टाई रॉड और कसने योग्य जोड़ क्यों
टाई रॉड वह छड़ है जिस पर खिंचाव (तनाव) होता है। यह दो भागों को बाँधे रखती है ताकि वे अलग न हों: छत के ट्रस, गेट, पुल, क्रेन, तार की बाड़।
समय के साथ छड़ थोड़ी खिंच जाती है या भाग बैठ जाते हैं, तो बंधन ढीला हो जाता है। ऐसा जोड़ चाहिए जो लंबाई को थोड़ा-थोड़ा बदल सके और फिर टिक जाए। टर्नबकल (रिगिंग स्क्रू या स्ट्रेनिंग स्क्रू) यही करता है।
टर्नबकल: भाग और कार्य
- बॉडी: एक लंबा नट, खुले फ्रेम या बंद नली जैसा, बीच में षट्भुज या चपटा भाग ताकि स्पैनर से घुमा सकें।
- दो छड़ें: एक पर दाएँ हाथ की (RH) चूड़ी, दूसरी पर बाएँ हाथ की (LH) चूड़ी। बॉडी के एक सिरे पर RH और दूसरे पर LH चूड़ी।
- लॉक नट: कसने के बाद हर छड़ पर एक नट बॉडी की ओर कस देते हैं ताकि ढीला न हो।
उलटी चूड़ियाँ क्यों?
अगर दोनों चूड़ियाँ एक जैसी हों, तो बॉडी घुमाने पर एक छड़ अंदर और दूसरी बाहर जाएगी: लंबाई नहीं बदलेगी। उलटी चूड़ियों से दोनों छड़ें एक साथ अंदर (या बाहर) जाती हैं, और छड़ों को घुमाना नहीं पड़ता।
लंबाई में बदलाव
एक पूरे चक्कर में हर छड़ एक पिच p खिसकती है, तो कुल लंबाई हर चक्कर में 2p बदलती है। n चक्कर में: बदलाव = 2 × p × n।
फ्लैंज पाइप जोड़
पाइप जोड़ रिसाव-रहित, दबाव सहने लायक मज़बूत और सफ़ाई या मरम्मत के लिए खोलने योग्य होना चाहिए। बड़े पाइपों के लिए फ्लैंज जोड़ सबसे आम है।
- फ्लैंज: हर पाइप के सिरे पर चपटा गोल छल्ला। यह पाइप के साथ ढला, चूड़ी से कसा या वेल्ड किया हो सकता है।
- गैस्केट: दोनों फ्लैंज के बीच पतला नरम छल्ला (रबर, रेशा या नरम धातु)। दबने पर यह छोटी दरारें भरकर रिसाव रोकता है।
- बोल्ट-नट: एक वृत्त पर लगते हैं जिसे पिच वृत्त कहते हैं। इनकी संख्या हमेशा सम (4, 6, 8…) होती है ताकि आमने-सामने जोड़ियों में कसकर गैस्केट बराबर दबे।
- ज़्यादा दबाव के लिए फ्लैंज में स्पिगट और सॉकेट (उभरा छल्ला जो गड्ढे में बैठता है) होता है ताकि पाइप सीध में रहें।
सामान्य अनुपात (D = पाइप का भीतरी व्यास)
फ्लैंज की मोटाई ≈ 1.5 × दीवार की मोटाई; पिच वृत्त व्यास ≈ D + 2.5 × बोल्ट व्यास + 2 × दीवार मोटाई। प्रश्न में दिए माप ही मानिए।
ड्रॉइंग टिप्स
- टर्नबकल: केंद्र रेखा, षट्भुज वाली बॉडी, दोनों छड़ें बनाइए, फिर चूड़ियों पर "RH" और "LH" लिखिए। चूड़ियाँ पतली रेखाओं से (परंपरागत तरीके से) दिखाइए।
- फ्लैंज जोड़: सामने का दृश्य ऊपरी आधा काट में बनाइए: दोनों फ्लैंज पर उलटी दिशा में हैचिंग, गैस्केट मोटी काली रेखा, बोल्ट बिना काट के।
- बगल के दृश्य में बोल्ट वृत्त चेन रेखा से बनाइए और छेद बराबर दूरी (360° ÷ बोल्ट संख्या) पर रखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- टर्नबकल: लंबाई में बदलाव = 2 × पिच × चक्करों की संख्या
- बोल्टों के बीच कोण = 360° ÷ बोल्टों की संख्या
- फ्लैंज बोल्टों की संख्या = सम संख्या (4, 6, 8 …)
- जोड़ के भाग: फ्लैंज + गैस्केट + फ्लैंज + बोल्ट-नट
हल किए गए उदाहरण
1. टर्नबकल की चूड़ी की पिच 2.5 मिमी है। 4 पूरे चक्करों में लंबाई कितनी बदलेगी?
बदलाव = 2 × 2.5 × 4 = 20 मिमी।
2. टाई रॉड 12 मिमी ज़्यादा लंबी है। पिच 2 मिमी है। कितने चक्कर चाहिए?
हर चक्कर = 2 × 2 = 4 मिमी। चक्कर = 12 ÷ 4 = 3।
3. फ्लैंज में 6 बोल्ट हैं। पास वाले बोल्टों के बीच कोण?
360° ÷ 6 = 60°।
4. फ्लैंज की सतहें चिकनी मशीन से बनी हों, तब भी गैस्केट क्यों चाहिए?
चिकनी सतह पर भी बहुत छोटे उभार और खरोंचें होती हैं। नरम गैस्केट उनमें दबकर भर जाता है और रिसाव का हर रास्ता बंद कर देता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि टर्नबकल के दोनों सिरों पर एक जैसी चूड़ी है: एक दाएँ हाथ की और एक बाएँ हाथ की होती है।
- 2 × पिच को केवल एक बार लगाना: बदलाव हर चक्कर में 2 × पिच है।
- फ्लैंज में विषम संख्या के बोल्ट बनाना: सम संख्या रखिए ताकि आमने-सामने कसे जा सकें।
- ड्रॉइंग में गैस्केट छोड़ देना: फ्लैंजों के बीच इसे मोटी रेखा से दिखाइए।