लेखन से पहले का संगीत और विश्व परंपराएँ
सबसे पुराने वाद्य 35,000 साल से भी पुरानी हड्डी की बाँसुरियाँ हैं। शुरुआती संगीत पूजा, काम, नृत्य और कहानियों के लिए था और सुनकर सीखा जाता था (मौखिक परंपरा)।
- भारत: राग (धुन का ढाँचा) और ताल (लय का चक्र) के विचार सदियों में विकसित हुए। दो मुख्य शास्त्रीय पद्धतियाँ बनीं: उत्तर में हिंदुस्तानी और दक्षिण में कर्नाटक, गुरु-शिष्य परंपरा से सिखाई गईं।
- पश्चिम अफ़्रीका: बहु-लय (एक साथ कई लय) और पुकार-जवाब गायन; इन्होंने बाद में ब्लूज़, जैज़ और पॉप को आकार दिया।
- इंडोनेशिया: गमेलन, घंटों और धातु-पट्टियों का समूह जो परतदार चक्र बजाता है।
- चीन, जापान, पश्चिम एशिया: दरबारी संगीत, तार-वाद्य और स्केल की लंबी परंपराएँ।
पाश्चात्य युग: मध्यकाल से क्लासिकल तक
मध्यकाल (लगभग 500 – 1400)
प्लेनचैंट: एक धुन (मोनोफ़ोनी), स्थिर ताल नहीं, लैटिन शब्द, गिरजाघरों में गायन। लगभग 1000 ई. में स्टाफ़ पर स्वरलिपि शुरू हुई। घुमंतू गायक (ट्रूबाडोर) प्रेम-गीत गाते थे।
पुनर्जागरण (1400 – 1600)
पॉलीफ़ोनी: चार या ज़्यादा स्वतंत्र गायन-रेखाएँ। मास और मैड्रिगल। छपाई से संगीत दूर-दूर फैला।
बारोक (1600 – 1750)
लगातार चलती बेस लाइन (बासो कंटिन्यूओ) के ऊपर धुन। नए रूप: ऑपेरा (पूरा गाया जाने वाला नाटक), ओरेटोरियो, कॉन्चेर्टो, फ़्यूग। संगीतकार: मोंतेवेर्दी, विवाल्डी, बाख, हैंडेल।
क्लासिकल (1750 – 1820)
साफ़, संतुलित वाक्यांश और होमोफ़ोनी (धुन + कॉर्ड)। सिम्फ़नी, स्ट्रिंग क्वार्टेट और सोनाटा। पियानो ने हार्पसीकॉर्ड की जगह ली। संगीतकार: हेडन, मोत्ज़ार्ट, शुरुआती बीथोवन। सार्वजनिक संगीत-सभाएँ बढ़ीं; संगीतकार दरबार और चर्च के अलावा टिकट ख़रीदने वालों से भी कमाने लगे।
रोमांटिक से आज तक
रोमांटिक (1820 – 1910)
गहरी भावना, बड़े ऑर्केस्ट्रा, एकल सितारा कलाकार, गीत (लीडर) और लोक-धुनों वाली राष्ट्रीय शैलियाँ। संगीतकार: शूबर्ट, शोपाँ, वर्दी, वाग्नर, चाइकोव्स्की।
20वीं सदी और आज
संगीतकारों ने नई ध्वनियाँ आज़माईं: डेब्यूसी के रंग, स्ट्राविंस्की की लय, बिना मूल स्वर (key) का संगीत। रिकॉर्डिंग (लगभग 1900 से), रेडियो और फ़िल्म ने सब बदल दिया: संगीत कहीं भी, कभी भी सुना जा सकता था। जैज़ अफ़्रीकी-अमेरिकी ब्लूज़ और रैगटाइम से निकला; फिर रॉक, पॉप, हिप-हॉप और इलेक्ट्रॉनिक डांस संगीत। भारतीय फ़िल्मी गीतों ने शास्त्रीय, लोक और पश्चिमी शैलियाँ मिलाईं और दुनिया भर तक पहुँचे।
