संगीत लोगों के जीवन से उगता है
हर देश में काम, पूजा, प्रेम और त्योहारों के गीत होते हैं। ये लोकगीत एक आदमी से दूसरे को मिलते हैं, शुरू में लिखे नहीं जाते। इनमें लोगों की भाषा, ताल और यादें रहती हैं। इतिहास बदलता है (युद्ध, नया शासक, शहरी जीवन) तो गीत भी बदलते हैं और अक्सर जो हुआ उसे दर्ज करते हैं।
इसलिए किसी देश का संगीत पढ़ते हुए हम उसका थोड़ा इतिहास भी पढ़ते हैं।
संगीतकार और राष्ट्र की कहानी
1800 के दशकों में कई देशों को अपनी भाषा और अपने अतीत पर गर्व होने लगा। संगीतकार भी इसमें शामिल हुए। उन्होंने स्थानीय कथाओं पर ओपेरा लिखे और बड़ी रचनाओं में लोकधुनें रखीं। इसे राष्ट्रीय संगीत-शाला (national school) कहते हैं।
- रूस: मिखाइल ग्लिंका ने रूसी कहानियों पर ओपेरा लिखे (1830 और 1840 के दशक)। बाद में मुसोर्गस्की और रिम्स्की-कोर्साकोव ने यह राह चुनी।
- चेक क्षेत्र: स्मेताना की रचना-माला मेरी मातृभूमि (1870 के दशक) में नदी पर वल्ताबा भी है।
- फ़िनलैंड: सिबेलियस ने फ़िनलैंडिया (1899) लिखी।
- भारत: रवींद्रनाथ टैगोर ने बंगाल के लोक और भक्ति गायन से निकले गीत लिखे और उनकी धुनें बनाईं, जैसे वह गीत जो आगे चलकर राष्ट्रगान बना।
हर जगह विचार एक ही है: घर की धुनें और कहानियाँ संगीत-सभा तक पहुँचती हैं।
रूसी बैले (Russian ballet)
बैले मंच की कला है जिसमें नर्तक बिना शब्दों के कहानी कहते हैं। संगीत नर्तकों के लिए साफ़ होना चाहिए: पक्की ताल, आसानी से पकड़ में आने वाला, हर पात्र की अपनी धुन।
रूसी बैले 1800 के दशकों में मशहूर हुआ। चाइकोव्स्की ने हंसों की झील (पहली बार 1877 में मंच पर), स्लीपिंग ब्यूटी (1890) और नटक्रैकर (1892) का संगीत रचा। हर एक में परीकथा है और याद रहने वाली धुनें हैं।
1900 के शुरुआती सालों में घूमने वाली बैले मंडलियाँ रूसी कहानियाँ दूसरे देशों में ले गईं। स्ट्राविंस्की ने ऐसी ही मंडली के लिए रूसी लोककथा पर फ़ायरबर्ड (1910) रचा। नृत्य, कथा और संगीत साथ चले, और विदेश के लोगों ने बैले से रूसी कला को जाना।
कैसे सुनें: रचना में इतिहास ढूँढो
कोई रचना सुनते समय तीन सवाल पूछो। यह कहाँ की है? (देश और समय)। कौन-सी कहानी कहती है? (कथा, नदी, परीकथा)। कौन-सी धुनें लोकगीत जैसी लगती हैं? (छोटे, गुनगुनाने लायक, दोहराए जाने वाले टुकड़े)। जवाबों से दिखता है कि जीवन और इतिहास संगीत में कैसे हैं।
खुद करो: समय-रेखा बनाओ
3D में खंभों पर एक-एक करके चलो। फिर अपने इलाके का कोई एक लोकगीत चुनो। कॉपी में समय की रेखा खींचो और तीन निशान लगाओ: लोकगीत के रूप में वह गीत, कोई फ़िल्म या संगीत-सभा की रचना जिसमें वह धुन आई, और आज। एक वाक्य लिखो: यह गीत जीवन का कौन-सा हिस्सा याद रखता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लोकगीत से राष्ट्रीय संगीत-शाला: लोकधुनें + देश की कहानियाँ, ओपेरा, सिम्फ़नी, बैले में
- बैले = नृत्य + कहानी + संगीत, शब्द नहीं
- चाइकोव्स्की के बैले: हंसों की झील 1877, स्लीपिंग ब्यूटी 1890, नटक्रैकर 1892
- सुनने के 3 सवाल: कहाँ की, कौन-सी कहानी, कौन-सी धुनें लोक जैसी
हल किए गए उदाहरण
1. ग्लिंका को रूसी शास्त्रीय संगीत का जनक क्यों कहते हैं?
वे उन पहले लोगों में थे जिन्होंने रूसी कहानियों और धुनों पर ओपेरा लिखे (1830 और 1840 के दशक)। बाद के संगीतकारों ने इसी विचार पर आगे काम किया।
2. राष्ट्रीय संगीत-शाला (national school) क्या है?
एक देश के संगीतकारों का समूह जो अपनी लोकधुनों, भाषा और कहानियों को शास्त्रीय रचनाओं में इस्तेमाल करता है।
3. नृत्य से कहानी कहने वाली एक रचना का नाम और संगीतकार बताओ।
हंसों की झील, एक बैले, संगीत चाइकोव्स्की का, पहली बार 1877 में मंच पर।
4. एक रचना छोटी गुनगुनाने लायक धुन से शुरू होती है जो दोहराई जाती है, फिर बड़े ऑर्केस्ट्रा में फैलती है। यह क्या बताता है?
हो सकता है वह लोकधुन पर आधारित हो। संगीतकार लोकधुन लेकर उसे ऑर्केस्ट्रा के लिए विकसित करते हैं।
5. बैले मंडलियों ने देश की कला फैलाने में कैसे मदद की?
1900 के शुरुआती सालों में वे विदेश गईं और राष्ट्रीय कथाएँ संगीत और नृत्य में प्रस्तुत कीं, इसलिए विदेशी दर्शकों ने उस संस्कृति को जाना।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि शास्त्रीय संगीत का आम लोगों से कोई नाता नहीं। बहुत-सी धुनें लोकगीतों से आईं।
- ओपेरा (गाया हुआ नाटक) और बैले (शब्दों के बिना नृत्य) को मिला देना।
- तारीख़ गलत लिखना: हंसों की झील 1877 की है, 1700 के दशक की नहीं।
- संगीत की जगह राजनीति पर लिखना। धुन, कहानी और वाद्यों के बारे में लिखो।