कैमरा और लेंस
कैमरा चलती तस्वीरें रिकॉर्ड करता है। लेंस रोशनी इकट्ठी करता है और तय करता है कि दृश्य का कितना हिस्सा चित्र में आए। ज़ूम इन करने पर लेंस छोटा हिस्सा देखता है, इसलिए चीज़ें बड़ी और पास दिखती हैं। ज़ूम आउट पर चौड़ा हिस्सा दिखता है।
तीन सेटिंग सबसे ज़रूरी हैं। रिज़ॉल्यूशन यानी चित्र में कितने छोटे बिंदु (पिक्सल) हैं; ज़्यादा बिंदु से चित्र साफ़ और फ़ाइल बड़ी होती है। फ्रेम रेट यानी एक सेकंड में कितने चित्र दिखते हैं (fps)। फ़िल्में अक्सर 24 fps पर होती हैं; बहुत से वीडियो 25 या 30 fps पर। फ़ोकस मुख्य चीज़ को साफ़ करता है, धुंधला नहीं।
शुरू करने से पहले बैटरी और मेमोरी कार्ड ज़रूर देखो। बैटरी खत्म या कार्ड भरा हो तो शूटिंग रुक जाती है।
कैमरा स्थिर रखना: तिपाई और दूसरे सहारे
हाथ थोड़ा हिलते हैं। पर्दे पर वह हिलना बड़ा दिखता है। तिपाई तीन पैरों वाला स्टैंड है जो कैमरे को स्थिर पकड़ता है। उसका सिर बाएँ-दाएँ (पैन) या ऊपर-नीचे (टिल्ट) आराम से घूमता है।
गिम्बल हाथ में पकड़ने वाला सहारा है, जिसकी छोटी मोटरें चलते समय हिलना कम करती हैं। कोई उपकरण न हो तो कैमरा दोनों हाथों से पकड़ो, कोहनी शरीर से सटाओ, या दीवार या मेज़ पर टिकाओ।
रोशनी: देखना रोशनी से ही संभव है
कैमरे को रोशनी चाहिए। कम रोशनी में चित्र अंधेरा और दानेदार आता है। बहुत ज़्यादा हो तो सफ़ेद-सा फीका चित्र बनता है। इस संतुलन को एक्सपोज़र कहते हैं।
आसान साधन: मुख्य रोशनी के लिए लैम्प या सूरज; परछाईं वाले हिस्से में रोशनी लौटाने के लिए रिफ़्लेक्टर (सफ़ेद गत्ता या फ़ॉइल बोर्ड); तेज़ रोशनी को नरम करने के लिए डिफ़्यूज़र (पतला कपड़ा)। मुख्य रोशनी चेहरे के सामने और थोड़ा किनारे से रखो, पीछे से नहीं। इंसान के पीछे की तेज़ खिड़की उसे काली आकृति बना देती है।
रोशनी का रंग भी होता है। गरम रोशनी पीली, ठंडी नीली। कैमरे की व्हाइट बैलेंस सेटिंग बताती है कि सफ़ेद कैसा दिखे, ताकि रंग सही रहें।
आवाज़: माइक्रोफ़ोन
वीडियो का आधा हिस्सा आवाज़ है। थोड़ा खराब चित्र लोग चला लेते हैं, खराब आवाज़ नहीं। माइक्रोफ़ोन ध्वनि तरंगों को बिजली के संकेत में बदलता है, जिसे कैमरा रिकॉर्ड कर सके।
सुनहरा नियम: माइक बोलने वाले के पास रखो। दूरी बढ़ने पर आवाज़ बहुत तेज़ी से कमज़ोर होती है और कमरे का शोर ज़्यादा लगता है। लैपल माइक कॉलर पर लगता है। शॉटगन माइक चित्र के ठीक बाहर से बोलने वाले की ओर रखा जाता है। विंडशील्ड (रोएँदार ढक्कन) हवा का शोर घटाती है। रिकॉर्डिंग में हेडफ़ोन लगाओ ताकि गड़बड़ी तुरंत सुनाई दे।
सामग्री, भंडारण और देखभाल
चलचित्र की "सामग्री" रंग या मिट्टी नहीं होती। वह है मेमोरी कार्ड, तार, बैटरी, हार्ड ड्राइव और सॉफ़्टवेयर। तेज़ और खाली कार्ड लो। फ़ालतू बैटरी चार्ज रखो। शूटिंग के बाद फ़ाइलें कंप्यूटर में और दूसरी ड्राइव में नक़ल करो: यह बैकअप है। संपादन नक़ल पर करो, इकलौती असली फ़ाइल पर नहीं।
