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भारतीय संगीत का इतिहास: ग्रंथ और महान संगीतकार

भारतीय संगीत लगभग 3000 वर्षों में बढ़ा। सामवेद के मंत्रों से पहली धुनें आईं। भरत के नाट्यशास्त्र ने स्वर, 22 श्रुतियाँ, ग्राम, जाति और वाद्यों के चार वर्ग बताए, जिनमें चमड़े के ढोल (अवनद्ध) भी हैं। शार्ङ्गदेव के संगीत रत्नाकर (13वीं सदी) ने सिद्धांत जोड़ा; अहोबल के संगीत पारिजात (17वीं सदी) ने वीणा के तार पर स्वरों के स्थान तय किए। तानसेन ने ध्रुपद को प्रसिद्ध किया; 18वीं सदी में ख़याल के साथ तबला बढ़ा। 1900 के आसपास भातखंडे और पलुस्कर ने स्वरलिपि और संगीत विद्यालय दिए, और 20वीं सदी के उस्तादों ने संगीत को दुनिया तक पहुँचाया।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. भारतीय संगीत लगभग 3000 वर्षों में बढ़ा। हर खंभा एक पड़ाव है, सबसे पुराना बाएँ।
  2. भरत का नाट्यशास्त्र वाद्यों को 4 वर्गों में बाँटता है: तार, हवा, चमड़े के ढोल और ठोस।
  3. नाट्यशास्त्र कहता है कि सप्तक में 7 स्वर पर 22 श्रुतियाँ हैं, यानी स्वर के छोटे-छोटे क़दम।
  4. मध्यकाल: संगीत रत्नाकर, फिर तानसेन, फिर संगीत पारिजात। हर एक से मिलने के लिए वर्ष स्लाइड कीजिए।
  5. 1900 के आसपास भातखंडे ने स्वरलिपि और 10 थाट दिए। पलुस्कर ने सबके लिए संगीत विद्यालय खोले।
  6. खुद खेलिए: पूरे 3000 वर्ष स्लाइड कीजिए और हर पड़ाव की कहानी पढ़िए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

बिना रिकॉर्डिंग के 2000 साल पुराने संगीत के बारे में कैसे जानते हैं?

नाट्यशास्त्र जैसे ग्रंथों से, जो स्वर, स्केल और वाद्यों का शब्दों और संख्याओं में वर्णन करते हैं।

वाद्यों को वर्गों में क्यों बाँटा?

ध्वनि कैसे बनती है (तार, हवा, खाल, ठोस) के आधार पर बाँटने से सीखना, बनाना और मिलाना आसान होता है।

22 श्रुतियाँ हैं तो स्वर 7 ही क्यों?

श्रुतियाँ छोटे स्वर-बिंदु हैं; स्वर मुख्य सुर हैं जो इनमें से कुछ पर बैठते हैं। दूरियाँ अलग हैं, इसलिए किसी स्वर को 4, किसी को 3 या 2 श्रुतियाँ मिलती हैं।

संगीत पारिजात क्यों ज़रूरी था?

इसने तार की नापी लंबाई से स्वर तय किए, जिससे स्वर सिर्फ़ कान से नहीं, सटीक जाँचे जा सकें।

स्वरलिपि इतनी ज़रूरी क्यों थी?

लिखी स्वरलिपि से रचनाएँ सुरक्षित रहीं और परिवार के बाहर किसी को भी सिखाई जा सकीं।

नाट्यशास्त्र में संगीत के तत्व

नाट्यशास्त्र मुनि भरत से जुड़ा ग्रंथ है, जो लगभग 200 ई.पू. से 200 ई. के बीच बना। यह नाटक पर बड़ा ग्रंथ है, और संगीत इसका बड़ा भाग है।

अवनद्ध वाद्य (चमड़े के ढोल)

