लिथोग्राफ़ी क्या है?
लिथोग्राफ़ी का अर्थ है "पत्थर पर लिखना" (यूनानी: लिथोस = पत्थर, ग्राफ़ीन = लिखना)। इसका आविष्कार लगभग 1796 में आलोइस सेनेफ़ेल्डर ने किया। यह समतल (planographic) विधि है: छपने वाली सतह सपाट होती है। वुडब्लॉक में चित्र उभरा होता है, एचिंग में खाँचों में। लिथोग्राफ़ी में ऊँचाई बिल्कुल नहीं होती। चित्र सिर्फ़ रासायनिक अंतर है: कुछ हिस्से चिकनाई पसंद करते हैं, कुछ पानी।
प्लेट: पत्थर या एल्युमिनियम
कलाकार चिकनी, सपाट चूना पत्थर की पटिया इस्तेमाल करते हैं। उसे रेत से घिसकर बहुत चिकना बनाते हैं। आजकल पतली एल्युमिनियम प्लेट भी चलती है, क्योंकि वह हल्की है और रखना आसान है। सतह सपाट और साफ़ होनी चाहिए, क्योंकि उँगली का निशान भी चिकना होता है और छप जाता है।
चित्र बनाना, पक्का करना और गीला करना
- चित्र बनाना: चिकनाई वाली क्रेयॉन या टूश नाम की तरल चिकनी स्याही से बनाओ। नरम क्रेयॉन से धूसर टोन आते हैं, कठोर से बारीक रेखाएँ।
- पक्का करना (पत्थर की एचिंग): पत्थर पर गम अरेबिक (गोंद) और एक बूँद हल्का अम्ल फैलाते हैं। यह खाँचे नहीं काटता। यह चित्र की चिकनाई पक्की करता है और खाली हिस्सों को पानी-प्रेमी बनाता है।
- धोना: कलाकार विलायक से क्रेयॉन धो देता है। पत्थर में चिकनाई की एक हल्की छाप बची रहती है।
- गीला करना: गीला स्पंज फेरते हैं। पानी खाली हिस्सों पर फैलता है, चिकने चित्र पर नहीं।
स्याही लगाना और प्रेस
पत्थर गीला ही रहते हुए कलाकार रोलर से तैलीय स्याही फेरता है। स्याही चित्र पर चिपकती है और गीले खाली पत्थर से फिसल जाती है। हर छाप से पहले पत्थर पर फिर स्पंज फेरते हैं और दोबारा स्याही लगाते हैं। फिर पत्थर पर कागज़ रखकर, ऊपर ढककर स्क्रेपर प्रेस से निकालते हैं। एक लकड़ी की पट्टी पीछे से ज़ोर से रगड़कर कागज़ को पत्थर पर दबाती है। छाप उल्टी आती है।
आम समस्याएँ: पानी कम हो तो स्याही पूरे पत्थर पर चिपकती है (स्कमिंग, गंदी पृष्ठभूमि)। पानी ज़्यादा हो तो चित्र की स्याही बह जाती है और छाप फीकी आती है।
रंगीन लिथोग्राफ़ी और आज
रंगों के लिए हर रंग का एक पत्थर या प्लेट बनती है और रजिस्ट्रेशन निशानों से मिलाकर एक-एक करके छापी जाती है। पोस्टर, संगीत के कवर और प्रसिद्ध कलाकृतियाँ इसी तरह छपीं। किताबों, अख़बारों और पैकिंग की आधुनिक ऑफ़सेट छपाई भी तेल-पानी के इसी विचार पर चलती है, जिसमें एल्युमिनियम प्लेट और रबर रोलर होते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लिथोग्राफ़ी = समतल (planographic) = सपाट सतह से छपाई
- चिकनाई स्याही पकड़ती है; खाली हिस्सों का पानी स्याही भगाता है
- गम अरेबिक + हल्का अम्ल = चित्र पक्का करता है
- कम पानी = स्कमिंग; ज़्यादा पानी = फीकी छाप
- छाप = उल्टा चित्र
- रंग = हर रंग का एक पत्थर या प्लेट
हल किए गए उदाहरण
1. लिथोग्राफ़ी में काटने की ज़रूरत ही क्यों नहीं पड़ती?
चित्र सपाट पत्थर पर चिकनाई से बनता है। चिकनाई स्याही पकड़ती है और गीला खाली पत्थर उसे भगाता है, इसलिए उभार या खाँचे नहीं चाहिए।
2. पत्थर पर उँगली का निशान छाप में आ गया। क्यों?
उँगली ने चिकनाई छोड़ी। चिकनाई स्याही पकड़ती है, इसलिए वह छप गया।
3. एक कलाकार 3 रंगों की छाप बनाना चाहता है। कितने पत्थर या प्लेट चाहिए?
3, हर रंग के लिए एक।
आम गलतियाँ
- सोचना कि अम्ल एचिंग की तरह गहरी रेखाएँ काटता है। लिथोग्राफ़ी में अम्ल सिर्फ़ चित्र पक्का करता है।
- पत्थर को नंगी उँगलियों से छूना। चिकनाई छप जाती है।
- स्याही लगाते समय पत्थर सूखने देना। इससे स्कमिंग होती है।
- बहुत ज़्यादा पानी लेना, जो चित्र को धो देता है।