड़ापन, कठोरता, लचीलापन, घनत्व, ऊष्मा और विद्युत चालन, पारदर्शिता, जलरोधिता और लागत. डिज़ाइनर काम के हिसाब से सामग्री चुनते हैं, सोचते हैं कि उसे कैसे आकार दें और जोड़ें (पेंच, कील, गोंद, वेल्डिंग, सोल्डरिंग, सिलाई), और सुरक्षा, लागत व पर्यावरण का ध्यान रखते हैं. कपड़े प्राकृतिक रेशों (सूती, ऊन, रेशम) और कृत्रिम रेशों (पॉलिएस्टर, नायलॉन) से बनते हैं.
6. Painting
Japanese-style painting (nihonga) · Watercolour painting · Oil painting · Manga and illustration · Other painting · Appreciation
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
- मंगा और चित्रण (इलस्ट्रेशन) – मंगा चित्रों से कहानी कहता है। चित्र पैनलों में क्रम से पढ़े जाते हैं। मंगा का पन्ना परतों में बनता है: योजना, पेंसिल, स्याही, स्क्रीनटोन, फिर संवाद गुब्बारे और ध्वनि-शब्द। चित्रण (इलस्ट्रेशन) वह बना हुआ चित्र है जो किताबों, पोस्टरों और विज्ञापनों में शब्दों को समझाता या सजाता है। दोनों रेखा, आकार और ख़ाके से पाठक की नज़र चलाते हैं।
- अन्य चित्र माध्यम (एक्रिलिक, टेम्परा, स्याही, फ़्रेस्को) – हर रंग पिगमेंट (रंगीन चूर्ण) और उसे थामने वाले बाइंडर से बनता है। बाइंडर बदलो तो रंग का व्यवहार बदल जाता है। एक्रिलिक में प्लास्टिक पॉलिमर होता है और वह सूखकर पानी-रोधी हो जाता है। टेम्परा में अंडे की ज़र्दी होती है। गुआश अपारदर्शी, चॉकी जलरंग है। इंक वॉश में पानी से कई धूसर छटाएँ बनती हैं। फ़्रेस्को गीले चूने के पलस्तर में रंगता है, इसलिए रंग दीवार का हिस्सा बन जाता है।
7. Printmaking
Woodblock printing · Copperplate printmaking · Lithography · Silk-screen printing · Other printmaking · Appreciation
- लकड़ी की ब्लॉक छपाई (वुडब्लॉक प्रिंटिंग) – वुडब्लॉक प्रिंटिंग में कलाकार सफ़ेद रहने वाले हिस्से काट देता है, उभरे हिस्सों पर स्याही लगाता है और ब्लॉक पर कागज़ दबाता है। छाप उल्टी (दर्पण जैसी) आती है और एक ब्लॉक से कई छापें बनती हैं। रंगीन छाप के लिए हर रंग का अलग ब्लॉक होता है, जिन्हें रजिस्ट्रेशन निशानों से मिलाया जाता है।
- तांबे की प्लेट की छपाई (एचिंग और एंग्रेविंग) – तांबे की प्लेट की छपाई में धातु की प्लेट में रेखाएँ काटी या अम्ल से खाई जाती हैं। खाँचों में स्याही भरी जाती है, सतह पोंछ दी जाती है और भारी प्रेस नम कागज़ को खाँचों में दबाती है। स्याही कागज़ पर रेखाओं के रूप में आती है। इसे इंटैग्लियो कहते हैं और छाप उल्टी आती है।
- लिथोग्राफ़ी (पत्थर छपाई) – लिथोग्राफ़ी में छपाई बिल्कुल सपाट पत्थर या प्लेट से होती है। चित्र चिकनाई वाली क्रेयॉन से बनता है। चिकनाई तैलीय स्याही को पकड़ती है और गीले खाली हिस्से स्याही को दूर भगाते हैं, क्योंकि तेल और पानी नहीं मिलते। पत्थर पर कागज़ दबाकर उल्टी छाप ली जाती है। रंगीन छाप के लिए हर रंग का एक पत्थर लगता है।
