"केंद्रीय रूप से रखा" का अर्थ
दो ठोस केंद्रीय रूप से रखे कहलाते हैं जब उनके अक्ष एक सीधी रेखा में हों। ऊपर वाले के आधार का केंद्र ठीक नीचे वाले के ऊपरी फलक के केंद्र पर हो।
आम जोड़े: वर्ग या षट्भुज पट्टी पर शंकु या बेलन, बेलन पर घन, छिन्नक पर गोला, प्रिज़्म पर पिरामिड। प्रायः नीचे वाला चौड़ा होता है।
संयोजन बनाने के चरण
- माप पढ़कर हर लंबाई को आइसो लंबाई (× 0.816) में बदलिए या आइसोमेट्रिक पैमाना लीजिए।
- नीचे का ठोस पूरा बनाइए, ऊपरी फलक साफ़।
- विकर्ण जोड़कर ऊपरी फलक का केंद्र खोजिए (वृत्त हो तो दीर्घवृत्त का केंद्र)।
- इस केंद्र के चारों ओर आइसो लंबाइयों से ऊपरी ठोस का आधार (समचतुर्भुज, षट्भुज या दीर्घवृत्त) बनाइए।
- साझा ऊर्ध्वाधर अक्ष पर ऊपरी ठोस की आइसो ऊँचाई तक जाकर ठोस पूरा कीजिए।
- ऊपर गोला हो तो: असली त्रिज्या का वृत्त, केंद्र ऊपरी फलक केंद्र से 0.816 × R ऊपर।
- दिखने वाले किनारे गहरे करें; छिपी रेखाएँ छोड़ दें।
कुल आइसो ऊँचाई = 0.816 × (h₁ + h₂)।
देखने की दिशा
प्रश्न में प्रायः सामने का दृश्य या तीर देकर कहा जाता है "तीर की दिशा से"। इससे पता चलता है कि वस्तु का कौन-सा भाग सामने है। आइसोमेट्रिक चित्र में वह फलक नीचे बाएँ या दाएँ सामने वाले फलक पर आता है।
- अगर वर्ग पट्टी का किनारा/कोना आपकी ओर है, तो दो बगल के फलक बराबर दिखते हैं।
- अगर एक फलक सीधा आपकी ओर है, तो वही सामने है और उसकी बगलें अक्षों पर पीछे जाती हैं।
- गोल ठोस (बेलन, शंकु, गोला) की बाहरी रेखा दिशा से नहीं बदलती, पर नीचे की पट्टी के लिए दिशा फिर भी ज़रूरी है।
परीक्षा सुझाव और खुद करके देखें
- नीचे का ठोस शीट पर नीचे से शुरू करें ताकि पूरी ऊँचाई आ जाए।
- रचना रेखाएँ पतली, अंतिम रेखाएँ मोटी।
- चित्र पर तीर की दिशा चिह्नित करें।
खुद करके देखें: माचिस की डिब्बी पर बीच में एक छोटा कप उल्टा रखिए। डिब्बी के कोने से देखिए। डिब्बी का आइसोमेट्रिक स्केच बनाइए, विकर्ण काटकर ऊपर का केंद्र पाइए और उसके चारों ओर कप का दीर्घवृत्त बनाइए। फिर डिब्बी 45° घुमाकर देखिए: अब कौन-सा फलक सामने है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- साझा अक्ष: ऊपरी आधार का केंद्र = नीचे के ऊपरी फलक का केंद्र
- कुल आइसो ऊँचाई = 0.816 × (h₁ + h₂)
- ऊपर गोला: त्रिज्या R (असली), केंद्र स्पर्श-बिंदु से 0.816R ऊपर
- ऊपरी फलक का केंद्र: आइसो समचतुर्भुज के विकर्णों का कटान बिंदु
- देखने की दिशा सामने के फलक तय करती है
हल किए गए उदाहरण
1. बेलन (Ø40, ऊँचाई 50) वर्ग पट्टी 80 × 80 × 20 पर बीच में खड़ा है। आइसो माप ज्ञात कीजिए।
पट्टी: भुजा 0.816 × 80 = 65.3 mm; मोटाई 16.3 mm। बेलन: 32.6 mm भुजा के समचतुर्भुज में दीर्घवृत्त; ऊँचाई 40.8 mm। कुल आइसो ऊँचाई = 0.816 × 70 = 57.1 mm।
2. शंकु (आधार Ø50, ऊँचाई 60) बेलन (Ø70, ऊँचाई 30) पर बीच में रखा है। चरण बताइए।
बेलन: 57.1 mm भुजा के समचतुर्भुज में दीर्घवृत्त, आइसो ऊँचाई 24.5 mm। ऊपरी दीर्घवृत्त के केंद्र पर 40.8 mm भुजा वाले समचतुर्भुज में शंकु का आधार। अक्ष पर 49 mm ऊपर शीर्ष। दो स्पर्श रेखाएँ। कुल आइसो ऊँचाई 73.5 mm।
3. Ø50 का गोला 50 भुजा के घन पर बीच में रखा है। गोले का केंद्र कहाँ?
घन की आइसो भुजा 40.8 mm। ऊपरी फलक का केंद्र (विकर्ण)। गोले का केंद्र उससे 0.816 × 25 = 20.4 mm ऊपर। वृत्त असली त्रिज्या 25 mm।
4. वर्ग पिरामिड (आधार 40, ऊँचाई 60) षट्भुज पट्टी (भुजा 40, मोटाई 20) पर बीच में है। कुल आइसो ऊँचाई?
असली = 20 + 60 = 80 mm। आइसो = 0.816 × 80 = 65.3 mm।
5. वर्ग पट्टी पहले कोना सामने रखकर, फिर फलक सामने रखकर देखी जाती है। चित्र में क्या बदलता है?
कोना सामने: दो बगल के फलक बराबर, किनारे 30° अक्षों पर। फलक सामने: पट्टी 45° घूमी, किनारे अक्षों पर नहीं; घेरने वाले वर्ग (डिब्बे) से कोने खोजते हैं।
6. घन (भुजा 30) बेलन (Ø60, ऊँचाई 25) पर बीच में है। कुल आइसो ऊँचाई और घन की आइसो भुजा?
घन की आइसो भुजा = 24.5 mm। कुल = 55 mm → आइसो 44.9 mm।
आम गलतियाँ
- ऊपरी ठोस को फलक के कोने पर रखना — हमेशा विकर्ण जोड़कर केंद्र पाइए।
- असली ऊँचाइयाँ जोड़कर 0.816 से गुणा भूल जाना।
- ऊपर रखे गोले की त्रिज्या घटाना — वृत्त असली त्रिज्या का; केवल केंद्र की ऊँचाई घटती है।
- तीर को अनदेखा करना — देखने की दिशा वाला फलक सामने होना चाहिए।