समाज और नृत्य में संगीत
संगीत का हमेशा एक काम रहा: पूजा, दरबार की शान, जन-मनोरंजन, विरोध, विज्ञापन, राष्ट्रीय गर्व। पैसा कौन देता था (चर्च, राजा, टिकट ख़रीदने वाले, रिकॉर्ड कंपनियाँ, स्ट्रीमिंग), इससे तय हुआ कि क्या लिखा गया।
संगीत और नृत्य साथ बढ़े: बारोक नृत्य-सूट (मिनुएट, जिग), 19वीं सदी का बैले (चाइकोव्स्की), अपने संगीत के साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य (भरतनाट्यम के साथ कर्नाटक, कथक के साथ हिंदुस्तानी), और आज के म्यूज़िक वीडियो व स्ट्रीट डांस।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- टेक्सचर: मोनोफ़ोनी (1 रेखा) → पॉलीफ़ोनी (कई रेखाएँ) → होमोफ़ोनी (धुन + कॉर्ड)
- मध्यकाल 500–1400: प्लेनचैंट
- पुनर्जागरण 1400–1600: पॉलीफ़ोनी, मैड्रिगल
- बारोक 1600–1750: बासो कंटिन्यूओ, ऑपेरा, फ़्यूग — बाख, हैंडेल, विवाल्डी
- क्लासिकल 1750–1820: सिम्फ़नी, सोनाटा — हेडन, मोत्ज़ार्ट
- रोमांटिक 1820–1910: भावना, विशाल ऑर्केस्ट्रा, राष्ट्रीय शैलियाँ
- 20वीं सदी–आज: रिकॉर्डिंग, जैज़, फ़िल्म संगीत, पॉप, इलेक्ट्रॉनिक
- भारत: राग + ताल; हिंदुस्तानी (उत्तर) और कर्नाटक (दक्षिण)
हल किए गए उदाहरण
1. आप एक चिकनी धुन सुनते हैं, लैटिन में, बिना ताल और बिना वाद्य के। कौन-सा युग?
मध्यकालीन प्लेनचैंट: एक रेखा (मोनोफ़ोनी), बिना संगत, धार्मिक, मुक्त लय।
2. हार्पसीकॉर्ड कॉर्ड बजाता है और चेलो वायलिन की धुन के नीचे तेज़ बेस बजाता है। कौन-सा युग?
बारोक: हार्पसीकॉर्ड और चेलो धुन के नीचे बासो कंटिन्यूओ बनाते हैं।
3. क्लासिकल से रोमांटिक युग तक ऑर्केस्ट्रा क्यों बड़ा हुआ?
संगीतकार बड़ा उतार-चढ़ाव और तेज़ भावना चाहते थे, वाद्य बेहतर हुए (पीतल वाद्यों में वाल्व), और टिकट वाले बड़े सभागारों को ज़्यादा आवाज़ चाहिए थी।
4. रिकॉर्डिंग ने समाज में संगीत को कैसे बदला?
संगीत ख़रीदकर घर पर बजाया जा सकता था, पूरी दुनिया तक पहुँचता था और हमेशा के लिए बचा रहता था; कलाकार और रिकॉर्ड कंपनी भी संगीतकार जितने अहम हो गए।
आम गलतियाँ
- हर ऑर्केस्ट्रा संगीत को "क्लासिकल" कहना। क्लासिकल युग केवल लगभग 1750–1820 है।
- मानना कि संगीत का इतिहास केवल यूरोप का है। भारत, अफ़्रीका, एशिया और अमेरिका की परंपराएँ भी लंबी हैं।
- पॉलीफ़ोनी (कई स्वतंत्र रेखाएँ) और होमोफ़ोनी (एक धुन + कॉर्ड) को मिला देना।
- बाख को क्लासिकल युग में रखना। बाख बारोक हैं (मृत्यु 1750)।