1900 के बाद संगीत क्यों बदला
लगभग 200 साल तक पश्चिमी संगीत ज़्यादातर टोनल था: उसमें एक घर का सुर (key) था और कॉर्ड कान को वापस घर की ओर खींचते थे। 1900 तक संगीतकारों को यह व्यवस्था पुरानी लगने लगी। नई तकनीक (रिकॉर्ड, रेडियो, इलेक्ट्रॉनिक्स), दो विश्व युद्ध और दूसरी संस्कृतियों के संगीत से मिलन ने उन्हें नई ध्वनियाँ खोजने को प्रेरित किया।
कोई एक शैली नहीं थी; कई 'वाद' साथ-साथ आए। मोटे तौर पर आधुनिकतावाद (modernism), लगभग 1900–1960: नियम तोड़ना; और उत्तर-आधुनिकतावाद (postmodernism), लगभग 1960 से: शैलियों को खुलकर मिलाना, लोकप्रिय और शास्त्रीय, पुराना और नया।
प्रभाववाद और अभिव्यंजनावाद
प्रभाववाद (डेबुसी, रवेल)
- मज़बूत धुन से ज़्यादा ध्वनि के कोमल रंग।
- पूर्ण-स्वर स्केल (सब कदम बराबर), पेंटाटोनिक और पुराने मोड।
- साथ-साथ खिसकते समानांतर कॉर्ड; धुंधली हार्मनी; हार्प, फ़्लूट, धीमे तार वाद्य।
अभिव्यंजनावाद और अतानता (शोनबर्ग, बर्ग, वेबर्न)
- डर जैसी तीव्र भीतरी भावनाएँ दिखाना।
- अतानता (atonal): कोई घर का सुर नहीं; बहुत बेसुरे-से (टकराते) कॉर्ड जो सुलझते नहीं।
- धुन में बड़ी छलाँगें, आवाज़ के अचानक बदलाव।
सीरियलिज़्म, नव-शास्त्रीयता और लोक-आधारित संगीत
सीरियलिज़्म (बारह-स्वर संगीत)
शोनबर्ग की विधि: सभी 12 सुरों को एक तय क्रम में रखो, जिसे टोन रो कहते हैं। रचना इसी रो और इसके बदले रूपों से बनती है: रेट्रोग्रेड (उल्टा क्रम), इनवर्ज़न (ऊपर-नीचे पलटा) और रेट्रोग्रेड इनवर्ज़न। कोई सुर दूसरे से ज़्यादा ज़रूरी नहीं।
नव-शास्त्रीयता (स्ट्राविंस्की, प्रोकोफ़िएव, पूलेंक)
विशाल रोमांटिक संगीत के विरुद्ध प्रतिक्रिया: छोटे समूह, पुराने साफ़ रूप (सोनाटा, सुइट, कॉन्चेर्टो), सूखी बनावट, पर तीखे आधुनिक कॉर्ड और उछलती लय।
लोक और राष्ट्रीय शैलियाँ (बार्तोक, कोडाई)
बार्तोक ने मध्य यूरोप के गाँवों से हज़ारों लोक गीत इकट्ठे किए। Hungarian Pictures (लोक धुनों पर आधारित पाँच छोटे ऑर्केस्ट्रा दृश्य) जैसी रचनाओं में उन्होंने लोक धुनें, मोड, ड्रोन, असमान ताल (5/8, 7/8, 2+2+3 के समूह), ओस्टिनाटो और रंगीन वाद्य-संयोजन इस्तेमाल किया। दूसरे संगीतकारों ने अपनी राष्ट्रीय आवाज़ बनाई: कॉपलैंड (खुली अमेरिकी ध्वनि), ब्रिटन और वॉन विलियम्स (अंग्रेज़ी), शोस्ताकोविच (व्यंग्य और नाटक), मेसियाँ (पक्षियों के गीत, खास मोड, जटिल लय)।
इलेक्ट्रॉनिक, संयोग और न्यूनतम संगीत
- इलेक्ट्रॉनिक संगीत: टेप, सिंथेसाइज़र और कंप्यूटर से बनी या बदली ध्वनि (श्टॉकहाउज़ेन, वारेज़)। म्यूज़िक कॉन्क्रीट में असली रिकॉर्ड की गई आवाज़ें।
- संयोग (aleatoric) संगीत: कुछ फ़ैसले संयोग या कलाकार पर छोड़े जाते हैं (जॉन केज)।
- ध्वनि-पुंज (clusters): पास-पास के बहुत सारे सुर एक साथ (लिगेटी, पेंडेरेत्स्की)।
- न्यूनतमवाद (रायली, राइख, ग्लास, एडम्स): छोटे दोहराते पैटर्न, स्थिर बीट, धीमे बदलाव, अक्सर फिर से टोनल। फ़ेज़िंग: दो कलाकार एक ही पैटर्न थोड़ी अलग गति से दोहराते हैं।
- उत्तर-आधुनिकता: पुराने संगीत के उद्धरण, जैज़, रॉक, विश्व संगीत का मेल; 'पवित्र न्यूनतमवाद' (पार्ट, टैवनर)।
कैसे सुनें और बताएँ: जाँच-सूची
सुनने वाले प्रश्नों में विशेषताएँ पहचानकर शैली से जोड़नी होती हैं। तत्वों का प्रयोग करो:
- धुन: क्रमिक या बड़ी छलाँगें? टोन रो?
