Ukraine 11 клас Art (profile level)
अध्याय: 3
1. Art of the European cultural region
European art
- विश्व कला: अलग-अलग संस्कृतियाँ कला कैसे बनाती हैं – हर सांस्कृतिक क्षेत्र की अपनी कला-भाषा है, जो उसकी आस्था, सामग्री और जीवन-शैली से बनती है। अफ़्रीकी कला मुखौटों, लकड़ी की मूर्तियों, काँसे और कपड़ों में साहसी, सरल आकार इस्तेमाल करती है, अक्सर अनुष्ठान और समुदाय के लिए, और इसने क्यूबिज़्म जैसी आधुनिक यूरोपीय कला को प्रेरित किया। भारतीय कला बारीकी और समरूपता से भरी है: मंदिर शिखर, स्तूप, मूर्तियाँ, लघु और लोक चित्र। सुदूर पूर्वी कला ब्रश-स्याही, सुलेख और खाली जगह को महत्व देती है। अरब-इस्लामी कला नियम से दोहराकर ज्यामितीय तारे, अरबेस्क और सुलेख बनाती है। कोलंबस-पूर्व अमेरिका ने सीढ़ीदार पिरामिड, कपड़े और सोने का काम बनाया; बाद में टोटम और मैक्सिकन भित्ति चित्र आए। यूरोपीय कला यूनानी स्तंभों से गॉथिक, पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य और आधुनिक शैलियों तक जाती है। किसी कृति को समझने के लिए उसका वर्णन करें, उसकी संस्कृति से जोड़ें, अपनी भावना पहचानें, फिर उस शैली में ख़ुद कुछ बनाएँ।
2. European cultural region: Ukraine
Ukrainian art
- सांस्कृतिक विरासत – सांस्कृतिक विरासत वह सब है जो किसी समुदाय को अतीत से मिला, जिसे वह आज महत्व देता है और आगे सौंपना चाहता है: इमारतें और स्मारक, संग्रहालय की चीज़ें, भाषाएँ, संगीत, नृत्य, त्योहार, हुनर, खाना और ज्ञान। मूर्त विरासत छू सकते हैं (अचल जैसे मंदिर और पुल, चल जैसे सिक्के और पांडुलिपियाँ); अमूर्त विरासत जी और निभाई जाती है; प्राकृतिक विरासत में ख़ास भू-दृश्य और जीव हैं। विरासत पहचान देती है, इतिहास सिखाती है, पर्यटन से कमाई लाती है और संस्कृतियों को जोड़ती है। मौसम, प्रदूषण, भीड़, लापरवाह निर्माण, उपेक्षा और संघर्ष इसे ख़तरे में डालते हैं; संरक्षण, कानून, संग्रहालय, विरासत सूचियाँ, शिक्षा और स्थानीय लोग इसे बचाते हैं।
3. Practical modules (school chooses one or more)
Singing · Musical instrument · Graphics · Computer graphics · Painting · Sculpture · Decorative and applied art · Basics of design · Choreography · Theatre · Photo art · Film art · Theatre and film projects; art of the home region
- संगीत प्रस्तुति (Music Performance): एकल और समूह में – संगीत प्रस्तुति यानी श्रोताओं के सामने कोई रचना बजाना या गाना। अच्छी प्रस्तुति में शुद्धता (सही सुर, सही लय), एक-सी ताल (टेम्पो), भाव दिखाने के लिए डायनेमिक्स और फ़्रेज़िंग, और शैली के अनुसार वादन होता है। समूह में कलाकार एक-दूसरे को सुनते हैं, आवाज़ का संतुलन रखते हैं और इशारों पर चलते हैं। अच्छी तैयारी = धीमा, सही रियाज़, छोटे टुकड़ों में, फिर गति बढ़ाना और दूसरों को सुनाना।
