ध्वनि एक तरंग है
ध्वनि हवा का आगे-पीछे हिलना है। हम इसे तरंग की तरह बनाते हैं। दो बातें मुख्य हैं: प्रति सेकंड कितनी तरंगें (आवृत्ति, हर्ट्ज़ Hz में, जो हमें पिच लगती है) और तरंग कितनी ऊँची है (आयाम, जो हमें ज़ोर लगता है)। तरंग का आकार टिम्बर देता है, यानी आवाज़ का "रंग"। 440 Hz वह सुर A है जिस पर आर्केस्ट्रा सुर मिलाते हैं।
संश्लेषण प्रणालियाँ: ऑसिलेटर, फ़िल्टर, एन्वेलप
सिंथेसाइज़र बिजली या सॉफ़्टवेयर से आवाज़ बनाता है। इसके मूल खंड:
- ऑसिलेटर (VCO): दोहराती तरंग बनाता है। आम आकार: साइन (शुद्ध, एक हार्मोनिक), स्क्वेयर (खोखली, विषम हार्मोनिक), सॉटूथ (चमकीली, सब हार्मोनिक), ट्राएंगल (नरम, कमज़ोर हार्मोनिक)।
- फ़िल्टर (VCF): कुछ हार्मोनिक हटाता है। लो-पास फ़िल्टर नीची आवाज़ें जाने देता है और कटऑफ़ से ऊपर की काट देता है। यह घटाव संश्लेषण (subtractive) है: भरपूर आवाज़ से शुरू करो, फिर घटाओ।
- एम्प्लीफ़ायर और एन्वेलप (ADSR): समय के साथ ज़ोर तय करता है। अटैक = पूरे ज़ोर तक पहुँचने का समय; डिके = टिके स्तर तक गिरना; सस्टेन = कुंजी दबी रहने पर टिका स्तर; रिलीज़ = कुंजी छोड़ने के बाद मंद पड़ना।
- LFO: धीमा ऑसिलेटर जो पिच को हिलाता है (वाइब्रेटो) या ज़ोर को (ट्रेमोलो)।
अन्य तरीके: योगात्मक (additive: कई साइन तरंगें जोड़ना, जैसे हार्मोनिक डंडे), FM (एक ऑसिलेटर दूसरे को मोड़ता है) और वेवटेबल (रखी हुई तरंगों में आगे बढ़ना)।
सैंपलिंग
कंप्यूटर चिकनी तरंग नहीं रख सकता। वह तरंग की ऊँचाई को हर सेकंड कई बार नापता है। हर माप एक सैंपल है।
- सैंपल रेट: प्रति सेकंड माप। CD में 44,100 Hz; वीडियो में अक्सर 48,000 Hz। जिस आवाज़ की सबसे ऊँची आवृत्ति f हो, उसके लिए सैंपल रेट 2f से ज़्यादा चाहिए (नाइक्विस्ट नियम)। इंसानी कान लगभग 20,000 Hz तक सुनता है, इसलिए 44,100 Hz काफ़ी है।
- बिट डेप्थ: हर सैंपल कितने स्तर ले सकता है। 16 बिट से 216 = 65,536 स्तर; 24 बिट में कहीं ज़्यादा और शोर कम।
- बहुत कम रेट से तरंग सीढ़ी जैसी बनती है और एक झूठी नीची आवाज़ आती है, जिसे एलियासिंग कहते हैं।
सैंपलर दर्ज की हुई आवाज़ों को कीबोर्ड से अलग-अलग पिच पर बजाता है। निर्माता लूप, ड्रम किट और सैंपल लाइब्रेरी में सैंपल का उपयोग करते हैं। कॉपीराइट का सम्मान कीजिए और अनुमति लीजिए।
ध्वनि, हाव-भाव, शब्द और चित्र
आधुनिक इलेक्ट्रोअकूस्टिक रचनाएँ ध्वनि को अन्य चीज़ों से जोड़ती हैं। हाव-भाव (gesture): सेंसर, कैमरा या टच स्क्रीन हाथ की हरकत को पिच, ज़ोर या फ़िल्टर में बदलते हैं। शब्द (text): कविता को बोला, टुकड़ों में काटा और ध्वनि में बदला जा सकता है (स्पीच सिंथेसिस)। चित्र (image): चित्र को ध्वनि की तरह बनाया जा सकता है (स्पेक्ट्रोग्राम को उलटा पढ़कर) या ध्वनि दृश्य चला सकती है, जैसे लाइव शो और खेलों में। साझा सूत्र है मैपिंग: कौन-सा इनपुट किस ध्वनि-पैरामीटर को बदले।
ऑनलाइन संगीत
