Spain 2º Bachillerato Design
अध्याय: 4
1. Concept, history and fields of design
Design and its fields · History and theory of design · Design movements and figures · Design and sustainability · Inclusive design · Diversity as heritage · Non-Western design contributions · Intellectual property in design
- डिज़ाइन (Design) क्या है? क्षेत्र, रूप-कार्य और सबके लिए डिज़ाइन – डिज़ाइन यानी किसी चीज़ की सोच-समझकर योजना बनाना ताकि वह लोगों का कोई काम करे। इसके कई क्षेत्र हैं: उत्पाद, ग्राफ़िक, फ़ैशन-वस्त्र, इंटीरियर, लैंडस्केप, वास्तुकला और डिजिटल (UX)। अच्छा डिज़ाइन रूप (आकार, रंग, सामग्री) और कार्य को जोड़ता है: "रूप कार्य के पीछे चलता है"। डिज़ाइनर तत्वों और सिद्धांतों का उपयोग करते हैं, वस्तु को शरीर के अनुसार बनाते हैं (एर्गोनॉमिक्स), सबके लिए (समावेशी) और धरती के लिए कम नुकसानदेह (टिकाऊ) चीज़ें बनाते हैं।
- डिज़ाइन इतिहास: आंदोलनों और डिज़ाइनरों ने रोज़ की चीज़ें कैसे बदलीं – डिज़ाइन समय के साथ बदलते हैं, क्योंकि नई सामग्री, नई तकनीक और समाज के बारे में नए विचार आते हैं। आर्ट्स एंड क्राफ़्ट्स ने सस्ते कारखाना सामान को नकारा और हाथ के काम को महत्त्व दिया। आर नूवो ने प्रकृति की बहती रेखाएँ अपनाईं। बाउहाउस और आधुनिकतावाद ने कहा, रूप कार्य के पीछे चलता है, और बड़े पैमाने के उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया। मध्य-शताब्दी डिज़ाइनरों ने ढली प्लाईवुड और प्लास्टिक से सस्ता फ़र्नीचर बनाया। उत्तर-आधुनिकता और मेम्फ़िस ने रंग और मज़े से नियम तोड़े। आज टिकाऊपन और डिजिटल निर्माण पर ध्यान है। दूसरों का काम पढ़ने से हम विश्लेषण करना, प्रेरणा लेना और बेहतर डिज़ाइन करना सीखते हैं।
- सतत डिज़ाइन: लोगों और धरती के अनुकूल उत्पाद – सतत (टिकाऊ) डिज़ाइन का मतलब है ऐसे उत्पाद बनाना जो हमारी ज़रूरत पूरी करें और प्रकृति व लोगों को कम से कम नुकसान दें। हर उत्पाद का जीवन चक्र है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। जीवन चक्र आकलन हर चरण का पारिस्थितिक पदचिह्न (ऊर्जा, CO₂, पानी, कचरा) जोड़ता है। सामाजिक पदचिह्न मज़दूरों और समुदायों पर असर है: वेतन, सुरक्षा, बाल श्रम, उचित व्यापार। डिज़ाइनर छह R (पुनर्विचार, मना करना, कम करना, दोबारा उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण), मरम्मत और विघटन योग्य डिज़ाइन अपनाते हैं और नियोजित अप्रचलन से बचते हैं। इको डिज़ाइन आर्थिक पक्ष भी देखता है: उत्पाद सस्ता और बनाने लायक़ हो, इसलिए अच्छा डिज़ाइन पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था में संतुलन रखता है।
- सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ – भारत में अनेक भाषाएँ, धर्म, क्षेत्र और जनजातियाँ हैं। विविधता का अर्थ है अंतर, ऊँच-नीच नहीं। समुदाय लोगों को अपनापन देते हैं, पर जब वे टकराते हैं तो राष्ट्र-राज्य को तय करना होता है कि उनसे कैसे बरते। भारत ने भाषाई राज्यों, संघवाद, अल्पसंख्यक अधिकारों और अपनी तरह की धर्मनिरपेक्षता से विविधता को स्वीकारा। इस पाठ में सामुदायिक पहचान, क्षेत्रवाद, धर्म, सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक समाज आसान भाषा में समझेंगे।
- डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार – बौद्धिक संपदा (IP) मन की रचना है, जैसे कहानी, गीत, प्रोग्राम, आविष्कार या लोगो। बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) निर्माता को उसके उपयोग पर नियंत्रण देते हैं। कॉपीराइट रचनात्मक कार्य (लेख, संगीत, कला, सॉफ़्टवेयर कोड) को बनते ही अपने-आप बचाता है; पेटेंट नए, उपयोगी आविष्कार को लगभग 20 साल बचाता है और इसके लिए आवेदन करना पड़ता है; ट्रेडमार्क ब्रांड नाम, लोगो और नारे बचाता है। साहित्यिक चोरी दूसरे का काम बिना श्रेय अपना बताना है। उल्लंघन सुरक्षित IP को बिना अनुमति इस्तेमाल करना है। सार्वजनिक लाइसेंस से निर्माता अपनी शर्तों पर साझा करते हैं: रचनात्मक कार्यों के लिए क्रिएटिव कॉमन्स (BY, SA, NC, ND), और सॉफ़्टवेयर के लिए GPL (कॉपीलेफ़्ट: बदला संस्करण खुला रहे) और Apache (उदार: नोटिस रखकर बंद उत्पाद में भी)।
2. Design: formal configuration and methodology
Design and function · Visual language elements · 2D and 3D image syntax · Modular composition · Semantics of design · Design process and methodology · Creative processes in design · Organising design teams
- डिज़ाइन (Design) क्या है? क्षेत्र, रूप-कार्य और सबके लिए डिज़ाइन – डिज़ाइन यानी किसी चीज़ की सोच-समझकर योजना बनाना ताकि वह लोगों का कोई काम करे। इसके कई क्षेत्र हैं: उत्पाद, ग्राफ़िक, फ़ैशन-वस्त्र, इंटीरियर, लैंडस्केप, वास्तुकला और डिजिटल (UX)। अच्छा डिज़ाइन रूप (आकार, रंग, सामग्री) और कार्य को जोड़ता है: "रूप कार्य के पीछे चलता है"। डिज़ाइनर तत्वों और सिद्धांतों का उपयोग करते हैं, वस्तु को शरीर के अनुसार बनाते हैं (एर्गोनॉमिक्स), सबके लिए (समावेशी) और धरती के लिए कम नुकसानदेह (टिकाऊ) चीज़ें बनाते हैं।
- कला के तत्व और डिज़ाइन के सिद्धांत – कला के तत्व वे ईंटें हैं जिनसे हर कलाकृति बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, मान (हल्का-गहरा), बनावट और स्थान; कई शिक्षक बिंदु को भी जोड़ते हैं। डिज़ाइन के सिद्धांत बताते हैं कि इन ईंटों को कैसे जमाएँ: संतुलन, विरोधाभास (कंट्रास्ट), बल (एम्फ़ेसिस), गति, लय और पैटर्न, अनुपात और पैमाना, एकता और विविधता।
- चिह्न-विज्ञान (Semiotics): चिह्न अर्थ कैसे बनाते हैं – चिह्न-विज्ञान चिह्नों का अध्ययन है। चिह्न = संकेतक (signifier: दिखने वाला रूप) + संकेतित (signified: मन में आने वाला विचार)। निरूपण (denotation) सीधा अर्थ है, संकेतार्थ (connotation) समाज का जोड़ा भाव। चिह्न आइकन, इंडेक्स या सिंबल हो सकते हैं। कोड पढ़ने के साझा नियम हैं और कैप्शन एक अर्थ बाँधता है (एंकरेज)। बार्थ ने "स्वाभाविक" लगने वाले संकेतार्थों को मिथक कहा।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- डिज़ाइन थिंकिंग: लोगों से शुरू करके समस्या हल करना – डिज़ाइन थिंकिंग समस्या हल करने का तरीका है जो पहले उन लोगों को समझता है जिनकी वह समस्या है। इसके पाँच चरण हैं: सहानुभूति (उपयोगकर्ता को देखना-सुनना, सहानुभूति मानचित्र से), परिभाषा ("हम कैसे…?" सवाल के रूप में साफ़ समस्या), विचार (बहुत सारे विचार, प्रकृति से भी: जैव-अनुकरण), प्रोटोटाइप (जल्दी, सस्ते मॉडल) और परीक्षण (उपयोगकर्ता से आज़माना और सुधारना)। यह पुनरावृत्त और उपयोगकर्ता-केंद्रित है, और दो बार फैलता-सिमटता है, जैसे दोहरा हीरा।
