Spain 2º Bachillerato Choir and Vocal Technique II
अध्याय: 3
1. Analysis
Text and music relationship · Interpretive and stage resources · Musical styles and cultures · Vocal pieces
- कला गीत: संगीत कविता में जान कैसे डालता है – कला गीत (art song) किसी कविता की रचित संगीत-व्यवस्था है, एक गायक और (आमतौर पर) पियानो के लिए, कॉन्सर्ट हॉल के लिए बनी। जर्मन में इसे Lied और फ़्रेंच में mélodie कहते हैं। संगीतकार शब्दों को अक्षरी ढंग (एक अक्षर, एक स्वर) या मेलिस्मा ढंग (एक अक्षर पर कई स्वर) से बिठाते हैं, शब्दों के स्वाभाविक बल का ध्यान रखते हैं, और शब्द-चित्रण से संगीत को अर्थ की नकल कराते हैं। रूप कविता के पीछे चलता है: स्ट्रॉफ़िक (हर पद पर वही संगीत), संशोधित स्ट्रॉफ़िक, या आद्योपांत रचित (कहानी आगे बढ़े तो नया संगीत)। पियानो साथी है जो परिचय, अंतराल और पोस्टल्यूड से दृश्य और भाव बनाता है। एक कहानी कहने वाले गीतों का समूह गीत-चक्र है। प्रसिद्ध संगीतकार: शूबर्ट, शूमान, ब्राह्म्स, फ़ोरे, देबूसी; भारत में रवींद्र संगीत और ग़ज़ल में भी कविता और धुन का ऐसा ही गहरा रिश्ता दिखता है।
- संगीत प्रस्तुति (Music Performance): एकल और समूह में – संगीत प्रस्तुति यानी श्रोताओं के सामने कोई रचना बजाना या गाना। अच्छी प्रस्तुति में शुद्धता (सही सुर, सही लय), एक-सी ताल (टेम्पो), भाव दिखाने के लिए डायनेमिक्स और फ़्रेज़िंग, और शैली के अनुसार वादन होता है। समूह में कलाकार एक-दूसरे को सुनते हैं, आवाज़ का संतुलन रखते हैं और इशारों पर चलते हैं। अच्छी तैयारी = धीमा, सही रियाज़, छोटे टुकड़ों में, फिर गति बढ़ाना और दूसरों को सुनाना।
- संगीत का इतिहास: चैंट से पॉप तक – संगीत लेखन से भी पुराना है। हर संस्कृति ने अपना संगीत बनाया, अक्सर सुनकर सीखा गया, जैसे भारतीय राग, अफ़्रीकी ढोल और गमेलन। पाश्चात्य परंपरा के मुख्य युग हैं: मध्यकाल (चैंट, लगभग 500–1400), पुनर्जागरण (पॉलीफ़ोनी, 1400–1600), बारोक (1600–1750), क्लासिकल (1750–1820), रोमांटिक (1820–1910) और 20वीं सदी से आज (जैज़, रिकॉर्डिंग, फ़िल्म, पॉप, इलेक्ट्रॉनिक)। हर युग ने टेक्सचर (एक साथ कितनी रेखाएँ), समूह का आकार और समाज में संगीत की जगह बदली।
- गायन तकनीक: मुद्रा, साँस, आवाज़ और समूह गान – अच्छा गाना पाँच बातों पर टिका है: सीधी पर ढीली मुद्रा; डायाफ़्राम से गहरी, स्थिर साँस; खुलकर कंपन करते स्वर-तंतु; साफ़ स्वर और व्यंजन; और ध्यान से सुनना ताकि सुर में गाओ। स्वर-तंतु जितना तेज़ कंपन करें, सुर उतना ऊँचा। हर आवाज़ (सोप्रानो, ऑल्टो, टेनर, बेस) की अपनी आरामदायक रेंज होती है। समूह गान में भाग अलग-अलग सुर गाते हैं जो मिलकर हार्मनी बनाते हैं, और सब कंडक्टर के इशारे मानते हैं। गाने से पहले वार्म-अप करो, पानी पियो, कभी चीख़ो या ज़ोर मत लगाओ।
2. Vocal technique
Relaxation and concentration · Voice care and posture · Voice production · Body expression and voice · Vocal exercises and improvisation · Harmonic ear and tuning
- गायन तकनीक: मुद्रा, साँस, आवाज़ और समूह गान – अच्छा गाना पाँच बातों पर टिका है: सीधी पर ढीली मुद्रा; डायाफ़्राम से गहरी, स्थिर साँस; खुलकर कंपन करते स्वर-तंतु; साफ़ स्वर और व्यंजन; और ध्यान से सुनना ताकि सुर में गाओ। स्वर-तंतु जितना तेज़ कंपन करें, सुर उतना ऊँचा। हर आवाज़ (सोप्रानो, ऑल्टो, टेनर, बेस) की अपनी आरामदायक रेंज होती है। समूह गान में भाग अलग-अलग सुर गाते हैं जो मिलकर हार्मनी बनाते हैं, और सब कंडक्टर के इशारे मानते हैं। गाने से पहले वार्म-अप करो, पानी पियो, कभी चीख़ो या ज़ोर मत लगाओ।
3. Ensemble practice
