इंटैग्लियो क्या है?
इंटैग्लियो (उच्चारण "इन-टाल-यो") का अर्थ है "भीतर काटा हुआ"। इसमें छपने वाली रेखाएँ प्लेट की सतह से नीचे होती हैं। यह वुडब्लॉक का उलटा है, जहाँ छपने वाले हिस्से उभरे होते हैं। तांबे की प्लेट की छपाई इंटैग्लियो का सबसे आम रूप है। जस्ते और इस्पात की प्लेटें भी चलती हैं।
खाँचे बनाने के तरीके
- एंग्रेविंग: कलाकार बुरिन नाम का तेज़ इस्पाती औज़ार तांबे में दबाकर साफ़ रेखाएँ काटता है।
- ड्राईपॉइंट: तेज़ सुई से सीधे प्लेट खुरचते हैं, अम्ल नहीं। किनारे पर खुरदुरी उभार (बर) बनती है, जिससे मखमली नरम रेखाएँ आती हैं।
- एचिंग: प्लेट पर मोम का ग्राउंड चढ़ता है। सुई से ग्राउंड में चित्र खुरचते हैं। फिर अम्ल नंगी धातु की रेखाओं को खाता है।
- एक्वाटिंट: प्लेट पर बारीक राल का चूरा पिघलाते हैं। अम्ल चूरे के आसपास नन्हे बिंदु खाता है। इन बिंदुओं से धूसर टोन के सपाट हिस्से बनते हैं।
अम्ल से खाना
एचिंग में प्लेट अम्ल के घोल में रखी जाती है। अम्ल सिर्फ़ वहाँ धातु खाता है जहाँ मोम हट चुका है। समय गहराई तय करता है। कुछ मिनट में उथले खाँचे और हल्की रेखाएँ बनती हैं। लंबे समय में गहरे खाँचे और गहरी रेखाएँ। कलाकार अक्सर प्लेट निकालकर हल्की रेखाओं पर वार्निश लगा देते हैं (स्टॉपिंग आउट) और फिर प्लेट रखकर बाकी रेखाओं को और गहरा खाते हैं। अम्ल ख़तरनाक है, इसलिए हवादार कमरे में दस्ताने और चश्मे के साथ काम करते हैं।
स्याही लगाना और पोंछना
कलाकार प्लेट को हल्का गर्म करके गाढ़ी स्याही सारे खाँचों में रगड़ता है। फिर सपाट सतह पहले टार्लाटन नाम के कड़े कपड़े से और फिर हथेली या नरम कागज़ से पोंछी जाती है। पोंछने के बाद स्याही सिर्फ़ खाँचों में बचती है। कुछ कलाकार जान-बूझकर सतह पर स्याही की पतली परत छोड़ते हैं ताकि हल्का रंग-टोन आए। सतह कम पोंछी जाए तो छाप की पृष्ठभूमि गंदी आती है।
प्रेस से छापना
स्याही लगी प्लेट पर नम, नरम कागज़ रखा जाता है। ऊपर फेल्ट के कंबल रखते हैं। यह परत एचिंग प्रेस के दो भारी बेलनों के बीच से निकलती है। भारी दबाव कागज़ को खाँचों में धकेलता है। कागज़ स्याही खींचकर रेखाएँ ले जाता है। प्लेट के किनारे भी कागज़ में दब जाते हैं और प्लेट-निशान बन जाता है। छाप उल्टी आती है और प्लेट पर दोबारा स्याही लगाकर कई छापें बनती हैं। नरम प्लेट (ड्राईपॉइंट) कुछ छापों में घिस जाती है, कठोर प्लेट सैकड़ों छापें देती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- इंटैग्लियो = स्याही खाँचों में, सतह पर नहीं
- एचिंग = मोम का ग्राउंड + सुई + अम्ल का घोल
- अम्ल का समय ज़्यादा = खाँचा गहरा = रेखा गहरी
- एंग्रेविंग = बुरिन से रेखा कटती है; ड्राईपॉइंट = सुई से खुरचना, बर बनती है
- एक्वाटिंट = राल का चूरा + अम्ल = धूसर टोन
- छाप = उल्टा चित्र + प्लेट-निशान
हल किए गए उदाहरण
1. लंबे समय अम्ल में रखने से रेखा गहरी क्यों आती है?
खाँचा गहरा हो जाता है, इसलिए ज़्यादा स्याही रखता है। कागज़ पर ज़्यादा स्याही आने से रेखा गहरी दिखती है।
2. प्लेट की सतह पोंछे बिना छापा गया। छाप में क्या दिखेगा?
रेखाओं के चारों ओर गहरी, गंदी पृष्ठभूमि, क्योंकि सपाट सतह पर भी स्याही थी।
3. एक प्लेट पर हल्की और गहरी, दोनों रेखाएँ चाहिए। कलाकार क्या करे?
प्लेट को थोड़ी देर अम्ल में रखो, हल्की रेखाओं पर वार्निश लगाओ (स्टॉपिंग आउट), फिर दोबारा अम्ल में रखो ताकि बाकी रेखाएँ ही और गहरी हों।
आम गलतियाँ
- सोचना कि स्याही वुडब्लॉक की तरह ऊपर रहती है। इंटैग्लियो में वह खाँचों में रहती है।
- कपड़े से बहुत ज़ोर से पोंछकर खाँचे भी खाली कर देना।
- सूखा, कड़ा कागज़ लेना। वह बारीक खाँचों में नहीं पहुँचता।
- प्लेट को बहुत देर अम्ल में रखना, जिससे रेखाएँ मिलकर धुँधली हो जाती हैं।