- वाद्य यंत्र (Musical Instruments) – हर वाद्य किसी चीज़ में कंपन कराता है: तार, हवा का स्तंभ, तनी खाल, ठोस वस्तु या इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और स्पीकर। हम वाद्यों को इसी से बाँटते हैं कि क्या काँपता है: तत (तार), सुषिर (हवा), अवनद्ध (खाल), घन (ठोस) और इलेक्ट्रॉनिक। छोटा, कसा या पतला हिस्सा ऊँचा स्वर देता है। हर वाद्य का अपना टिम्बर (स्वर का रंग) होता है क्योंकि वह हार्मोनिक्स का अपना मिश्रण जोड़ता है। ऑर्केस्ट्रा या बैंड में वाद्य मिलकर समृद्ध रंग बनाते हैं।
- रेखांकन और चित्रकला (Drawing and Painting) – रेखांकन देखने और सोचने का तरीक़ा है: इससे हम जो देखते हैं उसे दर्ज करते हैं, याद रखते हैं, डिज़ाइन की योजना बनाते हैं और विचार व्यक्त करते हैं। अच्छा चित्र खाका (blocking in) से शुरू होता है: चीज़ों को सरल आकारों में देखना (गोला, घन, बेलन) और हल्की रेखाओं से अनुपात जाँचना। फिर रेखा किनारे तय करती है, और रेखा का वज़न (भारी या हल्का) पास-दूर दिखाता है। रोशनी रूप देती है: रोशन वस्तु पर चमक, मध्य-स्वर, मुख्य छाया, परावर्तित रोशनी और गिरती छाया दिखती है। स्वर (value) सफ़ेद से काले तक जाता है; रोशनी-अँधेरे का तेज़ अंतर छायांकन (chiaroscuro) कहलाता है, और चित्र ऊँची कुंजी (ज़्यादातर हल्का) या नीची कुंजी (ज़्यादातर गहरा) में हो सकता है। सूखे माध्यम (ग्रेफ़ाइट, चारकोल, पेस्टल, रंगीन पेंसिल) हैचिंग, क्रॉस-हैचिंग, बिंदु और मिलाने से स्वर बनाते हैं; गीले माध्यम (स्याही, जलरंग, गुआश, ऐक्रेलिक, तैलरंग) वॉश, परतों और रंग मिलाने से। रैखिक और वायुमंडलीय परिप्रेक्ष्य जगह दिखाते हैं, और आकृति चित्रण में अनुपात, मुद्रा और पूर्वसंक्षेपण (foreshortening) लगते हैं।
- डिजिटल मीडिया: चित्र, आवाज़ और वीडियो संख्याएँ कैसे बनते हैं – डिजिटल मीडिया यानी कंप्यूटर पर संख्याओं के रूप में सहेजा गया हर चित्र, आवाज़, वीडियो या एनिमेशन। रास्टर चित्र पिक्सेल का जाल है; हर पिक्सेल लाल, हरे और नीले के 0 से 255 तक के मानों में सहेजा जाता है। वेक्टर ग्राफ़िक्स आकृतियों को गणित से सहेजते हैं, इसलिए हर आकार में साफ़ रहते हैं। वीडियो और एनिमेशन बहुत सारे फ़्रेम तेज़ी से दिखाना है। रेज़ोल्यूशन बढ़ने से फ़ाइल बड़ी होती है, इसलिए संपीडन करते हैं। मीडिया बनाते-बाँटते समय कॉपीराइट, लाइसेंस और लोगों के चित्र-अधिकार का सम्मान करना ज़रूरी है।
- मूर्तिकला की तकनीकें – मूर्तिकला तीन आयामों की कला है। यह उभार (पृष्ठभूमि से जुड़ी: निम्न या उच्च) या पूर्ण मूर्ति (अलग खड़ी, हर तरफ़ से दिखे) हो सकती है। बनाने के चार मुख्य तरीके: तराशना (पत्थर या लकड़ी से सामग्री हटाना), गढ़ना (मिट्टी या मोम जोड़ना, अक्सर आर्मेचर पर), ढलाई (साँचे में पिघला कांसा जैसा द्रव डालना) और निर्माण (हिस्से जोड़ना)। मूर्तिकार रेखाचित्र और मैकेट से योजना बनाते हैं, यथार्थवादी से अमूर्त तक यथार्थ का स्तर चुनते हैं, और मुद्रा, दिशा या असली गति से हलचल दिखाते हैं।
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
- कला के तत्व और डिज़ाइन के सिद्धांत – कला के तत्व वे ईंटें हैं जिनसे हर कलाकृति बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, मान (हल्का-गहरा), बनावट और स्थान; कई शिक्षक बिंदु को भी जोड़ते हैं। डिज़ाइन के सिद्धांत बताते हैं कि इन ईंटों को कैसे जमाएँ: संतुलन, विरोधाभास (कंट्रास्ट), बल (एम्फ़ेसिस), गति, लय और पैटर्न, अनुपात और पैमाना, एकता और विविधता।