Ensemble sound · Basics of improvisation · Body percussion and choreography · Basic score reading · Learning by memory · Commitment to group goals · Choir repertoire · Phonetic analysis of text · Artistic production roles · Careers in music
- गायन तकनीक: मुद्रा, साँस, आवाज़ और समूह गान – अच्छा गाना पाँच बातों पर टिका है: सीधी पर ढीली मुद्रा; डायाफ़्राम से गहरी, स्थिर साँस; खुलकर कंपन करते स्वर-तंतु; साफ़ स्वर और व्यंजन; और ध्यान से सुनना ताकि सुर में गाओ। स्वर-तंतु जितना तेज़ कंपन करें, सुर उतना ऊँचा। हर आवाज़ (सोप्रानो, ऑल्टो, टेनर, बेस) की अपनी आरामदायक रेंज होती है। समूह गान में भाग अलग-अलग सुर गाते हैं जो मिलकर हार्मनी बनाते हैं, और सब कंडक्टर के इशारे मानते हैं। गाने से पहले वार्म-अप करो, पानी पियो, कभी चीख़ो या ज़ोर मत लगाओ।
- संगीत रचना: छोटे-से विचार से पूरी धुन कैसे बने – रचना (composing) मतलब छोटे विचारों से संगीत बनाना। एक मोटिफ़ (कुछ स्वर) से शुरू करो। उसे दोहराव, सीक्वेंस (वही आकार ऊपर या नीचे) और बदलाव (लय बदलो, उल्टा करो) से बढ़ाओ। नीचे सुरसंगति रखो: I, IV, V, I जैसे कॉर्ड, और अंत में कैडेंस। बनावट चुनो (अकेली धुन, कॉर्ड के साथ धुन, या कई धुनें एक साथ)। पूरे टुकड़े को A B A या मुखड़ा-अंतरा जैसे रूप में ढालो। तात्कालिक रचना (improvisation) मौके पर रचना है। ब्रीफ़ बताता है मक़सद, लंबाई और वाद्य।
- संगीत प्रस्तुति (Music Performance): एकल और समूह में – संगीत प्रस्तुति यानी श्रोताओं के सामने कोई रचना बजाना या गाना। अच्छी प्रस्तुति में शुद्धता (सही सुर, सही लय), एक-सी ताल (टेम्पो), भाव दिखाने के लिए डायनेमिक्स और फ़्रेज़िंग, और शैली के अनुसार वादन होता है। समूह में कलाकार एक-दूसरे को सुनते हैं, आवाज़ का संतुलन रखते हैं और इशारों पर चलते हैं। अच्छी तैयारी = धीमा, सही रियाज़, छोटे टुकड़ों में, फिर गति बढ़ाना और दूसरों को सुनाना।
- संगीत स्वरलिपि: संगीत पढ़ना और लिखना – स्वरलिपि संगीत को लिखती है ताकि दूसरे उसे बजा सकें। स्टाफ़ स्वरलिपि में पाँच रेखाएँ हैं: स्वर जितना ऊपर, उतना ऊँचा सुर; क्लेफ़ रेखाओं के नाम बताता है। स्वर का आकार बताता है वह कितनी देर चलेगा (पूर्ण = 4 बीट, अर्ध = 2, चौथाई = 1, आठवाँ = ½)। 4/4 जैसा ताल चिह्न हर बार की बीट बताता है। शार्प और फ़्लैट सुर ऊँचा-नीचा करते हैं, और सप्तक (स्केल), अंतराल और कॉर्ड इन्हीं स्वरों से बनते हैं। भारतीय सरगम, टैब और कोरियाई जियोंगगानबो भी यही बातें अलग ढंग से लिखते हैं।
- समूह: कैसे बनते हैं और हमें कैसे बदलते हैं – समूह दो या अधिक लोगों का ऐसा मेल है जिसमें वे आपस में बात करते हैं, एक लक्ष्य रखते हैं, मानक मानते हैं और 'हम' महसूस करते हैं। लोग सुरक्षा, प्रतिष्ठा, आत्म-सम्मान, ज़रूरतों और लक्ष्यों के लिए समूह में जुड़ते हैं। समूह पाँच चरणों से गुज़रता है: निर्माण, विप्लव, प्रतिमान, निष्पादन, समापन। संरचना में भूमिका, मानक, प्रतिष्ठा और संसक्तता होते हैं। प्रकार: प्राथमिक/द्वितीयक, औपचारिक/अनौपचारिक, अंतःसमूह/बाह्यसमूह। समूह हमारा व्यवहार भी बदलता है: सामाजिक स्वैराचार में साझा काम में हर व्यक्ति कम मेहनत करता है; समूह ध्रुवीकरण में चर्चा के बाद समूह की राय और चरम हो जाती है।
- परियोजना प्रबंधन – परियोजना (project) एक बार का काम है जिसका साफ़ लक्ष्य, शुरुआत और अंत होता है। परियोजना प्रबंधन यानी उसकी योजना बनाकर और नियंत्रण करके उसे तय दायरे में, समय पर और बजट में पूरा करना। जीवन चक्र: आरंभ, योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और समापन। योजनाकार काम को छोटे कामों (WBS) में बाँटते हैं, गैंट चार्ट पर रखते हैं, क्रांतिक पथ ढूँढते हैं, जोखिम सँभालते हैं और अंत में सीख की समीक्षा करते हैं।
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।