- छापाकला (प्रिंटमेकिंग) – छापाकला में एक तैयार सतह (मैट्रिक्स या प्लेट) से दबाव देकर स्याही कागज़ पर उतारी जाती है। चार मुख्य परिवार हैं: उभार (उभरे हिस्से पर स्याही: वुडकट, लिनोकट), इंटैग्लियो (कटी रेखाओं में स्याही: एनग्रेविंग, एचिंग, ड्राईपॉइंट), समतल (चिकनाई और पानी: लिथोग्राफ़ी) और स्टेंसिल (छेदों से स्याही: स्क्रीन प्रिंट)। छाप दर्पण-प्रतिबिंब होती है। एक प्लेट से कई एक-जैसी छापें (संस्करण) बनती हैं; मोनोटाइप से सिर्फ़ एक।
8. Sculpture
Carving · Modelling (clay) · Other sculpture and 3D forms · Appreciation
- मूर्तिकला की तकनीकें – मूर्तिकला तीन आयामों की कला है। यह उभार (पृष्ठभूमि से जुड़ी: निम्न या उच्च) या पूर्ण मूर्ति (अलग खड़ी, हर तरफ़ से दिखे) हो सकती है। बनाने के चार मुख्य तरीके: तराशना (पत्थर या लकड़ी से सामग्री हटाना), गढ़ना (मिट्टी या मोम जोड़ना, अक्सर आर्मेचर पर), ढलाई (साँचे में पिघला कांसा जैसा द्रव डालना) और निर्माण (हिस्से जोड़ना)। मूर्तिकार रेखाचित्र और मैकेट से योजना बनाते हैं, यथार्थवादी से अमूर्त तक यथार्थ का स्तर चुनते हैं, और मुद्रा, दिशा या असली गति से हलचल दिखाते हैं।
- कंप्यूटर सिमुलेशन – मॉडल किसी असली चीज़ का सरल रूप है जिसमें सिर्फ़ ज़रूरी बातें रहती हैं। कंप्यूटर सिमुलेशन उस मॉडल को समय के साथ कदम-दर-कदम चलाकर देखता है कि क्या होगा। इसमें चर (स्थिति), नियम (स्थिति कैसे बदलती है), पैरामीटर (हमारी चुनी संख्याएँ) और अक्सर संयोग होता है, इसलिए कई बार चलाकर औसत लेते हैं। असली आँकड़ों से मिलाकर जाँचते हैं (वैलिडेशन)। मौसम, ट्रैफ़िक, बीमारी, उड़ान प्रशिक्षण में इसका उपयोग होता है क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और तेज़ है, पर उतना ही सही है जितना उसका मॉडल।
9. Visual Design
Basics of visual design · Design for communication purposes · Spatial design · Projection and representation · Appreciation
- कला के तत्व और डिज़ाइन के सिद्धांत – कला के तत्व वे ईंटें हैं जिनसे हर कलाकृति बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, मान (हल्का-गहरा), बनावट और स्थान; कई शिक्षक बिंदु को भी जोड़ते हैं। डिज़ाइन के सिद्धांत बताते हैं कि इन ईंटों को कैसे जमाएँ: संतुलन, विरोधाभास (कंट्रास्ट), बल (एम्फ़ेसिस), गति, लय और पैटर्न, अनुपात और पैमाना, एकता और विविधता।
- ग्राफ़िक डिज़ाइन (Graphic Design) – ग्राफ़िक डिज़ाइन चित्र, शब्द और आकृतियों को इस तरह सजाना है कि संदेश साफ़, काम का और सुंदर लगे। डिज़ाइनर तत्वों (रेखा, आकृति, रंग, अक्षर, चित्र, खाली जगह) और सिद्धांतों (ग्रिड व संरेखण, पदानुक्रम, कंट्रास्ट, निकटता, दोहराव, संतुलन, खाली जगह) का उपयोग करते हैं। प्रक्रिया: ब्रीफ़, खोज, विचार, स्केच, डिजिटल ड्राफ़्ट, राय और अंतिम कलाकृति। पोस्टर, लोगो, किताब के कवर, पैकेट, साइन बोर्ड, वेबसाइट और ऐप सब इसी से बनते हैं।
