राग किससे बनता है?
राग सिर्फ स्केल नहीं है। उसका लक्षण (पहचान-पत्र) बताता है:
- कौन-से स्वर (5, 6 या 7);
- आरोह और अवरोह, जो सीधे या टेढ़े (वक्र) हो सकते हैं;
- खास स्वर: जिस पर ठहरता है (न्यास), सबसे प्रबल स्वर (हिंदुस्तानी में वादी, कर्नाटक में जीव स्वर);
- गमक: स्वर को रंग देने वाले कंपन और मींड;
- पकड़ / संचार: छोटे वाक्यांश जिनसे राग पहचाना जाता है;
- भाव (रस) और हिंदुस्तानी में गाने का समय।
स्वरों की गिनती से: 5 = औडव, 6 = षाडव, 7 = संपूर्ण।
मेलकर्ता और जन्य राग (कर्नाटक)
मेलकर्ता जनक राग है: सातों स्वर क्रम से, ऊपर और नीचे। रे-ग, म और ध-नि के रूप बदलकर ठीक 72 मेलकर्ता बनते हैं (36 शुद्ध म के साथ, 36 प्रति म के साथ)।
- मायामालवगौळ (15): S R1 G3 M1 P D1 N3 S। शुरुआत का राग।
- शंकराभरणम (29): S R2 G3 M1 P D2 N3 S, पश्चिमी मेजर स्केल जैसा।
- कल्याणी (65): ऊपर जैसा पर तीव्र म (M2) के साथ।
जन्य राग मेलकर्ता से स्वर छोड़कर, टेढ़ी चाल से या बाहरी स्वर जोड़कर बनता है। मोहनम (S R2 G3 P D2 S) हरिकांभोजि से; हिंदोलम (S G2 M1 D1 N2 S) नटभैरवी से।
हिंदुस्तानी राग: बिहाग, भीमपलासी, भैरवी
हिंदुस्तानी राग दस जनक थाटों में बँटे हैं।
बिहाग (बिलावल थाट)
आरोह: नि सा ग म प नि सां (चढ़ते समय रे, ध वर्जित); अवरोह: सां नि ध प, म॑ प ग म ग रे सा। वादी ग, संवादी नि। देर रात का राग। पकड़: प म॑ ग म ग।
भीमपलासी (काफ़ी थाट)
आरोह: नि॒ सा ग॒ म प नि॒ सां; अवरोह: सां नि॒ ध प म ग॒ रे सा (ग, नि कोमल)। वादी म, संवादी सा। दोपहर का राग, कोमल और विरह भरा। पकड़: म ग॒ रे सा, नि॒ सा म।
भैरवी (भैरवी थाट)
कोमल रे, ग, ध, नि: सा रे॒ ग॒ म प ध॒ नि॒ सां। वादी म, संवादी सा (कुछ गुरु सा–प भी बताते हैं)। परंपरा से सुबह का, पर अक्सर कार्यक्रम के अंत में गाया जाता है।
राग पहचानने के लिए वर्जित स्वर और पकड़ सुनें। बंदिश लिखने के लिए सरगम स्वरलिपि और हर मात्रा पर ताल-चिह्न लगाएँ।
राग के साथ ताल
ताल समय का दोहराता चक्र है, जिसे ताली, उँगली-गिनती और हाथ पलटकर रखते हैं।
- आदि ताल: 8 मात्रा = लघु (ताली + 3 उँगली) + द्रुतम (ताली + पलट) + द्रुतम (ताली + पलट)। ज़्यादातर कृतियाँ और वर्णम आदि में।
- रूपक ताल: द्रुतम + लघु = 6 मात्रा (अक्सर 3 धीमी मात्रा गिनते हैं)।
- मिश्र चापु: 7 मात्रा, 3 + 2 + 2।
- खंड चापु: 5 मात्रा, 2 + 3।
पहली मात्रा सम (कर्नाटक में समम) कहलाती है; वाक्यांश इसी पर आकर रुकते हैं।
मनोधर्म और वर्णम की स्वरलिपि
मनोधर्म संगीत यानी मंच पर उसी समय रचा संगीत, राग और ताल के नियमों के भीतर:
- आलापना: बिना ताल के, धीरे-धीरे राग की खोज।
- तानम: लयबद्ध शब्दांश (त-नम), बिना तय ताल।
- निरवल: गीत की एक पंक्ति को बार-बार नई धुनों में।
- कल्पना स्वरम: नए सरगम पैटर्न, जो गीत की पंक्ति पर लौटते हैं।
वर्णम कार्यक्रम की शुरुआत और अभ्यास की रचना है, जो राग के वाक्यांश दिखाती है। इसके दो भाग: पूर्वांग (पल्लवि, अनुपल्लवि, मुक्तायि स्वरम) और उत्तरांग (चरणम और चिट्टस्वरम)। स्वरलिपि में आदि ताल का हर आवर्तन | 4 | 2 | 2 || लिखा जाता है, स्वर दो गतियों में।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- राग = चुने स्वर + आरोह-अवरोह + पकड़ + गमक + भाव
- 72 मेलकर्ता = 2 म × 6 रे-ग जोड़ × 6 ध-नि जोड़
- औडव = 5 स्वर, षाडव = 6, संपूर्ण = 7
- आदि ताल = 4 + 2 + 2 = 8 मात्रा
- रूपक = 2 + 4 = 6; मिश्र चापु = 7 (3 + 2 + 2); खंड चापु = 5 (2 + 3)
- वादी = सबसे खास स्वर; संवादी = दूसरा खास स्वर
हल किए गए उदाहरण
1. मोहनम: S R2 G3 P D2 S। कितने स्वर और कौन-सी जाति?
दोनों दिशाओं में पाँच स्वर → औडव-औडव (5-5) राग।
2. मायामालवगौळ मेलकर्ता क्यों है और मोहनम क्यों नहीं?
मायामालवगौळ सातों स्वर सीधे क्रम में ऊपर-नीचे लेता है। मोहनम म और नि छोड़ता है, इसलिए जन्य है।
3. बिहाग में चढ़ते समय कौन-से स्वर छूटते हैं?
आरोह में रे और ध वर्जित (नि सा ग म प नि सां), पर अवरोह में दोनों आते हैं।
4. 72 मेलकर्ता क्यों हैं, हिसाब लगाइए।
रे-ग के 6 मान्य जोड़, ध-नि के 6, और म के 2 रूप: 6 × 6 × 2 = 72।
5. आदि ताल के 3 आवर्तन में कितनी मात्राएँ?
8 × 3 = 24 मात्रा।
6. दोपहर के कार्यक्रम में म ग॒ रे सा वाक्यांश और कोमल नि सुनाई दे। कौन-सा निर्धारित राग होगा?
भीमपलासी: कोमल ग और नि, पकड़ म ग॒ रे सा, दोपहर का समय, वादी म।
आम गलतियाँ
- राग को "सिर्फ स्केल" कहना। दो रागों के स्वर एक हो सकते हैं (जैसे भूपाली और देशकार) पर चलन और खास स्वर अलग।
- भूल जाना कि कुछ राग केवल आरोह में स्वर छोड़ते हैं (बिहाग)।
- वादी और संवादी उलझाना: वादी सबसे खास, संवादी दूसरा।
- रूपक को 8 मात्रा गिनना। आदि 8 है; रूपक 6 (2 + 4)।