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फ़िल्म निर्माण की मूल बातें

फ़िल्म तीन चरणों में बनती है: पूर्व-निर्माण (विचार, पटकथा, स्टोरीबोर्ड, योजना), निर्माण (कैमरा, ध्वनि और प्रकाश के साथ शूटिंग) और उत्तर-निर्माण (संपादन, ध्वनि, संगीत, रंग और टाइटल)। कैमरा कहानी कहता है शॉट के आकार (वाइड, मीडियम, क्लोज़-अप), कोण (ऊँचा, आँख के स्तर, नीचा) और चाल (पैन, टिल्ट, ट्रैकिंग) से। टीम काम बाँटती है: निर्देशक, निर्माता, कैमरा ऑपरेटर, ध्वनि, प्रकाश, अभिनेता और संपादक। संपादन क्लिप चुनता, काटता और क्रम में लगाता है। एनिमेशन, जैसे स्टॉप मोशन, हर सेकंड कई फ़्रेम दिखाकर स्थिर चित्रों को चलता हुआ दिखाता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. हर फ़िल्म तीन चरणों में बनती है: 1. पूर्व-निर्माण (योजना), 2. निर्माण (शूटिंग), 3. उत्तर-निर्माण (संपादन और ध्वनि)।
  2. पहले पटकथा लिखो: शब्दों में कहानी। फिर स्टोरीबोर्ड बनाओ: हर शॉट का एक छोटा चित्र, क्रम में। यहाँ छह चित्र एक छोटी कहानी कहते हैं।
  3. शॉट का आकार बताता है कि कितना दिखेगा। कैमरा दूर से शुरू करता है (वाइड शॉट, जगह दिखाता है), पास आता है (मीडियम शॉट, क्रिया दिखाता है), और बहुत पास (क्लोज़-अप, भावना दिखाता है)।
  4. टीम मिलकर काम करती है। निर्देशक कहानी चलाता है, कैमरा ऑपरेटर हर शॉट सजाता है, ध्वनि टीम ऊपर माइक पकड़ती है, प्रकाश टीम अभिनेता पर रोशनी डालती है।
  5. संपादन: ज़रूरत से ज़्यादा शूट होता है। क्लिप 4 की ज़रूरत नहीं, तो वह कटती है और बाकी सरककर एक सहज दृश्य बनाती हैं। फिर ध्वनि, संगीत और रंग जुड़ते हैं।
  6. खुद आज़माओ: कैमरा पास-दूर करो और कोण बदलो। रीडआउट तुम्हारे शॉट का नाम बताएगा: वाइड, मीडियम या क्लोज़-अप, और ऊँचा, आँख के स्तर या नीचा कोण।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या फ़िल्म के लिए महँगा कैमरा चाहिए?

नहीं। फ़ोन, खिड़की की अच्छी रोशनी और साफ़ ध्वनि काफ़ी हैं। कैमरे से ज़्यादा योजना और साफ़ कहानी मायने रखती है।

स्टोरीबोर्ड के लिए अच्छी ड्रॉइंग ज़रूरी है?

नहीं। डंडी वाले आदमी और डिब्बे चलेंगे। बस यह दिखना चाहिए कि हर शॉट में क्या है और किस क्रम में।

वाइड शॉट और क्लोज़-अप में कैसे चुनूँ?

सोचो दर्शक को अभी क्या चाहिए: हम कहाँ हैं (वाइड), क्या हो रहा है (मीडियम), या किसी को कैसा लग रहा है (क्लोज़-अप)।

माइक अभिनेता के ऊपर क्यों रखते हैं?

आवाज़ के पास रहकर साफ़ ध्वनि पाने को, और फिर भी फ़्रेम के बाहर रहने को।

ज़रूरत से ज़्यादा शूट क्यों करते हैं?

कुछ टेक में गलतियाँ होती हैं। अतिरिक्त शॉट से संपादक को दृश्य सहज बनाने के विकल्प मिलते हैं।

परदे पर कोई ताक़तवर कैसे दिखता है?

