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तबला और पखावज के घराने, और लयकारी

घराना एक संगीत परिवार है: गुरु से शिष्य तक कम से कम तीन पीढ़ियों में चलती शैली, जिसका अपना वादन ढंग और अपनी रचनाएँ हों। तबला घराने बंद बाज (दिल्ली, अजराड़ा) और खुला बाज (लखनऊ, फ़र्रुख़ाबाद, बनारस, पंजाब) में बँटते हैं। पं. राम सहाय का बनारस घराना खुला और दमदार है। पखावज में कुदऊ सिंह घराना ज़ोरदार और भव्य, नाना पानसे घराना कोमल और संतुलित है। लयकारी यानी हर मात्रा में अलग संख्या के बोल: ठाह (1), दुगुन (2), तिगुन (3), चौगुन (4), और आड़ (3/2) जैसी कठिन लय।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. घराना एक संगीत परिवार है। गुरु शिष्यों को सिखाता है, वे अपने शिष्यों को। शैली आगे बढ़ती है।
  2. घराने के लिए संस्थापक, 3 या ज़्यादा पीढ़ियाँ, अपनी शैली और अपनी रचनाएँ चाहिए।
  3. तबले की शैलियों की दो ध्वनियाँ हैं। बंद बाज नरम और बंद। खुला बाज ज़ोरदार और गूँजता।
  4. तबले के छह घराने हैं। बनारस खुला और दमदार है, पं. राम सहाय ने शुरू किया।
  5. पखावज के भी घराने हैं। कुदऊ सिंह ज़ोरदार; नाना पानसे कोमल और सुंदर।
  6. खुद खेलिए: लयकारी। हर मात्रा में 1, 2, 3 या 4 बोल बजाइए और बिंदु गिनिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या घराना सच में परिवार होता है?

अक्सर परिवार से शुरू होता है, पर बाहर के शिष्य जो वह शैली सीखते हैं, वे भी उसी घराने के होते हैं।

तीन पीढ़ियाँ ही क्यों?

इससे पता चलता है कि शैली सिखाई जा सकती है और एक महान वादक के बाद भी जीवित रहती है।

बंद बाज नरम क्यों लगता है?

उँगलियों के सिरे किनार के पास लगते हैं, तो खाल का कम भाग काँपता है; खुले बाज में खुला हाथ ज़्यादा खाल गुँजाता है।

सबसे अच्छा घराना कौन-सा है?

कोई नहीं। हर एक की अपनी सुंदरता है; आज कई वादक एक से ज़्यादा घरानों से सीखते हैं।

पखावज तबले से कैसे अलग है?

पखावज एक लंबा ढोल है जिसके दो मुँह आड़े बजते हैं; तबला दो अलग ढोलों की जोड़ी है जो सीधे रखकर बजती है।

क्या दुगुन में ताल तेज़ हो जाता है?

नहीं। मात्राएँ उसी गति पर रहती हैं; बस हर मात्रा में बोल दुगने हो जाते हैं।

घराना क्या है?

घराना शब्द घर से बना है। यह गुरु–शिष्य परंपरा से आगे बढ़ने वाली संगीत शैली है, अक्सर परिवार के भीतर, पर बाहर के शिष्यों तक भी।

गायन के भी घराने हैं (ग्वालियर, आगरा, किराना, जयपुर-अतरौली, पटियाला), और सितार-सरोद के भी (मैहर, इमदादख़ानी, सेनिया)।

तबला घराने: बंद और खुला बाज

घरानाबाजमुख्य विशेषताएँ
दिल्लीबंदसबसे पुराना; सिद्धार ख़ाँ ने शुरू किया; किनार पर उँगलियों के सिरे; नरम, साफ़ क़ायदे
अजराड़ाबंददिल्ली से निकला; तीन की चाल (तिस्र जाति); बाएँ (डग्गे) का समृद्ध काम
लखनऊखुलापूरी हथेली और स्याही के बीच तक; कथक के साथ पनपा; गत और परन
फ़र्रुख़ाबादमिश्रितसुंदर गतें, तेज़ रेले, बड़ा भंडार
बनारसखुलादमदार, गूँजता, पखावज जैसा; लंबे एकल वादन
पंजाबखुलापखावज के निकट; लंबी, जटिल रचनाएँ

बनारस तबला घराना और कुदऊ सिंह पखावज घराना

बनारस घराना (तबला)

कुदऊ सिंह घराना (पखावज)

नाना पानसे घराना (पखावज)

महाराष्ट्र से; संतुलित, मधुर और सुंदर; ध्रुपद, कथक और भजन के अनुकूल; रचनाओं का बहुत बड़ा भंडार।

लयकारी

लय यानी गति; लयकारी यानी एक ही स्थिर ताल पर अलग-अलग गति या अनुपात में बजाने-गाने का कौशल।

नामप्रति मात्रा बोल4 मात्रा में
ठाह (बराबर)14 बोल
दुगुन28 बोल
तिगुन312 बोल
चौगुन416 बोल
आड़3/2 (2 मात्रा में 3 बोल)6 बोल
कुआड़5/45 बोल
बिआड़7/47 बोल

ठेके की दुगुन लिखने के लिए हर मात्रा के खाने में दो बोल रखें। दुगुन को सम पर ख़त्म करने के लिए आधे आवर्तन से शुरू करें।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. तीनताल (16 मात्रा) के एक आवर्तन में तिगुन में कितने बोल?

16 × 3 = 48 बोल।

2. दुगुन में तीनताल का पूरा ठेका (16 बोल) कितनी मात्राएँ लेगा? सम पर ख़त्म करने के लिए कहाँ से शुरू करें?

16 ÷ 2 = 8 मात्रा। 9वीं मात्रा से शुरू करें, ताकि 16वीं के अंत पर पूरा होकर सम पर आए।

3. वादक पूरी हथेली, ज़ोरदार खुले बोल और लंबी परनें बजाता है। कौन-सा घराना हो सकता है?

खुले बाज वाला घराना, जैसे बनारस (दमदार, पखावज जैसा) या पंजाब।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सबसे पुराना तबला घराना:
2. बनारस घराने के संस्थापक:
3. चौगुन में प्रति मात्रा कितने बोल?
4. कौन-सा बंद बाज घराना है?
5. कुदऊ सिंह किस वाद्य के लिए प्रसिद्ध हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तबले के कितने घराने हैं?

छह मुख्य: दिल्ली, अजराड़ा, लखनऊ, फ़र्रुख़ाबाद, बनारस और पंजाब।

तबले में लयकारी क्या है?

एक ही ताल पर हर मात्रा में अलग संख्या के बोल बजाना: ठाह, दुगुन, तिगुन, चौगुन, और आड़, कुआड़, बिआड़ जैसे अनुपात।

बंद बाज और खुले बाज में क्या अंतर है?

बंद बाज (दिल्ली, अजराड़ा) में किनार के पास उँगलियों के सिरों से नरम, बंद आवाज़। खुला बाज (लखनऊ, बनारस, पंजाब, कुछ हद तक फ़र्रुख़ाबाद) में पूरे हाथ से खुली, गूँजती आवाज़।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11घराने
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12लयकारी और घराने

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