Spain 1º Bachillerato Audiovisual Culture
अध्याय: 4
1. Milestones of photography and audiovisual media; audiovisual formats
History of photography and film language · Main movements in photography and film · Diversity in audiovisual media · Audiovisual formats
- फ़िल्म अध्ययन: फ़िल्में कहानी कैसे कहती हैं – फ़िल्म तेज़ी से चलती स्थिर तस्वीरों (फ़्रेम) की लड़ी है जिसे दिमाग़ गति की तरह देखता है। फ़िल्मकार एक दृश्य भाषा बोलते हैं: शॉट का आकार, कैमरा कोण, कैमरा की चाल, रोशनी, मीज़-आँ-सेन, ध्वनि और संपादन। हर चुनाव हमारी भावना बदलता है। सिनेमा 1890 के दशक में शुरू हुआ, 1920 के दशक के अंत में आवाज़ आई, फिर रंग; सोवियत मोंटाज, इतालवी नवयथार्थवाद, फ़्रेंच न्यू वेव और भारतीय समानांतर सिनेमा जैसे आंदोलन आए। फ़िल्म समीक्षा का मतलब है सबूत के साथ वर्णन, विश्लेषण, अर्थ और निर्णय।
- मीडिया साक्षरता (Media Literacy) – मीडिया साक्षरता मीडिया को पढ़ने, उस पर सवाल करने और खुद बनाने का हुनर है: समाचार, विज्ञापन, वीडियो, पोस्ट, फ़िल्म और गेम। हर मीडिया पाठ किसी ने, किसी उद्देश्य से, किसी दर्शक के लिए बनाया है, और उसमें ऐसे रूप, परिपाटियाँ और तकनीकें हैं जो हमारी भावना बदलती हैं। मीडिया-साक्षर व्यक्ति मानने या शेयर करने से पहले स्रोत, सबूत, दूसरे स्रोत और मूल जाँचता है, पूर्वाग्रह और फ़िल्टर बबल पहचानता है, और ज़िम्मेदारी से अपना मीडिया बनाता है।
2. Formal elements and expressive power of image and audiovisual language
Shots and camera movement · Exposure, focus and framing · Lighting basics · Composition for still and moving images · Colour symbolism and psychology · Digital retouching · Functions of audiovisual images
- फ़िल्म अध्ययन: फ़िल्में कहानी कैसे कहती हैं – फ़िल्म तेज़ी से चलती स्थिर तस्वीरों (फ़्रेम) की लड़ी है जिसे दिमाग़ गति की तरह देखता है। फ़िल्मकार एक दृश्य भाषा बोलते हैं: शॉट का आकार, कैमरा कोण, कैमरा की चाल, रोशनी, मीज़-आँ-सेन, ध्वनि और संपादन। हर चुनाव हमारी भावना बदलता है। सिनेमा 1890 के दशक में शुरू हुआ, 1920 के दशक के अंत में आवाज़ आई, फिर रंग; सोवियत मोंटाज, इतालवी नवयथार्थवाद, फ़्रेंच न्यू वेव और भारतीय समानांतर सिनेमा जैसे आंदोलन आए। फ़िल्म समीक्षा का मतलब है सबूत के साथ वर्णन, विश्लेषण, अर्थ और निर्णय।
- फ़ोटोग्राफ़ी: प्रकाश, एक्सपोज़र और संयोजन – कैमरा एक अँधेरा डिब्बा है जो प्रकाश पकड़ता है। लेंस प्रकाश को मोड़कर सेंसर (या फ़िल्म) पर साफ़, उल्टा चित्र बनाता है। तीन सेटिंग तय करती हैं कि कितना प्रकाश चित्र बनाएगा: एपर्चर (लेंस के छेद का आकार, f-संख्या में), शटर गति (प्रकाश कितनी देर पड़ेगा) और ISO (सेंसर कितना संवेदनशील)। तीनों मिलकर एक्सपोज़र त्रिभुज बनाते हैं। संयोजन (फ़्रेम में चीज़ें कहाँ रखें) और प्रकाश की गुणवत्ता सही फ़ोटो को अच्छा फ़ोटो बनाते हैं। फ़ोटोग्राफ़र चित्रों से कहानी कहते, संपादन करते और चित्रों की समीक्षा करना सीखते हैं।
