मीडिया में संगीत क्या करता है?
फ़िल्म, टीवी, विज्ञापन और गेम का संगीत तस्वीरों की सेवा के लिए बनता है। यह:
- जगह और समय बताता है (गाँव के दृश्य में सितार, 1700 के दशक के लिए हार्पसिकॉर्ड);
- मूड बनाता है (ख़ुशी, डर, दुख, रोमांच);
- पात्र के मन की भावना दिखाता है;
- दृश्यों को जोड़कर कहानी को बहाव देता है;
- ब्रांड को याद रखवाता है (विज्ञापन की जिंगल या साउंड लोगो)।
डाइजेटिक और नॉन-डाइजेटिक संगीत
डाइजेटिक संगीत कहानी की दुनिया के अंदर से आता है: रेडियो, शादी का बैंड, गाता हुआ पात्र। पात्र इसे सुन सकते हैं।
नॉन-डाइजेटिक संगीत (बैकग्राउंड स्कोर) सिर्फ़ दर्शकों के लिए जोड़ा जाता है, जैसे पीछा करने के दृश्य में ऑर्केस्ट्रा। कुछ दृश्य चतुराई से एक से दूसरे में बदल जाते हैं।
संगीतकार की तकनीकें
- लाइटमोटिफ़: पात्र, जगह या विचार से जुड़ी छोटी धुन। पात्र के बदलने पर इसे धीमा, माइनर या दूसरे वाद्य पर बजाया जाता है।
- हिट पॉइंट और मिकी-माउसिंग: संगीत ठीक हरकत पर आता है। हर हरकत की नक़ल करना मिकी-माउसिंग है, कार्टून में आम।
- ओस्टिनाटो: छोटा पैटर्न बार-बार दोहराना, ऊर्जा या तनाव बढ़ाने के लिए।
- स्वर-संगति (harmony): मेजर अक्सर उजला लगता है; माइनर, बेसुरे (dissonant) कॉर्ड और क्रोमैटिक रेखाएँ उदास या बेचैन।
- टेम्पो, सुर की ऊँचाई और आवाज़: तेज़ और ज़ोरदार = रोमांच; धीमा और धीमी आवाज़ = शांति या दुख; बहुत नीचे के सुर = ख़तरा।
- ध्वनि-रंग (timbre): हीरो के लिए ब्रास, रहस्य के लिए ऊँचे काँपते स्ट्रिंग्स, विज्ञान-कथा के लिए सिंथेसाइज़र।
- चुप्पी: अचानक संगीत रोकना सबसे असरदार पल हो सकता है।
वीडियो गेम का संगीत
गेम को नहीं पता कि खिलाड़ी एक जगह कितनी देर रुकेगा, इसलिए संगीत अनुकूल (adaptive) होना चाहिए:
- लूप बिना साफ़ अंत के आराम से दोहराते हैं।
- परतें (stems) ख़तरा बढ़ने-घटने पर जुड़ती या हटती हैं।
- स्टिंगर लेवल जीतने जैसी घटनाओं की छोटी ध्वनियाँ हैं।
पुराने गेम में बहुत कम साउंड चैनल थे, इसलिए छोटी, याद रहने वाली धुनें बनती थीं; आज कई गेम पूरे ऑर्केस्ट्रा का इस्तेमाल करते हैं।
जानने लायक़ संगीतकार
- बर्नार्ड हर्मन (अमेरिका, 20वीं सदी): एल्फ़्रेड हिचकॉक के साथ काम; छोटे दोहराते मोटिफ़ और अनोखे वाद्य-समूह, जैसे एक मशहूर डरावने दृश्य के लिए सिर्फ़ स्ट्रिंग्स की चुभती आवाज़ें।
- हांस ज़िमर (जर्मनी/अमेरिका): ऑर्केस्ट्रा को सिंथेसाइज़र से मिलाते हैं; एक्शन और विज्ञान-कथा फ़िल्मों में ज़ोरदार ओस्टिनाटो और गहरे ब्रास।
- माइकल जियाचिनो (अमेरिका): समृद्ध लाइटमोटिफ़ जो बदले रूप में लौटते हैं, जैसे परिवार और यादों वाली एनिमेटेड फ़िल्मों में।
- थॉमस न्यूमैन (अमेरिका): पियानो, मारिम्बा और अनोखे ताल-वाद्यों से कोमल बनावट, सपनीला, सोचने वाला मूड।
- नोबुओ उएमात्सु (जापान): मशहूर गेम संगीतकार; रोल-प्लेइंग गेम की यादगार धुनें, पहले साधारण साउंड चिप के लिए, बाद में ऑर्केस्ट्रा के लिए।
- ए. आर. रहमान (भारत): भारतीय धुनों और वाद्यों को इलेक्ट्रॉनिक और ऑर्केस्ट्रा ध्वनियों से मिलाते हैं, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फ़िल्मों में।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: डाइजेटिक = वह संगीत जिसे पात्र सुन सकें (कहानी के अंदर)
- मुख्य शब्द: नॉन-डाइजेटिक / बैकग्राउंड स्कोर = सिर्फ़ दर्शक सुनें
- मुख्य शब्द: लाइटमोटिफ़ = पात्र, जगह या विचार की छोटी धुन
- मुख्य शब्द: हिट पॉइंट = पर्दे की हरकत पर ठीक समय पर संगीत का ज़ोर
- मुख्य शब्द: अनुकूल (adaptive) संगीत = खिलाड़ी के काम से बदलने वाला गेम संगीत
हल किए गए उदाहरण
1. पर्दे पर शादी का बैंड बज रहा है और दो पात्र नाच रहे हैं। डाइजेटिक या नॉन-डाइजेटिक?
डाइजेटिक: बैंड कहानी के अंदर है और पात्र उसे सुन सकते हैं।
2. अंत के पास हीरो की ब्रास धुन अकेले पियानो पर धीमी, धीमी आवाज़ में और माइनर में लौटती है। इससे क्या पता चलता है?
लाइटमोटिफ़ बदला गया है ताकि दिखे कि हीरो अब उदास, थका या कुछ खो चुका है, फिर भी याद रहे कि यह वही व्यक्ति है।
3. अँधेरे घर में चुपके से घुसते चोर के दृश्य के लिए संगीत कैसे बनाओगे?
धीमी पर स्थिर धड़कन, बहुत धीमी आवाज़, नीचे के प्लक किए स्ट्रिंग्स का ओस्टिनाटो, रहस्य के लिए ऊँचे काँपते स्ट्रिंग्स, बेसुरे कॉर्ड, फिर कुत्ते के भौंकने से ठीक पहले चुप्पी और ज़ोरदार हिट पॉइंट।
आम गलतियाँ
- सोचना कि फ़िल्म का सारा संगीत बैकग्राउंड है। डाइजेटिक संगीत कहानी की दुनिया का हिस्सा है।
- सोचना कि लाइटमोटिफ़ हमेशा एक जैसा बजता है। पात्र के बदलाव दिखाने के लिए इसे बदला जाता है।
- हर बार कहना कि मेजर = ख़ुशी और माइनर = दुख। टेम्पो, वाद्य और संदर्भ भी मायने रखते हैं।
- भूलना कि गेम संगीत की लंबाई तय नहीं होती; उसे लूप होना और बदलना पड़ता है।