डिज़ाइन थिंकिंग क्या है? उपयोगकर्ता-केंद्रित डिज़ाइन
डिज़ाइन थिंकिंग समस्या हल करने की विधि है जो उत्पाद से नहीं, लोगों से शुरू होती है। डिज़ाइनर पूछते हैं: उपयोगकर्ता कौन है, उसे सच में क्या चाहिए, और क्यों?
यह उपयोगकर्ता-केंद्रित है: हर चरण में उपयोगकर्ता शामिल होता है। यह पुनरावृत्त (iterative) है: चरणों को बार-बार दोहराकर हर बार सुधार। तंत्र दृष्टिकोण (systems approach) पूरी तस्वीर देखता है: सामग्री, निर्माण, लागत, उपयोग और निपटान।
दोहरा हीरा
अच्छे डिज़ाइनर दो बार फैलते (diverge: खुलकर खोजना) और फिर सिमटते (converge: चुनना) हैं: पहले सही समस्या खोजने के लिए, फिर सही समाधान खोजने के लिए।
सहानुभूति और परिभाषा: उपयोगकर्ता को समझना
सहानुभूति यानी किसी का अनुभव उसकी नज़र से समझना। तरीके: बातचीत, लोगों को उत्पाद इस्तेमाल करते देखना, खुद आज़माना (जैसे मोटे दस्ताने पहनकर जार खोलना), सर्वे।
सहानुभूति मानचित्र
सहानुभूति मानचित्र (empathy map) में उपयोगकर्ता के बारे में चार खाने होते हैं: वह क्या कहता, सोचता, करता और महसूस करता है। इनके बीच का अंतर सुराग है। आशा जी कहती हैं "मैं ठीक हूँ", पर पड़ोसियों से मदद माँगती हैं और शर्मिंदगी महसूस करती हैं।
परिभाषा: छोटा समस्या-कथन लिखो। अच्छा कथन ज़रूरत के बारे में होता है, किसी तय उत्पाद के बारे में नहीं: "हम आशा जी को बिना दर्द जार खोलने में कैसे मदद करें?" (न कि "जार खोलने की मशीन बनाओ")। इसे समस्या खोजना कहते हैं।
विचार: रचनात्मक तरीके और जैव-अनुकरण
विचार (ideate) यानी बहुत सारे विचार बनाना। नियम: पहले संख्या, अभी परखो मत, दूसरों के विचार पर आगे बढ़ो, अनोखे विचारों का स्वागत।
- ब्रेनस्टॉर्मिंग और माइंड मैप (दृश्य सोच: बीच में समस्या, चारों ओर शाखाएँ)।
- SCAMPER: बदलो, जोड़ो, अपनाओ, संशोधित करो, दूसरे काम में लो, हटाओ, उलटो।
- स्केचिंग: जल्दी चित्र और चिपकने वाले नोट से विचारों को समूहों में रखना।
- जैव-अनुकरण (biomimicry): प्रकृति से हल लेना। कुत्ते के बालों में चिपके काँटेदार बीज → हुक-और-लूप फ़ास्टनर (वेल्क्रो)। किंगफ़िशर की चोंच → जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन की शांत नाक। छिपकली (गेको) के पैर → पकड़ वाली सतहें।
फिर सिमटो: विचारों को उपयोगकर्ता की ज़रूरत से मिलाकर सबसे अच्छे एक-दो चुनो।
प्रोटोटाइप, परीक्षण और पुनरावृत्ति
प्रोटोटाइप विचार जाँचने का जल्दी, सस्ता मॉडल है: कागज़, कार्ड, मिट्टी, फ़ोम, 3D प्रिंट, या ऐप के लिए क्लिक करने लायक स्क्रीन स्केच। कच्चे (low-fidelity) प्रोटोटाइप जल्दी बनते हैं; पक्के (high-fidelity) असली जैसे दिखते और चलते हैं।
असली उपयोगकर्ताओं के साथ परीक्षण करो। देखो, ज़्यादा समझाओ मत, और खुले सवाल पूछो: "क्या मुश्किल लगा?" क्या चला और क्या नहीं, लिखो।
प्रतिक्रिया तुम्हें वापस भेजती है: शायद फिर विचार पर, या समस्या को दोबारा परिभाषित करने पर। हर चक्कर एक पुनरावृत्ति है। "जल्दी और सस्ते में चूको" यानी समस्या कार्ड के मॉडल में पकड़ो, 10,000 उत्पाद बनने के बाद नहीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- डिज़ाइन थिंकिंग के चरण = सहानुभूति → परिभाषा → विचार → प्रोटोटाइप → परीक्षण (और वापस)
- सहानुभूति मानचित्र = कहता · सोचता · करता · महसूस करता
- समस्या-कथन = "हम [उपयोगकर्ता] की [काम] करने में कैसे मदद करें [ताकि ज़रूरत पूरी हो]?"
- फैलना (diverge) = बहुत विकल्प खोलना; सिमटना (converge) = चुनना
- जैव-अनुकरण = प्रकृति से लिए डिज़ाइन विचार
- प्रोटोटाइप = विचार जाँचने का जल्दी, सस्ता मॉडल
- पुनरावृत्ति = जाँच → सीख → सुधार का एक चक्कर
हल किए गए उदाहरण
1. भारी स्कूल बैग वाले छात्रों के लिए "हम कैसे…" कथन लिखो।
"हम छात्रों को रोज़ की ज़रूरी चीज़ें बिना पीठ दर्द के ले जाने में कैसे मदद करें?" इसमें उपयोगकर्ता और ज़रूरत है, तय हल नहीं (हल लॉकर, समय-सारणी में बदलाव या बेहतर बैग कुछ भी हो सकता है)।
2. पहले दिन आए नए छात्र का सहानुभूति मानचित्र भरो।
कहता: "कमरा 12 कहाँ है?" सोचता: "क्या कोई मेरे साथ बैठेगा?" करता: दरवाज़े के पास खड़ा रहता, फ़ोन देखता। महसूस: घबराहट, अकेलापन। ज़रूरत: एक दोस्ताना मार्गदर्शक और साफ़ संकेत।
3. बिना AC ठंडी रहने वाली इमारत के लिए जैव-अनुकरण का विचार दो।
दीमक की बाँबी हवा की नालियों से ठंडी रहती है, जिनसे गर्म हवा ऊपर निकल जाती है। इमारत चिमनियों और रोशनदानों से इसकी नकल कर सकती है (जैसे ज़िम्बाब्वे के हरारे का ईस्टगेट सेंटर)।
4. फ़ोन स्टैंड का कार्ड प्रोटोटाइप जाँच में गिर जाता है। आगे क्या?
यह काम की प्रतिक्रिया है। पुनरावृत्ति करो: आधार चौड़ा करो या कोण कम करो, नया कार्ड मॉडल बनाओ, और असली सामग्री से पहले उपयोगकर्ता के साथ फिर जाँचो।
आम गलतियाँ
- उपयोगकर्ता को समझे बिना सीधे हल पर कूद जाना।
- समस्या को ज़रूरत के बजाय तय उत्पाद ("एक ऐप बनाओ") के रूप में लिखना।
- ब्रेनस्टॉर्मिंग के दौरान विचारों को परखना, जिससे विचार कम बनते हैं।
- पहले ही महँगा, परफ़ेक्ट प्रोटोटाइप बनाना, जिसे जाँच के बाद बदलना मुश्किल हो।