पर्यावरण डिज़ाइन क्या है?
पर्यावरण डिज़ाइन का मतलब है लोगों के आसपास की जगह को आकार देना। जगह कोई सड़क, स्कूल का मैदान, बाज़ार, स्टेशन, बगीचा या मेला हो सकती है।
डिज़ाइनर तीन सवाल पूछता है। इसे कौन इस्तेमाल करेगा? यहाँ क्या करेगा? यहाँ कैसा लगना चाहिए? फिर वह आकार, रंग, सामग्री और रोशनी चुनकर इनके जवाब देता है।
किसी डिज़ाइन की हुई जगह के हिस्से
ज़्यादातर जगहों में यही कुछ हिस्से होते हैं।
- रास्ता: कहाँ चलना है यह दिखाता है। चौड़ा, समतल और सुरक्षित होना चाहिए।
- दिशा-चिह्न (साइनेज): चित्र, तीर और छोटे शब्द जो रास्ता बताते हैं। बड़े, साफ़ और अलग दिखने वाले रंग अच्छे रहते हैं।
- रोशनी: रात में सुरक्षा देती है और जगह को गर्म या शांत महसूस करा सकती है।
- बैठने की जगह और स्ट्रीट फ़र्नीचर: बेंच, कूड़ेदान, बस शेल्टर और नल। इनसे जगह आरामदायक बनती है।
- पौधे और पानी: छाया देते हैं, हवा ठंडी करते हैं और मन शांत करते हैं।
इमारत, प्रदर्शनी और मंच से आगे
प्रदर्शनी और मंच भी डिज़ाइन की हुई जगहें हैं। पर्यावरण डिज़ाइन में ये भी आते हैं:
- सार्वजनिक स्थान: चौक, खेल का मैदान, नदी किनारा, बाज़ार की गली।
- रास्ता खोजने की व्यवस्था (वेफ़ाइंडिंग): हवाई अड्डे, अस्पताल और मेट्रो के चिह्न।
- भीतरी सजावट (इंटीरियर): कक्षा, दुकान, कैफ़े, प्रतीक्षालय।
- अस्थायी डिज़ाइन: त्योहार की रोशनी, रंगोली, कंदील, पॉप-अप बाज़ार।
- रोशनी का डिज़ाइन: पुल और स्मारकों की लाइटें जो रात में जगह का रूप बदल देती हैं।
डिज़ाइनर कैसे काम करता है
कदम सीधे हैं।
- देखो कि लोग जगह को असल में कैसे इस्तेमाल करते हैं।
- स्केच बनाओ: पहले ऊपर से (नक्शा), फिर बगल से।
- मॉडल बनाओ: गत्ते, मिट्टी या कंप्यूटर से।
- जाँचो और सुधारो: लोगों से पूछो और जो ठीक न चले उसे बदलो।
अच्छा डिज़ाइन काम का (उपयोग), सुंदर (रूप) और लोगों व प्रकृति के प्रति दयालु होता है। उसे सब इस्तेमाल कर सकें: बच्चे, बुज़ुर्ग और व्हीलचेयर वाले भी।
खुद करके देखो
3D में: पाँचों बटन बंद करो। फिर सोचो कि स्कूल के गेट के लिए सबसे पहले क्या जोड़ोगे। उसे चालू करके गिनती देखो। घर पर: अपनी गली या स्कूल के मैदान में घूमो। एक चीज़ लिखो जो अच्छी चलती है और एक जो तुम जोड़ना चाहोगे (जैसे चिह्न, लैंप या छाया)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पर्यावरण डिज़ाइन = लोगों, प्रकृति और उपयोग के लिए जगह को आकार देना
- उपयोग + रूप + अनुकूलता = अच्छी जगह
- साइनेज = रास्ता बताने वाले चित्र, तीर और छोटे शब्द
- स्ट्रीट फ़र्नीचर = बेंच, कूड़ेदान, शेल्टर, नल
- नक्शा (प्लान) = ऊपर से दिखने वाला दृश्य
हल किए गए उदाहरण
1. एक बस स्टॉप पर छत नहीं है और एक ही पतली बेंच है। तीन बदलाव सुझाओ।
धूप-बारिश के लिए छत लगाओ, बुज़ुर्गों के लिए हत्थे वाली लंबी बेंच रखो, और रूट नंबर वाला साफ़ चिह्न लगाओ।
2. दोपहर में तेज़ धूप से स्कूल का मैदान खाली रहता है। डिज़ाइनर क्या जोड़ेगा?
पेड़ या छायादार छत, और उनके नीचे कुछ बेंच। छाया से मैदान दोपहर में भी काम का बनता है।
3. अस्पताल के गलियारे में आने वाले उलझ जाते हैं। पर्यावरण डिज़ाइन कैसे मदद करेगा?
रंग वाली फ़र्श की रेखाएँ, बड़े तीर और सरल चित्रों वाले चिह्न लगाओ और अच्छी रोशनी रखो।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पर्यावरण डिज़ाइन सिर्फ़ सुंदरता है। सुंदर पर बिना बेंच और रोशनी वाली जगह लोगों के काम नहीं आती।
- अलग ज़रूरतों वाले लोगों को भूल जाना। रैंप, बड़े अक्षर और आराम की जगह सबके काम आती है।
- चिह्न बहुत छोटे या बहुत ऊँचे लगाना।
- यह देखे बिना डिज़ाइन करना कि लोग असल में कैसे चलते और बैठते हैं।