म्यूज़िकल क्या है? बुक, स्कोर और टीम
- बुक: बोली जाने वाली पटकथा और कहानी।
- स्कोर: पूरा संगीत। लिरिक्स गीतों के बोल हैं।
- संगीतकार धुन बनाता है; गीतकार बोल लिखता है; बुक लेखक पटकथा लिखता है; कोरियोग्राफ़र नृत्य बनाता है; ऑर्केस्ट्रेटर तय करता है कौन-सा वाद्य क्या बजाए।
- पिट ऑर्केस्ट्रा मंच के नीचे बजता है। आजकल गायक अक्सर रेडियो माइक लगाते हैं।
शो से पहले ओवरचर (धुनों का मेल) बजता है; दूसरा अंक आंत्राक्त (entr'acte) से शुरू हो सकता है।
गीतों के प्रकार और उनका काम
- शुरुआती गीत: जगह, माहौल और मुख्य लोग बताता है।
- “मैं चाहता हूँ” गीत: मुख्य पात्र अपना सपना बताता है। इससे कहानी चलती है।
- युगल / प्रेम गीत: दो पात्र भावना बाँटते हैं, अक्सर हार्मनी में मिलते हैं।
- समूह गीत: कई आवाज़ें, बड़ा नृत्य, अक्सर अंक का अंत।
- हास्य (पैटर) गीत: तेज़, चतुर शब्द, हँसी के लिए।
- शोस्टॉपर / “11 बजे का गीत”: शो के आख़िर में भावना का सबसे ऊँचा पल।
- रीप्राइज़: पुराना गीत नए बोल या मूड के साथ लौटता है।
- अंडरस्कोर: संवाद के नीचे बजता संगीत।
संगीत के औज़ार
लाइटमोटिफ़: किसी पात्र या विचार से जुड़ी छोटी धुन। की-चेंज (अक्सर एक स्टेप ऊपर) ऊर्जा बढ़ाता है। कॉन्ट्रापंटल समूह: कई पात्र एक साथ अलग-अलग धुन गाते हैं। बेल्ट (ज़ोरदार छाती की आवाज़) बनाम लेजिट (शास्त्रीय स्वर)।
मुख्य संगीतकार और उनकी शैली
- कर्ट वाइल (1900–1950): जर्मनी में कैबरे जैसे तीखे गीत, जैज़ी नृत्य-ताल और कड़वी हार्मनी — ताकि दर्शक सोचें; बाद में ब्रॉडवे के लिए लिखा।
- रिचर्ड रॉजर्स (1902–1979): गीतकार ऑस्कर हैमरस्टाइन II के साथ एकीकृत म्यूज़िकल बनाया, जहाँ हर गीत कहानी से निकलता है। याद रहने वाली मधुर धुनें, अक्सर वॉल्ट्ज़ ताल।
- स्टीफ़न सॉन्डहाइम (1930–2021): कठिन, चतुर बोल और हार्मनी, कई पात्र एक साथ गाते हैं, दोहराते संगत-पैटर्न, गहरी या व्यंग्य भरी कहानियाँ।
- क्लॉड-मिशेल शॉनबर्ग (जन्म 1944): पूरा गाया जाने वाला (सुंग-थ्रू) बड़ा म्यूज़िकल, बड़े बैलेड, लौटती धुनें (लाइटमोटिफ़) और विशाल समूह-अंत।
- जेसन रॉबर्ट ब्राउन (जन्म 1970): पॉप-रॉक जैसा तेज़ पियानो, सिंकोपेटेड ताल, छोटे कलाकार-दल के लिए कहानी-गीत और अनोखी समय-रेखा।
ऑपेरा और म्यूज़िकल: संयुक्त कलाएँ
दोनों में संगीत, नाटक, शब्द, डिज़ाइन और कभी नृत्य मिलते हैं, इसलिए ये संयुक्त (सिंथेटिक) कलाएँ हैं।
- ऑपेरा (लगभग 1600 से): आमतौर पर पूरा गाया जाता है, शास्त्रीय प्रशिक्षित आवाज़ें बिना माइक, ऑर्केस्ट्रा, आरिया (एकल गीत) और रेसिटेटिव (बोलचाल जैसा गायन)।
- ऑपरेटा: हल्का, बोले गए संवाद के साथ — म्यूज़िकल तक का पुल।
- म्यूज़िकल: बोलना और गाना मिला, लोकप्रिय शैलियाँ (जैज़, रॉक, पॉप), माइक वाली आवाज़ें।
कुछ रचनाएँ बीच में हैं: सुंग-थ्रू म्यूज़िकल ऑपेरा जैसे लगते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बुक = पटकथा; स्कोर = संगीत; लिरिक्स = गीत के बोल
- “मैं चाहता हूँ” गीत — नायक का लक्ष्य
- रीप्राइज़ — गीत नए अर्थ के साथ लौटे
- लाइटमोटिफ़ — पात्र या विचार से जुड़ी धुन
- सुंग-थ्रू — लगभग कोई बोला गया संवाद नहीं
- एकीकृत म्यूज़िकल — गीत कहानी आगे बढ़ाते हैं
हल किए गए उदाहरण
1. मंच पर अकेली लड़की गाती है कि वह छोटा शहर छोड़कर दुनिया देखना चाहती है। कौन-सा गीत?
“मैं चाहता हूँ” गीत: मुख्य पात्र का लक्ष्य तय करता है।
2. इंटरवल से पहले पाँच पात्र एक साथ अपनी-अपनी धुन गाते हैं। तरीका और असर?
कॉन्ट्रापंटल समूह अंक-अंत के रूप में; सारे टकराव एक साथ दिखते हैं और तनाव बढ़ता है।
3. पहले अंक का ख़ुश प्रेम गीत दूसरे अंक में, ब्रेक-अप के बाद, धीमा और माइनर की में लौटता है। यह क्या है?
रीप्राइज़; बदला टेम्पो और की बताते हैं कि हालात और भावना बदल गए।
4. शो में कोई बोला संवाद नहीं, हर पात्र की अपनी लौटती धुन। कैसा म्यूज़िकल?
सुंग-थ्रू म्यूज़िकल, लाइटमोटिफ़ के साथ (शॉनबर्ग जैसी शैली)।
5. ऑपेरा और म्यूज़िकल में दो अंतर बताओ।
ऑपेरा आमतौर पर पूरा गाया जाता है, शास्त्रीय आवाज़ें बिना माइक; म्यूज़िकल में बोलना-गाना मिला, लोकप्रिय शैली और माइक।
आम गलतियाँ
- सोचना कि पात्र बेवजह गाते हैं। हर गीत भावना दिखाए या कहानी आगे बढ़ाए।
- बुक और लिरिक्स उलटना: बुक बोली गई पटकथा है, लिरिक्स गाए गए बोल।
- हर दोहराव को रीप्राइज़ कहना। रीप्राइज़ में अर्थ या संदर्भ बदलता है।
- ऑपेरा और म्यूज़िकल को एक ही मानना। मिलते-जुलते हैं, पर गायन, संवाद और संगीत-शैली अलग है।