- हार्मनी / तानता: टोनल, मोडल, पूर्ण-स्वर, अतानता, पुंज?
- लय / ताल: नियमित बीट, असमान ताल, बदलते ताल-चिह्न, ओस्टिनाटो?
- बनावट (texture): पतली या घनी, परतदार लूप?
- ध्वनि-रंग (timbre): अनोखे वाद्य, नई वादन तकनीकें, इलेक्ट्रॉनिक्स?
- संरचना: पुराना रूप (नव-शास्त्रीय), धीमी प्रक्रिया (न्यूनतमवाद)?
खुद करके देखो
- 1-2, 1-2, 1-2-3 (7 बीट) का पैटर्न दस बार ताली से बजाओ। लोक नृत्य की असमान 'लचक' महसूस करो।
- एक दोस्त के साथ 1-2-3-रुको साथ में बजाओ; फिर एक थोड़ा तेज़ हो जाए। फ़ेज़िंग सुनो।
- 3D में हर शैली बजाओ और हर एक के लिए एक शब्द लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- टोनल: घर का सुर है; अतानता (atonal): घर का सुर नहीं
- पूर्ण-स्वर स्केल: 6 सुर, हर कदम = 2 सेमीटोन (C D E F♯ G♯ A♯)
- टोन रो: सभी 12 सुर एक-एक बार; रूप: प्राइम (P), रेट्रोग्रेड (R), इनवर्ज़न (I), रेट्रोग्रेड इनवर्ज़न (RI)
- असमान ताल: 5/8 = 2+3, 7/8 = 2+2+3; ओस्टिनाटो = दोहराया पैटर्न
- न्यूनतमवाद: दोहराव + स्थिर बीट + धीमा बदलाव (फ़ेज़िंग, जोड़ने की प्रक्रिया)
- आधुनिकतावाद ≈ 1900–1960 (नियम तोड़ना); उत्तर-आधुनिकतावाद ≈ 1960 से (शैलियाँ मिलाना)
हल किए गए उदाहरण
1. तुम्हें कोमल हार्प कॉर्ड सुनाई देते हैं जो साथ-साथ खिसकते हैं, बिना साफ़ घर-सुर वाली फ़्लूट धुन और सपने जैसा माहौल। कौन-सी शैली?
प्रभाववाद। संकेत: कोमल रंगीन ध्वनि (हार्प, फ़्लूट), समानांतर कॉर्ड, पूर्ण-स्वर या मोडल हार्मनी बिना मज़बूत घर-सुर के, धुंधला सपने जैसा भाव। उदाहरण: डेबुसी।
2. टोन रो है C–B–G–A♭–E♭–C♯–D–B♭–F♯–F–E–A। इसके रेट्रोग्रेड के पहले चार सुर लिखो।
रेट्रोग्रेड = रो उल्टे क्रम में। आखिरी सुर से शुरू करो: A, E, F, F♯ ...
3. एक नृत्य धुन के हर बार में 7 तेज़ बीट हैं, ज़ोर 1, 3 और 5 पर। बीट कैसे बँटी हैं और किस संगीतकार ने इसे खूब इस्तेमाल किया?
1, 3, 5 पर ज़ोर से समूह बनते हैं 2 + 2 + 3 = 7 (7/8 ताल)। बार्तोक ने मध्य और पूर्वी यूरोप की ऐसी असमान लोक तालें इस्तेमाल कीं।
4. तीन विशेषताएँ बताओ जिनसे पता चले कि रचना न्यूनतमवादी है।
1) एक छोटा पैटर्न कई बार दोहराया जाता है। 2) स्थिर, न बदलने वाली बीट। 3) बहुत धीमे, धीरे-धीरे बदलाव (एक सुर जोड़ना, हिस्सों के बीच फ़ेज़िंग)। अक्सर हार्मनी लंबे समय तक कुछ सरल कॉर्ड पर रहती है।
आम गलतियाँ
- सारे आधुनिक संगीत को 'अतानता' कहना। नव-शास्त्रीय, लोक-आधारित और न्यूनतम संगीत अक्सर टोनल या मोडल होता है।
- सोचना कि सीरियलिज़्म यानी बेतरतीब सुर। टोन रो सभी 12 सुरों का सख़्त तय क्रम है।
- प्रभाववाद और अभिव्यंजनावाद को मिला देना। प्रभाववाद कोमल और धुंधला है; अभिव्यंजनावाद तीव्र और बेसुरा।
- कहना कि न्यूनतमवाद 'कभी नहीं बदलता'। वह धीरे बदलता है, और उन छोटे बदलावों को सुनना ही असली बात है।