नीचे कोण से, कैमरा नीचे से ऊपर देखता हुआ। खुद आज़माओ में कोण स्लाइडर से देखो।

फ़िल्म बनाने के तीन चरण

  1. पूर्व-निर्माण (योजना): विचार, शोध, पटकथा, स्टोरीबोर्ड, कलाकार चुनना (कास्टिंग), शूटिंग की जगह (लोकेशन), पोशाक और सामान, बजट और शूटिंग का समय-सारिणी। अच्छी योजना बाद में समय और पैसा बचाती है।
  2. निर्माण (शूटिंग): टीम शॉट और ध्वनि रिकॉर्ड करती है। हर शॉट कई बार लिया जा सकता है; हर कोशिश एक टेक है। क्लैपरबोर्ड पर दृश्य और टेक नंबर लिखे होते हैं ताकि संपादक उन्हें ढूँढ सके।
  3. उत्तर-निर्माण (अंतिम रूप): चित्रों का संपादन, ध्वनि साफ़ करना और मिलाना, संगीत और ध्वनि प्रभाव, कलर ग्रेडिंग, विज़ुअल इफ़ेक्ट, टाइटल और क्रेडिट। फिर फ़िल्म एक्सपोर्ट होकर दिखाई जाती है (वितरण)।

पटकथा और स्टोरीबोर्ड

पटकथा (स्क्रीनप्ले) शब्दों में कहानी है। इसमें दृश्य शीर्षक (अंदर या बाहर, जगह, दिन या रात), छोटी क्रिया पंक्तियाँ (क्या दिखता है) और हर पात्र के नाम के नीचे संवाद होते हैं। पटकथा का एक पन्ना परदे पर लगभग एक मिनट।

छोटी फ़िल्म में भी साफ़ ढाँचा चाहिए: शुरुआत (कौन, कहाँ), एक समस्या, और अंत जिसमें कुछ बदले।

तकनीकी पटकथा (शॉट सूची) हर दृश्य को नंबर वाले शॉट में बाँटती है: आकार, कोण, चाल, ध्वनि और अवधि।

स्टोरीबोर्ड फ़िल्म का कॉमिक-स्ट्रिप रूप है: हर शॉट का एक चित्र, कैमरा या अभिनेता की चाल के तीर, ध्वनि के नोट। डंडी वाले आदमी भी चलेंगे। इससे शूटिंग से पहले ही सब फ़िल्म देख लेते हैं।

कैमरे की भाषा: शॉट, कोण और चाल

शॉट के आकार

कोण

ऊँचा कोण (कैमरा नीचे देखता है) व्यक्ति को छोटा या कमज़ोर दिखाता है। आँख के स्तर पर सामान्य लगता है। नीचा कोण (कैमरा ऊपर देखता है) व्यक्ति को ताक़तवर या डरावना दिखाता है।

चाल

पैन (बाएँ-दाएँ घूमना), टिल्ट (ऊपर-नीचे घूमना), ट्रैकिंग/डॉली (कैमरा साथ चलता है), ज़ूम (लेंस बदलता है, कैमरा वहीं) और हैंडहेल्ड (हिलता हुआ, असली लगता है)।

संयोजन

तिहाई का नियम: 3 × 3 जाल सोचो और ज़रूरी चीज़ें रेखाओं पर रखो। व्यक्ति जिधर देख रहा है, उधर जगह छोड़ो। 180° नियम: बातचीत में दो अभिनेताओं के बीच की रेखा के एक ही ओर कैमरा रखो, ताकि वे जगह बदलते न लगें।

कौन क्या करता है: टीम

स्कूल की फ़िल्म में एक व्यक्ति कई काम करता है, पर काम के नाम याद रखने से कुछ छूटता नहीं।

संपादन, ध्वनि और उत्तर-निर्माण

संपादक क्लिप को टाइमलाइन पर रखता है, सबसे अच्छे टेक चुनता है, हर क्लिप का आगा-पीछा काटता है और क्रम में लगाता है। जोड़ के प्रकार:

निरंतरता संपादन समय और जगह साफ़ रखता है ताकि कट महसूस न हों। मॉन्टाज कई छोटे शॉट जोड़कर बहुत सारा समय जल्दी दिखाता है।

ध्वनि फ़िल्म का आधा हिस्सा है: संवाद, ध्वनि प्रभाव, परिवेश ध्वनि और संगीत। डाइजेटिक ध्वनि कहानी की दुनिया से आती है (दरवाज़ा बंद होना); नॉन-डाइजेटिक दर्शकों के लिए जोड़ी जाती है (पृष्ठभूमि संगीत)। आख़िर में कलर ग्रेडिंग मूड बनाती है, और टाइटल व क्रेडिट जुड़ते हैं।