- समूह: कैसे बनते हैं और हमें कैसे बदलते हैं – समूह दो या अधिक लोगों का ऐसा मेल है जिसमें वे आपस में बात करते हैं, एक लक्ष्य रखते हैं, मानक मानते हैं और 'हम' महसूस करते हैं। लोग सुरक्षा, प्रतिष्ठा, आत्म-सम्मान, ज़रूरतों और लक्ष्यों के लिए समूह में जुड़ते हैं। समूह पाँच चरणों से गुज़रता है: निर्माण, विप्लव, प्रतिमान, निष्पादन, समापन। संरचना में भूमिका, मानक, प्रतिष्ठा और संसक्तता होते हैं। प्रकार: प्राथमिक/द्वितीयक, औपचारिक/अनौपचारिक, अंतःसमूह/बाह्यसमूह। समूह हमारा व्यवहार भी बदलता है: सामाजिक स्वैराचार में साझा काम में हर व्यक्ति कम मेहनत करता है; समूह ध्रुवीकरण में चर्चा के बाद समूह की राय और चरम हो जाती है।
3. Graphic design
Functions of graphic design · Typography · Graphic design and composition · Graphic design processes · Brand identity · Editorial design · Advertising design · Signage
- ग्राफ़िक डिज़ाइन (Graphic Design) – ग्राफ़िक डिज़ाइन चित्र, शब्द और आकृतियों को इस तरह सजाना है कि संदेश साफ़, काम का और सुंदर लगे। डिज़ाइनर तत्वों (रेखा, आकृति, रंग, अक्षर, चित्र, खाली जगह) और सिद्धांतों (ग्रिड व संरेखण, पदानुक्रम, कंट्रास्ट, निकटता, दोहराव, संतुलन, खाली जगह) का उपयोग करते हैं। प्रक्रिया: ब्रीफ़, खोज, विचार, स्केच, डिजिटल ड्राफ़्ट, राय और अंतिम कलाकृति। पोस्टर, लोगो, किताब के कवर, पैकेट, साइन बोर्ड, वेबसाइट और ऐप सब इसी से बनते हैं।
4. Three-dimensional design
Product design · Representation in product design · Anthropometry, ergonomics and bionics · Product design for functional diversity · Materials and production systems · Packaging design · Space design · Interior design · Psychological perception of space · Inclusive space design
- त्रि-आयामी डिज़ाइन: ऐसे रूप बनाना जो सुंदर दिखें और अच्छा काम करें – त्रि-आयामी (3D) डिज़ाइन लंबाई, चौड़ाई और गहराई वाली असली चीज़ें बनाता है: मूर्तियाँ, उत्पाद, फ़र्नीचर, पैकेजिंग, गहने, मंच और जगह का डिज़ाइन। कलाकार रूप बनाते हैं काटकर हटाने (घटाने वाली), जोड़कर बढ़ाने (जोड़ने वाली), हिस्से जोड़कर बनाने (निर्माण) या साँचे में ढालने से। अच्छा 3D डिज़ाइन शरीर के नाप में फिट होता है (एर्गोनॉमिक्स, शरीर के माप यानी एंथ्रोपोमेट्री से), प्रकृति से सीखता है (बायोनिक्स), सामान बचाता और बेचता है (पैकेजिंग), अलग क्षमता वाले लोगों के काम आता है (सार्वभौमिक डिज़ाइन) और धरती का ध्यान रखता है।
- तकनीकी ड्राइंग: डिज़ाइन के विचार बताना – तकनीकी ड्राइंग एक साझा चित्र-भाषा है जो किसी वस्तु का सही आकार और माप दिखाती है। डिज़ाइनर हाथ से स्केच से शुरू करते हैं, फिर आइसोमेट्रिक या तिर्यक (ऑब्लीक) दृश्य से वस्तु को 3D में दिखाते हैं, और ऑर्थोग्राफ़िक प्रक्षेप (सामने, ऊपर, बगल के दृश्य) में मानक रेखाएँ, मिलीमीटर में माप और स्केल लगाते हैं ताकि कोई भी उसे बना सके। आज ज़्यादातर ड्राइंग CAD सॉफ़्टवेयर से बनती हैं।
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
- वास्तुकला: इमारतें कैसे खड़ी रहती हैं, दिखती और महसूस होती हैं – वास्तुकला लोगों के लिए इमारतें और जगहें डिज़ाइन करने की कला और विज्ञान है। हर इमारत को अपना भार ज़मीन तक पहुँचाना होता है: स्तंभ-धरन से, मेहराब, वॉल्ट और गुंबद से, या स्टील-कंक्रीट के ढाँचे से। हर युग की अपनी शैली रही: मिस्री, यूनानी-रोमन, बाइज़ेंटाइन, रोमनस्क, गॉथिक, पुनर्जागरण और आधुनिक। वास्तुकार नक़्शों (प्लान, उन्नयन, सेक्शन), मॉडल और CAD से योजना बनाते हैं, और जगह, रोशनी व पहुँच ऐसे सोचते हैं कि जगह सबके काम आए और अच्छी लगे।