अपने रिकॉर्डर को जानो
सोप्रानो रिकॉर्डर में एक मुखनली (जहाँ फूँकते हैं), तेज़ किनारे वाली खिड़की, आगे सात उँगली के छेद और पीछे एक अँगूठे का छेद होता है। फूँकने से हवा की पतली धार खिड़की के किनारे पर जाती है। इससे नली की हवा काँपती है और सुर सुनाई देता है।
सुर की ऊँचाई (तारत्व) हवा के स्तंभ की लंबाई पर निर्भर करती है: खिड़की से पहले खुले छेद तक। छेद ढकने से स्तंभ लंबा होता है और सुर नीचा। उँगली उठाने से स्तंभ छोटा होता है और सुर ऊँचा।
पकड़, साँस और जीभ
- पकड़: सीधे बैठो या खड़े हो। बायाँ हाथ ऊपर (अँगूठा पीछे, उँगलियाँ पहले तीन छेदों पर), दायाँ हाथ नीचे। उँगलियों के नरम पोरों का इस्तेमाल करो, नोक का नहीं, ताकि छेद बंद रहें। थोड़ा रिसाव चीं-चीं की आवाज़ बनाता है।
- साँस: नीचे पेट में साँस लो, छाती में ऊपर नहीं। ऐसे फूँको जैसे हाथ गरम कर रहे हो: हल्की, गरम, एक-सी हवा।
- जीभ: हर सुर को हल्के "तु" या "दु" से शुरू करो, जीभ ऊपर के दाँतों के पीछे लगे। इससे हर सुर साफ़ शुरू होता है।
- बहुत ज़ोर या बहुत धीमे: ज़्यादा ज़ोर से सुर एक अष्टक ऊपर कूदकर चीं-चीं करता है। बहुत धीमे से सुर नहीं बनता। बीच का रास्ता खोजो।
पहले सुर: B, A, G
पहले केवल बाएँ हाथ से शुरू करो। B: अँगूठा और पहली उँगली। A: अँगूठा और पहली दो उँगलियाँ। G: अँगूठा और पहली तीन उँगलियाँ। ध्यान दो कि हर नई उँगली ढकने से सुर नीचा होता है। सोप्रानो रिकॉर्डर पर ये लगभग 988, 880 और 784 हर्ट्ज़ बजते हैं। B-A-G धीरे बजाओ और हर सुर ध्यान से सुनो। फूँकने से पहले देखो कि अगली उँगली छेद पर ठीक बैठी है।
देखभाल: बिना साफ़ किए रिकॉर्डर किसी से साझा मत करो। बजाने के बाद पानी पोंछ दो और साफ़ करने के लिए कभी ज़ोर से मत फूँको।
समूह-गायन
कोरस वह समूह है जो साथ गाता है। मुद्रा: सीधे खड़े हो, पैर थोड़े फैले, घुटने ढीले, कंधे शिथिल। साँस: नीचे साँस लो ताकि पेट बाहर आए, और हवा धीरे-धीरे छोड़ो। गला तैयार करो: पहले गुनगुनाओ, फिर "आ" को हल्के से ऊपर-नीचे गाओ।
कोरस में स्वर-भाग होते हैं: नीचे के स्वर (जैसे बास), मध्य के (अल्टो) और ऊँचे (सोप्रानो)। वे एक ही समय पर अलग-अलग सुर गाते हैं, इसे स्वर-मेल (हार्मनी) कहते हैं। जब उनकी आवृत्तियाँ सरल अनुपात में होती हैं, जैसे C, E और G में 4 : 5 : 6, तो वे मिलकर मधुर मेल (कॉर्ड) बनाते हैं। सब एक ही सुर गाएँ तो वह एकस्वर (यूनिसन) है।
सुनो, मिलाओ और प्रस्तुति दो
सबसे अच्छे कोरस गायक तेज़ गाने से ज़्यादा सुनते हैं। अपनी आवाज़ का ज़ोर, स्वर और शुरुआत समूह से मिलाओ। संचालक को देखो। सुर में गाओ: बहुत ऊँचे या नीचे हुए तो मेल कर्कश लगेगा, तब धीरे से ठीक करो। हर भाग को अकेले अभ्यास करो, फिर साथ में।
करके देखो: रिकॉर्डर पर B-A-G बजाओ, फिर वही तीन सुर "ला" से गाओ। फिर कोई सरल धुन दो समूहों में गाओ: एक समूह दूसरे से कुछ ताल बाद शुरू करे, और मेल को सुनो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ढके छेद ↑ → हवा का स्तंभ ↑ → सुर ↓
- तारत्व (Hz) = प्रति सेकंड कंपन की संख्या
- कोरस के C : E : G की आवृत्तियाँ लगभग 4 : 5 : 6 अनुपात में
- साँस: नीची, एक-सी और हल्की
हल किए गए उदाहरण
1. रिकॉर्डर पर कौन-सा सुर नीचा है: B (अँगूठा + 1 उँगली) या G (अँगूठा + 3 उँगलियाँ)? क्यों?
G नीचा है। ज़्यादा छेद ढके हैं, इसलिए हवा का स्तंभ लंबा है और सुर नीचा।
2. बजाते समय तेज़ चीं-चीं सुनाई दे तो दो संभावित कारण बताओ।
या तो तुम बहुत ज़ोर से फूँक रहे हो (सुर एक अष्टक ऊपर कूदता है), या कोई उँगली छेद बंद नहीं कर रही और हवा रिस रही है।
3. कोरस C (262 Hz), E (330 Hz) और G (392 Hz) गाता है। सबसे ऊँचे और सबसे नीचे का अंतर निकालो।
392 − 262 = 130 Hz।
4. रिकॉर्डर पर सुर A की आवृत्ति 880 Hz है। एक कंपन में कितना समय लगता है?
आवर्तकाल = 1 ÷ 880 ≈ 0.00114 s ≈ 1.14 ms।
5. ऊँचे स्वर (392 Hz) और नीचे स्वर (262 Hz) का अनुपात निकालो।
392 ÷ 262 ≈ 1.5, यानी सरल अनुपात 3 : 2।
6. गायकों को ऊपर छाती की जगह नीचे साँस क्यों लेनी चाहिए?
नीची साँस डायाफ़्राम का इस्तेमाल करती है, ज़्यादा हवा देती है और नियंत्रण बेहतर बनाती है, इसलिए आवाज़ मज़बूत रहती है और थकती नहीं।
आम गलतियाँ
- उँगलियों की नोक का इस्तेमाल करना, पोरों का नहीं। छेद रिसते हैं और सुर चीं-चीं करता है।
- तेज़ सुर के लिए ज़ोर से फूँकना। इससे रिकॉर्डर चीं-चीं करता है। एक-सी हल्की हवा रखो।
- साँस लेते समय कंधे उठाना। साँस नीचे पेट में लो।
- समूह से ज़्यादा ऊँची आवाज़ में गाना। कोरस में मिलना है, अलग नहीं दिखना।