सुरक्षा और देखभाल: तार ऐसी जगह न छोड़ो जहाँ कोई गिर जाए; लैम्प कपड़े और कागज़ से दूर रखो क्योंकि वे गरम होते हैं; उपकरण सूखे रखो और लेंस सिर्फ़ मुलायम कपड़े से पोंछो; किसी की फ़िल्म बनाने से पहले उससे पूछो।
करके देखो: तीन मिनट की जाँच
फ़ोन लो। 1) उसे किताबों पर ऐसे रखो कि हिले नहीं। 2) खिड़की की तरफ़ मुँह करके 10 सेकंड रिकॉर्ड करो। 3) खिड़की की तरफ़ पीठ करके 10 सेकंड रिकॉर्ड करो। 4) तीन क़दम दूर से बोलो, फिर एक क़दम दूर से। सब क्लिप हेडफ़ोन से देखो। लिखो कि कौन-सी सबसे अच्छी थी और क्यों। ऊपर के 3D में स्लाइडर और तिपाई वाले डिब्बे से यही करके देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य बात: स्थिर + रोशनी + आवाज़
- फ्रेम रेट: 24, 25 या 30 fps = हर सेकंड दिखने वाले चित्र
- ज़ूम इन = संकरा दृश्य; ज़ूम आउट = चौड़ा दृश्य
- माइक की दूरी आधी करने पर आवाज़ बहुत तेज़ और साफ़ मिलती है
- बैकअप नियम: फ़ाइलें 2 जगह रखो
हल किए गए उदाहरण
1. खिड़की के पास खड़े विद्यार्थी का वीडियो काली आकृति जैसा आता है। गलती क्या है और ठीक कैसे करें?
खिड़की विद्यार्थी के पीछे है, इसलिए कैमरा तेज़ खिड़की के हिसाब से सेट होता है और चेहरा काला हो जाता है। विद्यार्थी का मुँह खिड़की की ओर करो, या सामने लैम्प जलाओ ताकि चेहरे पर रोशनी पड़े।
2. बाज़ार में इंटरव्यू रिकॉर्ड किया। आवाज़ बहुत धीमी है और भीड़ का शोर तेज़ है। दो उपाय बताओ।
माइक बोलने वाले के पास रखो (लैपल माइक, या चित्र के ठीक बाहर पकड़ा माइक) और रिकॉर्डिंग में हेडफ़ोन लगाओ। हो सके तो शांत कोने में जाओ।
3. चलते हुए लिया शॉट झटके वाला है। कौन-सा उपकरण काम आएगा और क्यों?
गिम्बल। उसकी छोटी मोटरें क़दमों का हिलना कम करती हैं। गिम्बल न हो तो घुटने मोड़ो, दोनों हाथों से पकड़ो और धीरे चलो।
4. एक फ़िल्म क्लिप 10 सेकंड 24 fps पर चलती है। उसमें कितने चित्र हैं?
हर सेकंड 24 चित्र, 10 सेकंड तक: 24 × 10 = 240 चित्र।
5. मेमोरी कार्ड में 64 GB खाली है। एक मिनट का वीडियो लगभग 400 MB लेता है। लगभग कितने मिनट आएँगे? (1 GB = 1000 MB)
64 GB = 64,000 MB। 64,000 / 400 = 160 मिनट।
6. फ़ोन से दो लोगों की बातचीत के वीडियो के लिए सुरक्षित और सरल सामान की सूची बनाओ।
छोटी तिपाई पर फ़ोन, बोलने वालों के सामने लैम्प या खिड़की, हर एक के लिए क्लिप-ऑन माइक, हेडफ़ोन, चार्ज बैटरी, फ़ोन में काफ़ी जगह, और शूटिंग के बाद फ़ाइलों की कंप्यूटर में नक़ल।
आम गलतियाँ
- लंबा शॉट हाथ में कैमरा पकड़कर लेना और फिर हिलने पर हैरान होना। तिपाई या मज़बूत सहारा लो।
- सूरज या खिड़की को इंसान के पीछे रखना। चेहरा काला हो जाता है। रोशनी सामने रखो।
- माइक दूर रखकर आवाज़ बाद में ठीक करने की सोचना। खराब आवाज़ सुधारना बहुत कठिन है, इसलिए पास से रिकॉर्ड करो।
- बैटरी, कार्ड की जगह और टेस्ट क्लिप न देखना और शूटिंग खो देना। साथ ही फ़ाइलों की इकलौती नक़ल रखना।