मुद्रा और शरीर को ढीला रखना
आपका शरीर ही वाद्य है। पैर कंधों जितने खुले, वज़न दोनों पैरों पर, घुटने ढीले (अकड़े नहीं), कमर सीधी, कंधे ढीले और नीचे, ठुड्डी सीधी। बैठकर गाओ तो कुर्सी के आगे के हिस्से पर, दोनों पैर ज़मीन पर।
जबड़े, गर्दन या कंधों का तनाव आवाज़ को दबा देता है। गाने से पहले कंधे घुमाओ, हल्की जम्हाई लो, जबड़े की मालिश करो और तीन धीमी साँसें लेकर मन शांत करो। शांत, एकाग्र शरीर खुलकर गाता है और शब्द भी बेहतर याद रखता है।
साँस और साँस पर नियंत्रण
गायक गहरी साँस लेते हैं। डायाफ़्राम, फेफड़ों के नीचे गुंबद जैसी मांसपेशी, साँस लेते समय नीचे जाता है, फेफड़े भरते हैं और पेट व निचली पसलियाँ बाहर आती हैं। कंधे नहीं उठने चाहिए।
साँस छोड़ना नियंत्रित हो: हवा धीरे और बराबर निकले ताकि लंबी पंक्ति में साँस ख़त्म न हो। अभ्यास:
- 4 गिनती में साँस अंदर, "स्स्स" के साथ 8, फिर 12, फिर 16 गिनती में बाहर।
- पिल्ले की तरह हाँफो और पेट की मांसपेशियों को काम करते महसूस करो।
- गाने में साँस लेने की जगह (अक्सर अल्पविराम या पंक्ति के अंत पर) निशान लगाओ ताकि कोई शब्द न टूटे।
आवाज़ कैसे बनती है: सुर, रेंज और आवाज़ के प्रकार
गले में स्वर-यंत्र (लैरिंक्स) के अंदर ऊतक की दो छोटी परतें हैं, जिन्हें स्वर-तंतु (वोकल फ़ोल्ड) कहते हैं। फेफड़ों की हवा इन्हें कंपाती है और यह कंपन हवा में ध्वनि-तरंग बनकर फैलता है। फिर गले, मुँह और नाक की खाली जगहों में आवाज़ गूँजकर भरी और तेज़ होती है (अनुनाद)।
सुर (पिच) इस पर निर्भर है कि तंतु एक सेकंड में कितनी बार कंपन करते हैं (आवृत्ति, हर्ट्ज़ Hz में)। मध्य सा के ऊपर वाला A स्वर 440 Hz है। कसे और पतले तंतु तेज़ कंपन करते हैं और ऊँचा सुर देते हैं।
रेंज वह दायरा है जिसमें आप आराम से गा सकते हो। आवाज़ के आम प्रकार, ऊँचे से नीचे: सोप्रानो (लगभग 260–1050 Hz), ऑल्टो (लगभग 175–700 Hz), टेनर (लगभग 130–520 Hz), बेस (लगभग 80–330 Hz)। किशोर उम्र में लड़कों की आवाज़ भारी होती है क्योंकि तंतु लंबे और मोटे होते हैं; इस दौरान आराम वाली रेंज में धीरे गाओ।
उच्चारण, भाव और वार्म-अप (रियाज़)
स्वर (आ, ए, ई, ओ, ऊ) आवाज़ की मिठास ले जाते हैं: इन्हें खुला और लंबा रखो। व्यंजन अर्थ ले जाते हैं: इन्हें छोटा और साफ़ बोलो, ख़ासकर शब्द के अंत में।
भाव: धीमा-तेज़ (p, f, धीरे-धीरे तेज़) मानो, हर पंक्ति को उसके सबसे ज़रूरी शब्द की ओर ले जाओ, और चेहरे से गीत का भाव दिखाओ।
