डिज़ाइनर ड्राइंग क्यों बनाते हैं
डिज़ाइन को डिज़ाइनर के दिमाग़ से बनाने वाले तक पहुँचना होता है। शब्द धीमे हैं और ग़लत समझे जा सकते हैं। तकनीकी ड्राइंग तय नियमों पर चलती है, इसलिए पुणे में बनी ड्राइंग से बर्लिन में भी सही चीज़ बन सकती है।
- फ़्रीहैंड स्केच: विचार खोजने के लिए जल्दी बनी पेंसिल ड्राइंग। पहले हल्की रचना-रेखाएँ, फिर अंतिम रेखाएँ गहरी। नोट्स (एनोटेशन) जोड़ो।
- मॉडल: गत्ते, फ़ोम या 3D-प्रिंट से बना नमूना, आकार और पकड़ जाँचने के लिए।
- औपचारिक ड्राइंग: बनाने के लिए माप सहित सटीक दृश्य।
- CAD (कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन): सॉफ़्टवेयर जो 3D मॉडल बनाता है और दृश्य अपने-आप देता है।
तकनीकी ड्राइंग मशीन इंजीनियरिंग, वास्तुकला, बिजली की वायरिंग, फ़र्नीचर और उत्पाद डिज़ाइन में काम आती है। असली चीज़ों को ध्यान से देखना पहली कला है।
चित्रात्मक ड्राइंग: आइसोमेट्रिक, तिर्यक और पर्सपेक्टिव
- आइसोमेट्रिक: खड़े किनारे खड़े रहते हैं; चौड़ाई और गहराई के किनारे क्षैतिज से 30° पर। तीनों माप असली लंबाई में। वृत्त दीर्घवृत्त (ellipse) बन जाते हैं। आइसोमेट्रिक ग्रिड पेपर पर बनाओ।
- तिर्यक (ऑब्लीक): सामने की सतह असली और चपटी; गहराई की रेखाएँ 45° पर, अक्सर आधी लंबाई में (कैबिनेट ऑब्लीक)।
- पर्सपेक्टिव: रेखाएँ एक या दो लुप्त बिंदुओं (vanishing point) पर मिलती हैं, जैसे दूर जाती सड़क। सबसे असली लगता है पर दूरी के साथ माप छोटे होते हैं।
- एक्सप्लोडेड दृश्य: हिस्सों को अलग खींचकर दिखाते हैं कि वे कैसे जुड़ते हैं।
वह दृश्य चुनो जो सबसे काम की सतहें दिखाए। रेंडरिंग (छाया, रंग, बनावट) प्रस्तुति को साफ़ बनाती है।
ऑर्थोग्राफ़िक प्रक्षेप: सामने, ऊपर और बगल के दृश्य
ऑर्थोग्राफ़िक प्रक्षेप वस्तु को अलग-अलग चपटे दृश्यों में दिखाता है, हर एक सीधे सामने से। सोचो वस्तु काँच के डिब्बे में है और हर सतह काँच पर चपटी की गई।
- सामने का दृश्य (फ्रंट एलिवेशन): जो आकार के बारे में सबसे ज़्यादा बताए।
- ऊपर का दृश्य (प्लान): सीधे नीचे देखना।
- बगल का दृश्य (साइड/एंड एलिवेशन): बाएँ या दाएँ से देखना।
दृश्य एक सीध में रहते हैं: ऊपर का दृश्य सामने वाले के ठीक ऊपर या नीचे, ताकि चौड़ाई मिले; बगल का दृश्य बराबर में, ताकि ऊँचाई मिले।
फर्स्ट एंगल और थर्ड एंगल
दुनिया में दो तरीके चलते हैं। फर्स्ट एंगल (भारत, यूरोप में आम) में ऊपर का दृश्य सामने वाले के नीचे और बायाँ दृश्य दाईं ओर। थर्ड एंगल (अमेरिका में आम) में ऊपर का दृश्य ऊपर और बायाँ दृश्य बाईं ओर। ड्राइंग पर एक छोटा प्रतीक (शंकु) बताता है कि कौन-सा तरीका है।