- नृत्य: तत्व, नृत्य-रचना और शैलियाँ – नृत्य शरीर की वह गति है जो स्थान और समय में, ऊर्जा के साथ, भावना जताने, कहानी सुनाने या उत्सव मनाने के लिए होती है। हर नृत्य को चार तत्वों से समझ सकते हैं: शरीर (क्या हिलता है), स्थान (कहाँ: स्तर, दिशा, रास्ते), समय (कब: ताल, लय, ठहराव) और ऊर्जा (कैसे: तीखी या कोमल, ज़ोरदार या हल्की)। नृत्य-रचना (कोरियोग्राफ़ी) मोटिफ़, दोहराव, कैनन, एकस्वरता, विरोधाभास और बनावट जैसे तरीक़ों से गतियाँ सजाने की कला है। अच्छे कलाकार तकनीक, सुरक्षा और भाव सीखते हैं, और अच्छे दर्शक देखी चीज़ का वर्णन, विश्लेषण, अर्थ और मूल्यांकन करते हैं। शास्त्रीय, लोक, बैले, हिप-हॉप – हर शैली अपनी संस्कृति और इतिहास से निकलती है।
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
- फ़ोटोग्राफ़ी: प्रकाश, एक्सपोज़र और संयोजन – कैमरा एक अँधेरा डिब्बा है जो प्रकाश पकड़ता है। लेंस प्रकाश को मोड़कर सेंसर (या फ़िल्म) पर साफ़, उल्टा चित्र बनाता है। तीन सेटिंग तय करती हैं कि कितना प्रकाश चित्र बनाएगा: एपर्चर (लेंस के छेद का आकार, f-संख्या में), शटर गति (प्रकाश कितनी देर पड़ेगा) और ISO (सेंसर कितना संवेदनशील)। तीनों मिलकर एक्सपोज़र त्रिभुज बनाते हैं। संयोजन (फ़्रेम में चीज़ें कहाँ रखें) और प्रकाश की गुणवत्ता सही फ़ोटो को अच्छा फ़ोटो बनाते हैं। फ़ोटोग्राफ़र चित्रों से कहानी कहते, संपादन करते और चित्रों की समीक्षा करना सीखते हैं।
- फ़िल्म निर्माण की मूल बातें – फ़िल्म तीन चरणों में बनती है: पूर्व-निर्माण (विचार, पटकथा, स्टोरीबोर्ड, योजना), निर्माण (कैमरा, ध्वनि और प्रकाश के साथ शूटिंग) और उत्तर-निर्माण (संपादन, ध्वनि, संगीत, रंग और टाइटल)। कैमरा कहानी कहता है शॉट के आकार (वाइड, मीडियम, क्लोज़-अप), कोण (ऊँचा, आँख के स्तर, नीचा) और चाल (पैन, टिल्ट, ट्रैकिंग) से। टीम काम बाँटती है: निर्देशक, निर्माता, कैमरा ऑपरेटर, ध्वनि, प्रकाश, अभिनेता और संपादक। संपादन क्लिप चुनता, काटता और क्रम में लगाता है। एनिमेशन, जैसे स्टॉप मोशन, हर सेकंड कई फ़्रेम दिखाकर स्थिर चित्रों को चलता हुआ दिखाता है।
- सांस्कृतिक विरासत – सांस्कृतिक विरासत वह सब है जो किसी समुदाय को अतीत से मिला, जिसे वह आज महत्व देता है और आगे सौंपना चाहता है: इमारतें और स्मारक, संग्रहालय की चीज़ें, भाषाएँ, संगीत, नृत्य, त्योहार, हुनर, खाना और ज्ञान। मूर्त विरासत छू सकते हैं (अचल जैसे मंदिर और पुल, चल जैसे सिक्के और पांडुलिपियाँ); अमूर्त विरासत जी और निभाई जाती है; प्राकृतिक विरासत में ख़ास भू-दृश्य और जीव हैं। विरासत पहचान देती है, इतिहास सिखाती है, पर्यटन से कमाई लाती है और संस्कृतियों को जोड़ती है। मौसम, प्रदूषण, भीड़, लापरवाह निर्माण, उपेक्षा और संघर्ष इसे ख़तरे में डालते हैं; संरक्षण, कानून, संग्रहालय, विरासत सूचियाँ, शिक्षा और स्थानीय लोग इसे बचाते हैं।