डिजिटल ध्वनि फ़ाइलें स्ट्रीमिंग और डाउनलोड से बाँटी जाती हैं। संपीड़न (compression) से फ़ाइल छोटी होती है: लॉसलेस (FLAC, सब रखता है) या लॉसी (MP3, AAC, वह हिस्सा छोड़ता है जो हमें कम सुनाई देता है)। ब्राउज़र Web Audio से लाइव आवाज़ बना सकते हैं, इसलिए सिंथ वेब पेज में चल सकते हैं। ऑनलाइन मंचों के साथ कॉपीराइट और लाइसेंस (जैसे Creative Commons) और दूर बैठे कलाकारों का सहयोग भी आता है।
इलेक्ट्रोअकूस्टिक संगीत और उसकी आलोचना
इलेक्ट्रोअकूस्टिक संगीत में बिजली-तंत्र और दर्ज की गई ध्वनि मुख्य सामग्री है। शुरुआती पड़ाव: 1940 के दशक में पेरिस की म्यूज़िक कॉन्क्रेत (असली आवाज़ों की टेप रिकॉर्डिंग को काटना और बदलना) और कोलोन के इलेक्ट्रॉनिक स्टूडियो (शुद्ध संश्लेषित ध्वनि)। बाद में कंप्यूटर और लाइव इलेक्ट्रॉनिक्स आए।
एक समीक्षा लिखने के लिए एक से ज़्यादा बार सुनिए और पूछिए: कौन-सी ध्वनियाँ हैं (रिकॉर्ड की या संश्लेषित)? समय के साथ ध्वनि कैसे बदलती है? स्थान का उपयोग कैसे है (बाएँ, दाएँ, दूर, पास)? संरचना क्या है? कौन-सा भाव या विचार याद आता है? हर बात को रचना के किसी क्षण से सिद्ध कीजिए, सिर्फ़ "मुझे अच्छा लगा" नहीं।
आज़माइए: बनाइए और देखिए
3D में (1) सॉ तरंग चुनिए, फ़िल्टर घटाइए और तरंग को नरम होते देखिए; (2) सैंपल 6 रखिए, फिर बढ़ाइए और सीढ़ी को गायब होते देखिए। घर पर: फ़ोन के वॉइस रिकॉर्डर के पास एक ताली बजाइए, फिर ऐप में तरंग को ज़ूम कीजिए। पहले अनुमान लगाइए, फिर जाँचिए: अटैक कहाँ है, रिलीज़ कहाँ?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आवृत्ति f (Hz) = प्रति सेकंड तरंगें; आवर्तकाल T = 1 / f
- नाइक्विस्ट नियम: सैंपल रेट > 2 × सबसे ऊँची आवृत्ति
- स्तरों की संख्या = 2^बिट (16 बिट → 65,536)
- प्रति सेकंड डेटा = सैंपल रेट × बिट × चैनल (बिट)
- ADSR = अटैक, डिके, सस्टेन, रिलीज़
- सप्तक ऊपर = आवृत्ति × 2
हल किए गए उदाहरण
1. 440 Hz वाले सुर A का आवर्तकाल क्या है?
T = 1 / f = 1 / 440 ≈ 0.00227 s, यानी लगभग 2.27 ms।
2. सुर A3 की आवृत्ति 220 Hz है। एक सप्तक ऊपर का A क्या होगा?
सप्तक आवृत्ति दोगुनी करता है: 220 × 2 = 440 Hz।
3. संगीत के लिए 44,100 Hz काफ़ी क्यों है?
इंसान लगभग 20,000 Hz तक सुनता है। नाइक्विस्ट नियम के अनुसार सैंपल रेट इसके दोगुने, 40,000 Hz, से ज़्यादा होना चाहिए। 44,100 Hz इससे ऊपर है।
4. 48,000 Hz पर 2 सेकंड की (मोनो) ऑडियो में कितने सैंपल होंगे?
48,000 × 2 = 96,000 सैंपल।
5. CD-गुणवत्ता की स्टीरियो ऑडियो के 1 मिनट का आकार बाइट में क्या है?
44,100 × 16 बिट × 2 चैनल × 60 s = 84,672,000 बिट ÷ 8 = 10,584,000 बाइट, यानी लगभग 10.6 MB।
6. एक पैड-ध्वनि धीरे उभरती है और कुंजी छोड़ने पर धीरे मंद होती है। उसका ADSR बताइए।
लंबा अटैक (धीमा चढ़ाव), मध्यम डिके, ऊँचा सस्टेन, लंबा रिलीज़ (धीमा घटाव)।
आम गलतियाँ
- पिच और ज़ोर को मिलाना: पिच आवृत्ति है, ज़ोर आयाम है।
- सोचना कि ऊँचा सैंपल रेट ऊँची पिच देता है। वह सिर्फ़ ज़्यादा ब्योरा देता है, सुर नहीं बदलता।
- मानना कि लो-पास फ़िल्टर सिर्फ़ ध्वनि को धीमा करता है। वह ऊँचे हार्मोनिक हटाकर ध्वनि को फीका करता है।
- सैंपलिंग (असली आवाज़ नापना) और संश्लेषण (आवाज़ बनाना) को एक समझना।