ध्वनि तरंग से संकेत तक
ध्वनि एक कंपन है जो हवा में तरंग बनकर चलती है। उसकी आवृत्ति (हर सेकंड कंपन, हर्ट्ज़ Hz में) सुर की ऊँचाई तय करती है; आयाम ज़ोर तय करता है। मनुष्य लगभग 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं।
माइक एक ट्रांसड्यूसर है: ऊर्जा का एक रूप दूसरे में बदलता है। हवा एक पतली झिल्ली को धकेलती है और माइक उसी पैटर्न में घटता-बढ़ता वोल्टेज बनाता है। स्पीकर उल्टा करता है: वोल्टेज कोन हिलाता है, कोन हवा धकेलता है।
यह लगातार संकेत एनालॉग है। विनाइल रिकॉर्ड और टेप एनालॉग नकल रखते थे।
डिजिटल ऑडियो: सैंपलिंग और बिट डेप्थ
कंप्यूटर सिर्फ़ संख्याएँ रख सकता है। एनालॉग-से-डिजिटल परिवर्तक (ADC), जो आमतौर पर ऑडियो इंटरफ़ेस में होता है, संकेत को हर सेकंड कई बार नापता है। हर नाप एक सैंपल है।
- सैंपल रेट: हर सेकंड कितने सैंपल। CD में 44,100 Hz (44.1 kHz)। यह सबसे ऊँची आवृत्ति के दोगुने से ज़्यादा होना चाहिए।
- बिट डेप्थ: हर सैंपल कितने बिट में। 16-बिट से 65,536 स्तर; ज़्यादा बिट = कम शोर, ज़्यादा बारीकी।
- फ़ाइल का आकार (बिना संपीड़न) = सैंपल रेट × बिट डेप्थ × चैनल × समय।
संपीड़ित फ़ॉर्मेट (MP3, AAC) वे आवाज़ें हटाते हैं जो हम मुश्किल से सुनते हैं, जिससे फ़ाइल छोटी होती है; लॉसलेस (WAV, FLAC) सब कुछ रखते हैं।
DAW: ट्रैक, MIDI और संपादन
डिजिटल ऑडियो वर्कस्टेशन (DAW) संगीत रिकॉर्ड, संपादित और सजाने का सॉफ़्टवेयर है। मुफ़्त, पैसे वाले और फ़ोन वाले सभी DAW में एक जैसे विचार हैं: एक टाइमलाइन, पंक्तियों में ट्रैक, और एक मिक्सर।
- ऑडियो ट्रैक में रिकॉर्ड की गई आवाज़ (गाना, गिटार)।
- MIDI ट्रैक में निर्देश: कौन-सा स्वर, कब, कितनी देर और कितने ज़ोर से। MIDI खुद आवाज़ नहीं करता; वह वर्चुअल वाद्य बजाता है। रिकॉर्डिंग के बाद भी वाद्य बदल सकते हो या गलत स्वर ठीक कर सकते हो।
- संपादन: काटना, कॉपी, लूप, फ़ेड, टेम्पो बदलना, ताल ठीक करना (क्वांटाइज़)।
- सैंपलर और लूप: छोटी रिकॉर्ड की गई आवाज़ें जिन्हें ईंट की तरह दोबारा इस्तेमाल करते हैं।
अब एक लैपटॉप या फ़ोन से एक ही व्यक्ति पूरा गाना लिख, बजा, रिकॉर्ड और प्रकाशित कर सकता है।
मिक्सिंग, इफ़ेक्ट और मीडिया में संगीत
मिक्सिंग ट्रैकों का संतुलन है: वॉल्यूम फ़ेडर स्तर तय करता है, पैन आवाज़ को बाएँ या दाएँ रखता है, EQ बेस और ट्रेबल घटाता-बढ़ाता है, कम्प्रेशन तेज़ और धीमे हिस्से बराबर करता है, और रिवर्ब जगह का एहसास देता है। मास्टरिंग आख़िरी चमक है ताकि गाना हर डिवाइस पर अच्छा लगे।