- परिसर और कमरे का डिज़ाइन: काम की और अच्छी लगने वाली जगह बनाना – अच्छा डिज़ाइन इस सवाल से शुरू होता है: इस जगह में क्या-क्या काम होंगे? कमरे को सोने, पढ़ने और सामान रखने के ज़ोन में बाँटा जाता है। फ़र्नीचर ऐसे रखा जाता है कि दरवाज़े से रास्ता खाली रहे। खिड़की की दिन की रोशनी पढ़ने में मदद करती है, इसलिए मेज़ खिड़की के पास रखने से बिजली बचती है। हल्के रंग कमरे को बड़ा और उजला दिखाते हैं, गहरे रंग छोटा और शांत। स्कूल परिसर भी ऐसे ही बनता है: छाँव के पेड़, बेंच, खेल की जगह और पक्की पगडंडी। बनाने से पहले स्केल पर नक्शा बनाते हैं, जैसे कागज़ पर 1 सेमी = असली 50 सेमी।
10. Craft Design
Basics of craft design · Projection and drafting · Crafts · Product design · Traditional crafts · Appreciation
- शिल्प में सामग्री, रूप और रंग – हर शिल्प तीन चुनावों से बनता है। सामग्री बनावट, वज़न और एहसास तय करती है। रूप (आकार) तय करता है कि वह कैसे खड़ा होगा, क्या रखेगा और कैसा दिखेगा। रंग मन का भाव तय करता है। अच्छा कारीगर काम और उपयोगकर्ता के हिसाब से तीनों चुनता है।
- पारंपरिक शिल्प – पारंपरिक शिल्प हाथ से उपयोगी और सुंदर चीज़ें बनाने का तरीका है, जिसमें स्थानीय सामग्री और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सिखाया गया हुनर लगता है। कुम्हार मिट्टी को आकार देकर पकाता है, बुनकर ताने और बाने को गूँथता है, कागज़ कटिंग में मोड़ से सममित डिज़ाइन बनते हैं, और बढ़ई लकड़ी को जोड़ों से जोड़ता है। शिल्प-भावना का अर्थ है धैर्य, बारीकी, सामग्री का सम्मान और अच्छे काम पर गर्व।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
11. Information Media Design
Basics of information media · Visualising information · Communication, exchange and sharing · Appreciation
- सूचना माध्यम की मूल बातें – सूचना माध्यम वह वाहक है जो संदेश को भेजने वाले से पाने वाले तक पहुँचाता है। लिखित, चित्र, ध्वनि और वीडियो चार आम माध्यम हैं। हर एक की ताकत अलग है, इसलिए अच्छा डिज़ाइनर संदेश और दर्शक के हिसाब से माध्यम चुनता है और शोर कम रखता है।
- डेटा विज़ुअलाइज़ेशन: संख्याओं को चित्र में बदलना – डेटा विज़ुअलाइज़ेशन यानी डेटा को चित्र की तरह दिखाना ताकि पैटर्न आसानी से दिखें। समूहों की तुलना के लिए दंड आलेख (bar chart), पूरे के हिस्सों के लिए पाई चार्ट, समय के साथ बदलाव के लिए रेखा ग्राफ़, दो संख्याओं के संबंध के लिए प्रकीर्ण आलेख (scatter plot) और मानों के फैलाव के लिए आयतचित्र (histogram)। अच्छे चार्ट में शीर्षक, मात्रक सहित अक्षों के नाम और ईमानदार पैमाना होता है; दंड आलेख का अक्ष 0 से शुरू होता है।
- संचार, आदान-प्रदान और जानकारी साझा करना – संचार का मतलब है कि संदेश भेजने वाले से पाने वाले तक किसी माध्यम से जाता है और जवाब (प्रतिपुष्टि) वापस आता है। अच्छा संदेश सरल होता है, पाने वाले और माध्यम के हिसाब से बना होता है और रुकावट से बचता है। साझा करने से संदेश कई लोगों तक पहुँचता है, इसलिए सच, श्रेय और निजता का भी ध्यान रखना होता है।