ड्राइंग के मानक: रेखाएँ, माप, स्केल और CAD
| रेखा | उपयोग |
|---|---|
| मोटी लगातार | दिखने वाली रूपरेखा और किनारे |
| पतली डैश वाली | छिपे किनारे |
| पतली चेन (लंबा-छोटा डैश) | केंद्र रेखा, सममिति रेखा |
| तीर वाली पतली लगातार | माप और प्रक्षेप रेखाएँ |
माप मिलीमीटर में लिखे जाते हैं। हर माप एक ही बार लिखो, जहाँ तक हो दृश्य के बाहर। Ø = व्यास, R = त्रिज्या।
स्केल ड्राइंग के माप की असली माप से तुलना है। 1:2 = आधा; 2:1 = दोगुना; 1:1 = असली माप। टाइटल ब्लॉक में नाम, तारीख़, स्केल, प्रक्षेप प्रतीक और इकाई होती है। अंतरराष्ट्रीय मानक (ISO 128, ISO 129 और राष्ट्रीय रूप) ये नियम तय करते हैं। बिजली के आरेखों में स्विच, बल्ब, सेल के लिए चित्र नहीं, मानक प्रतीक बनते हैं।
CAD में एक बार बनाओ, माप बदलो तो हर दृश्य अपने-आप बदलता है; फ़ाइल लेज़र कटर या 3D प्रिंटर (CAM) को भेज सकते हो।
करके देखो
माचिस की डिब्बी या रबड़ लो। डॉट पेपर पर उसका आइसोमेट्रिक स्केच बनाओ, फिर सामने, ऊपर और बगल के दृश्य बनाओ और रूलर से हर माप mm में लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आइसोमेट्रिक: चौड़ाई व गहराई 30° पर, ऊँचाई सीधी, असली लंबाई
- तिर्यक: सामने असली, गहराई 45° पर (अक्सर आधी)
- स्केल = ड्राइंग माप : असली माप (1:2 = आधा)
- फर्स्ट एंगल: ऊपर का दृश्य नीचे; थर्ड एंगल: ऊपर का दृश्य ऊपर
- माप mm में; Ø = व्यास, R = त्रिज्या
- रेखाएँ: मोटी = दिखती, डैश = छिपी, चेन = केंद्र
हल किए गए उदाहरण
1. मेज़ का ऊपरी भाग 1200 mm लंबा है। 1:10 स्केल पर ड्राइंग में कितना?
1200 ÷ 10 = 120 mm।
2. 8 mm का छोटा पेंच 5:1 स्केल पर बना है। ड्राइंग में लंबाई?
8 × 5 = 40 mm। बड़ा करने वाला स्केल छोटे पुर्ज़े साफ़ दिखाता है।
3. कौन-सा दृश्य ऊँचाई और चौड़ाई दिखाता है?
सामने का दृश्य। ऊपर का दृश्य चौड़ाई और गहराई, बगल का दृश्य ऊँचाई और गहराई दिखाता है।
4. एक किनारा पीछे है और सामने से नहीं दिखता। सामने के दृश्य में कैसे बनेगा?
पतली डैश वाली (छिपी) रेखा से।
5. फर्स्ट एंगल में ऊपर का दृश्य कहाँ जाता है?
सामने के दृश्य के ठीक नीचे, सीध में, ताकि चौड़ाई मिले।
6. तिर्यक ड्राइंग में डिब्बा 40 mm गहरा है। कैबिनेट ऑब्लीक में गहराई रेखा कितनी?
आधी: 20 mm, 45° पर।
आम गलतियाँ
- आइसोमेट्रिक में गहराई 45° पर बनाना। आइसोमेट्रिक में 30°; 45° तिर्यक में होता है।
- दृश्यों को सीध में न रखना, जिससे सामने और ऊपर के दृश्य की चौड़ाई न मिले।
- छिपे किनारे डैश की जगह पूरी रेखा से बनाना।
- एक ही माप कई दृश्यों पर दोहराना, या mm वाली ड्राइंग में cm लिखना।