- कला के तत्व और डिज़ाइन के सिद्धांत – कला के तत्व वे ईंटें हैं जिनसे हर कलाकृति बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, मान (हल्का-गहरा), बनावट और स्थान; कई शिक्षक बिंदु को भी जोड़ते हैं। डिज़ाइन के सिद्धांत बताते हैं कि इन ईंटों को कैसे जमाएँ: संतुलन, विरोधाभास (कंट्रास्ट), बल (एम्फ़ेसिस), गति, लय और पैटर्न, अनुपात और पैमाना, एकता और विविधता।
- रंग सिद्धांत: रंग-चक्र, रंगों का मेल, मिश्रण और अर्थ – रंग सिद्धांत रंग मिलाने और साथ रखने के सरल नियम हैं। पेंट में लाल, पीला और नीला प्राथमिक रंग हैं; दो प्राथमिक से द्वितीयक (नारंगी, हरा, बैंगनी) बनता है; प्राथमिक + पास वाला द्वितीयक = तृतीयक, और इस तरह 12 रंगों का चक्र बनता है। हर रंग के तीन आयाम हैं: वर्ण/ह्यू (नाम), मान (हल्का-गहरा: टिंट, शेड, टोन) और संतृप्ति (चटक-फीका)। पूरक, सजातीय, त्रिक और एकवर्णी जैसे सामंजस्य रंगों को साथ अच्छा दिखाते हैं। गर्म रंग आगे आते लगते हैं, ठंडे पीछे जाते। प्रकाश जुड़कर सफ़ेद बनता है (RGB); पेंट और स्याही प्रकाश घटाते हैं (CMY से लगभग काला)। रंग भावना और संस्कृति के अर्थ भी रखते हैं।
- डिजिटल मीडिया: चित्र, आवाज़ और वीडियो संख्याएँ कैसे बनते हैं – डिजिटल मीडिया यानी कंप्यूटर पर संख्याओं के रूप में सहेजा गया हर चित्र, आवाज़, वीडियो या एनिमेशन। रास्टर चित्र पिक्सेल का जाल है; हर पिक्सेल लाल, हरे और नीले के 0 से 255 तक के मानों में सहेजा जाता है। वेक्टर ग्राफ़िक्स आकृतियों को गणित से सहेजते हैं, इसलिए हर आकार में साफ़ रहते हैं। वीडियो और एनिमेशन बहुत सारे फ़्रेम तेज़ी से दिखाना है। रेज़ोल्यूशन बढ़ने से फ़ाइल बड़ी होती है, इसलिए संपीडन करते हैं। मीडिया बनाते-बाँटते समय कॉपीराइट, लाइसेंस और लोगों के चित्र-अधिकार का सम्मान करना ज़रूरी है।
3. Audiovisual narrative
Literary screenplay · Technical script and storyboard · Mise-en-scène · Soundtrack · Editing and post-production · Language of TV and advertising
- फ़िल्म निर्माण की मूल बातें – फ़िल्म तीन चरणों में बनती है: पूर्व-निर्माण (विचार, पटकथा, स्टोरीबोर्ड, योजना), निर्माण (कैमरा, ध्वनि और प्रकाश के साथ शूटिंग) और उत्तर-निर्माण (संपादन, ध्वनि, संगीत, रंग और टाइटल)। कैमरा कहानी कहता है शॉट के आकार (वाइड, मीडियम, क्लोज़-अप), कोण (ऊँचा, आँख के स्तर, नीचा) और चाल (पैन, टिल्ट, ट्रैकिंग) से। टीम काम बाँटती है: निर्देशक, निर्माता, कैमरा ऑपरेटर, ध्वनि, प्रकाश, अभिनेता और संपादक। संपादन क्लिप चुनता, काटता और क्रम में लगाता है। एनिमेशन, जैसे स्टॉप मोशन, हर सेकंड कई फ़्रेम दिखाकर स्थिर चित्रों को चलता हुआ दिखाता है।