12. Moving-Image Expression
Knowledge and use of equipment, tools and materials · Planning, composition and direction · Editing, compositing and processing · Appreciation
- फ़िल्म के उपकरण: कैमरा, तिपाई, लाइट और माइक – अच्छे वीडियो के लिए चार काम ठीक होने चाहिए: कैमरा स्थिर, काफ़ी रोशनी, साफ़ आवाज़ और सुरक्षित भंडारण। तिपाई हिलना रोकती है, लैम्प अंधेरा दूर करता है, माइक आवाज़ साफ़ करता है और मेमोरी कार्ड का बैकअप आपका काम बचाता है।
- वीडियो एडिटिंग: कच्चे क्लिप से तैयार फ़िल्म तक – वीडियो बनाने के दो बड़े भाग हैं। प्रोडक्शन यानी क्लिप और फ़ोटो शूट करना। पोस्ट-प्रोडक्शन यानी उसके बाद का सारा काम: फ़ोटो रीटच करना, टाइमलाइन पर क्लिप एडिट करना (ट्रिम, जोड़ना, शीर्षक और ध्वनि की परतें लगाना), फिर नतीजे को स्क्रीन के लिए वीडियो फ़ाइल या छपाई के लिए ऊँचे रिज़ॉल्यूशन की तस्वीर में एक्सपोर्ट करना। कहानी असल में एडिटिंग में बनती है: क्लिप का क्रम और लंबाई तय करते हैं कि देखने वाले को कैसा लगेगा।
13. Environmental Design
Living environment and form · Exhibition planning and form · Stage direction and design · Other environmental design · Appreciation
- रहने का परिवेश और रूप: लोगों के लिए जगह गढ़ना – हम जहाँ रहते हैं, यानी घर, आँगन, गली और पार्क, उन्हें लोग ही आकार देते हैं। अच्छे आकार लोगों की ज़रूरत के हिसाब से होते हैं: सही नाप (मानव पैमाना), रोशनी और छाया, आसान आवाजाही और सुखद एहसास। पेड़, रास्ते, बैठने की जगहें और इमारतें मिलकर जगह को आरामदायक बनाते हैं।
- कला प्रदर्शनी: योजना, सजावट और कला को देखना – प्रदर्शनी कलाकृतियों का योजना से किया गया सार्वजनिक प्रदर्शन है, जहाँ कृतियाँ, दर्शक और स्थान मिलते हैं। स्थान हो सकते हैं: संग्रहालय, कला-दीर्घा, सार्वजनिक जगह, ऑनलाइन। योजना में विषय और दर्शक चुनना, कृतियाँ छाँटना, फिर उन्हें सजाना, रोशनी देना और परिचय-पर्ची लगाना शामिल है। दर्शक वर्णन, विश्लेषण, व्याख्या और मूल्यांकन करते हैं।
- मंच-सज्जा: थिएटर, फ़िल्म और टीवी के सेट कैसे बनते हैं – मंच-सज्जा (स्टेज डिज़ाइन, scenography) वह जगह योजना और निर्माण से तैयार करती है जहाँ कहानी घटती है। डिज़ाइनर चित्रित, गढ़ी और ढाँचागत सज्जा चुनता है, मंच की मशीनरी (फ़्लाई टावर, रोशनी) के साथ काम करता है, पैमाने से नक़्शे बनाता है, और कार्यशाला में फ़्लैट, चबूतरे और सामान बनवाता है। फ़िल्म और टीवी सेट केवल वही बनते हैं जो कैमरे को दिखता है; आज डिजिटल ड्राइंग और नई तकनीकें हर चरण में मदद करती हैं।
- पर्यावरण डिज़ाइन: लोगों के लिए स्थान बनाना – पर्यावरण डिज़ाइन उन जगहों को आकार देने की कला है जहाँ लोग रहते, काम करते, पढ़ते और मिलते हैं। इमारत, प्रदर्शनी और मंच के अलावा इसमें रास्ते, चिह्न, रोशनी, बेंच, पौधे और अस्थायी सजावट भी आती है। अच्छा डिज़ाइन काम का हो (उपयोग), सुंदर हो (रूप) और लोगों व प्रकृति के अनुकूल हो।