वाद्य ध्वनि कैसे बनाता है?
ध्वनि हवा में चलने वाला कंपन है। हर वाद्य के तीन हिस्से होते हैं:
- कंपक (तार, वायु स्तंभ, खाल, पट्टी या स्पीकर शंकु),
- उसे शुरू करने का तरीका (छेड़ना, गज, फूँकना, मारना या बिजली का संकेत),
- अनुनादक जो आवाज़ बढ़ाता है (गिटार या सितार का खोखला शरीर, ड्रम का खोल)।
तारत्व (ऊँचा या नीचा स्वर) इस पर निर्भर है कि हिस्सा कितनी तेज़ी से काँपता है: उसकी आवृत्ति, जिसकी इकाई हर्ट्ज़ (Hz) है। छोटे, कसे, पतले हिस्से तेज़ काँपते हैं, तो स्वर ऊँचा। तार की लंबाई आधी करो तो आवृत्ति दोगुनी: स्वर एक सप्तक ऊपर।
वाद्यों के परिवार
कई संस्कृतियाँ वाद्यों को "क्या काँपता है" से बाँटती हैं। भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में चार वर्ग हैं; विश्व की एक प्रचलित पद्धति (हॉर्नबोस्टल–साक्स) में पाँच।
- तत (तार, chordophone): सितार, वीणा, सरोद, वायलिन, गिटार, हार्प। गज से, उँगली से या चोट से (पियानो)।
- सुषिर (हवा, aerophone): बाँसुरी, शहनाई, क्लैरिनेट (वुडविंड) और ट्रम्पेट, ट्रॉम्बोन (ब्रास, जिनमें होंठ काँपते हैं)।
- अवनद्ध (खाल, membranophone): तबला, मृदंगम, ढोल, टिम्पनी।
- घन (ठोस, idiophone): घंटी, मंजीरा, झाँझ, घटम, ज़ाइलोफ़ोन।
- इलेक्ट्रॉनिक (electrophone): सिंथेसाइज़र, इलेक्ट्रिक कीबोर्ड, एम्प्लिफ़ायर वाला इलेक्ट्रिक गिटार, ड्रम मशीन।
टिम्बर: फ़्लूट और वायलिन अलग क्यों सुनाई देते हैं
जब वाद्य एक स्वर बजाता है, तो साथ में कुछ हल्के, ऊँचे स्वर भी बजते हैं। ये हार्मोनिक्स (अधिस्वरक) हैं। हर वाद्य का हार्मोनिक्स का अपना नुस्खा होता है, और स्वर शुरू व खत्म करने का अपना ढंग। इससे उसका टिम्बर या स्वर-रंग बनता है।
फ़्लूट में कम हार्मोनिक्स हैं, तो आवाज़ शुद्ध और मुलायम। वायलिन या शहनाई में बहुत, तो आवाज़ चमकदार। इलेक्ट्रॉनिक वाद्य बिजली के संकेतों से ध्वनि बनाते हैं; सिंथेसाइज़र असली वाद्य की नकल या बिल्कुल नया टिम्बर बना सकता है। डिजिटल औज़ार (कीबोर्ड, ऐप, MIDI) से एक वादक कई ध्वनियाँ चला सकता है।
वाद्य साथ में: ऑर्केस्ट्रा और वाद्यवृंद
वाद्य-संयोजन (orchestration) का अर्थ है तय करना कि कौन-सा वाद्य कौन-सा हिस्सा बजाएगा। पश्चिमी सिम्फ़नी ऑर्केस्ट्रा के चार भाग हैं: तार (सबसे बड़ा), वुडविंड, ब्रास और ताल वाद्य। भारतीय शास्त्रीय संगत में धुन का वाद्य (सितार या सारंगी), आधार स्वर (तानपुरा) और ताल (तबला) होते हैं। रॉक बैंड में गिटार, बेस, ड्रम और कीबोर्ड।
रचनाकार रंग के लिए परिवार मिलाते हैं: गर्माहट के लिए तार, ताकत के लिए ब्रास, हल्के एकल के लिए वुडविंड, ताल और नाटकीयता के लिए आघात वाद्य।
करके देखें
एक खुले डिब्बे पर रबर बैंड चढ़ाओ और छेड़ो। फिर उसे और कसकर छेड़ो। फिर बीच से दबाकर छेड़ो। हर बार कौन-सा ऊँचा है? बोतलों में अलग-अलग पानी भरकर ऊपर से फूँको: ज़्यादा पानी = छोटा वायु स्तंभ = ऊँचा स्वर।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आवृत्ति (तारत्व) – प्रति सेकंड कंपन, इकाई हर्ट्ज़ (Hz)
- तार या खुली नली: f = v ÷ 2L (छोटा L → बड़ा f)
- लंबाई आधी → आवृत्ति दोगुनी (एक सप्तक ऊपर)
- तत – तार वाद्य
- सुषिर – हवा वाले वाद्य
- अवनद्ध – खाल वाले वाद्य
- घन – ठोस वस्तु काँपती है
- इलेक्ट्रॉनिक – बिजली से ध्वनि
- टिम्बर – स्वर-रंग, हार्मोनिक्स के मिश्रण से
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण करो: सितार, तबला, बाँसुरी, मंजीरा, सिंथेसाइज़र।
सितार – तत। तबला – अवनद्ध। बाँसुरी – सुषिर। मंजीरा – घन। सिंथेसाइज़र – इलेक्ट्रॉनिक।
2. 0.65 m लंबा गिटार तार 110 Hz बजाता है। वादक बीच में फ्रेट दबाता है। अब आवृत्ति?
लंबाई आधी → आवृत्ति दोगुनी = 220 Hz (एक सप्तक ऊपर)।
3. तार पर तरंग 300 m/s से चलती है। तार 0.6 m लंबा है। मूल आवृत्ति निकालो।
f = v ÷ 2L = 300 ÷ (2 × 0.6) = 300 ÷ 1.2 = 250 Hz।
4. ट्रम्पेट और फ़्लूट एक ही 440 Hz का स्वर बजाएँ तो अलग क्यों लगते हैं?
मुख्य आवृत्ति एक है, पर हर वाद्य हार्मोनिक्स का अलग मिश्रण जोड़ता है और स्वर अलग ढंग से शुरू करता है, तो टिम्बर अलग है।
आम गलतियाँ
- प्रबलता (loudness) और तारत्व (pitch) को एक समझना। प्रबलता कंपन के आकार से, तारत्व कंपन की गति से।
- पियानो को सिर्फ़ आघात वाद्य मानना। उसके हथौड़े तारों पर पड़ते हैं, तो वह तत वाद्य भी है।
- सैक्सोफ़ोन को धातु का होने से ब्रास मानना। उसमें रीड है, तो वह वुडविंड है।
- यह सोचना कि लंबा तार ऊँचा स्वर देता है। लंबा = धीमा कंपन = नीचा स्वर।