5 मिनट का वार्म-अप: शरीर का स्ट्रेच → साँस → होंठ फड़फड़ाना या गुनगुनाना → नीचे से ऊपर सायरन → स्वरों पर पाँच सुरों का सरगम (सा रे ग म प) → उच्चारण के लिए जीभ-घुमाऊ वाक्य। आवाज़ का ध्यान रखो: पानी पियो, गला बैठे तो आराम दो, कभी चीख़ो या ऊँचे सुर पर ज़ोर मत लगाओ।
समूह गान: भाग, हार्मनी, सुर मिलाना और कंडक्टर के इशारे
मिश्रित कोरस में आमतौर पर चार भाग होते हैं, SATB: सोप्रानो, ऑल्टो, टेनर, बेस। स्कूल कोरस पहले एकस्वर (सब एक ही धुन) में, फिर राउंड या कैनन में, फिर दो-तीन भागों में गाते हैं। जब भाग अलग पर मेल खाते सुर गाते हैं, तो हार्मनी सुनाई देती है।
सुर मिलाना: एक ही सुर पर दो आवाज़ें तब सुर में हैं जब उनके कंपन मेल खाएँ; थोड़ा फ़र्क़ हो तो लहराती-सी आवाज़ (बीट) सुनाई देती है। गाने से ज़्यादा सुनो, बगल वाली आवाज़ से मिलाओ, और ऐसे घुलो कि कोई आवाज़ अलग न निकले।
कंडक्टर के इशारे: तैयारी की साँस (हाथ उठे, सब एक साथ साँस लेते हैं), ताल का पैटर्न (2 के लिए नीचे-ऊपर, 3 के लिए नीचे-बाहर-ऊपर, 4 के लिए नीचे-अंदर-बाहर-ऊपर), कट-ऑफ़ (छोटा बंद होता घेरा), और हाथ की ऊँचाई या आकार से तेज़-धीमा।
कोरस कई तरह का संगीत गाते हैं: लोकगीत, अलग-अलग देशों के गीत, भक्ति संगीत और पॉप। भारत में देशभक्ति गीत और भजन के समूह गायन में भी साँस और घुलने के यही नियम लगते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. एक सुर 220 Hz है। एक सप्तक ऊपर वाला सुर कितना होगा?
एक सप्तक ऊपर आवृत्ति दोगुनी: 220 × 2 = 440 Hz।
2. आपकी पंक्ति 12 ताल लंबी है और 9वीं ताल पर साँस ख़त्म हो जाती है। दो उपाय बताओ।
1) पंक्ति से पहले धीरे और गहरी साँस लो, हवा बराबर छोड़ो (12 गिनती तक स्स्स का अभ्यास)। 2) अगर शब्द अनुमति दें तो किसी प्राकृतिक विराम पर छोटी साँस का निशान लगाओ।
3. 24 बच्चों के कोरस को SATB गाना है। संतुलित बँटवारा सुझाओ।
सबसे आसान: हर भाग में 6। अगर नीची आवाज़ें कमज़ोर हों तो 6 S, 5 A, 6 T, 7 B ताकि बेस हार्मनी को सहारा दे।
4. सुबह की सभा से पहले कक्षा के लिए 5 मिनट का वार्म-अप बनाओ।
1 मिनट कंधे घुमाना और स्ट्रेच; 1 मिनट साँस (4 अंदर, 8 बाहर स्स्स पर); 1 मिनट होंठ फड़फड़ाना और सायरन; 1 मिनट "मा-मे-मी-मो-मू" पर पाँच सुर; 1 मिनट जीभ-घुमाऊ वाक्य और गीत की पहली पंक्ति।
आम गलतियाँ
- साँस लेते समय कंधे उठाना; साँस नीचे जाए, पेट और पसलियाँ बाहर।
- ऊँचे सुर गले से ज़ोर लगाकर निकालना; ज़ोर नहीं, साँस का सहारा और गूँज इस्तेमाल करो।
- कोरस में बाक़ी सबसे तेज़ गाना; समूह में सुनो और घुलो।
- शब्दों के आख़िरी व्यंजन निगल जाना, जिससे सुनने वाले शब्द नहीं समझ पाते।