नाट्यशास्त्र ढोलों पर विशेष ध्यान देता है। मुख्य समूह पुष्कर वाद्य हैं: मृदंग, पणव और दर्दुर। ग्रंथ की एक कथा बताती है कि मुनि स्वाति को कमल के पत्तों पर गिरती बारिश की आवाज़ से ढोल का विचार आया। ग्रंथ इन्हें बनाने, मिलाने, बोल और गायन-अभिनय में संगत के बारे में बताता है।

मध्यकालीन ग्रंथ: संगीत रत्नाकर और संगीत पारिजात

संगीत रत्नाकर

13वीं सदी में देवगिरि (दक्कन) में शार्ङ्गदेव ने लिखा। यह पुराने सिद्धांत को 7 अध्यायों में जोड़ता है: स्वर, राग, प्रकीर्णक (विविध, गायक के गुण भी), प्रबंध (रचनाएँ), ताल, वाद्य और नर्तन (नृत्य)। हिंदुस्तानी और कर्नाटक दोनों संगीत इसे मुख्य ग्रंथ मानते हैं।

संगीत पारिजात

17वीं सदी में अहोबल ने लिखा। इसका बड़ा विचार: इसने 12 स्वरों (शुद्ध और विकृत) के स्थान वीणा के तार की लंबाई से तय किए। जैसे, प तार के दो-तिहाई पर। इससे स्वर सटीक और नापने योग्य हुए। इसमें उस समय के कई रागों का वर्णन भी है।

तानसेन, भातखंडे और पलुस्कर

तबले की उत्पत्ति और विकास

तबले की उत्पत्ति पर कई मत हैं:

विकास: दिल्ली → अजराड़ा, लखनऊ, फ़र्रुख़ाबाद, बनारस, पंजाब घराने; फिर 20वीं सदी में सभाएँ, रेडियो, फ़िल्में और विश्व मंच।

महान संगीतकार: जीवन परिचय

ताल-वादक

वादक

गायक

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. ये किस नाट्यशास्त्र वर्ग में आएँगे: सारंगी, शहनाई, तबला, मंजीरा?

सारंगी – तत (तार); शहनाई – सुषिर (हवा); तबला – अवनद्ध (चमड़ा); मंजीरा – घन (ठोस)।

2. जाँचिए कि 4-3-2-4-4-3-2 का जोड़ 22 है।

4 + 3 + 2 + 4 + 4 + 3 + 2 = 22। ✓

3. समय-क्रम में लगाइए: भातखंडे, नाट्यशास्त्र, तानसेन, संगीत रत्नाकर, संगीत पारिजात।

नाट्यशास्त्र → संगीत रत्नाकर (13वीं) → तानसेन (16वीं) → संगीत पारिजात (17वीं) → भातखंडे (~1900)।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. संगीत रत्नाकर किसने लिखा?
2. नाट्यशास्त्र में ढोल किस वर्ग में हैं?
3. सप्तक में कितनी श्रुतियाँ हैं?
4. हिंदुस्तानी रागों को 10 थाटों में किसने बाँटा?
5. अलाउद्दीन ख़ाँ किसके उस्ताद थे?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाट्यशास्त्र क्या है?

भरत से जुड़ा प्राचीन संस्कृत ग्रंथ, जो नाटक, नृत्य और संगीत पर है। इसमें स्वर, 22 श्रुतियाँ, ग्राम, जाति और वाद्यों के चार वर्ग हैं।

संगीत रत्नाकर और संगीत पारिजात में क्या अंतर है?

संगीत रत्नाकर (शार्ङ्गदेव, 13वीं सदी) पुराना सिद्धांत 7 अध्यायों में जोड़ता है। संगीत पारिजात (अहोबल, 17वीं सदी) वीणा के तार की लंबाई से 12 स्वर तय करता है।

तबले का आविष्कार किसने किया?

पक्का पता नहीं। अमीर ख़ुसरो वाली बात किंवदंती है; तबला 18वीं सदी में बढ़ा और दिल्ली के सिद्धार ख़ाँ ने पहला तबला घराना शुरू किया।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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