वृंद (एन्सेम्बल) क्या है?
वृंद (एन्सेम्बल) वह समूह है जो साथ मिलकर संगीत प्रस्तुत करता है। यह फ़्रेंच शब्द है जिसका अर्थ 'साथ-साथ' है। एकल में एक व्यक्ति सब कुछ सँभालता है। वृंद में हर कलाकार काम बाँट लेता है।
हर वृंद को तीन चीज़ें चाहिए: साझा ताल (सब एक ही गति रखें), साझा सुर (सब सुर में हों) और सुनना (हर कोई अपने साथ दूसरों को भी सुने)।
छोटे वृंद: एकल, युगल, तिकड़ी, चौकड़ी
- एकल (1): एक आवाज़ या वाद्य, अक्सर संगतकार के साथ, जैसे तानपुरा, पियानो या तबला।
- युगल (2): दो आवाज़ें या वाद्य। एक धुन गा सकता है और दूसरा उसके साथ दूसरी पंक्ति।
- तिकड़ी (3): जैसे वायलिन, चेलो और पियानो, या तीन गायक।
- चौकड़ी (4): क्लासिक स्ट्रिंग क्वार्टेट में दो वायलिन, एक वायोला और एक चेलो होते हैं। गायन की चौकड़ी में अक्सर सोप्रानो, आल्टो, टेनर और बास होते हैं।
छोटे वृंद में हर कलाकार साफ़ सुनाई देता है, इसलिए हर एक को सावधान और भरोसेमंद होना पड़ता है। यहाँ छिपने की जगह नहीं है।
गायन वृंद: गायक-दल और मंडलियाँ
गायक-दल (कॉयर या कोरस) गायकों का बड़ा समूह है। गायकों को उनकी आवाज़ के दायरे के हिसाब से भागों में बाँटा जाता है:
- सोप्रानो: सबसे ऊँची आवाज़ें (अक्सर बच्चे और महिलाएँ)।
- आल्टो: महिलाओं या बच्चों की कुछ नीची आवाज़ें।
- टेनर: पुरुषों की ऊँची आवाज़ें।
- बास: सबसे नीची आवाज़ें।
इसे SATB लिखते हैं। दल एक स्वर में (सब वही स्वर), संगति में (एक साथ अलग-अलग स्वर) या बिना वाद्य के (अ कैपेला) गा सकता है। अन्य गायन वृंदों में प्रश्न-उत्तर शैली में गाने वाली लोक मंडलियाँ, भजन मंडलियाँ और स्कूल प्रार्थना सभा के दल आते हैं।
वादक वृंद: बैंड और ऑर्केस्ट्रा
ऑर्केस्ट्रा में चार परिवार होते हैं: तार (वायलिन, वायोला, चेलो, डबल बास), वायु (बाँसुरी, क्लैरिनेट, ओबो), पीतल (तुरही, ट्रॉम्बोन, हॉर्न) और ताल-वाद्य (ड्रम, झाँझ)। संचालक छड़ी से ताल देता है और बताता है कि कौन-सा समूह कब शुरू करे।
बैंड आम तौर पर छोटा होता है और किसी विषय पर बनता है: पीतल बैंड, रॉक बैंड (गिटार, बास, ड्रम), जैज़ कॉम्बो या मार्चिंग बैंड। दुनिया की संगीत परंपराओं के अपने वृंद हैं: मुख्य गायक या वादक के साथ तबला, तानपुरा आदि वाली भारतीय शास्त्रीय मंडली, इंडोनेशिया का गामेलान, पश्चिम अफ़्रीका के ढोल-दल और बहुत कुछ।
अच्छा वृंद-कलाकार कैसे बनें
- पहले सुनिए। अगर आप दूसरों को सुन नहीं पा रहे, तो आप ज़्यादा तेज़ हैं।
- संतुलन। धुन थोड़ी ऊँची हो, सहारा थोड़ा धीमा।
- घुलना-मिलना। अपने पड़ोसी के साथ शैली, ज़ोर और स्वर-रंग मिलाइए।
- सुर मिलाना। शुरू करने से पहले अपना सुर जाँचिए।
- साथ गिनिए और साँस लीजिए। नायक या संचालक को देखिए और एक साथ साँस लीजिए।
- अपना भाग और दूसरों का भी जानिए। अपनी शुरुआत, विराम और ज़ोर-धीमे के बदलाव निशान लगाकर रखिए।
करके देखिए: घर पर दोस्त के साथ एक स्थिर ताल पर ताली बजाइए। एक ताल रखे और दूसरा उस पर कोई पैटर्न बजाए। फिर जगह बदलिए। आपने अभी ताल का युगल बना लिया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संख्याएँ: एकल 1, युगल 2, तिकड़ी 3, चौकड़ी 4, पंचक 5, षटक 6
- गायक-दल की आवाज़ें (ऊँचे से नीचे): सोप्रानो, आल्टो, टेनर, बास = SATB
- ऑर्केस्ट्रा के परिवार: तार, वायु, पीतल, ताल-वाद्य
- मुख्य शब्द: वृंद, धुन, संगति (हार्मनी), एक स्वर, अ कैपेला, संचालक, संतुलन, घुलना-मिलना
हल किए गए उदाहरण
1. एक गायक-दल में 12 गायक हैं, जो S, A, T और B में बराबर बँटे हैं। हर भाग में कितने गायक हैं?
भाग 4 हैं। 12 ÷ 4 = हर भाग में 3 गायक।
2. स्कूल की मंडली में वायलिन, बाँसुरी, तुरही और ड्रम हैं। हर एक ऑर्केस्ट्रा के किस परिवार का है?
वायलिन: तार। बाँसुरी: वायु। तुरही: पीतल। ड्रम: ताल-वाद्य।
3. एक युगल में संगति गाने वाला गायक, धुन गाने वाले से बहुत ज़ोर से गा रहा है। समस्या क्या है और ठीक कैसे करें?
संतुलन ग़लत है। धुन दब जाती है। संगति वाले को थोड़ा धीमा गाना चाहिए, दूसरी आवाज़ सुननी चाहिए और स्वर-रंग मिलाना चाहिए ताकि दोनों आवाज़ें घुल जाएँ।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ज़्यादा ज़ोर अच्छा है। वृंद में दूसरों को दबा देने से संगीत बिगड़ जाता है।
- युगल और तिकड़ी में गड़बड़ करना। अलग कलाकार गिनिए: युगल 2, तिकड़ी 3।
- यह मानना कि गायक-दल में एक ही भाग होता है। ज़्यादातर दल चार भाग गाते हैं, SATB।
- सुर और ताल दूसरों के साथ जाँचे बिना शुरू कर देना।