शूटिंग: अच्छा कच्चा माल जुटाना
प्रोडक्शन का मतलब है कच्चा माल बनाना। वीडियो में यह शूटिंग है। जो आप फ़िल्माते या खींचते हैं, वे क्लिप (वीडियो) और स्टिल (फ़ोटो) कहलाते हैं।
- वाइड शॉट: पूरी जगह और सब कहाँ हैं, यह दिखाता है।
- मीडियम शॉट: व्यक्ति को कमर से ऊपर दिखाता है, ताकि काम दिखे।
- क्लोज़-अप: चेहरा या छोटी चीज़ दिखाता है, ताकि भावना महसूस हो।
अच्छी आदतें: कैमरा स्थिर पकड़ें (दोनों हाथ या ट्राइपॉड), रोशनी अपनी पीठ की तरफ़ रखें, साफ़ आवाज़ रिकॉर्ड करें, और अतिरिक्त क्लिप (कटअवे या B-रोल) भी लें ताकि एडिटर के पास चुनने को हो। वीडियो तेज़ी से चलने वाली तस्वीरों की कतार है, जिन्हें फ़्रेम कहते हैं; आम गति 24, 25 या 30 फ़्रेम प्रति सेकंड (fps) होती है।
फ़ोटो रीटचिंग
रीटचिंग का मतलब है फ़ोटो खींचने के बाद उसे बेहतर बनाना। इसका मतलब यह नहीं कि जो हुआ उसका सच बदल दिया जाए।
- एक्सपोज़र और उजलापन: अँधेरी फ़ोटो को हल्का (या बहुत चमकीली को गहरा) करें।
- कंट्रास्ट और रंग: रंग स्वाभाविक लगें; पीलापन या नीलापन ठीक करें।
- क्रॉप और सीधा करना: जो ज़रूरी नहीं उसे काटें और टेढ़ी क्षितिज-रेखा सीधी करें।
- दाग़ ठीक करना (क्लोन या हील): साफ़ पिक्सेल कॉपी करके धूल के दाग़ या छोटे धब्बे पर रखें।
नियम: हमेशा कॉपी पर काम करें, ओरिजिनल रखें, और ईमानदार रहें। ख़बर की फ़ोटो को झूठ दिखाने के लिए नहीं बदला जा सकता।
एडिटिंग: ट्रिम करें, जोड़ें और कहानी कहें
एडिटिंग प्रोग्राम आपके क्लिप टाइमलाइन पर दिखाता है, यानी बाएँ से दाएँ चलती समय की रेखा। प्लेहेड वह निशान है जो बताता है कि आप कौन-सा पल देख रहे हैं।
- क्लिप इम्पोर्ट करें और फ़ोल्डरों में रखें।
- ट्रिम: हर क्लिप की शुरुआत और अंत काटें ताकि केवल सबसे अच्छा हिस्सा बचे।
- जोड़ें: क्लिप कहानी के क्रम में रखें। एक क्लिप से दूसरे में बदलना कट है। नरम बदलाव ट्रांज़िशन (फ़ेड या डिज़ॉल्व) है; इसे कम इस्तेमाल करें।
- लय देखें: छोटे क्लिप तेज़ और तनाव भरे लगते हैं, लंबे क्लिप धीमे और शांत।
काम की तरकीब: जब काम या बोलने वाला बदले तब नया शॉट शुरू करें, और वाइड, मीडियम, क्लोज़-अप को मिलाएँ ताकि चित्र कभी ऊबाऊ न हो।
परतें: चित्र, शीर्षक और ध्वनि
टाइमलाइन में कई ट्रैक होते हैं। वीडियो ट्रैक में चित्र रहते हैं; टाइटल ट्रैक में लिखा हुआ; ऑडियो ट्रैक में आवाज़, संगीत और ध्वनि-प्रभाव। सब साथ चलते हैं, इसलिए आप क्लिप के ऊपर शीर्षक रख सकते हैं या किसी के बोलते समय संगीत धीमा कर सकते हैं।
एनिमेशन भी यही विचार है: चित्र या 3D मॉडल हर फ़्रेम में थोड़ा बदलता है, और तेज़ी से चलाने पर चलता हुआ लगता है। कथात्मक एनिमेशन में फ़्रेम कहानी (शुरुआत, बीच, अंत) कहते हैं; कंप्यूटर एनिमेशन में चित्र कंप्यूटर बनाता या चलाता है। सरकते हुए आने वाले शीर्षक भी सरल कंप्यूटर एनिमेशन हैं।
एक्सपोर्ट और प्रिंट