एनिमेशन की सरल तकनीकें

एनिमेशन आँख को चकमा देता है: कई स्थिर चित्र तेज़ी से दिखाओ तो चलते लगते हैं। फ़िल्में आमतौर पर 24 फ़्रेम प्रति सेकंड (fps) दिखाती हैं; सरल एनिमेशन 12 fps पर, हर चित्र दो फ़्रेम तक।

अच्छे एनिमेशन के नियम: छोटी, बराबर चालें; कैमरा स्थिर; फ़ोटो के बीच रोशनी न बदले।

करके देखो: एक मिनट की फ़ोन फ़िल्म

तीन पंक्तियों में कहानी लिखो: किसी को कुछ चाहिए, एक मुश्किल आती है, अंत में कुछ बदलता है। 6 चित्रों का स्टोरीबोर्ड बनाओ। हर चित्र फ़ोन से शूट करो: कम से कम एक वाइड, एक मीडियम और एक क्लोज़-अप। चेहरे पर खिड़की की रोशनी डालो। क्लिप क्रम में जोड़ो, फ़ालतू सेकंड काटो, एक ध्वनि प्रभाव और संगीत जोड़ो। परिवार को दिखाओ और पूछो: क्या बिना समझाए कहानी समझ आई?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. दर्शकों को लगे कि विशाल रोबोट बहुत ताक़तवर है। कौन-सा कोण लोगे?

नीचा कोण: कैमरा नीचे रखकर रोबोट की ओर ऊपर देखो। इससे वह बड़ा और ताक़तवर लगता है।

2. स्टॉप-मोशन क्लिप 12 fps पर 8 सेकंड की चाहिए। कितनी फ़ोटो?

फ़्रेम = सेकंड × fps = 8 × 12 = 96 फ़ोटो।

3. पटकथा 5 पन्नों की है। फ़िल्म लगभग कितनी लंबी होगी?

लगभग 1 मिनट प्रति पन्ना, यानी करीब 5 मिनट।

4. 'पार्क में एक लड़की को खोया पिल्ला मिलता है' के लिए तीन शॉट सोचो।

1) पार्क का वाइड शॉट (हम कहाँ हैं?)। 2) लड़की आवाज़ सुनकर मुड़ती है, मीडियम शॉट (क्या हो रहा है?)। 3) पिल्ला दौड़कर आता है तो मुस्कुराता चेहरा, क्लोज़-अप (उसे कैसा लगा?)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पटकथा लिखना और स्टोरीबोर्ड बनाना किस चरण में होता है?
2. पात्र की भावना कौन-सा शॉट सबसे अच्छा दिखाता है?
3. व्यक्ति की ओर ऊपर देखता कैमरा उसे कैसा दिखाता है?
4. फ़िल्म की रचनात्मक दृष्टि कौन चलाता है?
5. सिर्फ़ दर्शकों के लिए जोड़ा गया पृष्ठभूमि संगीत कहलाता है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ़िल्म निर्माण के चरण कौन-से हैं?

पूर्व-निर्माण (विचार, पटकथा, स्टोरीबोर्ड, योजना), निर्माण (चित्र और ध्वनि की शूटिंग) और उत्तर-निर्माण (संपादन, ध्वनि, संगीत, रंग, टाइटल), फिर वितरण।

कैमरे के बुनियादी शॉट कौन-से हैं?

एक्सट्रीम वाइड, वाइड, मीडियम, क्लोज़-अप और एक्सट्रीम क्लोज़-अप, ऊँचे, आँख के स्तर या नीचे कोण के साथ।

फ़िल्में प्रति सेकंड कितने फ़्रेम चलाती हैं?

सिनेमा आमतौर पर 24 फ़्रेम प्रति सेकंड। सरल स्टॉप मोशन अक्सर 12 फ़्रेम प्रति सेकंड।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

इटलीSecondaria di secondo grado – classe 5ª (esame di Stato)Audiovisual disciplines (year 5)
स्पेन2º ESOImage and visual and audiovisual communication
स्पेन3º ESOImage and visual and audiovisual communication
स्पेन4º ESOPhotography, visual, audiovisual and multimedia language
स्पेन1º BachilleratoAudiovisual narrative
स्पेन1º BachilleratoAudiovisual production: techniques and procedures
यूक्रेन10 класPractical modules (school chooses one or more)
यूक्रेन11 класPractical modules (school chooses one or more)
इंग्लैंडYear 13Component 3: Production (NEA)
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Film
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