एक्सोनोमेट्रिक प्रक्षेप क्या है?
ठोस की तीन दिशाएँ होती हैं: चौड़ाई, गहराई और ऊँचाई। कागज़ पर सिर्फ़ दो। एक्सोनोमेट्रिक प्रक्षेप (axonometric projection) में हम ठोस को घुमाते और झुकाते हैं, फिर हर कोने से सीधी समांतर रेखाएँ कागज़ पर डालते हैं। नतीजा: एक चित्र जिसमें तीन चेहरे दिखते हैं।
एक कोने पर मिलने वाले तीन किनारे तीन अक्ष बनते हैं। कितना घुमाया और झुकाया, उसी से अक्षों के बीच कोण और हर अक्ष का छोटा होना तय होता है।
- आइसोमेट्रिक: तीनों अक्ष बराबर छोटे; कोण 120°, 120°, 120°।
- डाइमेट्रिक: दो अक्ष बराबर छोटे, तीसरा अलग।
- ट्राइमेट्रिक: तीनों अलग-अलग छोटे।
आइसोमेट्रिक प्रक्षेप और आइसोमेट्रिक स्केल
घन को खड़ी धुरी पर 45° घुमाइए, फिर लगभग 35.26° आगे झुकाइए, ताकि आप उसके लंबे विकर्ण के साथ देखें। अब हर किनारा कागज़ से बराबर कोण बनाता है। कागज़ पर ऊँचाई का अक्ष खड़ा रहता है और चौड़ाई-गहराई के अक्ष क्षैतिज से 30° पर जाते हैं। इसलिए तीनों अक्ष आपस में 120° पर हैं।
हर किनारा आपसे दूर झुका है, इसलिए छोटा दिखता है: असली लंबाई का √(2/3) ≈ 0.82। इसे आइसोमेट्रिक स्केल कहते हैं। 100 mm का किनारा लगभग 82 mm बनाया जाता है।
आइसोमेट्रिक ड्राइंग बनाम आइसोमेट्रिक प्रक्षेप
अक्सर 0.82 छोड़कर हर किनारा पूरी लंबाई का बनाते हैं। यह आइसोमेट्रिक ड्राइंग है। आकृति वही, बस लगभग 22% बड़ी (1 ÷ 0.82 ≈ 1.22)। सिर्फ़ अक्षों के समांतर रेखाएँ (आइसोमेट्रिक रेखाएँ) नापी जा सकती हैं; तिरछी रेखाएँ बिंदु जोड़कर बनाते हैं।
तिर्यक दृश्य: कैवलियर और कैबिनेट
तिर्यक (oblique) दृश्य में सामने का चेहरा सपाट, असली आकार और आकृति में बनता है। गहराई की रेखाएँ एक कोण पर, आमतौर पर 45° पर, पीछे जाती हैं।
- कैवलियर: गहराई पूरी लंबाई। आसान, पर वस्तु ज़्यादा गहरी लगती है।
- कैबिनेट: गहराई आधी। ज़्यादा स्वाभाविक लगती है।
गोल या ज़्यादा बारीकी वाला चेहरा सामने रखिए: तिर्यक दृश्य में वहाँ वृत्त, वृत्त ही रहता है। पैकेजिंग के स्केच के लिए तिर्यक दृश्य तेज़ है: डिब्बे का सामना बनाइए, गहराई जोड़िए, और उसका जाल (खुला हुआ सपाट डिब्बा) बनाकर फ्लैप जाँचिए।
आइसोमेट्रिक में वृत्त, ठोस और तकनीकी स्केच
आइसोमेट्रिक ड्राइंग में किसी भी चेहरे पर वृत्त दीर्घवृत्त (ellipse) बन जाता है। चार-केंद्र विधि: वृत्त के चारों ओर का वर्ग आइसोमेट्रिक समचतुर्भुज के रूप में बनाइए; भुजाओं के मध्य-बिंदु लगाइए; दोनों अधिक कोण वाले कोनों से सामने के मध्य-बिंदुओं तक रेखाएँ खींचिए; कटान बिंदुओं को केंद्र मानकर चार चाप बनाइए।
सामने, ऊपर और बगल के दृश्यों से ठोस बनाना हो तो पहले पूरी चौड़ाई, गहराई, ऊँचाई का एक "बक्सा" बनाइए, फिर हिस्से काटिए और बारीकियाँ जोड़िए। छिपे किनारे आमतौर पर नहीं बनाते।