संगीत प्रौद्योगिकी संगीत को दूसरे मीडिया से जोड़ती है: फ़िल्म और टीवी का पार्श्व संगीत, एक्शन के साथ बदलता गेम संगीत, विज्ञापन, पॉडकास्ट और छोटे वीडियो। स्ट्रीमिंग सेवाएँ हमारी सुनी चीज़ों के आँकड़ों से गाने सुझाती हैं, जिससे निजी पसंद बनती है। सुनने के औज़ार (स्पेक्ट्रोग्राम, ट्यूनर, धीमा प्लेबैक) संगीत को गौर से समझने में मदद करते हैं।
ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल
कॉपीराइट का सम्मान करो: अनुमति लो या लाइसेंस वाले/मुफ़्त लूप और सैंपल इस्तेमाल करो, और रचनाकार को श्रेय दो। कानों की रक्षा करो: हेडफ़ोन का वॉल्यूम लगभग 60% से कम रखो और बीच में आराम करो।
करके देखो
फ़ोन पर 10 सेकंड अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करो। फिर किसी मुफ़्त रिकॉर्डिंग ऐप में उसके ऊपर ताली की ताल का दूसरा ट्रैक रिकॉर्ड करो। दोनों का वॉल्यूम तब तक बदलो जब तक दोनों साफ़ सुनाई दें। तुमने दो-ट्रैक मिक्स बना लिया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ट्रांसड्यूसर: माइक (ध्वनि → वोल्टेज), स्पीकर (वोल्टेज → ध्वनि)
- सैंपल रेट = हर सेकंड सैंपल (CD: 44.1 kHz)
- सैंपल रेट > 2 × सबसे ऊँची आवृत्ति
- स्तर = 2^(बिट डेप्थ) (16-बिट → 65,536)
- फ़ाइल आकार (बिट) = सैंपल रेट × बिट डेप्थ × चैनल × सेकंड
- MIDI = स्वर-निर्देश; ऑडियो = रिकॉर्ड की गई आवाज़
हल किए गए उदाहरण
1. 4-बिट और 16-बिट सैंपल कितने स्तर रख सकते हैं?
4-बिट: 2⁴ = 16 स्तर। 16-बिट: 2¹⁶ = 65,536 स्तर, इसलिए वह लहर को बहुत बारीकी से पकड़ता है।
2. 44,100 Hz, 16-बिट पर 60 सेकंड की स्टीरियो ऑडियो का आकार MB में निकालो।
बिट = 44,100 × 16 × 2 × 60 = 8,46,72,000 बिट। बाइट = ÷ 8 = 1,05,84,000 बाइट ≈ 10.6 MB।
3. कीबोर्ड पर गलत स्वर बजा। MIDI रिकॉर्ड किया हो या ऑडियो, कहाँ ठीक करना आसान? क्यों?
MIDI में। वह स्वर को निर्देश की तरह रखता है, तो पियानो-रोल में खींचकर सही सुर पर रख सकते हो। ऑडियो में स्वर लहर में घुला होता है, बदलना मुश्किल है।
4. संगीत के लिए 44.1 kHz सैंपल रेट काफ़ी क्यों है?
मनुष्य लगभग 20 kHz तक सुनते हैं। पकड़ने के लिए 2 × 20 kHz = 40 kHz से ज़्यादा चाहिए, तो 44.1 kHz पूरी सुनने की सीमा ढक लेता है।
आम गलतियाँ
- MIDI को आवाज़ की रिकॉर्डिंग मानना। वह सिर्फ़ स्वर-आँकड़े है जो वाद्य बजाते हैं।
- यह सोचना कि ज़्यादा सैंपल रेट से गाना "तेज़" होता है। इससे बारीकी बढ़ती है, वॉल्यूम नहीं।
- हर ट्रैक को पूरा तेज़ कर देना। अच्छा मिक्स संतुलित होता है और जगह छोड़ता है।
- इंटरनेट पर मिला कोई भी गाना या सैंपल बिना अनुमति इस्तेमाल करना।