तार से आवाज़ कैसे बनती है
तार को खींचकर छोड़ो तो वह आगे-पीछे तेज़ी से काँपता है। इन कँपकँपियों को कंपन (vibration) कहते हैं। कंपन हवा को धक्का देते हैं और हवा आवाज़ को कान तक पहुँचाती है। अकेला तार बहुत धीमा बोलता है, इसलिए वाद्य में लकड़ी का खोखला डिब्बा होता है। डिब्बा तार के साथ काँपता है और आवाज़ कई गुना बढ़ा देता है।
एक सेकंड में तार जितनी बार काँपता है, वह उसकी आवृत्ति (frequency) है। इसे हर्ट्ज़ (Hz) में नापते हैं। ऊँची आवृत्ति यानी ऊँचा सुर।
सुर की ऊँचाई किससे तय होती है
तार का सुर तीन बातों से बदलता है:
- लंबाई: छोटा तार तेज़ काँपता है, इसलिए ऊँचा सुर। आधी लंबाई पर आवृत्ति दुगुनी, यानी एक सप्तक ऊपर।
- कसाव: जितना कसा तार, उतना ऊँचा सुर। खूँटी घुमाने से यही होता है।
- मोटाई: पतला तार ऊँचा सुर देता है। चेलो के तार मोटे हैं, इसलिए सुर नीचे हैं।
बजाते समय तुम बाएँ हाथ की अंगुलियों से लंबाई बदलते हो। कसाव और मोटाई ट्यूनिंग और तार चुनते समय तय हो जाती है।
तार वाद्य परिवार और उन्हें कैसे बजाते हैं
- वायलिन, वायोला, चेलो, डबल बास: गज़ से बजने वाले वाद्य, छोटे और ऊँचे से बड़े और नीचे तक। वायलिन में फ्रेट नहीं होते, इसलिए हर सुर कान और अंगुली की जगह से खोजना पड़ता है।
- गिटार: तार छेड़कर या झंकार से बजाया जाता है। धातु की पट्टियाँ (फ्रेट) हर सुर की सही जगह बताती हैं।
- हार्प: बहुत से तार, हर तार एक सुर के लिए।
- भारतीय उदाहरण: सितार, सरोद, वीणा और वायलिन (कर्नाटक संगीत में भी बजता है) एक ही ध्वनि-सिद्धांत पर चलते हैं।
दायाँ हाथ: गज़ चलाना और तार छेड़ना
गज़ (बो) एक छड़ी है जिस पर घोड़े के बाल लगे होते हैं। रोज़िन से बाल थोड़े चिपचिपे हो जाते हैं, इसलिए वे तार को पकड़ते और छोड़ते रहते हैं। इसी से सुर चलता रहता है।
अच्छी आवाज़ के लिए तीन चीज़ें: गज़ की गति, तार पर पड़ता वज़न और तार पर जगह। लंबी, चिकनी गज़ से लेगातो और छोटे झटकों से स्टाकातो बनता है।
पिज़िकाटो यानी अंगुली से तार छेड़ना। आर्को यानी गज़ से बजाना। गिटार वादक अंगुलियों या पिक से बजाता है।
बायाँ हाथ, वाइब्रेटो और ट्यूनिंग
बायाँ हाथ तारों को दबाकर सुर बदलता है। वायलिन में अंगुली ठीक सही जगह पर पड़नी चाहिए, नहीं तो सुर बेसुरा हो जाएगा। कुछ मिलीमीटर खिसकने से भी सुर बदल जाता है।
वाइब्रेटो यानी अंगुली को हल्के से हिलाना ताकि सुर थोड़ा लहराए। इससे लंबा सुर मुलायम लगता है।
ट्यूनिंग: बजाने से पहले खुले तार मिलाओ। वायलिन G D A E पर मिलाया जाता है। ट्यूनर ऐप या कोई तय सुर इस्तेमाल करो। खूँटी थोड़ी घुमाओ, सुनो, दोहराओ।
तार एकल के लिए बैठक और अभ्यास
- सीधे खड़े या बैठो, कंधे ढीले, वाद्य को कसकर मत भींचो।
- पहले खुले तार और लंबी गज़ का अभ्यास करो।
- ट्यूनर या स्थिर सुर के साथ सरगम धीरे बजाओ।
- कठिन माप छोटे टुकड़ों में धीरे बजाओ।
- अपनी रिकॉर्डिंग सुनो। पहले सुर की शुद्धता, फिर ताल, फिर भाव देखो।
करके देखो
दो अंगुलियों के बीच रबर बैंड खींचो और छेड़ो। उसे छोटा करके फिर छेड़ो। कौन ऊँचा सुनाई देता है? अब और कसकर खींचो। पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर सुनो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आवृत्ति f ∝ 1 / लंबाई (आधी लंबाई → दुगुनी आवृत्ति = 1 सप्तक ऊपर)
- दो लंबाइयों के लिए: f2 / f1 = L1 / L2
- खुला तार 220 Hz; आधी लंबाई 440 Hz; एक-तिहाई लंबाई 660 Hz
- पिज़िकाटो = छेड़ना; आर्को = गज़ से; वाइब्रेटो = सुर का छोटा लहराना
हल किए गए उदाहरण
1. खुला तार 220 Hz देता है। उसे आधी लंबाई पर दबाओ तो आवृत्ति क्या होगी?
आधी लंबाई पर आवृत्ति दुगुनी: 220 × 2 = 440 Hz (एक सप्तक ऊपर)।
2. 60 cm का खुला तार 200 Hz देता है। उसे 40 cm करने पर आवृत्ति निकालो।
f ∝ 1/L। f2 = 200 × 60 / 40 = 300 Hz।
3. 50 cm का तार 440 Hz देता है। 880 Hz के लिए कितनी लंबाई चाहिए?
आवृत्ति दुगुनी करनी है तो लंबाई आधी: 25 cm।
4. समान लंबाई और तनाव पर मोटा चेलो-तार और पतला वायलिन-तार, कौन नीचा सुर देगा?
मोटा चेलो-तार, क्योंकि मोटे तार धीमे काँपते हैं।
आम गलतियाँ
- लंबा तार ऊँचा सुर देता है, ऐसा सोचना। उलटा है: छोटा तार ऊँचा सुर देता है।
- तेज़ आवाज़ के लिए गज़ को बहुत दबाना। ज़्यादा वज़न से खुरदरी आवाज़ आती है; गज़ की गति भी बढ़ाओ।
- बिना ट्यूनिंग के बजाना। तब सारे सुर बेसुरे लगते हैं, अंगुलियाँ ठीक हों तब भी।
- गर्दन को कसकर पकड़ना। हाथ ढीला रखो।