तकनीकी स्केच हाथ से बनी आइसोमेट्रिक ड्राइंग है, अक्सर आइसोमेट्रिक डॉट पेपर पर: पहले हल्की रेखाएँ, आख़िर में गहरी बाहरी रेखाएँ।
करके देखिए: माचिस की डिब्बी का आइसोमेट्रिक स्केच
एक माचिस की डिब्बी लीजिए। उसकी चौड़ाई, गहराई, ऊँचाई mm में नापिए। कागज़ पर पास वाले कोने के लिए खड़ी रेखा, फिर चौड़ाई और गहराई के लिए 30° पर दो रेखाएँ खींचिए। लंबाइयाँ लगाइए और अक्षों के समांतर रेखाओं से डिब्बा पूरा कीजिए। फिर 3D में आइसोमेट्रिक और कैबिनेट दबाकर मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आइसोमेट्रिक अक्ष: आपस में 120°; चौड़ाई-गहराई क्षैतिज से 30°
- आइसोमेट्रिक स्केल = √(2/3) ≈ 0.816
- आइसोमेट्रिक ड्राइंग ≈ 1.22 × आइसोमेट्रिक प्रक्षेप
- कैवलियर: गहराई × 1, 45° पर; कैबिनेट: गहराई × ½, 45° पर
- आइसोमेट्रिक के लिए झुकाव = arctan(1/√2) ≈ 35.26°, घुमाव = 45°
हल किए गए उदाहरण
1. घन का किनारा 50 mm है। (a) आइसोमेट्रिक ड्राइंग (b) आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में कितना बनेगा?
(a) पूरी लंबाई: 50 mm। (b) 50 × 0.816 ≈ 40.8 mm।
2. डिब्बा 60 mm चौड़ा, 40 mm गहरा, 30 mm ऊँचा है। कैवलियर और कैबिनेट में गहराई की रेखा कितनी होगी?
कैवलियर: 40 mm, 45° पर। कैबिनेट: 20 mm, 45° पर। चौड़ाई 60 mm और ऊँचाई 30 mm दोनों में असली।
3. आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में एक किनारा कागज़ पर 65.3 mm है। असली लंबाई?
असली = 65.3 ÷ 0.816 ≈ 80 mm।
4. ऊपर के चेहरे पर 40 mm व्यास का वृत्त आइसोमेट्रिक में कैसे बनाएँ?
40 mm का आइसोमेट्रिक समचतुर्भुज बनाइए, मध्य-बिंदु लगाइए, अधिक कोण वाले कोनों को सामने के मध्य-बिंदुओं से जोड़िए और कटान बिंदुओं से चार चाप बनाइए। यह दीर्घवृत्त होगा।
5. आइसोमेट्रिक ड्राइंग, प्रक्षेप से बड़ी क्यों दिखती है?
ड्राइंग असली लंबाई (×1) लेती है, प्रक्षेप 0.816। 1 ÷ 0.816 ≈ 1.22, यानी ड्राइंग हर दिशा में लगभग 22% बड़ी है। आकृति वही।
6. डिब्बे पर गोल घड़ी का चेहरा बनाना है। कौन-सा दृश्य लें?
तिर्यक (कैबिनेट) दृश्य, घड़ी सामने। तिर्यक में सामने का चेहरा असली आकृति का रहता है, इसलिए परकार से सीधा वृत्त बन जाता है।
आम गलतियाँ
- आइसोमेट्रिक में चौड़ाई-गहराई 45° पर बनाना। आइसोमेट्रिक में 30° होता है; 45° तिर्यक के लिए है।
- तिरछी (गैर-आइसोमेट्रिक) रेखा पर नापना। सिर्फ़ अक्षों के समांतर रेखाओं पर स्केल लगता है।
- आइसोमेट्रिक चेहरे पर परकार से वृत्त बनाना। वह दीर्घवृत्त होना चाहिए।
- कैवलियर और कैबिनेट में उलझना: कैवलियर = पूरी गहराई, कैबिनेट = आधी।