वीडियो एक्सपोर्ट करना
एक्सपोर्ट (या रेंडर) सब कुछ जोड़कर एक वीडियो फ़ाइल बनाता है, जैसे MP4। आकार चुनें (जैसे 1920 x 1080 पिक्सेल, जिसे फ़ुल HD कहते हैं) और वही फ़्रेम दर रखें जिस पर शूट किया था। बड़ी और बेहतर क्वालिटी का मतलब बड़ी फ़ाइल।
फ़ोटो छापना
स्क्रीन RGB रोशनी (लाल, हरा, नीला) से रंग बनाती है। प्रिंटर CMYK स्याही (सियान, मैजेंटा, पीला, काला) इस्तेमाल करते हैं, इसलिए छपे रंग थोड़े अलग दिख सकते हैं। साफ़ छपाई के लिए लगभग 300 बिंदु प्रति इंच (dpi) चाहिए।
छपाई का आकार (इंच) = पिक्सेल / dpi। 3000 पिक्सेल चौड़ी फ़ोटो 300 dpi पर 10 इंच चौड़ी छपती है।
करके देखें: 15 सेकंड का वीडियो एडिट करें
फ़ोन पर तीन छोटे क्लिप बनाएँ (वाइड, मीडियम, क्लोज़-अप) जिनमें दोस्त दरवाज़ा खोल रहा है। कोई भी मुफ़्त एडिटिंग ऐप लें। हर क्लिप को 3 से 5 सेकंड तक ट्रिम करें, क्रम में लगाएँ, शीर्षक जोड़ें और एक्सपोर्ट करें। फिर क्रम बदलें और 3D (चरण 6) दोबारा देखें: एहसास कैसे बदला?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रोडक्शन = शूटिंग। पोस्ट-प्रोडक्शन = रीटच, एडिट, एक्सपोर्ट।
- शॉट के नाप: वाइड (जगह), मीडियम (काम), क्लोज़-अप (भावना)।
- कुल फ़्रेम = फ़्रेम प्रति सेकंड x सेकंड।
- छपाई का आकार (इंच) = पिक्सेल / dpi।
- स्क्रीन = RGB रोशनी। प्रिंट = CMYK स्याही।
- टाइमलाइन की कुल लंबाई = क्लिपों की लंबाइयों का जोड़।
हल किए गए उदाहरण
1. एक फ़िल्म 8 सेकंड की है और 25 फ़्रेम प्रति सेकंड पर चलती है। कुल कितने फ़्रेम हुए?
फ़्रेम = 25 x 8 = 200 फ़्रेम।
2. एक फ़ोटो 3600 पिक्सेल चौड़ी है। 300 dpi पर वह कितने इंच चौड़ी छप सकती है?
3600 / 300 = 12 इंच चौड़ी। 150 dpi पर 24 इंच चौड़ी छप सकती है, पर छपाई धुँधली दिखेगी।
3. कच्चे क्लिप 12 से., 9 से. और 14 से. के हैं। आप उन्हें 5 से., 4 से. और 6 से. तक ट्रिम करते हैं। फ़िल्म कितनी लंबी है और कितना हटा?
फ़िल्म = 5 + 4 + 6 = 15 से.। कच्चा जोड़ = 12 + 9 + 14 = 35 से.। हटाया = 35 - 15 = 20 से.।
4. स्कूल के खेल दिवस का वीडियो धावक के पैरों के क्लोज़-अप से शुरू होकर फिर ट्रैक के वाइड शॉट पर जाता है। यह क्रम अच्छा क्यों है?
क्लोज़-अप से देखने वाले में जिज्ञासा जगती है और मेहनत महसूस होती है। फिर वाइड शॉट बताता है 'हम कहाँ हैं?'। पास से शुरू करके दूर जाना जानकारी देने से पहले रुचि बनाता है।
आम गलतियाँ
- हर क्लिप को पूरी लंबाई में रखना। ट्रिम करें: जो कहानी में काम न आए उसे काट दें।
- फ़ोटो या क्लिप की इकलौती कॉपी पर एडिट करना। हमेशा कॉपी पर काम करें और ओरिजिनल रखें।
- आवाज़ को नज़रअंदाज़ करना। ख़राब आवाज़ (शोर, बोलने पर तेज़ संगीत) अच्छे चित्र को बिगाड़ देती है।
- छोटी वेब फ़ोटो को बड़े आकार में छापना। बड़े आकार में कम पिक्सेल धुँधले दिखते हैं; पहले पिक्सेल / dpi देखें।