CBSE कक्षा 12 अभियांत्रिकी आलेखन
अध्याय: 2
1. ठोसों के सममितीय प्रक्षेप
सममितीय पैमाना · ठोसों का सममितीय प्रक्षेप · दो ठोसों का संयोजन
- आइसोमेट्रिक प्रक्षेप और एक्सोनोमेट्रिक ड्राइंग – एक्सोनोमेट्रिक ड्राइंग में ठोस को एक ही चित्र में तीन अक्षों — चौड़ाई, गहराई, ऊँचाई — के साथ दिखाते हैं। आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में तीनों अक्ष 120° पर होते हैं और हर अक्ष बराबर छोटा होता है (स्केल ≈ 0.82)। आइसोमेट्रिक ड्राइंग में पूरी लंबाई लेते हैं। डाइमेट्रिक में दो अक्ष बराबर छोटे, ट्राइमेट्रिक में तीनों अलग। तिर्यक (कैवलियर, कैबिनेट) में सामने का चेहरा असली आकार का रहता है और गहराई 45° पर — पूरी (कैवलियर) या आधी (कैबिनेट)। चेहरों पर वृत्त दीर्घवृत्त बन जाते हैं।
- ठोसों का आइसोमेट्रिक (सममितीय) प्रक्षेप – आइसोमेट्रिक प्रक्षेप एक ही चित्र में ठोस को तीन अक्षों के साथ दिखाता है जो आपस में 120° पर हैं: एक ऊर्ध्वाधर, दो क्षैतिज से 30° पर। इन अक्षों पर हर लंबाई एक ही अनुपात में छोटी होती है: आइसोमेट्रिक लंबाई = 0.816 × असली लंबाई। पूरी लंबाई लेने पर आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग (दृश्य) बनती है, जो लगभग 22.5% बड़ी होती है। प्रिज़्म और पिरामिड को आइसोमेट्रिक डिब्बे में बंद करके बनाते हैं। फलक पर वृत्त दीर्घवृत्त बनता है (चार-केंद्र विधि)। गोला हमेशा वृत्त दिखता है: प्रक्षेप में उसकी त्रिज्या असली त्रिज्या ही रहती है, और केंद्र स्पर्श-बिंदु से 0.816 × R ऊपर होता है।
- दो ठोसों के संयोजन का आइसोमेट्रिक प्रक्षेप – संयोजन वाले प्रश्न में एक ठोस (प्रायः बड़ा) आधार होता है और दूसरा उसके ऊपर बीच में रखा होता है, इसलिए दोनों का एक ही ऊर्ध्वाधर अक्ष होता है। पहले नीचे का ठोस आइसो लंबाइयों से बनाइए। उसके ऊपरी फलक का केंद्र खोजिए; यही ऊपर वाले ठोस के आधार का केंद्र है। वहाँ से साझा अक्ष पर ऊपरी ठोस की आइसो ऊँचाई तक जाइए। ऊँचाइयाँ जुड़ती हैं: कुल आइसो ऊँचाई = 0.816 × (h₁ + h₂)। देखने की दिशा (प्रश्न का तीर) बताती है कि कौन-सा फलक सामने आएगा। छिपी रेखाएँ नहीं दिखाते।
2. मशीन आलेखन
मशीन पुर्ज़ों का आलेखन · बेयरिंग · छड़ जोड़ · टाई-रॉड और पाइप जोड़
- मशीन ड्राइंग: डिटेल ड्राइंग बनाना और पढ़ना – मशीन ड्राइंग किसी एक पुर्ज़े की ऐसी सटीक तस्वीर है कि कारखाना बिना कुछ पूछे उसे बना सके। डिटेल (वर्किंग) ड्राइंग में पुर्ज़े के दृश्य (views), अंदर का हिस्सा दिखाने के लिए सेक्शन, हर माप (dimension), माप कितना ऊपर-नीचे हो सकता है (tolerance), सतह की चिकनाई, पदार्थ और टाइटल ब्लॉक होते हैं।
- असेंबली ड्राइंग: पुर्ज़े आपस में कैसे जुड़ते हैं – असेंबली ड्राइंग कई पुर्ज़ों को जोड़कर बना पूरा उत्पाद दिखाती है। यह बताती है कि कौन-कौन से पुर्ज़े हैं (बैलून और पुर्ज़ों की सूची यानी बिल ऑफ़ मटीरियल्स), हर पुर्ज़ा कहाँ जाता है, और वे कैसे जुड़े हैं: बोल्ट-स्क्रू से जो खुल सकते हैं, या रिवेट-वेल्ड से जो हमेशा के लिए जुड़ते हैं।
- छड़ जोड़: स्लीव और कॉटर, गिब और कॉटर – कॉटर जोड़ दो छड़ों को सिरे से सिरा जोड़ता है ताकि वे लंबाई की दिशा में खिंचाव या धक्का सह सकें, और ज़रूरत पड़ने पर अलग भी हो सकें। कॉटर स्टील की चपटी फन्नी है जिसकी एक तरफ़ हल्की ढलान (टेपर) लगभग 1 में 30 होती है। स्लीव और कॉटर जोड़ में एक खोखली स्लीव दोनों सिरों को ढकती है और दो कॉटर उन्हें बाँधते हैं। गिब और कॉटर जोड़ में एक पट्टा एक छड़ के चौकोर सिरे को लपेटता है और गिब तथा कॉटर उसे कसते हैं। ड्रॉइंग में हर माप छड़ के व्यास d के गुणज में लिखा जाता है।
- टाई-रॉड और पाइप जोड़: टर्नबकल और फ्लैंज जोड़ – टाई रॉड वह छड़ है जो खिंचाव (तनाव) से भागों को साथ बाँधे रखती है। टर्नबकल दो टाई रॉडों को जोड़ता है और उन्हें कसने या ढीला करने देता है: इसकी बॉडी के एक सिरे पर दाएँ हाथ की और दूसरे पर बाएँ हाथ की चूड़ी होती है, इसलिए एक चक्कर में दोनों छड़ें अंदर खिंचती हैं और लंबाई दो पिच बदलती है। पानी, भाप, तेल या गैस वाले पाइप फ्लैंज जोड़ से जुड़ते हैं: हर सिरे पर चपटा छल्ला (फ्लैंज), बीच में नरम गैस्केट, और गोलाई में लगे बोल्ट-नट उन्हें दबाते हैं, ताकि रिसाव न हो पर जोड़ खुल भी सके।