- फ़िल्म अध्ययन: फ़िल्में कहानी कैसे कहती हैं – फ़िल्म तेज़ी से चलती स्थिर तस्वीरों (फ़्रेम) की लड़ी है जिसे दिमाग़ गति की तरह देखता है। फ़िल्मकार एक दृश्य भाषा बोलते हैं: शॉट का आकार, कैमरा कोण, कैमरा की चाल, रोशनी, मीज़-आँ-सेन, ध्वनि और संपादन। हर चुनाव हमारी भावना बदलता है। सिनेमा 1890 के दशक में शुरू हुआ, 1920 के दशक के अंत में आवाज़ आई, फिर रंग; सोवियत मोंटाज, इतालवी नवयथार्थवाद, फ़्रेंच न्यू वेव और भारतीय समानांतर सिनेमा जैसे आंदोलन आए। फ़िल्म समीक्षा का मतलब है सबूत के साथ वर्णन, विश्लेषण, अर्थ और निर्णय।
4. Audiovisual production: techniques and procedures
Production crew roles · Assigning production tasks · Production phases · Choosing techniques and conventions · Technical equipment · Sound recording · Non-linear editing software · Distributing audiovisual content · Evaluating productions
- फ़िल्म निर्माण की मूल बातें – फ़िल्म तीन चरणों में बनती है: पूर्व-निर्माण (विचार, पटकथा, स्टोरीबोर्ड, योजना), निर्माण (कैमरा, ध्वनि और प्रकाश के साथ शूटिंग) और उत्तर-निर्माण (संपादन, ध्वनि, संगीत, रंग और टाइटल)। कैमरा कहानी कहता है शॉट के आकार (वाइड, मीडियम, क्लोज़-अप), कोण (ऊँचा, आँख के स्तर, नीचा) और चाल (पैन, टिल्ट, ट्रैकिंग) से। टीम काम बाँटती है: निर्देशक, निर्माता, कैमरा ऑपरेटर, ध्वनि, प्रकाश, अभिनेता और संपादक। संपादन क्लिप चुनता, काटता और क्रम में लगाता है। एनिमेशन, जैसे स्टॉप मोशन, हर सेकंड कई फ़्रेम दिखाकर स्थिर चित्रों को चलता हुआ दिखाता है।
- परियोजना प्रबंधन – परियोजना (project) एक बार का काम है जिसका साफ़ लक्ष्य, शुरुआत और अंत होता है। परियोजना प्रबंधन यानी उसकी योजना बनाकर और नियंत्रण करके उसे तय दायरे में, समय पर और बजट में पूरा करना। जीवन चक्र: आरंभ, योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और समापन। योजनाकार काम को छोटे कामों (WBS) में बाँटते हैं, गैंट चार्ट पर रखते हैं, क्रांतिक पथ ढूँढते हैं, जोखिम सँभालते हैं और अंत में सीख की समीक्षा करते हैं।
- मीडिया उद्योग – मीडिया उद्योग वे कंपनियाँ और संस्थाएँ हैं जो फ़िल्म, TV, संगीत, समाचार, गेम और ऑनलाइन सामग्री बनाती, बेचती और लोगों तक पहुँचाती हैं। हर उत्पाद निर्माण, वितरण और प्रदर्शन से गुज़रता है। कुछ बड़े समूह (conglomerate) कई कंपनियों के मालिक हैं, जो ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज एकीकरण से जुड़ी हैं। तकनीक से अभिसरण हुआ — एक फ़ोन अब कई उपकरणों का काम करता है। पैसा सरकारी/सार्वजनिक धन, विज्ञापन या सदस्यता से आता है। नियामक उम्र-रेटिंग जैसे नियम बनाते हैं। डिजिटल वितरण और स्ट्रीमिंग ने उद्योग को वैश्विक बना दिया है।