मंच-सज्जा (स्टेज डिज़ाइन)
मंच-सज्जा वह सब है जो दर्शक अभिनेताओं के अलावा मंच पर देखते हैं:
- सेट और पृष्ठभूमि: रंगा या बना हुआ दृश्य जो जगह और समय बताता है (जंगल, महल, सड़क)।
- प्रॉप्स: अभिनेताओं के इस्तेमाल की चीज़ें, जैसे लालटेन या किताब।
- वेशभूषा और मेकअप: बताते हैं कि पात्र कौन है।
- रोशनी: कहाँ देखना है यह बताती है, और उसका रंग व कोण माहौल बदलते हैं। गर्म पीली रोशनी अक्सर आरामदायक या खुशनुमा लगती है; बगल से आती ठंडी नीली रोशनी अजीब या डरावनी लगती है।
- ध्वनि और संगीत माहौल को सहारा देते हैं।
अच्छी सज्जा सरल होती है: हर चीज़ का एक कारण होता है। दर्शक एक नज़र में जगह समझ लें।
कला-फोटोग्राफी
स्नैपशॉट एक पल दर्ज करता है। कला-फोटोग्राफी कुछ कहती भी है: फोटोग्राफर चुनता है कि फ्रेम के अंदर क्या और कैसे रखे।
- विषय (सब्जेक्ट): चित्र किस बारे में है।
- रोशनी: सुबह या शाम की मुलायम रोशनी कोमल लगती है; दोपहर की तेज़ रोशनी गहरी छाया बनाती है।
- संयोजन (कम्पोज़िशन): चीज़ों की जगह। तिहाई के नियम में फ्रेम को दो खड़ी और दो आड़ी रेखाओं से बाँटते हैं। विषय को रेखा पर या जहाँ रेखाएँ मिलती हैं वहाँ रखना आम तौर पर ठीक बीच में रखने से ज़्यादा संतुलित लगता है।
- दूसरे औज़ार: मार्गदर्शक रेखाएँ (विषय की ओर जाती सड़क), सादी पृष्ठभूमि, नीचे या ऊपर से देखना और फालतू चीज़ें काट देना।
फोटो एक ही फ्रेम होता है, इसलिए उसके अंदर की हर चीज़ मायने रखती है।
फिल्म की भाषा
फिल्म कुछ सरल औज़ारों से कहानी कहती है। इन्हें शब्दों की तरह पढ़ना सीखो।
- शॉट का आकार: वाइड शॉट जगह दिखाता है, मीडियम शॉट व्यक्ति और उसका काम, क्लोज़-अप चेहरा और भावना।
- कैमरा कोण: नीचे से व्यक्ति मज़बूत लगता है, ऊपर से छोटा।
- कैमरे की गति: पैन (बगल में घूमना), टिल्ट (ऊपर-नीचे), ज़ूम या ट्रैक (पास जाना)।
- संपादन (एडिटिंग): शॉट एक के बाद एक जोड़े जाते हैं। चेहरे से बंद दरवाज़े पर कट हमें बताता है कि व्यक्ति किससे डरता है।
- ध्वनि और संगीत भावना जोड़ते हैं।
सिनेमा और टीवी यही भाषा बाँटते हैं। टीवी समाचार अक्सर मीडियम शॉट इस्तेमाल करते हैं; कार्टून फिल्म सभी तरह के शॉट ले सकती है।
एनिमेशन: चित्रों को चलाना
आँख किसी चित्र को बहुत थोड़ी देर याद रखती है। अगर थोड़े बदले हुए नए चित्र काफ़ी तेज़ी से आएँ तो दिमाग उन्हें जोड़कर गति देखता है। हर चित्र एक फ्रेम है।
- फिल्में 24 फ्रेम प्रति सेकंड दिखाती हैं। कई कार्टून हर दूसरे फ्रेम पर चित्र बनाते हैं (12 प्रति सेकंड) और फिर भी ठीक लगते हैं।
- हाथ से बना एनिमेशन: कलाकार हर मुद्रा बनाते हैं। स्टॉप-मोशन: मॉडलों को थोड़ा हिलाकर फोटो खींचते हैं। कंप्यूटर एनिमेशन: प्रोग्राम बीच के फ्रेम बनाता है।
- काम की बात: उछलती गेंद ज़मीन से टकराते समय दब जाती है, और जहाँ वह धीमी चलती है वहाँ मुद्राएँ पास-पास होती हैं।
एक सेकंड के लिए 12 फ्रेम प्रति सेकंड पर 12 चित्र चाहिए। एक मिनट के कार्टून के लिए 720 चित्र चाहिए।
करके देखो: फ्लिप बुक और फ्रेम बनाओ
1. 10 चिपकने वाली पर्चियों पर गेंद बनाओ, हर बार थोड़ी नीचे, और आखिरी पर्ची पर उसे दबी हुई बनाओ। अँगूठे से पन्ने पलटो।
2. कागज़ से आयत काटकर फ्रेम बनाओ। उससे अपनी कक्षा देखो। अपना विषय तिहाई रेखा पर लाओ।
3. 3D में आखिरी चरण में डर का माहौल और क्लोज़-अप चुनो। बताओ कैसा महसूस होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मंच = सेट + प्रॉप्स + वेशभूषा + रोशनी + ध्वनि
- तिहाई का नियम: विषय तिहाई रेखा या मिलन-बिंदु पर
- शॉट: वाइड → जगह; मीडियम → व्यक्ति; क्लोज़-अप → भावना
- ज़रूरी फ्रेम = फ्रेम प्रति सेकंड × सेकंड
हल किए गए उदाहरण
1. स्कूल नाटक में भूतिया घर का दृश्य है। कौन सी रोशनी और पृष्ठभूमि का रंग सुझाओगे?
बगल से, नीचे से और थोड़ी धीमी ठंडी नीली या हरी रोशनी, और गहरी पृष्ठभूमि। इससे दृश्य अजीब और डरावना लगता है।
2. फिल्म में एक लड़की बहुत बड़े खाली मैदान में अकेली है। कौन सा शॉट दिखाता है कि वह कितनी छोटी है?
वाइड शॉट। वह पूरी जगह दिखाता है, इसलिए लड़की उसमें छोटी लगती है।
3. एक छोटा कार्टून 12 फ्रेम प्रति सेकंड पर 5 सेकंड चलता है। कितने चित्र चाहिए?
12 फ्रेम/सेकंड × 5 सेकंड = 60 चित्र।
4. तुम्हारे फोटो में पेड़ ठीक बीच में है। तिहाई के नियम से इसे कैसे सुधारोगे?
कैमरा इस तरह हिलाओ कि पेड़ बाईं या दाईं खड़ी तिहाई रेखा पर आए और क्षितिज एक आड़ी तिहाई रेखा पर रहे।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि मंच-सज्जा सिर्फ रंगी हुई पृष्ठभूमि है। रोशनी, प्रॉप्स और वेशभूषा भी इसका हिस्सा हैं।
- तिहाई के नियम को कानून मान लेना। यह मददगार मार्गदर्शक है; कलाकार इसे जानबूझकर तोड़ सकते हैं।
- शॉट के आकार उलझाना: क्लोज़-अप चेहरा दिखाता है, पूरी जगह नहीं।
- भूल जाना कि एनिमेशन में बहुत से फ्रेम चाहिए। एक चित्र चल नहीं सकता।