मानव जीवन में संगीत
हर देश के लोग संगीत बनाते हैं। संगीत कहानियाँ सुनाता है, साथ काम करने में मदद करता है, मन शांत करता है, और ऐसी भावनाएँ बाँटने देता है जिन्हें शब्दों में कहना कठिन है। संगीत स्वरों, लय और मौन से जान-बूझकर सजाई गई ध्वनि है। धुन स्वरों की एक पंक्ति है; तेज़ कंपन से ऊँचे स्वर बनते हैं और धीमे कंपन से नीचे स्वर।
लौकिक, धार्मिक और लिटर्जिकल संगीत
- लौकिक संगीत (secular) धर्म के बारे में नहीं होता: फ़िल्मी गीत, लोकगीत, लोरी, पॉप, स्कूल के गीत।
- धार्मिक संगीत आस्था के बारे में होता है: स्तुति, धन्यवाद या प्रार्थना के गीत। इसे घर, खेत, जुलूस या हॉल में गाया जा सकता है। उदाहरण हैं ईसाई गीत, भजन, क़व्वाली और गुरबानी कीर्तन, हर एक अपने धर्म में।
- लिटर्जिकल संगीत (liturgical) चर्च की सभा का ही भाग है। इसके शब्द और धुनें तय होती हैं और क्रम में इसकी जगह तय होती है। ऑर्थोडॉक्स चर्चों में इसे गायक-मंडली या गायक आम तौर पर बिना वाद्य के गाते हैं।
सारा लिटर्जिकल संगीत धार्मिक है, पर सारा धार्मिक संगीत लिटर्जिकल नहीं। ये तीनों डिब्बों की तरह एक के भीतर एक आते हैं।
स्तुति रचने वाले संत
स्तुति-रचयिता (hymnographer) वह व्यक्ति है जो स्तुति-गीत लिखता है। चर्च कई संतों को इस वरदान के लिए याद करते हैं।
- रोमानोस द मेलोडिस्ट (छठी सदी) ने कोंटाकिया नाम के लंबे कथा-गीत लिखे।
- जॉन ऑफ़ दमिश्क (आठवीं सदी) ने ईस्टर के गीत लिखे और आठ स्वर-पद्धतियों (ऑक्टोएकोस) की व्यवस्था बनाई: आठ धुन-ढाँचे, आठ हफ़्तों के चक्र में हर हफ़्ते के लिए एक।
- कॉस्मास ऑफ़ मायूमा और एफ़्रेम द सीरियन भी स्तुति-गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं।
इनके गीत हज़ार साल से ज़्यादा से कई भाषाओं में गाए जा रहे हैं। रोमानिया में भी चर्च के गायक आठ स्वर-पद्धतियों की धुनें इस्तेमाल करते हैं।
पर्व के स्तुति-गीत
पर्व (feast day) वह खास दिन है जो किसी बड़ी घटना या संत को याद करता है, जैसे क्रिसमस, एपिफ़नी, ईस्टर या किसी संत का दिन। हर पर्व का अपना स्तुति-गीत होता है और वह हर साल सभा में उसी जगह गाया जाता है।
सबसे प्रसिद्ध छोटा स्तुति-गीत (ट्रोपारियन) ईस्टर का है, "मसीह जी उठे हैं"। क्रिसमस पर कई देशों में कैरोल भी गाए जाते हैं, जो धार्मिक हैं पर लिटर्जी का हिस्सा नहीं। कोई शब्द बोलने से पहले ही स्तुति-गीत बता देता है कि कौन-सा पर्व है।
करके देखो: गीत छाँटो
अपने जाने हुए पाँच गीत लिखो। हर गीत को तीन डिब्बों में से एक में रखो: लौकिक, धार्मिक, लिटर्जिकल। परिवार के किसी सदस्य से पूछो कि वे जो त्योहार मनाते हैं उनमें कौन-से गीत गाए जाते हैं। 3D में बजाओ दबाओ, फिर गिनती वाले स्वर नए क्रम में दबाओ। धुन कैसे बदलती है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संगीत = जान-बूझकर सजाई गई ध्वनि
- लौकिक: कोई भी विषय। धार्मिक: आस्था के बारे में। लिटर्जिकल: चर्च की सभा का भाग
- स्तुति-रचयिता = स्तुति-गीत लिखने वाला
- ऑक्टोएकोस = आठ स्वर-पद्धतियों की व्यवस्था
- पर्व = खास दिन, हर एक का अपना स्तुति-गीत
हल किए गए उदाहरण
1. दिव्य लिटर्जी के दौरान गायक-मंडली एक स्तुति-गीत गाती है। यह लौकिक, धार्मिक या लिटर्जिकल है?
यह लिटर्जिकल है क्योंकि यह चर्च की सभा का हिस्सा है। यह धार्मिक भी है, क्योंकि सारा लिटर्जिकल संगीत धार्मिक होता है।
2. दोस्ती के बारे में एक फ़िल्मी गीत। यह किस प्रकार का है?
लौकिक। यह धर्म के बारे में नहीं है।
3. चर्च के कई गीतों में इस्तेमाल होने वाली आठ स्वर-पद्धतियों को किसने व्यवस्थित किया?
आठवीं सदी में संत जॉन ऑफ़ दमिश्क ने।
आम गलतियाँ
- धार्मिक और लिटर्जिकल को एक ही समझना। लिटर्जिकल गीत वे हैं जो सभा के भीतर ही गाए जाते हैं।
- सोचना कि लौकिक संगीत बुरा है। इसका सिर्फ़ मतलब है कि वह धर्म के बारे में नहीं है।
- सोचना कि सारे स्तुति-गीत एक ही व्यक्ति ने लिखे। अलग-अलग सदियों में कई संतों ने लिखे।
- यह भूल जाना कि हर पर्व का अपना स्तुति-गीत होता है।